‘घर-वापसी’ पर लोग क्यों हो जाते हैं बाहरी?

  • 6 नवंबर 2017
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आप में से बहुत से लोग अपने गांव, अपने शहर से दूर किसी और जगह पर काम कर रहे होंगे. बरसों तक दूसरे शहर या राज्य में रहने के बाद जब आप अपने घर वापस जाते हैं, तो कैसा लगता है?

यक़ीनन अपना ही शहर या गांव पहचान में नहीं आता होगा. वो जगह जहां आप ने बचपन गुज़ारा, वो बेगानी सी लगने लगती है. बहुत से अनजान चेहरे दिखाई देते हैं. रहन-सहन और बोलचाल का फ़र्क़ मालूम होता है.

हम सब के साथ यही होता है. रोज़गार के लिए दूसरे शहर, राज्य या देश में जाकर वक़्त गुज़ारने के बाद जब घर लौटते हैं, तो अपनापन नहीं महसूस होता. अपने ही घर में बेगाने हो जाते हैं हम.

ग्लोबलाइज़ेशन के इस दौर में बहुत से लोगों के साथ ऐसा हो रहा है. कई बरस दूसरे देश में गुज़ारने के बाद घर वापसी करने वालों को अपने ही क़स्बे या शहर में अपनापन नहीं मिलता.

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कैसे निपटते हैं लोग?

बीबीसी ने इस सवाल का जवाब उन लोगों से जानने की कोशिश की, जिन्होंने विदेश में लंबा वक़्त बिताने के बाद घर वापसी की.

अमरीका की वेंडी स्क्रॉच ने फ़ेसबुक पर अपना तजुर्बा लिखा. वो कहती हैं कि जैसे दूसरे देश में जाने पर आप को कल्चर शॉक लगता है. ठीक उसी तरह कई साल बाद अपने वतन वापस आने पर एहसास होता है कि आप किस तरह अपनी जड़ों से ही कट गए हैं. यूं लगता है कि घर वापसी नहीं, आप दूसरी दुनिया में लौटे हैं.

ब्रिटेन के रहने वाले पीट जोंस ने क़रीब पंद्रह साल डेनमार्क, हॉलैंड और स्विटज़रलैंड में बिताए. इस के बाद जब वो अपने शहर ब्लाइटी लौटे, तो कुछ दिन बाद ही उन्हें लगा कि उन्हें वापस जाना चाहिए. ये वो शहर नहीं जो उनका अपना घर था.

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पुराने दिन न करें याद

अमरीका के ब्रूस फेलिक्स क़रीब 26 साल ऑस्ट्रेलिया में रहे थे. जब वो अपने घर वापस आए, तो लोग और उनका बर्ताव एकदम बदला हुआ था. ब्रूस को यूं लगा जैसे वो अपने घर नहीं लौटे, बल्कि किसी और नए शहर में आ गए हैं, जहां न उन्हें कोई पहचानने वाला है और न ही समझने वाला. उनका बातचीत का लहज़ा भी बाक़ी लोगों से बदला हुआ था. वो साफ़ तौर से बाहरी महसूस कर रहे थे.

इसी तरह मैरी सू कॉनेली जब बीस साल अमरीका में रहकर अपने देश आयरलैंड लौटीं, तो ख़ुद को अपने ही शहर में बेगाना पाया. वो बदल गई थीं. स्थानीय लोगों ने कहा कि तुम तो बाहरी हो. उन्हें बहुत बुरा लगा. वापस अपने शहर आकर भूल करने का एहसास हुआ.

ऐसे ही एक शख़्स हैं डेनिस ग्रावेल. वो सलाह देते हैं कि जब आप कई साल बाद घर वापसी करें, तो बेहतर है कि गुज़रे हुए दिनों को याद न करें. ये सोचें कि आप एक नई जगह एक नई ज़िंदगी शुरू करने जा रहे हैं. इससे आप को अपने शहर से तालमेल बिठाने में मदद मिलेगी. ऑस्ट्रेलिया की रहने वाली एलिसन ली भी डेनिस की बात से इत्तेफ़ाक़ रखती हैं. जब वो कई बरस विदेशों में गुज़ारकर ऑस्ट्रेलिया लौटीं, तो इसी नुस्खे की मदद से अपने शहर से तालमेल बैठाया.

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ब्रिटेन के जॉन सिम्पसन सलाह देते हैं कि जब आप अपने शहर वापस जाएं तो उसी जगह न रहें, जहां पहले रहते थे. न ही आप वो काम शुरू कर दें, जो पहले किया करते थे. इससे आप को भी नयापन लगेगा.

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ऑस्ट्रेलिया की रहने वाली वेस्ना थॉमस 16 साल बाद अमरीका से लौटीं तो उन्हें दोस्त बनाने में काफ़ी दिक़्क़त हुई. फिर उन्होंने एक बुक क्लब शुरू किया. पार्ट टाइम काम शुरू किया. वो एक स्कूल में मुफ़्त में पढ़ाने लगीं. इससे उन्हें लोगों से ताल्लुक़ बनाने में मदद मिली.

वहीं, ब्रिटेन की कैटरीना गॉनरमैन ने कहा कि जब वो ब्रिटेन वापस आईं तो उन्होंने इसे भी विदेश में नई नौकरी की तरह लिया. इससे उन्हें एडजस्ट करने में ज़्यादा दिक़्क़त नहीं हुई. यही काम अमरीका के मार्क सेबास्टियन ओर ने किया.

क्या आप दोबारा जुड़ पाते हैं?

वैसे कुछ लोगों ने ये भी कहा कि दोबारा अपने शहर में जाकर बसना कोई ज़रूरी नहीं. क्योंकि आप फिर से अपनी जड़ों से जुड़ नहीं पाते हैं. वक़्त के साथ बहुत कुछ बदल जाता है. आप ख़ुद भी बहुत बदल जाते हैं. इसलिए पुराने दौर में लौटना आसान नहीं होता.

बेहतर होता है कि घर वापस जाएं भी तो इसे ज़िंदगी में एक नई शुरुआत की तरह देखें. अपने पुराने दिनों की याद में खोने के बजाय ज़िंदगी के पन्नों पर नई इबारत लिखने की कोशिश करें. आपके लिए दोबारा अपने शहर या देश में बसना आसान होगा.

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