दुनिया के अलग अलग शहरों में लंच क्या करते हैं लोग?

  • 22 जनवरी 2018
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Image caption तमर कसाबियां

दुनिया में किसी भी संस्कृति को समझना हो तो ये देखिए कि वहां के लोग लंच कैसे करते हैं, कब करते हैं, कहां करते हैं और लंच क्या करते हैं.

बीबीसी ने भी दुनिया के कुछ शहरों में रहने वाले लोगों से जाना कि वो लंच कैसे करते हैं और क्या करते हैं.

चलिए आपको इस दिलचस्प तजुर्बे से रूबरू कराते हैं.

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मुकुल पारेख, मुंबई, भारत-

मुंबई के रहने वाले मुकुल पारेख एक एकाउंटिंग कंपनी में ऑफ़िस मैनेजर हैं. मुकुल कहते हैं कि लंच करने के लिए वक़्त दिनों-दिन कम होता जा रहा है. इसके लिए वो दफ़्तर में काम के बोझ और अक्सर लगने वाले जाम को ज़िम्मेदार मानते हैं.

मुकुल रोज़ाना दोपहर में अपने दफ़्तर में लंच करते हैं. इसमें वो क़रीब आधे घंटे का वक़्त ख़र्च करते हैं.

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Image caption मुकुल पारेख

आम तौर पर मुकुल घर से अपना लंच साथ लाते हैं. लेकिन कई बार वो मुंबई के मशहूर डब्बावालों की सेवाएं भी लेते हैं. ये डब्बेवाले लोगों के घरों से लंच को उनके दफ़्तर तक पहुंचाते हैं. ये सेवा क़रीब एक सदी से चल रही है.

मुंबई के डब्बेवाले दुनिया भर में मशहूर हैं कि वो बिना ग़लती किए रोज़ाना हज़ारों लंच बॉक्स लोगों के घर से उनके दफ़्तर पहुंचाते हैं. 100 डब्बों में से ग़लती की संभावना 3.4 डब्बों के साथ होने की ही रहती है.

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Image caption डब्बावाला

पीढ़ी-दर-पीढ़ी डब्बेवालों का लंच कोडिंग सिस्टम पिता से बेटे में ट्रांसफ़र होता है. यानी सटीक काम का ये बिज़नेस विरासत में मिले सीक्रेट से चल रहा है.

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Image caption रोलेक्स

सारा गिमोनो, एमबाले, युगांडा-

भारत की तरह अफ़्रीकी देश युगांडा में भी लंच करने की रफ़्तार बहुत तेज़ है. यहां भी रफ़्तार भरी ज़िंदगी जीने वाले लोग लंच के लिए मुश्किल से वक़्त निकाल पाते हैं.

युगांडा के एमबाले शहर में काम करने वाली सारा गिमोनो एक एनजीओ से जुड़ी हैं. वो कहती हैं कि लोग जल्द से जल्द लंच करके काम पर लग जाना चाहते हैं ताकि ज़्यादा से ज़्यादा काम कर सकें. हालांकि कोई लंच स्किप नहीं करता.

सारा बताती हैं कि युगांडा में लोग डिनर को ज़्यादा अहमियत नहीं देते. सारा रोज़ाना आधे घंटे का वक़्त लंच पर ख़र्च करती हैं. वो इसके लिए अक्सर अपने दफ़्तर के पास के रेस्टोरेंट में जाती हैं.

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Image caption सारा गिमोनो

सारा कहती हैं कि युगांडा में भी भारत की तरह ही लोग दफ़्तर में ही अपना लंच निपटाते हैं. कुछ लोग अपने साथियों के साथ होटलों-रेस्त्रां में जाकर लंच करते हैं.

सारा कहती हैं कि युगांडा में स्ट्रीट फूड का भी ख़ूब चलन है. वो ख़ुद अक्सर फील्ड वर्क के दौरान रोलेक्स खाती हैं. रोलेक्स एक चपाती होती है, जिसमें अंडे, टमाटर और प्याज़ के टुकड़े डालकर रोल करके सेंका जाता है.

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वनीसा मोनरॉय, न्यूयॉर्क, अमरीका-

न्यूयॉर्क की रहने वाली वनीसा की उम्र चालीस बरस है, वो पेशेवर डॉग वाकर हैं. यानी बड़े लोगों के कुत्तों को टहलाने का काम करती हैं. वो कहती हैं कि न्यूयॉर्क में अक्सर लोग लंच का पूरा टाइम सैंडविच या सलाद ख़रीदने के लिए लाइन में लगे रहकर ही बिता देते हैं.

वक़्त की बर्बादी से बचने के लिए वनीसा अक्सर घर से ही स्नैक बार पैक करके लाती हैं. इन्हें खाकर वो ख़ुद को एनर्जी भी देती हैं और वक़्त भी बचा लेती हैं.

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Image caption वनीसा मोनरॉय

वनीसा कहती हैं कि मेरे लिए सुबह हेवी ब्रेकफास्ट करना आसान होता है. फिर स्नैक बार पैक करके लाना और उससे काम चलाना सहूलियत भरा हो जाता है.

वो कहती हैं कि हल्के-फुल्के खाने की वजह से दिन में नींद भी नहीं आती. हालांकि वो फास्ट फूड खाना नुक़सानदेह मानती हैं.

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Image caption वनीसा मोनरॉय

अमरीका में दूसरे देशों के मुक़ाबले लोग छोटे लंच ब्रेक लेते हैं. 2016 में हुए सर्वे के मुताबिक़ 51 फ़ीसद अमरीकी लोग लंच में 15 से 30 मिनट लगाते हैं.

केवल 3 प्रतिशत लोग ही 45 मिनट या इससे ज़्यादा वक़्त लंच पर ख़र्च करते हैं. वहीं, फ्रांस में 43 प्रतिशत लोग लंच में 45 मिनट से ज़्यादा टाइम ख़र्च करते हैं.

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फेथ रागस, मकाती सिटी, फिलीपींस-

फिलीपींस में हर कर्मचारी को लंच के लिए एक घंटे दिए जाने का नियम है.

यहां के के मकाती सिटी में रहने वाली फेथ रागस को अपने शहर में चलने वाली ठेला गाड़ियों का खाना बहुत पसंद है. इन्हें जॉलीजीप कहते हैं. इनमें अधपका खाना रखकर बेचा जाता है.

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Image caption फेथ रागस

स्ट्रीट फूड को ज़ायक़ेदार और साफ़-सुथरा बनाने के लिए सरकार ने जॉलीजीप चलानी शुरू की थी.

फेथ रागस अपने दफ़्तर से थोड़ी दूर पर लगने वाली ऐसी ही ठेला गाड़ी से लंच लेती हैं. इन पर प्लास्टिक की थैलियों में घर के बने पकवान बेचे जाते हैं.

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Image caption फेथ रागस

फेथ कहती हैं कि दिन में तीन वक़्त ठीक से खाना सेहत के लिए बेहद ज़रूरी है.

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फ्रांस्वां पेलन, पेरिस, फ्रांस-

फ्रांस में लंच कल्चर बहुत शानदार है. यहां लोग लंच पर ख़ूब पैसे भी ख़र्च करते हैं और वक़्त भी. यहां 43 फ़ीसद लोग रोज़ 45 मिनट लंच करने में बिताते हैं. क़रीब 72 फ़ीसद लोग हफ़्ते में एक बार ज़रूर रेस्टोरेंट में लंच करते हैं.

फ्रांस्वां पेलन, पेरिस में प्रोडक्ट डिज़ाइनर हैं. वो आम तौर पर दफ़्तर के पास स्थित सुपरमार्केट से लंच मंगाते हैं.

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Image caption फ्रांस्वां पेलन

लंच वो दफ़्तर के किचन में अपने साथियों के साथ ही करते हैं.

हफ़्ते में एक दिन वो बाहर जाकर किसी रेस्टोरेंट में भी खाना खाते हैं. लंच के दौरान वो साथियों से बात करते हैं. ये बातचीत तमाम मुद्दों पर होती है. फ्रांस्वां पेलन कहते हैं कि लंच के दौरान बातचीत से दूसरों की राय जानने को मिलती है.

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Image caption फ्रांस्वां पेलन

लंच के दौरान फ्रांस में वाइन पीने का भी चलन है. शुक्रवार को लंच में ज़्यादा लोग वाइन पीते हैं.

फ्रांस में दुनिया भर की कुल खपत का 11.3 फ़ीसदी वाइन पी जाती है. शुक्रवार को ही लोग लंच के लिए भी ज़्यादा बाहर जाते हैं.

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तमर कसाबियां, काहिरा, मिस्र-

मिस्र में आम तौर पर लोग भारी-भरकम नाश्ता करते हैं. इसलिए लंच अक्सर 3 से 4 बजे तक होता है. ज़्यादातर लोग घर से ही लंच पैक करके लाते हैं और दफ़्तर में खाते हैं.

काहिरा के सबसे बड़े मॉल सिटीस्टार हेलियोपोलिस में काम करने वाली तमर कसाबियां कहती हैं कि उन्हें जंक फूड खाना पसंद नहीं, इसलिए वो घर से ही खाना लाती हैं.

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Image caption तमर कसाबियां

तमर बताती हैं कि काहिरा में बहुत-सी कंपनियां 1 से 2 बजे के बीच लंच करने का वक़्त देती हैं. लेकिन इस दौरान लोग लंच नहीं करते और कॉफ़ी-चाय पीते हुए वक़्त बिताते हैं. लंच के लिए लोग 3 से 4 बजे के बीच आधे घंटे और निकालते हैं.

तमर बताती हैं कि युमामिया जैसी कई ऐसी कंपनियां हैं जो साफ-सुथरा, हेल्दी लंच दफ़्तर में पहुंचाती भी हैं. कुछ लोग इनकी सेवाएं भी लेते हैं.

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एलिज़ा रिनाल्डी, साओ पाउलो, ब्राज़ील-

ब्राज़ील में आम तौर पर काम के घंटे ज़्यादा होते हैं. लोग सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक काम करते हैं. इसलिए वो काम के बीच से लंच करने के नाम पर एक घंटे का ब्रेक लेते हैं. इस दौरान लोग दफ़्तर से बाहर निकलना पसंद करते हैं. इसलिए कई कंपनियां भी कर्मचारियों को फ़ूड कूपन देती हैं, ताकि सस्ते दाम में उनके खाने का इंतज़ाम हो सके.

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Image caption एलिज़ा रिनाल्डी

ब्राज़ील के साओ पाउलो शहर में काम करने वाली एलिज़ा रिनाल्डी एक मीडिया कंपनी में कंटेंट डायरेक्टर हैं. वो और उनकी साथी नताशा, दोनों ही घर से अधपका लंच पैक करके दफ़्तर लाती हैं. लंच टाइम में वो उसे तैयार करके खाती हैं.

एलिज़ा कहती हैं कि घर से खाना लाना हेल्दी होता है. बाहर के खाने को वो सेहत के लिए ठीक नहीं मानतीं. उनकी साथी नताशा भी इस बात से इत्तेफ़ाक़ रखती हैं.

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Image caption एलिज़ा रिनाल्डी

लंच टाइम पर बाहर निकलने के चलन पर एलिज़ा का कहना है कि अगर आप रोज़ बाहर निकलते हैं तो लोग ये मानते हैं कि आप कम काम करते हैं. इसलिए वो बाहर जाने से परहेज़ करती हैं.

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