सभी को ई-मेल भेजने के क्या हैं फ़ायदे?

  • ब्रायन बोरज़िकोवस्की
  • बीबीसी कैपिटल

आज हम डिजिटल दुनिया में जी रहे हैं. सभी काम कंप्यूटर और इंटरनेट के ज़रिए कर रहे हैं. मेल के ज़रिए ख़तो-किताबत करना आज की कारोबारी ज़िंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है. लेकिन ई-मेल के ज़रिए बात करने के अपने कुछ क़ायदे क़ानून हैं.

लोग इ-मेल का इस्तेमाल तो ख़ूब करते हैं, पर उन उसूलों को भूल जाते हैं जिन्हें अपना कर वो ज़्यादा बेहतर तरीक़े से बातचीत कर सकते हैं.

ऑफ़िस के मेल के साथ अक्सर ये ख़राबी रहती है कि उसमें सभी कर्मचारी जुड़े रहते हैं. ऐसे में लोग जब मेल करते हैं, तो, वो सभी को कर देते हैं.

अब इसमें जिसके काम की वो मेल है उसे तो मिलती ही है, जिनके काम की नहीं होती उन्हें भी वो मेल मिल जाती है. ऐसे में दिमाग़ पर एक दबाव रहता है कि इतनी मेल आ गई हैं, अब इन्हें पढ़ना है. अगर बिना पढ़े डिलीट कर देते हैं, तो, आपके काम की मेल भी डिलीट हो जाती हैं.

रिप्लाई ऑल वाली ई-मेल एक तो आपका वक़्त बर्बाद कराती हैं, दूसरे आपके इन-बॉक्स पर बेवजह का दबाव भी बनाती हैं. इन-बॉक्स में मेल रखने की अपनी एक लिमिट है. अगर उससे ज़्यादा मेल जमा हो जाते हैं तो आपको मेल बॉक्स खाली करना पड़ता है. और रिप्लाई ऑल वाली मेल आपके मेल बॉक्स को चंद घंटों में ही भर देते हैं.

ऐसे में अगर मेल बॉक्स खाली नहीं किया गया तो आपकी ज़रूरी मेल भी रूक जाती हैं.

लेकिन हर चीज़ के दो पहलू होते हैं. रिप्लाई ऑल वाली मेल के नुक़सान हैं तो इसके फ़ायदे भी हैं.

मिसाल के लिए कुछ दिन पहले एक कंपनी के दो कर्मचारी किसी आइडिया को लेकर ई-मेल पर ही आपस में उलझ गए. कंपनी के बाक़ी कर्मचारी भी दोनों के बीच मेल पर चल रही बहस के गवाह थे. क्योंकि दोनों ही अपने ई-मेल रिप्लाई ऑल के ऑप्शन के साथ भेज रहे थे.

मेल पर चल रही इस बहस को देखते हुए एक कर्मचारी ने मशवरा दिया कि क्यों ना सभी कर्मचारी खाने पर मुलाक़ात करें, और वहीं आइडिया पर बहस कर ली जाए.

लिहाज़ा ई-मेल पर छिड़ी बहस के बहाने ही सही सभी कर्मचारियों को एक साथ खाने पर मिलने का मौक़ा मिला और मीटिंग क़ाफ़ी काम की भी रही.

सभी ने ना सिर्फ़ अपनी कंपनी के बारे में बात की, बल्कि दूसरी कंपनियों के मुतालिक़ भी बात की. सभी ने अपने अपने तजुर्बे भी बयान किए. इससे सभी कर्मचारियों में एक टीम होने का एहसास मज़बूत हुआ.

टोरंटो की प्रोफ़ेसर मैरी वॉलर का कहना है कि चेन ई-मेल के बहुत से फ़ायदे हैं. ये टीम के सभी साथियों के एक साथ जोड़ता हैं. मान लीजिए किसी ई-मेल में कोई मज़ाहिया मैसेज लिखकर भेजा है. जिस कर्मचारी के लिए वो मैसेज लिखा गया है, वो भी वहां मौजूद हो और जवाब दे रहा हो, तो, इससे एक हंसी मज़ाक़ का माहौल तैयार होता है.

बहुत सी रिसर्च से ये साबित होता है कि अगर कर्मचारी आपस में हंसी मज़ाक़ के माहौल में काम करते हैं तो उससे उनकी क्रिएटिविटी बढ़ती है और तनाव कम होता है.

मैरी के मुताबिक़ अगर किसी चेन ई-मेल में कोई अपनी ग़लती पर पहले ख़ुद ही हंस पड़ता है तो फिर दूसरों को भी हंसने का मौका मिल जाता है और उस मज़ाक पर तरह तरह से चुटकी लेते हुए मज़ाक भरे ई-मेल की चेन चल पड़ती है. कुल मिलाकर इस सब से तनाव कम होता है.

चेन ई-मेल का एक फ़ायदा और होता है अगर सभी लोग अपने अपने काम में व्यस्त होते हैं तो एक चेन मेल के ज़रिए एक ही वक़्त में सभी से बात हो जाती है.

जानकारों के मुताबिक़ चेन ई-मेल से एक और फ़ायदा होता है. ई-मेल में आपके साथी जिस तरह से अपनी बात लिखते हैं, या जिन लफ़्ज़ों में अपनी बात कहते हैं, उससे उनकी मानसिकता का पता चलता है. साथ ही ये भी पता चलता है कि ज़बान पर उनकी कितनी पकड़ है.

चेन ई-मेल करते हुए सावधानी बरतनी भी ज़रूरी है. बहुत मर्तबा जरा सी लापरवाही की वजह से कंपनी की गोपनीय जानकारियां भी आम हो जाती है. ऐसे में मेल भेजने वाले को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ सकता है.

चेन ई- मेल के कुछ नुक़सान हैं तो बहुत से फ़ायदे भी हैं. अगर आप भी रिप्लाई ऑल का बटन दबाकर मेल करते हैं, तो, ख़्याल रहे कि ऐसे मेल आपकी तरफ़ से सभी को जाएं जिसमें हंसी मज़ाक हो, कोई नया आइडिया हो.

(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.)

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