बदल रहा है दुनिया का सबसे लोकप्रिय बर्गर

  • 14 सितंबर 2018
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1967 में अमरीका के ग्रेटर पिट्सबर्ग में पहली बार परोसे गए बिग मैक बर्गर की दुनिया दीवानी है. बीफ़ और हैम मीट पसंद करने वाले दुनिया भर के मांसाहारी इसे चाव से खाते हैं.

शायद ही कोई देश, कोई शहर हो जहां कुरकुरे तली गई पत्तियों और सुनहरे पीले बन के साथ परोसे जाने वाले मांस के टुकड़ों को पसंद करने वाले लोग ना मिलें.

बिग मैक फ़ास्ट फ़ूड खाने वालों की पहली पसंद है. लेकिन जो लोग सेहत को लेकर जागरूक हैं और अपने खाने में मांस और जानवरों की चर्बी पसंद नहीं करते, वे बिग मैक से दूर रहते हैं.

दुनिया भर में शाकाहार अपनाने वालों की तादाद बढ़ रही है. इन नये ग्राहकों के लिए मैकडॉनल्ड्स को भी नया मेन्यू बनाना पड़ रहा है.

स्वीडन इसका बेहतरीन उदाहरण है. स्वीडन में शाकाहार अपनाने वाले लोगों के लिए मैकडॉनल्ड्स ने नया सैंडविच लॉन्च किया है जो जानवरों के मांस और उस पर होने वाले अत्याचार से मुक्त है. यह है मैक वेगन.

मैकडॉनल्ड्स का यह नया बर्गर शाकाहारी और मांसाहारी दोनों पसंद कर रहे हैं और इसे फ़ास्ट फ़ूड का भविष्य माना जा रहा है.

2017 में मैकडॉनल्ड्स ने स्वीडन की फ़ूड कंपनी ओर्क्ला से हाथ मिलाया था. दोनों ने मिलकर एक नये तरह की पैटी तैयार की.

दक्षिणी स्वीडन के तटीय शहर माल्मो में इन दोनों कंपनियों ने मांस-रहित बर्गर बनाने की तैयारी शुरू की.

ओर्क्ला के प्रॉडक्ट डेवेलपर कार्ल-जोहान फ्रीलैंडर कहते हैं, "जब आपके पास मांस का बेस होता है तो उसका अपना एक ज़ायका होता है. सोया प्रोटीन का स्वाद उसकी बराबरी का नहीं होता."

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ज़ायके के इस अंतर को पाटने के लिए फ्रीलैंडर ने सोया प्रोटीन में प्याज, काली मिर्च और टमाचर के पाउडर का इस्तेमाल किया. टमाटर से इसे एक खास लाल रंग मिला.

लेकिन फ्रीलैंडर कहते हैं कि मैक वेजन के स्वाद का राज़ उमामी में है. उमामी को 'फ़िफ़्थ फ्लेवर' के नाम से भी जाना है, जो असल में ख़ुशबूदार पत्तियों वाले पौधे की सुगंध है.

फ्रीलैंडर ने मशरूम पाउडर जैसे शाकाहारी उत्पादों में उमामी मिलाकर नया ज़ायका तैयार किया जो मांस जैसा स्वादिष्ट है.

मैकडॉनल्ड्स और ओर्क्ला का मकसद एक ऐसा बर्गर बनाना था, जो ग्राहकों को मांस का स्वाद तो दे लेकिन उसमें जानवरों का मांस ना हो. यह प्रयोग सफल रहा और स्वीडन के लोगों ने इसे खूब पसंद किया.

एनिमल राइट्स स्वीडन के मुताबिक हर दस में से एक स्वीडिश नागरिक शाकाहारी है. 30 साल से कम उम्र के लोगों में यह अनुपात हर पांच में से एक का है. इस आधार पर स्वीडन में शाकाहारियों की संख्या ब्रिटेन के कुल शाकाहारियों से दोगुनी है.

एसोसिएशन ऑफ़ एनिमल राइट्स की कैमिला बोर्कबॉम लिखती हैं, "ऐसे समय में जब शाकाहारी उत्पादों की बिक्री बढ़ रही है, लोगों में शाकाहार अपनाने की चाहत भी बढ़ रही है. यह जानवरों के लिए बहुत ही अच्छा है. लोग औपचारिक तौर पर खुद को शाकाहारी घोषित किए बिना भी ज़्यादा से ज़्यादा शाकाहार अपना रहे हैं."

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मैक वेजन का स्वाद असली मांस जैसा

मांसाहारियों और शाकाहारियों के संसार के बीच के ये लोग ही मैक वेजन के सबसे बड़े ग्राहक हैं. वे मांस भी खाते हैं लेकिन वे ऐसा पौष्टिक शाकाहार पसंद करते हैं जिसका स्वाद मांस जैसा हो. इनमें से कुछ शाकाहारी भी हैं जो असली बिग मैक बर्गर को चखना चाहते हैं.

अब अहम सवाल यह है कि क्या मैक वेजन बर्गर का स्वाद ऐसा है जो लंबे समय तक टिक सके?

मैकडॉनल्ड्स और उसकी सहयोगी कंपनियों ने इस पर सर्वे किया और पाया कि हां, मैक वेजन को लोग सालों साल पसंद करेंगे.

डैन मोर्सेर्वि पिछले 15 साल से शाकाहारी हैं. उन्होंने मैक वेजन बर्गर को चखकर देखा और पाया कि इसका स्वाद असली मांस जैसा है.

मोर्सेर्वि कहते हैं, "मुझे यह बढ़िया लगा. इसका स्वाद एकदम मीट जैसा है. मैं दोबारा वह स्वाद महसूस कर रहा हूं."

स्वीडन में इन दिनों ज़्यादा से ज़्यादा लोग पेड़-पौधों से मिलने वाले भोजन पर आश्रित हो रहे हैं. समस्या सिर्फ़ सही संतुलन बनाने की है. उन्हें एक ऐसा भोजन चाहिए जो पूरे देश में मिले और सभी को पसंद आए. इस कसौटी पर मैकडॉनल्ड्स का मैक वेजन बिल्कुल खरा उतरा.

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मैकडॉनल्ड्स की चुनौती ख़त्म हो गई हो, ऐसा भी नहीं है. शाकाहारियों का एक बड़ा वर्ग फ़ास्ट फ़ूड को नैतिक और सेहतमंद नहीं मानता. मैकडॉनल्ड्स का इतिहास भी शाकाहार की जगह मांसाहार को बढ़ावा देने वाला रहा है.

लेकिन स्वीडन जैसी जगहों पर लोग इस बहस को पीछे छोड़ रहे हैं. मांसाहार और शाकाहार के बीच के लोग मैकडॉनल्ड्स को बड़ा बिजनेस दे रहे हैं.

मैकडॉनल्ड्स ने मैक वेजन बर्गर के बारे में अपनी योजना का खुलासा नहीं किया है कि क्या वह इसे दुनिया के दूसरे देशों में भी ले जाना चाहता है. फ़िलहाल सिर्फ़ स्कैंडिनेविया के देशों में क्रूरता-रहित मांस का ज़ायका उपलब्ध है.

मोर्सेर्वि कहते हैं, "लोग इसे पंसद कर रहे हैं. उन्हें लगता है कि स्वाद से समझौता किए बगैर वे खाने की अपनी आदतों को बदल सकते हैं."

अगर आप अपने खाने के लिए जानवरों को नहीं मारना चाहते तो यह आपके लिए है. इसे चखकर देखिए.

(ये कहानी मूल रूप से बीबीसी रेडियो 4 के कार्यक्रम यू ऐंड योर्स की है और इसके प्रस्तुतकर्ता विनिफ्रेड रॉबिन्सन और प्रोड्यूसर केविन माउसलि हैं)

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