जिसकी आवाज़ में है दम, उसे ही मिलती है दमदार सैलरी

  • 9 जून 2018
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इंसान की पहचान का एक बेहद अहम पहलू है, आवाज़- भारी आवाज़, गहराई वाली आवाज़, सुरीली आवाज़, पतली-सी आवाज़ या दहाड़ने वाली आवाज़.

जितने इंसान, उतने ही तरह की आवाज़ें और लोगों के बोलने का तरीक़ा. पर, क्या आपकी आवाज़ का आपकी तनख़्वाह से कोई ताल्लुक़ है?

अगर आप का जवाब ना में है, तो आपके लिए ये चौंकाने वाली ख़बर है.

आपकी आवाज़ का आपकी सैलरी यानी तनख़्वाह से गहरा ताल्लुक़ होता है.

लेकिन ये तय कैसे होता है? और किस तरह की होती है उनकी आवाज़ जो करोड़ों रुपयों की क़माई करते हैं?

हाल ही में अमरीका के 792 पुरुषों की आवाज़ रिकॉर्ड की गई. वो सभी किसी न किसी कंपनी के सीईओ थे. फिर उनकी आवाज़ का और उनकी सैलरी का विश्लेषण किया गया.

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इस रिसर्च के बेहद दिलचस्प नतीजे सामने आए हैं-

  • जो सीईओ 125 हर्ट्ज़ वाली आवाज़ में बोलते हैं, उनकी सैलरी उन सीईओ के मुक़ाबले 126 लाख रुपए ज़्यादा थी, जो इससे ज़्यादा तेज़ आवाज़ में बोलते हैं.
  • सीईओ की आवाज़ की पिच का ताल्लुक़ कंपनियों की क़ीमत से भी जुड़ा पाया गया.
  • गहरी आवाज़ में बोलने वाले सीईओ की कंपनी की क़ीमत दूसरी कंपनियों से 2 हज़ार 90 करोड़ रुपए ज़्यादा देखी गई.

अफ़सोस की बात ये है कि इस सर्वे में महिला सीईओ शामिल नहीं थीं. इसकी एक वजह ये भी है कि महिला सीईओ अभी हैं ही बहुत कम.

लेकिन गहरी आवाज़ होने के फ़ायदे महिला सीईओ को भी होते हैं.

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आमदनी और आवाज़ का ताल्लुक़

तो, आख़िर क्या वजह है कि हमारी आमदनी का सीधा ताल्लुक़ हमारी आवाज़ से है?

कुछ वैज्ञानिक इसे हमारे विकास की प्रक्रिया का हिस्सा मानते हैं.

अमरीका की ड्यूक यूनिवर्सिटी के विलियम मेव कहते हैं कि विकास की प्रक्रिया के दौरान गहरी आवाज़ वाले अक्सर मुक़ाबले में अव्वल आते थे. जब इंसान संसाधनों के लिए लड़ाई लड़ रहा था, तो आवाज़ भी उसमें बहुत अहम रोल निभा रही थी.

मर्दों की आवाज़ उनके हारमोन 'टेस्टोस्टेरोन' से तय होती है. विलियम मेव कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि सिर्फ़ इंसानों की तरक़्क़ी में आवाज़ का अहम रोल होता है. दूसरे जानवरों की कामयाबी भी उनकी आवाज़ पर निर्भर करती है.

विलियम मेव शेर की मिसाल देते हैं, जिसकी भारी और गहरी गुर्राहट उसे जंगल का राजा बनाती है.

मेव कहते हैं कि इंसान के बोलने का तरीक़ा लोगों में भरोसा जगाता है. उनके बारे में राय क़ायम करने में अहम रोल निभाता है.

मेव के मुताबिक़, जानवरों की दुनिया में इन बातों की अहमियत नहीं है. मगर इंसानी समाज में आवाज़ बहुत बड़ा रोल निभाती है.

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लेकिन पतली आवाज़ वालों का क्या?

किसी इंसान की आवाज़ अगर गहराई से भरी है तो इस से उसकी कई ख़ूबियों का इशारा मिलता है. ऐसे लोग क़ाबिल, भरोसेमंद, किसी से भी अपनी बात मनवा सकने वाले समझे जाते हैं.

मतदाता भी उन नेताओं को वोट देना पसंद करते हैं, जिनकी आवाज़ में गहराई हो.

ये कोई खुला संकेत तो नहीं होता, मगर इसका ये मतलब ज़रूर होता है कि आपके पास ज़्यादा ताक़त है. और आप ज़्यादा कमाई करने की क्षमता रखते हैं.

यहां ये बात याद रखने लायक़ है कि किसी की हैसियत का अंदाज़ा हम आवाज़ के सिवा दूसरी बातों से भी लगा सकते हैं.

कहते हैं कि मशहूर अमरीकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन बांसुरी जैसी आवाज़ में बोला करते थे.

लेकिन, उनके शब्दों में ज़बरदस्त ताक़त थी, जो उनकी महीन आवाज़ की वजह से तनिक भी कम नहीं हुई. लेकिन न ही लिंकन की ताक़त और न ही उनकी क़ाबिलियत, उनकी आवाज़ से नापी गई.

कई बार जो आवाज़ महीन और कमज़ोर होती है, वो भी सबसे असरदार साबित होती है.

(बीबीसी कैपिटल की ये कहानी अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें)

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