यहां लोग घूमने नहीं, बल्कि ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने आते हैं

  • 5 अक्तूबर 2018
दक्षिण कोरिया के लोग इमेज कॉपीरइट EPA

आप कहीं सैर-सपाटे के लिए निकलें तो क्या वहां ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में वक़्त ज़ाया करना पसंद करेंगे? शायद नहीं.

टूरिस्ट प्लेस पर कोई भी व्यक्ति समय बर्बाद क्यों करना चाहेगा, वो भी उमस भरे मौसम में, लंबी कतार में खड़े होकर पसीना पोंछते हुए.

मगर दक्षिण कोरिया के जेजू आइलैंड की बात निराली है. जेजू सैलानियों का स्वर्ग है. ज्वालामुखी विस्फोट से बना यह द्वीप कोरिया के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से से करीब 100 मील दूर है.

जेजू में सबसे ज्यादा चीनी सैलानी आते हैं. इस साल अब तक तीन लाख चीनी टूरिस्ट यहां पहुंच चुके हैं.

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जेजू के समुद्र तट चीनियों को बहुत पसंद हैं. यहां खरीदारी करना और जुआ खेलना भी उन्हें अच्छा लगता है. लेकिन उन्हें सबसे ज्यादा पसंद है यहां का ड्राइविंग लाइसेंस.

चीन के कई सैलानी तो सिर्फ़ यहां के ड्राइविंग लाइसेंस एग्ज़ाम सेंटर आने के लिए टूर प्लान करते हैं. दिन में वे फॉर्म भरते हैं, लाइन में खड़े होते हैं और परीक्षा देते हैं.

अगर वे पहली ही कोशिश में पास हो जाते हैं तो उनके पास बीच पर घूमने का समय भी बच जाता है.

काम के हिसाब से छुट्टियां प्लान करना नया नहीं है. लोग कॉस्मेटिक सर्जरी कराने, बच्चे पैदा करने में होने वाली दिक़्क़तों का इलाज कराने, प्रोफ़ेशनल ट्रेनिंग लेने और यहां तक कि फ़ुटबॉल मैच देखने के लिए भी धरती के एक छोर से दूसरे छोर तक चले जाते हैं.

दो तरह से फ़ायदेमंद

कुछ शहर किसी एक चीज़ में विशेषज्ञता के लिए मशहूर हो जाते हैं. जैसे मेक्सिको का लॉस एल्गोडोन्स दांतों के इलाज के लिए मशहूर है और वियतनाम का होई एन ग्राहकों के नाप से कपड़े सिलने के लिए.

जेजू में ड्राइविंग लाइसेंस वाला पर्यटन बहुत पुराना नहीं है. लेकिन यह तेज़ी से बढ़ रहा है. स्थानीय ड्राइवर्स लाइसेंस एग्जामिनेशन सेंटर के मुताबिक इस साल 2,172 चीनी नागरिकों को यहां से लाइसेंस मिले, यानि हर हफ़्ते औसतन 62 लोगों को. 2010 में पूरे साल में सिर्फ़ 68 चीनी नागरिकों को लाइसेंस मिला था.

ड्राइविंग लाइसेंस चाहने वाले चीनी नागरिकों के लिए दक्षिण कोरिया से लाइसेंस लेना दो तरह से फ़ायदेमंद है- एक तो गुणवत्ता और दूसरे कम ख़र्च.

चीन के बड़े शहरों के ड्राइविंग स्कूल से लाइसेंस बनवाना जेजू आने के मुक़ाबले बहुत महंगा है. दूसरे, यहां आसानी से और फ़टाफ़ट काम हो जाता है.

चीन की टूरिस्ट कंपनियां "दक्षिण कोरिया के हवाई" में लाइसेंस बनवाने के लिए 5 दिन का हॉली-डे पैकेज ऑफ़र करती हैं. ये पैकेज 8,800 युआन (1280 डॉलर) से शुरू होते हैं. इस ख़र्च में जेजू के सुंदर समुद्री तटों पर घूमना-फिरना भी हो जाता है.

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परीक्षा देकर परमिट

होटल का ख़र्च, ड्राइविंग ट्रेनिंग, लोकल ट्रांसपोर्ट और परीक्षा की फीस सब कुछ इसमें शामिल होता है. बस खाने और हवाई किराये का पैसा अलग से देना होता है.

भारत के हिसाब से यह महंगा लग सकता है, लेकिन बीजिंग में वीआईपी ड्राइविंग कोर्स का खर्च 15 हजार युआन (2,188 डॉलर) तक है और इस काम में महीनों लग जाते हैं.

कई देशों की तरह चीन भी दूसरे देशों के वैध लाइसेंस को मान्यता देता है और उसके आधार पर ड्राइविंग का लोकल परमिट जारी करता है. चीनी नागरिक जब जेजू से लाइसेंस लेकर आते हैं तो चीन में सिर्फ़ एक लिखित परीक्षा देकर परमिट हासिल कर सकते हैं.

चीनी टूरिस्ट के कोरियाई लाइसेंस को वरीयता देने के पीछे एक और वजह है.

रोड टेस्ट पास करने में अपने दोस्त की मदद के लिए आए छात्र मिंक्वू ल्यू कहते हैं, "चीन में ड्राइविंग टेस्ट बहुत मुश्किल है. कोरिया में यह बहुत आसान है."

चीन और कोरिया दोनों देशों में मेडिकल टेस्ट होते हैं. दोनों ही देशों में लिखित परीक्षा, सिम्युलेटर टेस्ट और रोड टेस्ट होते हैं.

कोरिया में यह परीक्षा बहुत आसान है, ऐसा भी नहीं है. दिसंबर 2016 में यहां टेस्ट में कई बदलाव किए गए थे, जिसके बाद सिम्युलेटर टेस्ट में पास होने वालों की संख्या 60 फ़ीसदी तक गिर गई थी.

चीन का टेस्ट अब भी कोरिया के टेस्ट से मुश्किल है. चीन में होने वाली लिखित परीक्षा में 100 सवाल होते हैं, जबकि कोरिया में सिर्फ़ 40 सवाल होते हैं.

परीक्षा पास करने के लिए चीन में 90 फ़ीसदी अंक लाने ज़रूरी हैं, जबकि कोरिया में 60 फ़ीसदी अंक लाने वाला भी पास हो जाता है. ब्रिटेन में 70 फ़ीसदी अंक ज़रूरी हैं.

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4 घंटे की प्रैक्टिस

चीन में ड्राइविंग टेस्ट लेने वाले सेंटर कम हैं और आवेदक ज़्यादा. इसलिए हर चरण को पार करने में कई हफ़्ते लग जाते हैं. जो लोग परीक्षा के किसी चरण में एक से अधिक बार फ़ेल कर जाते हैं, उनको पूरी परीक्षा नये सिरे से देनी होती है.

चीन के विपरीत जेजू में कई बार एक ही दिन में ड्राइविंग टेस्ट के सभी चरण पूरे हो जाते हैं.

जेजू में पैकेज-टूर कंपनी चलाने वाली यिंगक्विन कुई ने स्थानीय ड्राइविंग एकेडमी से तालमेल कर रखा है. वे सैलानियों को 13 घंटे की अनिवार्य ड्राइविंग ट्रेनिंग दिलाती हैं. इसमें 4 घंटे का प्रैक्टिस कोर्स और 6 घंटे की रोड ड्राइविंग शामिल होती है.

कुई का दावा है कि ट्रेनिंग के बाद बहुत कम लोग ही ऐसे होते हैं जो टेस्ट पास नहीं कर पाते, 100 में शायद कोई एक.

जेजू के ड्राइवर लाइसेंस एग्ज़ामिनेशन सेंटर के कर्मचारी बताते हैं कि लाइसेंस के लिए आवेदन से लेकर सर्टिफ़िकेट मिलने तक की पूरी प्रक्रिया औसत रूप से हफ़्ते भर में पूरी हो जाती है. कभी-कभी यह काम सिर्फ़ दो दिनों में हो जाता है.

दक्षिण कोरिया के ड्राइविंग लाइसेंस को हासिल करना ना सिर्फ़ आसान है, बल्कि यह ज़्यादा कारगर भी है.

1940 से 1960 के बीच संयुक्त राष्ट्र की कोशिशों से इंटरनेशनल ड्राइविंग परमिट (IDP) की शुरुआत हुई थी. आईडीपी धारक दूसरे देशों में भी कार किराये पर ले सकते हैं और ड्राइव कर सकते हैं.

चीन ने उन समझौतों पर दस्तख़त नहीं किए थे, इसलिए चीनी लाइसेंस पर आईडीपी नहीं मिलती. दक्षिण कोरिया के लाइसेंस पर आईडीपी मिल जाती है. इसलिए देश-दुनिया घूमने-फिरने वालों के लिए उनका अधिक महत्व होता है.

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कुई कहती हैं, "मेरे ज़्यादातर ग्राहक चीन के हैं जो दूसरे देशों में रहते हैं, विशेषकर ब्रिटेन और इटली में." आईडीपी हासिल करके वे उन देशों में ड्राइविंग कर सकते हैं जहां वे रहते हैं. 150 दूसरे देशों में भी उनके पास ड्राइविंग का अधिकार होता है.

भाषा भी एक कारक है. मिसाल के लिए, ब्रिटेन में होने वाले ड्राइविंग टेस्ट सिर्फ़ अंग्रेजी या वेल्श में लिए जाते हैं. जेजू में आवेदन और लिखित परीक्षा चीनी भाषा में भी दी जा सकती है. परीक्षा केंद्र के कर्मचारी भी जरूरी चीनी शब्दों से परिचित हैं.

दक्षिण कोरिया के दूसरे शहरों में भी अंग्रेज़ी में लिखित परीक्षा दी जा सकती है, जबकि आवेदन पत्र कई भाषाओं में उपलब्ध रहते हैं. लेकिन चीनी सैलानियों की भीड़ जेजू आइलैंड में ही जुटती है. वजह ये है कि मेनलैंड में आने के लिए वीजा जरूरी है, लेकिन जेजू में चीनी नागरिकों को वीज़ा की जरूरत नहीं पड़ती.

जेजू की कुदरती खूबसूरती भी कम दिलकश नहीं है. सुंदर समुद्र तट पर घूमने का आनंद है और अगर लाइसेंस मिल गया तो कोरियाई बारबेक्यू का भी मज़ा लिया जा सकता है.

(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.)

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