काम करने की जगह सुधारें, मुनाफ़ा बढ़ाएं

  • एलिसन बैरेन
  • बीबीसी कैपिटल
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आसपास अच्छे फूलों वाले पौधे हों. सॉफ्ट लाइट्स का इस्तेमाल हो तो दफ़्तर का माहौल बदल जाएगा

ऑफ़िस में आपको अपना काम पसंद है लेकिन ऑफ़िस पसंद नहीं है. ऐसा ही है ना? बहुत से लोगों के साथ ऐसा ही होता है.

दरअसल आजकल जिस तरह से ऑफ़िस स्पेस डिज़ाइन किए जाते हैं, वहां कम से कम जगह में ज़्यादा से ज़्यादा लोगों के बैठने का इंतज़ाम करने की कोशिश रहती है.

ऐसे में वहां खिड़कियां नहीं बनाई जातीं. ऑफ़िस पूरी तरह से बंद हो जाता है. रोशनी कम होती है. काम करने के लिए आपके पास एक अदद कुर्सी, मेज़ और कंप्यूटर होता है.

ज्यादातर दफ़्तरों का यही हाल है. इस सब का असर कर्मचारियों की सेहत, क्रिएटिविटी और काम पर पड़ता है.

अगर ऑफ़िस स्पेस में कु़दरती ख़ूबसूरती को जोड़ दिया जाए तो इन सारी मुश्किलों से छुटकारा पाया जा सकता है. मसलन, अगर ऑफ़िस की दीवारों पर अच्छे रंग लगाए जाएं, आसपास अच्छे फूलों वाले पौधे हों, सॉफ्ट लाइट्स का इस्तेमाल हो. इससे दफ़्तर का माहौल ही बदल जाएगा.

कर्मचारियों के काम पर भी इसका अच्छा असर होगा. ये सारी बातें 'बायोफिलिया' के सिद्धांत पर आधारित हैं. इसके मुताबिक़ इंसान का क़़ुदरती ख़ूबसूरती और दूसरे जीवों के साथ गहरा संबंध होता है.

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ऑफ़िस स्पेस में कु़दरती ख़ूबसूरती को जोड़ दिया जाए तो कई मुश्किलों से छुटकारा पाया जा सकता है

इंग्लैंड की मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर सर केरी कूपर का कहना है कि कोई भी मुलाज़िम ऐसे ऑफिस में काम नहीं करना चाहता जहां क़ुदरती रोशनी न हो. आस पास फूल और पौधे नहीं हों.

उन्होंने 2015 में 16 देशों के क़रीब 7,600 लोगों के बीच एक सर्वेक्षण किया. जिसमें दफ़्तर में थोड़े से बदलाव लाने के बाद लोगों से बात की गई.

ये पाया गया कि इस छोटे से बदलाव से कर्मचारियों की क्रिएटिविटी में क़रीब 15 फीसद और प्रोडक्टिविटी में छह फ़ीसद का इज़ाफ़ा हुआ. एक तिहाई लोगों ने कहा कि उनके ऑफ़िस का डिज़ाइन बदलने भर से ही फ़ैसला लेने की क़ुव्वत पर असर पड़ा है. इसके अलावा सात फ़ीसद लोगों ने कहा कि उनके दफ़्तर में क़ुदरती रोशनी आती ही नहीं.

क़रीब 58 फीसद लोगों का कहना था कि उनके ऑफिस में पौधे हैं ही नहीं. ज़रा सोचिए, कैसे लगते होंगे ये ऑफ़िस और कितना मुश्किल होता होगा वहां काम करना.

साल 2014 में एक और स्टडी हुई थी, जिसमें पता चला कि जिस दफ़्तर में पेड़-पौधे होते हैं वहां के कर्मचारी ज़्यादा खुशमिज़ाज होते हैं. साथ ही जानकारों का ये भी कहना है कि 'बायोफिलिया' के सिद्धांत पर अभी और काम करना बाक़ी है.

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कोशिश होनी चाहिए कि ऑफिस बेजान चीज़ों से लदा हुआ कमरा ना लगे

इसमें कोई दो राय नहीं कि हरियाली और क़ुदरती रोशनी अच्छी सेहत के लिए ज़रूरी हैं. जो लोग क़ुदरत के नज़दीक रहते हैं उनकी सेहत बड़े-बड़े शहरों के आलीशान घरों में रहने वालों की सेहत से बेहतर होती है.

साल 2015 में स्पेन के बार्सिलोना में एक रिसर्च में पाया गया कि स्कूलों में ज़्यादा हरियाली होने से बच्चों के दिमाग़ी विकास में इज़ाफ़ा होता है. हरियाली में नंगे पैर चलने से आपकी नकारात्मक सोच आपसे दूर होती है और आप तनाव मुक्त रहते हैं. डॉक्टर तो अक्सर इसकी सलाह देते हैं.

अब अगर क़ुदरत के नज़दीक रहने के इतने फ़ायदे हैं तो फिर दफ़्तर में इसे जगह क्यों ना दी जाए. आख़िर घर के बाद यही वो जगह है, जहां आप सबसे ज़्यादा वक़्त गुज़ारते हैं.

अपनी डेस्क पर एक छोटा सा पौधा रख लेने भर से कुछ नहीं होने वाला है. इसके लिए अब बड़ी बड़ी कंपनियां आगे आ रही हैं.

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ऑफ़िस की दीवारों पर ऐसे वॉलपेपर लगा सकते हैं, जिस पर क़ुदरत के ख़ूबसूरत नज़ारे हों

'अमेज़न' कंपनी ऐसा ऑफ़िस बनाने जा रही है जहां बड़े पार्क जैसा माहौल देखने को मिलेगा. मीटिंग रूम इस तरह से डिज़ाइन किए जा रहे हैं जहां बड़े-बड़े पेड़ों के वजूद का एहसास हो.

इसके लिए 30 देशों से तीन हज़ार तरह के पौधे मंगवाए जा रहे हैं. यही नहीं, यहां बैठने के लिए कुर्सियां भी ऐसी होंगी जो चिड़िया के घोंसले से मेल खाती होंगी.

ज़ाहिर है इस तरह का माहौल तैयार करने के लिए मोटी रक़म की दरकार होगी. अगर आपका बजट उतना नहीं है तो बेहतर है कि आप अपने कर्मचरियों से सलाह मशविरा कर लें कि उन्हें किस तरह का माहौल ज़्यादा पसंद है.

लेकिन कोशिश यही होनी चाहिए कि ऑफिस बेजान चीज़ों से लदा हुआ कमरा न लगे जहां इंसान की शक्ल में मशीनें काम कर रही हों. बल्कि वहां क़ुदरत के वजूद का एहसास भी हो.

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ऑफिस में पेंट कराते समय रंगों का ख़ास ख़्याल रखना चाहिए

जानकार कहते हैं कि अगर आपके पास इतना भी बजट नहीं है कि आप अच्छी किस्म के फूलों वाले पौधे ऑफ़िस में रख सकें तो आप ऑफ़िस की दीवारों पर ऐसे वॉलपेपर लगा सकते हैं, जिस पर क़ुदरत के ख़ूबसूरत नज़ारे हों.

फर्श पर ऐसी फ्लोरिंग करा सकते हैं, जिस पर चलते हुए घास पर चलने का एहसास हो. मछलियों को देखने से भी पॉज़िटिव एनर्जी मिलती है.

इसलिए आप भी ऑफिस में बड़े फिश एक्वेरियम लगा सकते हैं. जिससे पानी में रहने वाली ज़िंदगी का एहसास बना रहता है.

क्रिएटिविटी बढ़ाने में रंगों का भी बड़ा अहम रोल होता है. इसलिए ऑफिस में पेंट कराते समय रंगों का ख़ास ख़्याल रखना चाहिए. अगर ऑफिस की दीवारें सादा सफ़ेद रंग से रंगी हैं तो हो सकता है वहां सभी कर्मचारी अपनी प्रतिभा का पूरी तरह इस्तेमाल ना कर पाएं.

रंगों का इस्तेमाल भौगोलिक स्थिति पर भी निर्भर करता है, जैसे कनाडा में जामुनी रंग कर्मचारियों की ख़ुशी से जुड़ा है, जबकि चीन में कत्थई रंग अच्छा माना जाता है.

अमरीका के कैलिफ़ोर्निया के एक कॉल सेंटर में सभी कर्मचारियों को छोटे छोटे क्यूबिकल में बैठा कर काम कराया गया.

एक कर्मचारी की खिड़की से बाहर का क़ुदरती नज़ारा होता था. देखा गया कि उस कर्मचारी की कॉल अटेंड करने की रफ़्तार दूसरे कर्मचारियों के मुक़ाबले छह से सात फ़ीसद ज़्यादा थी.

कंपनी ने फिर हर कर्मचारी के वर्कस्टेशन पर क़रीब एक हज़ार डॉलर ख़र्च करने का फ़ैसला किया. नतीजा ये रहा कि हर मुलाज़िम की काम करने की क़ुव्वत बढ़ी तो कंपनी का मुनाफ़ा भी बढ़ा.

अब अगर आप भी अपनी कंपनी का मुनाफ़ा बढ़ाना चाहते हैं तो अपने मुलाज़िमों के काम करने की जगह पर ध्यान दें.

कर्मचारियों की सेहत अच्छी रहेगी तो ज़ाहिर है कंपनी की सेहत भी अच्छी रहेगी. यानि मोटा मुनाफ़ा मिलता रहेगा. तो देर मत कीजिए छोटा इनवेस्टमेंट करके बड़ा फ़ायदा कमाने पर ध्यान दीजिए.

(अंग्रेज़ी में मूल लेख यहाँ पढ़ें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.)

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