बाकी दुनिया के मुक़ाबले अमीर कैसे हैं नॉर्वे के युवा

  • 23 जुलाई 2018
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पश्चिमी देशों के युवा अपने माता-पिता की तुलना में ग़रीब होने की राह पर हैं. लेकिन एक देश में उलटी गंगा बह रही है. पर कैसे?

ये कोई नई बात नहीं कि अमरीका, ब्रिटेन और दूसरे पश्चिमी देशों में 1980 और 2000 के बीच पैदा हुए लोग ख़र्च के बोझ से दबे हैं.

पढ़ाई और घर बसाने का ख़र्च हद से ज्यादा बढ़ा है, जो उनकी चिंता बढ़ाता रहता है. कई तरह के अध्ययनों से ये बात सामने आ चुकी है कि यह पीढ़ी पिछली पीढ़ी से ग़रीब रहने वाली है.

लेकिन ये बात सभी देशों पर लागू नहीं होती. उत्तरी यूरोप में बसे नॉर्वे में कहानी एकदम अलग है.

समुद्री लुटेरों, बर्फ़ पर होने वाले खेलों और खड़ी चट्टान वाले समुद्री सोतों के लिए मशहूर नॉर्वे यूरोप की इकलौती अर्थव्यवस्था है, जहाँ के नौजवानों की आर्थिक स्थिति पिछली पीढ़ी से बेहतर है.

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नॉर्वे में 30 से 35 साल के लोगों की ख़र्च योग्य सालाना औसत आमदनी क़रीब 4 लाख 60 हज़ार क्रोनर यानी क़रीब 56,200 अमरीकी डॉलर है.

साल 1966 से 1980 के बीच पैदा हुई पिछली पीढ़ी जब इस उम्र में थी, तब उसकी आमदनी के मुक़ाबले नये नौजवानों की आमदनी में 13 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

चौंकाने वाले ये आंकड़े ब्रिटेन के थिंक टैंक "दी रिजॉल्यूशन फ़ाउंडेशन" ने जारी किये हैं.

'लक्ज़मबर्ग इकनम डेटाबेस' नाम से जारी इस रिपोर्ट में दुनिया भर के देशों में आमदनी के तुलनात्मक आंकड़े हैं.

मज़बूत अर्थव्यवस्था वाले दूसरे देशों के नौजवानों से इसकी तुलना करें तो अमरीका में इस आयु वर्ग के नौजवानों की आमदनी 5 फ़ीसदी घटी है और जर्मनी में 9 फ़ीसदी की गिरावट रही.

साल 2008 के वित्तीय संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित दक्षिणी यूरोप के देशों में यह गिरावट 30 फ़ीसदी रही.

नॉर्वे में 15-29 साल के नौजवानों में बेरोजगारी भी सबसे कम 9.4 फ़ीसदी है, जबकि ओईसीडी देशों में यह औसत 13.9 फ़ीसदी है.

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नॉर्वे की ख़ुशनसीबी!

राजधानी ओस्लो में ऐसे नौजवानों को ढूंढ़ना मुश्किल नहीं है जो अपने देश की दौलत बढ़ा रहे हैं.

25 साल के ग्रैजुएट एलेक्जेंडर आर्नीज़ कहते हैं, "मैं कभी नहीं सोचता कि मैं अपने पैसे कैसे ख़र्च करूं. मैं महीने में एक बार थिएटर जाता हूं. एक बार सिनेमा जाता हूं. दोस्तों के साथ बाहर खाना खाने जाता हूं. छुट्टियों में बाहर घूमने जाता हूं."

आर्नीज़ एक म्यूज़िकल थिएटर के लिए स्क्रिप्ट लिखते हैं, लेकिन उससे उन्हें कोई आमदनी नहीं होती. इसलिए वे अपने ख़र्च के लिए कोर्सवोल के सुपरमार्केट में हर हफ्ते एक या दो शिफ्ट में काम करते हैं.

आर्नीज़ सब-अर्बन सिटी में अपने एक दोस्त के साथ अपार्टमेंट में रहते हैं.

वो कहते हैं, "मैं जानता हूं कि मैं कितनी खुशनसीबी में हूं. मैं जो करियर बनाना चाहता हूं, उसके लिए मुझे बहुत ज्यादा कुर्बानियां नहीं देनी पड़ रहीं."

आर्नीज़ को हर घंटे काम के कम से कम 164 क्रोनर यानी 20 अमरीकी डॉलर मिलते हैं. वीकेंड पर या शाम की शिफ्ट में इससे ज्यादा पैसे मिलते हैं.

स्कैंडिनेवियाई देशों में टैक्स की दरें ज्यादा हैं, फिर भी आर्नीज़ महीने में क़रीब 14,000 क्रोनर या 1,700 अमरीकी बचा लेते हैं.

इसके आधे पैसे से वह घर का किराया देते हैं, घूमने-फिरने, खाने-पीने में ख़र्च करते हैं और बाकी बचे हुए पैसे से वह जो चाहे वह कर सकते हैं.

कोर्सवोल के ही 31 साल से बिज़नेस एनालिस्ट ओस्टाइन की अपनी बीएमडब्लू कार है.

वे अपना पूरा नाम नहीं बताते, लेकिन कहते हैं, "हालांकि नॉर्वे अमीर है, लेकिन यहां के लोग अपनी निजी संपत्ति के बारे में बातचीत करना पसंद नहीं करते."

ओस्टाइन मानते हैं कि उन्होंने इतना ज़रूर कमाया है कि जब वे 27 साल के थे, तब उन्होंने दो बेडरूम का अपार्टमेंट ख़रीदा था और वे छुट्टियाँ मनाने अमरीका और एशिया जाते हैं.

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Image caption 25 साल के ग्रैजुएट एलेक्जेंडर आर्नीज़ एक म्यूज़िकल थिएटर के लिए स्क्रिप्ट लिखते हैं

नॉर्वे अलग क्या करता है?

नॉर्वे के नौजवानों की खुशहाल जिंदगी देश के आर्थिक विकास से जुड़ी है.

साल 1980 से 2013 के बीच किसी भी विकसित देश के मुक़ाबले नॉर्वे की औसत आमदनी ज्यादा बढ़ी.

दौलत और खुशहाली की रैंकिंग के कई पैमानों पर वह दुनिया में नंबर वन है.

वैश्विक मंदी से भी वह आसानी से निकल गया. साल 2017 में 110 देशों के लेगाटम प्रॉस्पैरिटी इंडेक्स में नॉर्वे टॉप पर रहा.

नॉर्वे का तेल और गैस सेक्टर पिछले तीन दशकों से देश की आर्थिक तरक्की का मुख्य कारक है. उत्तरी सागर में मिले भंडारों के बाद नॉर्वे ने पीछे मुड़कर नहीं देखा है, हालांकि हाल के वर्षों में तेल के दाम में आई गिरावट से कुछ असर जरूर पड़ा है.

ओस्लो के बीआई नॉर्वेजियन बिज़नेस स्कूल में अर्थशास्त्र की प्रोफ़ेसर हाइल्ड बजॉर्नलैंड कहती हैं कि सिर्फ़ यही महत्वपूर्ण नहीं है कि नॉर्वे कितनी दौलत बना रहा है. बल्कि यह भी अहम है कि वह इस दौलत का क्या कर रहा है.

वो कहती हैं, "नॉर्वे अपने तेल और अपनी संपत्ति को बेहतर तरीके से मैनेज कर रहा है. वह बचत कर रहा है और उसका एक हिस्सा समाज को वापस भी देता है. इससे कुछ लोगों को बहुत ज्यादा मिलने की जगह बहुत सारे लोगों को उस संपत्ति का हिस्सा मिलता है."

नॉर्वे ने अपने पैसे को दुनिया के सबसे बड़े सोवेरन वेल्थ फ़ंड में लगाया है.

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Image caption अर्थशास्त्र की प्रोफ़ेसर हाइल्ड बजॉर्नलैंड

यह एक विशाल गुल्लक की तरह है जिसका पैसा 9000 से ज्यादा कंपनियों में निवेश किया जाता है.

फिलहाल यह फ़ंड 1,000 अरब डॉलर से ज्यादा का है. इस बचत के बावजूद नॉर्वे में टैक्स की दरें ज्यादा है और न्यूनतम मजदूरी की दरें यूनियन के साथ बातचीत के आधार पर तय होती हैं.

बजॉर्नलैंड कहती हैं, "युवाओं और कम तनख्वाह वाले लोगों की आमदनी हर साल बढ़ती है और यहाँ कम कमाने वाले और बहुत ज्यादा कमाने वालों की आमदनी में बड़ा अंतर नहीं है."

द रिजॉल्यूशन फ़ाउंडेशन की रिपोर्ट कहती है कि मज़बूत अर्थव्यवस्था वाले दूसरे देशों, जैसे अमरीका, ब्रिटेन और जर्मनी में गैर बराबरी ज्यादा है.

वहाँ न्यूनतम मजदूरी और अधिकतम मजदूरी का अंतर बहुत बड़ा है. वहाँ के नौजवानों की आमदनी पर इसका बुरा असर पड़ता है. इसके उलट नॉर्वे ने पीढ़ियों में समानता का भाव रखा है.

इससे लोगों में संतोष है और यहां सामाजिक विद्रोह या बगावत देखने को नहीं मिलती.

समाज कल्याण योजनाओं और स्वास्थ्य सेवाओं को मिलने वाली सब्सिडी भी युवाओं को खुशहाल बनाती है.

यहाँ बेरोजगारी पर मिलने वाली मदद भरपूर है. लोग नया काम ढूंढते हुए दो साल तक पिछली सैलरी के 60 फ़ीसदी के बराबर बेरोजगारी भत्ता ले सकते हैं.

सभी नॉर्डिक देशों की तरह नॉर्वे में भी बच्चे पालने का ख़र्च कम है और माँ बनने पर मिलने वाली छुट्टियों की वजह से महिलाओं को भी काम करने में कोई दिक्कत नहीं होती.

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Image caption चिली से आई 27 साल की गैब्रिएला सांज़ना ह्यूमन राइट्स में मास्टर्स की पढ़ाई कर रही हैं.

ज़्यादातर स्कूलों और विश्वविद्यालयों में पढ़ाई मुफ़्त है. पढ़ने के लिए कर्ज़ लेने पर कोई ब्याज़ नहीं देना पड़ता.

छात्रों के लिए रोज़गार की दर ऊंची होने से और मदद मिलती है.

बजॉर्नलैंड कहती हैं, "यह महत्वपूर्ण है कि नौजवानों को पढ़ाई के दौरान ही कोई काम मिल जाता है".

इस तरह के पार्ट-टाइम काम से नॉर्वे के नौजवान दूसरे यूरोपीय देशों के मुकाबले ज्यादा कमा लेते हैं.

बिज़नेस स्कूल में पढ़ने वाले ज्यादातर छात्र बजॉर्नलैंड की राय से इत्तफाक रखते हैं.

चिली से आई 27 साल की गैब्रिएला सांज़ना ह्यूमन राइट्स में मास्टर्स की पढ़ाई कर रही हैं. वह पार्ट-टाइम वेट्रेस का काम करती हैं.

सांज़ना कहती हैं, "यहां काम खोजना मुश्किल नहीं है और पैसे भी अच्छे मिल जाते हैं. इससे बहुत मदद मिलती है. समय भी अच्छे से कटता है और पढ़ाई भी हो जाती है."

सांज़ना ने बताया, "मुझे बहुत टैक्स देना पड़ता है लेकिन मुझे इसकी चिंता नहीं है, क्योंकि मैं जानती हूं कि सरकार हमें बहुत कुछ देती है."

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भविष्य सुरक्षित है?

नॉर्वे के लिए सब ठीक हो, ऐसा नही है. कामयाबी के बीच कुछ चिंता की बातें भी हैं. युवाओं के लिए रोजगार की दर में गिरावट आई है.

ओईसीडी की नई रिपोर्ट के मुताबिक़, साल 2007 से 2016 के बीच नॉर्वे में 15 से 29 साल के नौजवानों की आबादी क़रीब 18 फ़ीसदी बढ़ी है और इनके लिए रोजगार के अवसर कम हो रहे हैं.

दूसरे देशों से आने वाले युवाओं में बेरोजगारी की दर 10 फ़ीसदी है.

ओस्लो मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ़ लेबर एंड वेलफ़ेयर रिसर्च के सीनियर रिसर्चर क्रिस्टियन हेग्गबॉ कहते हैं कि दूसरे देशों से यूरोप आने वाले पढ़े-लिखे छात्रों और आप्रवासियों को अच्छा काम मिल जाता है लेकिन जातीय अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव होता है.

वे कहते हैं, "कुछ हद तक इसके पीछे शिक्षा का अभाव होता है, लेकिन इस बात में कोई संदेह नहीं कि जितनी नौकरियों की जरूरत है, उतना काम नहीं है."

कुछ जगहों पर विदेशी मूल के लोगों को काम पर रखने में भी हिचकिचाहट दिखाई जाती है.

हेग्गबॉ कहते हैं कि नॉर्डिक देशों में जन्मे और यहीं पले-बढ़े दूसरी पीढ़ी के आप्रवासियों को भी कई बार काम ढूंढ़ने में संघर्ष करना पड़ता है.

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Image caption साल 1980 से 2013 के बीच किसी भी विकसित देश के मुक़ाबले नॉर्वे की औसत आमदनी ज्यादा बढ़ी.

बंटा हुआ समाज

नाइजीरिया से आए ओव जॉर्ज फिलहाल बेरोजगार हैं.

वे कहते हैं आपका संपर्क यहां काम दिलाने में आपकी मदद करता है. वे कहते हैं, "पिछली नौकरी मुझे नॉर्वे के ही एक दोस्त के जरिये मिली थी. उसके बाद मुझे कोई ढंग की नौकरी नहीं मिली."

जिबूती से आए 19 साल के कायद महम्मद एक मीडिया कंपनी में काम करते हैं.

वे कहते हैं कि काम ढूंढ़ने में उनको कोई मुश्किल नहीं हुई और उनको आसानी से काम मिल गया.

लेकिन कायद को लगता है कि विदेशियों के लिए यहाँ अमीर बनना आसान नहीं है, क्योंकि उनको कम तनख्वाह वाले काम ही मिल पाते हैं और बेरोजगार होने के डर से वे उसी काम में लटके रहते हैं.

स्कैंडिनेवियाई देशों को समानता वाले अपने समाज पर बड़ा गर्व है, लेकिन समाज में गैर-बराबरी की खाई चौड़ी होने के संकेत भी दिखने लगे हैं.

ओईसीडी के आंकड़े बताते हैं कि राष्ट्रीय औसत के आधे से कम कमाने वाली आबादी साल 2004 में सिर्फ़ 6.9 फ़ीसदी थी जो 2015 में 8.1 फ़ीसदी हो गई.

ओईसीडी रिपोर्ट तैयार करने वालों में से एक सेबास्टियन कॉनिग्स कहते हैं कि रोजगार नहीं पाने वाले और ट्रेनिंग या शिक्षा से बाहर रह जाने वाले लोगों की हालत यहां दूसरे देशों के मुक़ाबले ज्यादा ख़राब हो जाती है.

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Image caption ओईसीडी के आंकड़े बताते हैं कि राष्ट्रीय औसत के आधे से कम कमाने वाली आबादी साल 2004 में सिर्फ़ 6.9 फ़ीसदी थी जो 2015 में 8.1 फ़ीसदी हो गई.

क़ामयाबी की क़ीमत

बजॉर्नलैंड के मुताबिक़, नॉर्वे के संपन्न लोगों को भी सचेत हो जाना चाहिए.

उनके अनुसार, "आपने अच्छे दिन बिताए हैं. आपने लंबी छुट्टियां ली हैं. लंबे समय तक सुख के दिन बिताने के बाद आपने उनको अपना तकदीर मान लिया. लेकिन जो चीजें पहले हुई हैं वह भविष्य में भी हों, यह जरूरी नहीं है."

बजॉर्नलैंड कहती हैं कि नॉर्वे को ज्यादा काम करना होगा. तेल और गैस के अलावा दूसरे उद्योगों पर भी ध्यान देना होगा. नौकरी देने वालों को तेल और गैस सेक्टर के बाहर अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाओं को ज्यादा मौके देने होंगे. आज जैसी जिंदगी जीने के लिए नॉर्वे के युवाओं को भी मर्जी से कहीं भी नौकरी करने की जगह उस जगह की तलाश करनी होगी, जहां उनके कौशल की ज्यादा जरूरत है.

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उपाय क्या है

इसमें कोई शक़ नहीं कि नॉर्वे के सामने चुनौतियां हैं, लेकिन विशेषज्ञों को लगता है कि दूसरे देश नॉर्वे से बहुत कुछ सीख सकते हैं.

करियर की शुरुआत में नौजवानों की मदद के लिए सेबास्टियन कॉनिग्स शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सेवाओं के आपसी रिश्ते की तरफ इशारा करते हैं.

नॉर्वे में स्कूल छोड़ने वाले हर छात्र को फ़ोन करके ये पूछा जाता है कि अगर उसे और पढ़ाई करके रोज़गार नहीं करना तो उसने क्या विकल्प सोचा है.

हालांकि नॉर्वे की आबादी सिर्फ़ 51 लाख है, लेकिन बड़े देश चाहें तो इन नीतियों को अपने यहां लागू कर सकते हैं.

क्रिस्टियन हेग्गबॉ को लगता है कि अगर तेल सेक्टर को अलग कर कर दिया जाये और नॉर्वे को अपनी अर्थव्यवस्था को दूसरा आकार देना पड़े तो भी समतावादी सिद्धांतों और युवाओं की मदद करने वाली नीतियों की वजह से नॉर्वे प्रगति कर लेगा.

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