क्या है नेताओं के करिश्माई होने की कला?

  • 4 नवंबर 2017
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Image caption बिल क्लिंटन, नरेंद्र मोदी और स्टीव जॉब्स

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, एप्पल के पूर्व सीईओ स्टीव जॉब्स, पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, इन सब में एक जैसी क्या बात है?

आप इन्हें पसंद करें या ना करें, पर एक बात तो मानेंगे, कि ये सभी करिश्माई व्यक्तित्व के धनी हैं. ऐसे करिश्माई नेता अपने प्रशंसकों को ज़्यादा विश्वासभक्त होने के लिए प्रेरित कर सकते है. उन्हें ज़्यादा मेहनत करने के लिए तैयार कर सकते हैं.

पर, क्या नेताओं के करिश्माई होने के कई तरीक़े हो सकते हैं?

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Image caption टोनी ब्लेयर

क्या है करिश्माई लीडर का होना?

वर्कप्लेस यानी काम करने की जगह पर किसी करिश्माई टीम लीडर का होना, बेहतर काम की गारंटी हो सकता है. हालांकि करिश्मा जन्मजात नहीं होता. इसे अपने अंदर पैदा भी किया जा सकता है. कुछ ख़ास हुनर और नुस्खे अपना कर कोई भी करिश्माई नेता बन सकता है.

इसकी सबसे पहली शर्त होती है, सामने वाले से असरअंदाज़ तरीक़े से बात करना. फिर चाहे वो भाषण देकर हो, या आपसी बातचीत से हो, चिट्ठी लिखकर हो या क़िताब लिखकर की जाए.

अक्सर अच्छे वक्ता शानदार मिसालें देकर, पुराने क़िस्से सुनाकर या चुटकुले सुनाकर लोगों से संवाद करते हैं. बातें करते वक़्त या भाषण देने के दौरान वो अपने हाथों से, या चेहरे के हाव-भाव से भी एक तरह का अपनापन सुनने वाले के साथ जोड़ने की कोशिश करते हैं.

वो अपनी बॉडी लैंग्वेज से ही जज़्बात, सुनने वाले तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं. उनके हाव-भाव ही सुनने वाले में भरोसा जगाते हैं.

लोग, दूसरों से आंखें मिलाकर, मुस्कुराकर, उन्हें अपने बारे में बात करने का हौसला देकर, उनका भरोसा जीत लेते हैं. उन्हें मोह लेते हैं. लोग अक्सर लोगों से मिलने पर उनके बारे में सवाल करते हैं. उनका हौसला बढ़ाने वाली बातें करते हैं.

मगर करिश्माई व्यक्तित्व के धनी लोगों के लिए ज़रूरी नहीं होता कि वो हर एक से निजी तौर पर मिलें. वो दूर रहकर भी अपना मोहक असर सामने वालों पर छोड़ सकते हैं. यानी मन मोहने वाले लोकप्रिय तो हो सकते हैं. करिश्माई होने के लिए कुछ और भी चाहिए.

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Image caption नरेंद्र मोदी

मोदी ने बनाया लोगों को मुरीद

मिसाल के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही लीजिए. आज वो देश के करोड़ों लोगों के लोकप्रिय नेता हैं. इनमें से ज़्यादातर से वो निजी तौर पर नहीं मिले हैं. लेकिन अपनी बातों से, अपने भाषण से और अपने हाव-भाव से उन्होंने बहुत से लोगों से राब्ता क़ायम कर लिया है. करोड़ों लोगों को अपना मुरीद बना लिया है.

एप्पल के पूर्व सीईओ स्टीव जॉब्स भी इस की बड़ी मिसाल थे. उनके तमाम भाषण देखने-सुनने वाली ओलिविया फॉक्स कहती हैं कि बहुत से कर्मचारी जॉब्स को पसंद नहीं करते थे. फिर भी उनके सिर पर जॉब्स का जादू चढ़कर बोलता था.

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Image caption मर्लिन मुनरो

कैसे बनाते हैं मुरीद?

अमरीका की रहने वाली ओलिविया फॉक्स ने द करिश्मा मिथ के नाम से क़िताब लिखी है. वो एक्ज़ीक्यूटिव कोच भी हैं.

ओलिविया करिश्माई लोगों को कई वर्गों में बांटती हैं. वो कहती हैं कि कई लोगों के पास स्टार पावर होती है. जैसे आमिर या शाहरुख़ ख़ान. या फिर हॉलीवुड अभिनेत्री मर्लिन मुनरो. ये लोग कैमरे के सामने बेहतरीन परफॉर्मेंस देकर लोगों को अपना मुरीद बनाते थे.

इनके बाद वो लोग आते हैं जो सामने वाले की बातें बड़े गौर से सुनते हैं. फिर नंबर आता है दया का, कल्याण करने का करिश्मा करने वालों का. ओलिविया इसकी मिसाल दलाई लामा के तौर पर देती हैं.

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Image caption मार्गरेट थैचर

करिश्माई व्यक्तित्व का असर

करिश्माई किरदार होने के बड़े फ़ायदे होते हैं. जैसे कोई नेता कुछ ख़ास बातों का प्रतीक बन जाता है. उन बातों से इत्तेफ़ाक़ रखने वाले लोग उस से जुड़ने लगते हैं. उसकी तरह बनने की कोशिश करते हैं. उसकी बातों पर यक़ीन करते हैं.

इश बारे में स्विटज़रलैंड की लुसान यूनिवर्सिटी के जॉन एंटोनाकिस ने काफ़ी रिसर्च की है. एंटोनाकिस बताते हैं कुछ लोगों ने एक मोटिवेशनल स्पीकर का भाषण सुनने के बाद 17 फ़ीसद बेहतर काम किया.

एंटोनिकास का मानना है कि अगर आप के अंदर करिश्माई ख़ूबियां हैं, तो आप दूसरों से कई काम करा सकते हैं. उनसे अपनी बात मनवा सकते हैं. करिश्मे की मदद से लोगों को आपस में सहयोग करने के लिए भी राज़ी किया जा सकता है.

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Image caption मार्क ज़ुकरबर्ग

आख़िर कैसे असर करता है करिश्मा?

2016 में हुई एक रिसर्च बताती है कि जिन लोगों का व्यक्तित्व करिश्माई होता है, लोग उन पर ज़्यादा भरोसा करते हैं. ऐसे लोग, साथियों को आपस में सहयोग के लिए राज़ी कर लेते हैं. वो नए विचार, नए आइडिया के ज़रिए साथियों पर गहरा असर डालते हैं. वो निजी तौर पर जोखिम लेकर संगठन को नई ऊंचाई पर ले जाते हैं. जैसे कि मार्क ज़ुकरबर्ग या एलन मस्क.

तो क्या आप ख़ुद को ट्रेनिंग देकर करिश्माई बना सकते हैं?

जो लोग करिश्माई व्यक्तित्व के धनी हैं, उन्हें क़रीब से देखेंगे तो पता चलता है कि उनके अंदर कोई ऐसी जादुई बात नहीं होती.

असल में ऐसे लोग शब्दों के सही इस्तेमाल से अपनी बात कहने का हुनर जानते हैं. इसके लिए ज़रूरी है, कि आप सही मिसाल का इस्तेमाल करें. सही वक़्त पर सही क़िस्सा सुनाएं, लोगों को दो चीजों की सही-सही तुलना करके बताएं. ऐसे सवाल उठाएं, जो सुनने वाले के ज़हन में हलचल पैदा करें.

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करिश्माई होने के लिए क्या ज़रूरी?

आप ध्यान से सुनें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार इन ख़ूबियों का इस्तेमाल करते हैं. वो भाषणों में पुरानी सरकारों के काम से अपने काम की तुलना करते हैं. वो पुराने क़िस्से सुनाते हैं. कई बार मज़ाकिया अंदाज़ में बात रखते हैं. यही उनके करिश्माई किरदार की शख़्सियत होने की निशानी है.

करिश्माई होने के लिए ज़रूरी है कि आप सामने वाले के जज़्बात समझें. उन के अंदर उम्मीदें जगाएं. उनके अंदर ख़ुद के लिए भरोसा जगाएं. नैतिकता की दुहाई देकर अपने आप को एक ऊंचे पायदान पर ले जाएं.

जिन मैनेजरों को ये ट्रेनिंग मिली होती है, वो करियर में काफ़ी आगे जाते हैं. बहुत से एमबीए के छात्र ऐसे लोगों के वीडियो देखकर सीखते हैं.

ऐसी ही मिसाल थीं पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर. वो जादुई शख़्सियत की मालकिन थीं. वो अक्सर जोशीले भाषण से लोगों का दिल जीत लेती थीं. उनका 1980 में अपनी पार्टी की बैठक में दिया गया भाषण, आज भी मिसाल के तौर पर याद किया जाता है. इसमें उन्होंने विरोधियों पर ज़ोरदार हमले किए. पुराने क़िस्से सुनाए, बड़े टारगेट रखे. इस तरह उन्होंने सुनने वालों का दिल जीत लिया.

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बॉडी लैंग्वेज का सही होना ज़रूरी

दूसरों पर गहरा असर डालने के लिए आपके हाव-भाव, बॉडी लैंग्वेज भी सही होना ज़रूरी है. आपके हाथों का अंदाज़ और चेहरे के संकेत ऐसे होने चाहिए, जो देखने वाले में भरोसा पैदा करें ताकि वो आप की बातों पर यक़ीन कर सकें.

यही वजह है कि हिलेरी क्लिंटन के मुक़ाबले बिल क्लिंटन आज भी ज़्यादा लोकप्रिय हैं. हिलेरी को सुनिए तो लगता है कि वो लिखी-लिखाई बातें कह रही हैं.

ओलिविया कहती हैं कि आप को पहले ये तय करना होगा कि आप किस तरह का करिश्मा ख़ुद के अंदर पैदा करना चाहते हैं. दूसरों को नियंत्रित करने वाला असर चाहिए, तो अपना आत्मविश्वास बढ़ाना होगा. इसके लिए मार्शल आर्ट की कक्षाओं में जाकर देखिए कि दो लड़ने वाले लोग किस तरह से अपने निजी स्पेस के लिए ताक़त और जी-जान लगाते हैं.

बॉडी लैंग्वेज से ही अपने आत्मविश्वास का संकेत देने की कोशिश कीजिए, कई बार तो अकड़कर खड़े होने भर से काम हो जाता है. वो कहती हैं कि स्टीव जॉब्स अक्सर ऐसे संकेतों से सामने वालों पर जादुई असर किया करते थे.

तो आप इन बातों पर ग़ौर करके और काम करके ख़ुद के अंदर भी करिश्मा पैदा कर सकते हैं.

(बीबीसी कैपिटल पर इस मूल रिपोर्ट को इंग्लिश में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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