समंदर की लहरों से अठखेलियां कर रहे ये बुज़ुर्ग

  • एलिज़ाबेथ गारोन
  • बीबीसी कैपिटल
क्रूज़ शिप

रिटायरमेंट का मतलब होता है किसी शांत जगह पर सुकून की ज़िंदगी बसर करना. ज़िंदगी के आख़िरी दिनों का लुत्फ़ लेना.

मगर ये फ़लसफ़ा सबको पसंद नहीं आता. दुनिया में बहुत से जुनूनी लोग हैं, जो रिटायरमेंट के बाद की ज़िंदगी भी उसी उत्साह से जीते हैं, जैसे उन्होंने बाक़ी ज़िंदगी गुज़ारी होती है. कई लोग हैं जो रिटायरमेंट के बाद समंदर की लहरों पर अठखेलियां करते हैं.

दुनिया भर में क्रूज़ शिप के ज़रिए सफ़र करने का चलन तेज़ी से बढ़ रहा है. इस साल पूरी दुनिया में क़रीब ढाई करोड़ लोगों ने क्रूज़ से सफ़र किया. आज से दस साल पहले यह आंकड़ा केवल डेढ़ करोड़ था. इनमें से आधे से ज़्यादा लोग पचास या उससे ज़्यादा की उम्र के थे.

इनमें से कई लोग ऐसे हैं, जिन्होंने समंदर को अपना दूसरा घर बना लिया है. यानी रिटायरमेंट के बाद इन लोगों ने क्रूज़ को ही अपना घर बना लिया है.

यह रिटायरमेंट की आदर्श जगह हो सकती है. मगर इसमें सेहत का मसला खड़ा हो सकता है. क्रूज़ शिप पर हर तरह की सुविधाएं मिलती हैं. मनोरंजन और वर्ज़िश से लेकर इंटरनेट तक. इससे आपको वहां पर घर जैसा माहौल मिलता है.

कम उम्र में रिटायर होने वाले लोगों को क्रूज़ पर वक़्त बिताना पसंद आ रहा है. फ़िलहाल इसका कोई आंकड़ा तो नहीं, मगर क्रूज़ पर रिटायरमेंट वाली ज़िंदगी जीने वालों की अच्छी ख़ासी तादाद है.

कुछ लोगों के लिए क्रूज़ पर रिटायरमेंट का मतलब एक छोटा सा कमरा लेकर साल भर घूमना है. वहीं कुछ लोगों के लिए अपने लिए शानदार जगह ख़रीदने जैसा है. ये लोग बढ़िया क्रूज़ शिप पर अपने लिए आलीशान ठिकाना ले लेते हैं, जैसे द वर्ल्ड क्रूज़ शिप.

फ़्लोरिडा के लेखक जैन कलिनेन कहते हैं कि ऐसे लोगों को घूमना-फिरना पसंद होता है. वे घर पर रहने के सिरदर्द से बचना चाहते हैं, जहां रख-रखाव समेत तमाम तरह की झंझट होते हैं.

अमरीका में ट्रैवल एजेंसी चलाने वाली जे जॉनसन बताती हैं कि अस्सी से ज्यादा उम्र की उनकी एक ग्राहक ने अपना मकान बेचकर दुनिया घूमने का फ़ैसला किया. उसके बाद वे रिटायरमेट होम में रहना चाहती थीं.

जब उन्हें समझाया गया कि उनके पास जितने पैसे होंगे उससे वो ज़िंदगी भर रिटायरमेट होम के बजाय क्रूज़ पर रह सकती है, तब उस महिला ने अपना फ़ैसला बदल दिया और क्रूज़ पर ही रहने की ठान ली.

जॉनसन कहती हैं कि कई मामलों में जहाज़ पर रहना फ़ायदे का सौदा है. वे कहती हैं कि जो लोग जहाज़ पर सफर करते हैं, वे नियमित रूप से जुआ नहीं खेलेंगे, शराब कम पिएंगे और दूसरे शौक़ पर पैसे नहीं खर्च करेंगे. इससे क्रूज़ पर रहने का उनका ख़र्च आसानी से निकल आएगा. इससे क्रूज़ शिप वालों को नुक़सान होता है.

साथ ही उम्रदराज़ मुसाफ़िरों के साथ सेहत की दिक़्क़त भी होती है. सभी क्रूज़ पर डॉक्टर और दूसरे मेडिकल स्टाफ़ की मौजूदगी ज़रूरी है. इससे कंपनी का ख़र्च बढ़ता है.

बहुत से लोग ऐसे भी होते हैं जो अपने घर के आस-पास के ख़राब मौसम के सीज़न से बचने के लिए क्रूज़ के सफ़र पर निकल जाते हैं. इससे वो ख़राब मौसम से जूझने से भी बच जाते हैं और सैर-सपाटा भी हो जाता है.

हालांकि बार-बार एक ही क्रूज़ पर एक ही तरफ़ के सफ़र पर निकलना बोरियत भरा भी हो सकता है. एक वक़्त के बाद आप इससे ऊब जाते हैं. क्योंकि हर बार आपको वही पहचानी जगह और वही जाने-पहचाने चेहरे देखने को मिलते हैं.

क्रूज़ में मिलने वाली सुविधाओं में भी फ़र्क़ होता है. औसतन 170 वर्ग फुट का केबिन लोगों के लिए पर्याप्त होता है. मगर आप ज़्यादा पैसे ख़र्च करके इससे भी बड़े केबिन ले सकते हैं.

मसलन, 'द वर्ल्ड' नाम के क्रूज़ पर 165 लोगों के लिए आलीशान रिहाइशी कमरे बनाए गए हैं. इनमें स्टूडियो अपार्टमेंट जैसी जगह भी है और तीन बेडरूम के बराबर वाले ठिकाने भी हैं.

जहाज़ पर टेनिस, शॉपिंग, बार और तैरने की जगह भी है इसमें शानदार रेस्तरां और बड़ा सा सिनेमा हाल भी है. साथ ही लेक्चर के लिए भी बड़ी सी जगह है.

'द वर्ल्ड' के लिए बुकिंग करने वाली लंदन की जोआना मेरेड्रू कहती हैं कि आप अपनी सुविधा के हिसाब से कहीं भी आ-जा सकते हैं. यह क्रूज़ दो से तीन साल में पूरी दुनिया का चक्कर लगाता है. इस दौरान ये 100 से ज़्यादा जगहों पर रुकता है.

इस जहाज़ के लोग ही वोट के ज़रिए तय करते हैं कि सैर के दौरान जहाज़ कहां-कहां रुकेगा. अगले साल यह जहाज़ पहली बार अंटार्कटिका जाएगा. इसके अलावा य यह ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, पूर्वी एशिया, कनाडा, अमरीका और क्यूबा में भी रुकेगा.

इसके ज़्यादातर मुसाफ़िर साल के कुछ महीनों तक समंदर में सफ़र करते हैं, जैसे यह उनका दूसरा घर हो.

इसमें जो रिहाइशी केबिन हैं उसे लोग पांच से छह साल के लिए किराये पर लेते हैं. कुछ लोग उसे हमेशा के लिए भी ख़रीद सकते हैं. इसमें सफ़र करने वालों की औसत उम्र 58 साल है.

अब 'द वर्ल्ड' से भी बड़ा क्रूज़ शिप 'यूटोपिया' भी आ गया है. यूटोपिया जल्द ही तीन-साढ़े तीन साल के सफ़र पर निकलने वाला है इसमें 1450 से 6200 वर्ग फुट तक के रिहाइशी केबिन हैं. इनकी क़ीमत 40 लाख से लेकर साढ़े तीन करोड़ डॉलर तक है. कंपनी को उम्मीद है कि लोग इसे दूसरे घर की तरह समझेंगे.

बढ़ती मांग को देखकर पूरी दुनिया में कंपनियां नए-नए क्रूज़ शिप बना रही हैं. ख़ास तौर से रईसों के लिए इनमें तमाम इंतज़ाम करने का दावा किया जा रहा है.

क्रूज़ शिप में रिटायरमेंट के बाद रहने वालों के लिए हर सुविधा मौजूद हो ये ज़रूरी नहीं. ख़ास तौर से बीमारी के मोर्चे पर काफ़ी कुछ किया जाना बाक़ी है.

कई जहाज़ों पर हेलीपैड होते हैं जो किसी बीमारी की सूरत में मुसाफ़िर को फ़ौरन सुरक्षित जगह ले जाने की सुविधा मुहैया कराते हैं. लेकिन इतना भर काफ़ी नहीं.

बढ़ती उम्र अपने आप में सेहत की बड़ी चुनौती है. फिर इस तरह जहाज़ से लोगों को निकालने का ख़र्च भी काफ़ी आता है. मसलन, जे जॉनसन की अस्सी से ज़्यादा की उम्र की वे ग्राहक, सफ़र पर निकलने के कुछ दिन बाद ही बीमार हो गई.

अगर आप ज़्यादा उम्र के नहीं हैं, तो जहां जहाज़ रुकते हैं वहां आपकी डॉक्टर से मुलाक़ात कराई जा सकती है. वहीं, कई लोगों के लिए सेहत बड़ी चुनौती नहीं होती. वो सफ़र का पूरा लुत्फ़ लेते हैं.

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