पति-पत्नी जो गढ़ रहे हैं जापान की नई छवि

  • 24 सितंबर 2018
रैचेल और जुन इमेज कॉपीरइट Rachel and Jun Yoshizuki

किसी भी देश के जन-जीवन, लोगों के रहन-सहन, खान-पान और संस्कृति की विशेषता बताने वाली कुछ किताबें होती हैं. लेकिन जापान विलक्षण है. इस देश के बारे में जानने के लिए लोग यू-ट्यूब का सहारा ले रहे हैं.

जापान के 'लोमड़ी गांव' में किलकारी करते लोमड़ी के बच्चों के साथ एक महिला के खेलने वाले वीडियो को 60 लाख से ज़्यादा बार देखा गया है.

'इडियट्स गाइड टू जापानीज़ स्क्वैट टॉयलेट्स' को 30 लाख लोगों ने देखा है. 'मॉडर्न जापानीज़ टेबल मैनर्स' को क़रीब 20 लाख लोग देख चुके हैं.

ये सारे वीडियो नागोया में रहने वाले दंपति रैचेल और जुन योशिज़ुकि ने बनाए हैं. वे 'रैचेल एंड जुन' यू-ट्यूब चैनल चलाते हैं. जापान के आम लोगों के रोज़मर्रा के जीवन को दिखाने वाले उनके वीडियो को अब तक 20 करोड़ बार देखा जा चुका है.

रैचेल और जुन जे-व्लॉगर्स हैं. वे जापानी संस्कृति की ख़ूबियों के बारे में छोटी से छोटी बात बताते हैं और इसके लिए सामान्य लोगों के दैनिक जीवन के असली वीडियो दिखाते हैं.

वे किसी भी विषय पर वीडियो अपलोड करते हैं. जापान के किसी हाई स्कूल का टूर हो या फिर किसी कैप्सूल होटल के छोटे से कमरे में रुकना कैसा होता है. जापान में बहु-नस्लीय होना कैसा होता है, यह भी उनके वीडियो का विषय हो सकता है.

जापान में यू-ट्यूब पहले कभी इतना लोकप्रिय नहीं था. यू-ट्यूब के एशिया-प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख मार्क लेफ़्कोविट्ज़ कहते हैं, "जापान में यू-ट्यूब चैनलों पर अपलोड किए जाने वाले वीडियो 2016-17 के बीच दोगुने हो गए हैं."

चैनल आजीविका का साधान

रैचेल और जुन के यू-ट्यूब चैनल के 18 लाख सब्सक्राइबर हैं. यह चैनल ही उनकी आजीविका का साधन है. उन्होंने कुछ दूसरे यू-ट्यूब चैनल भी खोले हैं, जैसे जुन्स किचेन. इसके 20 लाख नियमित दर्शक हैं.

यू-ट्यूब चैनल की कमाई कई चीज़ों पर निर्भर करती है. जैसे किसी वीडियो को कितने लोग देखते हैं और जिन देशों में उनके दर्शक हैं, वहां विज्ञापन की दरें क्या हैं.

जे-व्लॉगिंग ने रैचेल और जुन के लिए कमाई के दूसरे रास्ते भी खोले हैं. इन दोनों को वीडियो गेम्स में आवाज़ देने का ऑफर मिला. रैचेल को मॉडलिंग करने के भी प्रस्ताव मिले. इनके अतिरिक्त क्राउडसोर्सिंग साइट पैट्रियॉन से स्पांसरशिप और दर्शकों से दान भी मिले.

जुन जापान की हैं और रैचेल अमरीका के हैं. इंटरनेट पर मशहूर होने की उनकी कोई तमन्ना नहीं थी. 2012 में जब उन्होंने अपना चैनल खोला तो वे इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल सिर्फ़ वीडियो शेयर करने के लिए करते थे.

उनके चैनल में दूसरों की दिलचस्पी जगने में ज़्यादा देर नहीं लगी. 2012 में ही उन्होंने एक वीडियो बनाया जिसका शीर्षक था- 'जापान में क्या ना करें' तब तक गिने-चुने लोग ही उनके चैनल के सब्सक्राइबर थे. मगर इस वीडियो को लाखों लोगों ने देखा.

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Image caption रैचेल और जुन

दो-तीन साल तक उन्होंने कोई छुट्टी नहीं ली. वे हफ्ते के सातों दिन काम करते थे. वे सुबह उठने के समय भी वीडियो बनाते थे. उनको एडिट करते थे. नये आइडिया सोचते थे और उनको फ़िल्माते थे. वे सोशल मीडिया का सहारा लेते थे. लोगों से मुलाक़ातें करते थे.

इन सबका सेहत पर बुरा असर पड़ा. रैचेल कमज़ोर हो गए. उनकी तबीयत आए दिन बिगड़ जाती थी. फिर भी डेडलाइन पर काम पूरा करने के लिए उनको हफ़्ते में कई बार रात-रात भर जागना पड़ता था.

रैचेल और जुन ने ऐसे विषयों पर वीडियो बनाए जिनके बारे में वे असल में परवाह करते थे. जापान के बारे में पहले इंटरनेट पर बहुत कम सामग्री थी, इसलिए लोग उनके वीडियो पसंद करने लगे.

रैचेल फ़ख़्र से कहते हैं, "हमारे कुछ दर्शक बताते हैं कि वे हमारी वजह से जापान आए या हमारे वीडियो की वजह से उन्होंने जापानी भाषा सीखनी शुरू की. कई लोग किसी शहर को देखने गए क्योंकि हमने वहां के बारे में वीडियो बनाया था."

क्या यू-ट्यूब के वीडियो ने रैचेल और जुन को जापान का सांस्कृतिक राजदूत बनाया है? इस सवाल पर जुन कहती हैं, "मैं ख़ुद को सांस्कृतिक दूत नहीं समझती." रैचेल भी इससे सहमति जताते हैं, "हमने यू-ट्यूब चैनल इसलिए शुरू किया क्योंकि हम ऐसा चाहते थे."

अपने नये वीडियो '50 फैक्ट्स अबाउट जापान' को बनाने में उन्होंने 250 घंटे ख़र्च किए. इतना ज़्यादा समय उन्हें पहले कभी नहीं लगा था.

ग्यारह मिनट के वीडियो में यह दिखाया गया है कि कैसे जापान की सड़कों पर लगे कंस्ट्रक्शन बैरियर जानवरों की शक्ल वाले होते हैं. जापान के लोग आज भी सीडी क्यों ख़रीदते हैं और गर्भनिरोधक गोलियां जापान के लोग पसंद क्यों नहीं करते.

रैचेल और जुन ने इन चीज़ों के बारे में वर्षों तक सोचा, लेकिन 190 देशों में फैले उनके दर्शकों के लिए ये सब एकदम नया है.

उनके दर्शकों में 30 फ़ीसदी अमरीका के हैं. बाकी लोग जापान, ताईवान, जर्मनी, ब्राजील, स्पेन और स्वीडन में फैले हुए हैं. जापान में वीडियो देखकर अंग्रेज़ी सीखने वाले लोगों की तादाद भी अच्छी खासी है.

जे-व्लॉगर्स के वीडियो देखना क्यों पसंद करते हैं लोग?

दुनिया भर में सैलानियों की संख्या बढ़ रही है. 2012 से 2017 के बीच सैलानियों की संख्या 250 फ़ीसदी बढ़ी.

वर्ल्ड टूरिज़्म ऑर्गनाइज़ेशन के मुताबिक़, जापान में सैलानियों की तादाद लगातार छह साल से 10 फ़ीसदी से ज्यादा बढ़ रही है. पिछले साल दो करोड़ 80 लाख विदेशी पर्यटक जापान आए.

जापान सरकार ने 2020 के टोक्यो ओलंपिक के लिए 4 करोड़ सैलानियों को आकर्षित करने का लक्ष्य रखा है.

यू-ट्यूब के लेफ़्कोविट्ज़ कहते हैं, "यह मेरे लिए दिलचस्प है कि पर्यटन को जे-व्लॉगिंग से जोड़कर देखा जा रहा है."

लेफ़्कोविट्ज़ कहते हैं कि जापान के पॉप कल्चर, यहां के खान-पान और इतिहास में लोगों की रुचि ने पर्यटन और जे-व्लॉगिंग, दोनों को बढ़ावा दिया है.

"लोग यहां घूमना चाहते हैं. यहां के खान-पान, रीति-रिवाज और संस्कृति के बारे में जानना चाहते हैं. लोग इसके लिए यू-ट्यूब का भी सहारा लेते हैं. इससे हम भी बढ़ रहे हैं."

लेकिन जो विदेशी सैलानी टोक्यो की सड़कों पर चहलकदमी करते हुए हर नुक्कड़ पर रोबोट और पोकेमॉन से मिलने की तमन्ना लेकर आते हैं, उन्हें निराशा हाथ लगती है.

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Image caption टोक्यो का सेंसो-जी मंदिर

जापान की नकारात्मक चीज़ों को भी दिखाते हैं

वैसे तो हर देश के बारे में कुछ भ्रांतियां होती हैं, लेकिन जापान के बारे में लगता है कि इसने देश के अजब-ग़ज़ब तत्वों को प्रमुखता दिलाकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में जानबूझकर अपने बारे में एक धारणा बनवाई है.

जापान का एक खेल इंटरनेट पर बहुत लोकप्रिय है जिसमें दो खिलाड़ी एक प्लास्टिक ट्यूब में फूंक मारकर एक-दूसरे के मुंह में ज़िंदा कॉकरोच घुसाने की कोशिश करते हैं.

रैचेल कहते हैं, "मुझे लगता है कि ज़मीनी लोगों से असलियत जानना अच्छा है. कई लोग सोचते हैं कि जापान एक अलग तरह का देश है. लेकिन यहां वे देखते हैं कि जापान दूसरे देशों जैसा ही एक देश है."

रैचेल और जुन कई बार जापान के नकारात्मक पक्षों को भी दिखाते हैं.

इसी साल टोक्यो मेडिकल यूनिवर्सिटी ने यह स्वीकार किया कि उसने दाख़िला परीक्षा के अंकों में छेड़छाड़ की थी ताकि कम लड़कियां एडमिशन ले सकें.

रैचेल और जुन ने इस पर भी एक वीडियो बनाया, जिसमें सोशल मीडिया पर जापान की महिलाओं की प्रतिक्रिया को शामिल किया गया. उन्होंने जापान में लैंगिक भेदभाव पर फ़ोकस किया, जो बाद में 'मी टू' आंदोलन में उभरकर सामने आया.

स्काइप पर इंटरव्यू के दौरान रैचेल बताते हैं कि दुनिया भर में जापान के बारे में भ्रांतियां फैली हैं. इसे 'निराले जापान' के रूप में देखा जाता है. हंसी-मज़ाक वाले जापानी खेलों और धींगामस्ती करने वाले मसखरों से इंटरनेट की दुनिया भरी है.

रैचेल और जुन की बातचीत में दो संस्कृतियों की विशेषताएं उभरकर सामने आती हैं. पति-पत्नी उसी तरह बात करते हैं, जिस तरह उनके दर्शक अपने-अपने देशों में करते हैं.

रैचेल कहते हैं, "किसी वीडियो में दोनों तरह के दृष्टिकोण का आना अच्छा है. मुझे लगता है कि हमारे चैनल की सफलता के पीछे यह भी एक कारण है."

(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.)

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