भारत की इस महंगी चॉकलेट का बढ़ रहा बाज़ार

  • 30 अक्तूबर 2016
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त्यौहार का सीज़न है. ऐसे में आपको तमाम लोग यही कहते सुनाई देंगे, 'कुछ मीठा हो जाए'. हम भारतीयों को मीठे से बेइंतिहा मुहब्बत है.

त्यौहार हो, ख़ुशी का कोई भी मौक़ा हो, जश्न मीठे के साथ ही मनाया जाता है, गुलाबजामुन, बर्फ़ी, जलेबी, लड्डू, रसमलाई...मिठाई की अनगिनत क़िस्में हैं, जो जश्न में हमारी साझीदार हैं.

भारत के हर गली-मुहल्ले में मिठाई की दुकानें मिल जाएंगी, जो तरह-तरह की मिठाइयां बेचती हैं. उत्तर से लेकर दक्षिण तक हर कोने में मिठाई की इतनी क़िस्में मिलती हैं कि गिनने बैठो तो शायद ख़त्म ही न हो.

हमारे इसी मीठे प्रेम में अब नया ट्विस्ट आ गया है. हम चॉकलेट भी ख़ूब खाने लगे हैं. ये विदेशी मीठी ट्रीट अब हमारी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन गई है. भारत में चॉकलेट का कारोबार क़रीब 3 अरब डॉलर सालाना का है. दीवाली पर भी बड़ी संख्या में लोग एक-दूसरे को चॉकलेट का तोहफ़ा दे रहे हैं.

इस कारोबार मे अब एक नई तरह की चॉकलेट ने दाखिला लिया है. इसे आर्टिज़नल चॉकलेट कहते हैं. ये बाज़ार में बिकने वाली आम चॉकलेट से अलग होती है. इसे ख़ास तौर से कुछ ख़ास ग्राहकों के लिए बनाया जाता है.

इस स्पेशल चॉकलेट के आम बार की क़ीमत साढ़े चार डॉलर या क़रीब साढ़े तीन सौ रुपए होती है. जोकि बाज़ार में बिकने वाली आम चॉकलेट से तीन गुने से भी ज़्यादा है.

इस चॉकलेट की सबसे बड़ी खूबी ये है कि इसमें भारत में ही पैदा होने वाली ककाओ बीन्स इस्तेमाल की जाती हैं. इसमें ककाओ की मात्रा ज़्यादा होती है और चीनी की कम. भारत के पहले प्रमाणित चॉकलेट टेस्टर नितिन चोरडिया कहते हैं कि ये स्पेशल चॉकलेट पहले पहल चार साल पहले भारतीय बाज़ार में आई थी.

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आज देश में छह कंपनियां ऐसी आर्टिज़नल चॉकलेट बना रही हैं. जिनके जल्द ही बढ़कर चालीस तक पहुंचने की उम्मीद है. क्योंकि बढ़ती आमदनी के साथ ही भारतीय अब ख़ास तौर से ऑर्डर करने पर बनने वाली महंगी चॉकलेट को भी तोहफ़े के तौर पर देने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं. अगले कुछ सालों में इसकी मांग और बढ़ने की उम्मीद है.

इस आर्टिज़नल चॉकलेट में स्वाद बढ़ाने के लिए कोई केमिकल नहीं मिला होता. इसमें ककाओ की मात्रा ज़्यादा होती है और चीनी कम होती है. भारत में तेज़ी से बढ़ती डायबिटीज़ की बीमारी से बचने में ये मददगार हो सकती है. साथ ही हम भारतीयों की मीठा खाने की आदत को भी इससे संतुष्टि मिलती है. सरकार भी ककाओ को बढ़ावा देने पर ज़ोर दे रही है. इससे किसानों को भी फ़ायदा होगा.

नितिन चोरडिया कहते हैं कि भारतीय लोग चॉकलेट ककाओ के लिए नहीं, मीठे के लिए खाते हैं. क्योंकि उन्हें मीठा बेहद पसंद है. ऐसे में ये आर्टिज़नल चॉकलेट, उनकी मीठा खाने की आदत से निपटने में मददगार हो सकती है. क्योंकि इससे सेहत को कम नुक़सान होगा. हां, जेब पर ज़रूर बोझ बढ़ेगा.

रोज़ मिठाई या आम चॉकलेट खाने के मुक़ाबले इस चॉकलेट को खाने से आपके शरीर में चीनी कम जाएगी. आपको डायबिटीज़ होने का डर कम होगा. नितिन चोरडिया कहते हैं कि इस चॉकलेट के ज़रिए वो आम भारतीयों को यही संदेश देना चाहते हैं कि, मीठा खाइए, पर मीठा कम खाइए.

(अंग्रेजी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी पर उपलब्ध है.)

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