अगर कोई आपके मेल का जवाब न दे तो...?

  • ब्रायन बोर्जोवोस्की
  • बीबीसी कैपिटल
ई-मेल, कम्प्युटर, इंटरनेट

पूरी दुनिया में घर और दफ़्तर के काम के लिए ई-मेल का चलन बढ़ गया है. एक अंदाज़े के मुताबिक़ हम सबको रोज़ाना सवा सौ के क़रीब ई-मेल आते हैं. इनमें से हर एक को पढ़ने में एक मिनट लगाना और फिर जवाब देने में एक और मिनट ख़र्च करना, सबके लिए चुनौती है. अगर हमें इतना ही वक़्त लगता है तो हमें रोज़ाना औसतन चार घंटे ख़र्च करने होंगे, हर ई-मेल को पढ़कर जवाब देने में. ये हर किसी के लिए मुमकिन नहीं.

लेकिन, हम ई-मेल के जवाब नहीं देते तो कई लोगों को परेशानी हो जाती है. उनके सिर पर फिक्र सवाल हो जाती है. वो सोचने लगते हैं कि आख़िर उनकी ई-मेल का जवाब क्यों नहीं आया? कहीं ई-मेल लिखने में गड़बड़ी तो नहीं हुई? कहीं आपके ई-मेल का किसी ने बुरा तो नहीं मान लिया? जिसको ई-मेल भेजा गया उसने उसे पढ़ा या नहीं?

हमारी तकनीक आधारित ज़िंदगी में ई-मेल भी सिरदर्द बनते जा रहे हैं. बहुत से लोग दिन-रात ई-मेल ही चेक करते रहते हैं. और अगर कोई ई-मेल भेज दिया तो उसके फौरन जवाब की उम्मीद सामने वाले से लगाते हैं. जवाब नहीं आया तो उनकी फिक्र बढ़ जाती है.

ऐसे ही एक शख़्स हैं अमरीका के डैनी गार्शिया. डैनी एक ऑनलाइन कंपनी में काम करते हैं. उनके पास रोज़ाना सैकड़ों ई-मेल आती हैं. वो काफ़ी ई-मेल भेजते भी हैं. और हर मेल भेजने के फौरन बाद डैनी का इंतज़ार शुरू हो जाता है. अब जवाब आया कि तब आया. कई बार ऐसा होता है कि जवाब देर से आता है, या नहीं आता. ऐसे में डैनी तनाव में आ जाते हैं.

दुनिया में बहुत से ऐसे लोग हैं जो डैनी की तरह की हालत से गुज़रते हैं. ई-मेल देखने और उसके जवाब का फौरन ही इंतज़ार करने लगते हैं. हालांकि अभी इस बाद को किसी पैमाने पर नहीं नापा गया कि ई-मेल के इंतज़ार में लोगों को कितना तनाव हो जाता है.

कनाडा की टोरंटो यूनिवर्सिटी की जूली मैकार्थी कहती हैं कि ये फिक्र हालात पर अपना क़ाबू न होने से पैदा होती है. सामने वाला आपकी ई-मेल कब पढ़ेगा और कब उसका जवाब देगा, इस पर आपका कोई ज़ोर नहीं चलता. यही बात आपके ज़हन में फ़िक्र पैदा करती है.

आज हम टेक्स्ट मैसेज, फेसबुक मैसेंजर, व्हॉट्सऐप, स्नैपचैट जैसे मैसेजिंग ऐप्स के ज़रिए बात करने के आदी हो गए हैं. इनमें हमें फौरी तौर पर जवाब मिल जाता है. फिर हम यही उम्मीद ई-मेल से लगा बैठते हैं. लेकिन, हर ई-मेल का तुरंत जवाब देना किसी के लिए संभव नहीं.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए गए तजुर्बे के मुताबिक़ औसतन लोग ई-मेल का जवाब दो घंटे में दे देते हैं. लेकिन इसकी उम्मीद पचास फ़ीसद ही रहती है. कई बार लोग आधे घंटे में ही जवाब दे देते हैं.

अगर आपकी ई-मेल का फ़ौरन जवाब नहीं आए तो ज़्यादा परेशान होने की ज़रूरत नहीं. जूली मैकार्थी कहती हैं कि शायद सामने वाला ई-मेल खोलकर बैठा ही न हो. शायद वो ऑफ़िस के काम से दूरी बनाकर परिवार के साथ वक़्त बिताना चाह रहा हो. ये भी हो सकता है कि काम में ज़्यादा व्यस्तता के चलते वो आपकी ई-मेल का जवाब न दे पा रहा हो. कोई भी वजह हो सकती है.

दूसरों के जवाब न आने से परेशान होने वाले डैनी गार्शिया ख़ुद बहुत से ई-मेल के जवाब तुरंत नहीं देते. यहां तक कि उनकी बॉस को भी मेल में ये लिखकर देना पड़ा कि, वो कम से कम ये जवाब दे दें कि ई-मेल उन्हें मिल गया है.

कनाडा के क्रिस बेली ने इस मुसीबत का एक अलग हल निकाला है. उन्होंने अपने ई-मेल को दो हिस्सों में बांट लिया है. वो ई-मेल जो ज़रूरी हैं, उनके क़रीबी लोगों के हैं, वो अलग ई-मेल अकाउंट में आते हैं. वहीं दूसरे ई-मेल अकाउंट में तमाम तरह के मेल आते हैं.

जो क़रीबी लोगों का ई-मेल अकाउंट है उन्हें क्रिस, नियमित रूप से देखते हैं और ज़रूरी मेल का फ़ौरन जवाब देते हैं. वहीं दूसरे ई-मेल अकाउंट को वो दिन में एक बार चेक करते हैं और उसके लिए उन्होंने दिन का एक घंटा तय कर रखा है.

अगर आपको अपनी ई-मेल के जवाब के इंतज़ार में ज़्यादा फ़िक्र होती है, तो आप एक काम कर सकते हैं. आप मेल के साथ ही लिख दें कि आपको इसका जवाब कुछ घंटे में, या एक दो-दिन में चाहिए. अगर ग़ैरज़रूरी मेल है तो भी लिख दें कि आराम से जवाब दें.

इससे सामने वाले को भी ई-मेल की अहमियत समझ में आएगी. उम्मीद यही है कि वो आपके कहे मुताबिक़ तय वक़्त पर जवाब दे देगा. आज कल बहुत से ऐप भी आ गए हैं जो ये बताते हैं कि आपका ई-मेल कब देखा गया.

इनके ज़रिए भी आप ये चेक कर सकते हैं कि आपने जिसे मेल भेजा उसने कब ई-मेल चेक की. आपका मेल पढ़ा या नहीं. मिनमैक्स और स्ट्रीक ऐसे ही ऐप हैं. कई बार आपके ई-मेल की लिखावट ऐसी होती है कि सामने वाले को बात समझ में नहीं आती.

आप अपनी ई-मेल लिखने के तरीक़े में बदलाव करके भी जल्द जवाब पा सकते हैं. और फिर भी आपको ई-मेल के जवाब उम्मीद के मुताबिक़ वक़्त पर नहीं मिल रहे हैं. तो, ऐसे तनाव से बचने का सबसे अच्छा तरीक़ा है कि फ़ोन उठाकर सामने वाले से सीधे बात कर लीजिए. ई-मेल का जवाब आने का ऐसा भी क्या तनाव लेना!

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