लंचब्रेक में जिम, कैसा है ये आइडिया

  • 24 जनवरी 2019
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कसरत हमारी ज़रूरत है, यह हम सबको पता है. हममें से कई लोग कसरत करते भी हैं.

लगभग सभी लोगों को कसरत करने के लिए समय निकालने में मशक्कत करनी पड़ती है. नींद की तरह रोज कसरत करना ज़रूरी नहीं है.

हमें इसके लिए समय निकालना पड़ता है. कई लोग दिन के सबसे महत्वपूर्ण समय में कसरत करने के रास्ते निकाल रहे हैं. वे ऑफिस में काम के बीच में कसरत कर रहे हैं.

साल 2008 में ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने पाया था कि जिन कर्मचारियों की कंपनी जिम तक पहुंच थी और जो उसका इस्तेमाल भी करते थे, उनकी उत्पादकता ज़्यादा थी.

काम के नियमित घंटों के दौरान जिस दिन वे ऑफिस जिम में कसरत करते थे, उस दिन वे ज़्यादा संतुष्ट होकर घर लौटते थे.

2013 में हुए एक शोध से पता चला था कि उम्र चाहे जो भी हो, जो लोग थोड़ी कसरत करते हैं उसका फ़ायदा उनको तुरंत दिखने लगता है.

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सुनहरा मौका

साइकिलिंग मशीन पर 15 मिनट तक तेज़ी से पैडल चलाना भी आपको फिट रख सकता है.

इन नतीजों से यह संकेत मिलता है कि ऑफिस में काम के दौरान कसरत करना सुबह या शाम जिम जाने से भी अच्छा है.

इसके नियमित फ़ायदे तो मिलते ही हैं, जैसे वजन घटना, अच्छी नींद, बेहतर सेक्स, बेहतर मूड और बीमारियां दूर होना.

यूके यूनिवर्सिटी की फिजिकल फिटनेस शाखा यूनिवर्सिटी ऑफ़ बर्मिंघम स्पोर्ट्स में रजिस्टर्ड न्यूट्रिशनिस्ट और फिटनेस इंस्ट्रक्टर पीटर एंटोनियो लंच ब्रेक के दौरान काम करने की जगह कसरत करने को सुनहरा मौका बताते हैं.

इससे न सिर्फ़ फिटनेस हासिल करने में मदद मिलती है, बल्कि दोपहर के वक़्त एक उपलब्धि हासिल करने का सुख भी मिलता है, जो शाम तक बना रहता है.

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तनाव से राहत

एंटोनियो कहते हैं कि उनके जो ग्राहक दिन में कसरत करते हैं, वे ज़्यादा काम करते हैं कम बीमार पड़ते हैं.

इसके अलावा, यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बढ़िया है. यह मीटिंग और ईमेल के तनाव से राहत देता है.

इन्हीं तर्कों के आधार पर कुछ लोग प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूलों में लंच ब्रेक के दौरान बच्चों से कसरत कराने की बात करते हैं.

शोध से पता चलता है कि बार-बार दुहराने वाले टास्क करने और कक्षा की पढ़ाई से ब्रेक लेने से छात्रों को ध्यान लगाने और बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिलती है.

निजी फ़ायदे तो बस शुरुआत है. काम के दौरान कसरत करने से बड़े स्तर पर भी फ़ायदे हैं.

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शारीरिक रूप से निष्क्रिय

स्वास्थ्य संगठनों और कारोबार के महारथियों के बीच इस बात पर चर्चा हुई है कि क्या ऑफिस से शुरू होने वाली गंभीर बीमारियों से लड़ने के लिए कसरत को अनिवार्य कर देना चाहिए.

उदाहरण के लिए, ब्रिटेन में दो करोड़ लोग शारीरिक रूप से निष्क्रिय हैं.

ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन के मुताबिक इससे राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा पर हर साल 120 करोड़ पाउंड (150 करोड़ डॉलर) का बोझ पड़ता है.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म HootSuite के सीईओ रेयान होम्स ने कुछ साल पहले एक लेख लिखा था जो वायरल हो गया था.

इसका शीर्षक था, 'व्हाई इट्स टाइम वी पेड इम्प्लॉइज़ टू एक्सरसाइज़ एट वर्क.' इस लेख में होम्स ने ऑफिस में कसरत करने को ऊपर से लागू करने की बात कही थी.

उनका कहना है कि अगर लोग हृदय रोगों, कैंसर और सांस की बीमारियों से मर रहे हैं तो एक मज़बूत टीम को बनाए रखना मुश्किल है.

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ये कैसे करें

क्रिश्चियन एलेन बोस्टन में रहते हैं. वह एक स्टार्ट-अप चलाते हैं जो कंपनियों को कस्टमर सर्विस टूल्स मुहैया कराती है.

एलेन कहते हैं कि वजन उठाना, योग करना और दिन में थोड़ी दौड़ लगाना उनको अच्छा लगता है.

ऑफिस में फिटनेस ब्रेक को तवज्जो देने वाले साथियों के होने से ऐसा करना आसान हो जाता है.

"मैं बिना किसी झिझक के कह सकता हूं कि 19 साल के डेस्क जॉब में जब मैं नियमित रूप से कसरत करता था तब मैं हमेशा खुश और सेहतमंद रहा."

एलेन पिछले 6 साल से एक मीटअप (Meetup) वेबसाइट के ज़रिए लोगों को जोड़ रहे हैं.

ये सभी लोग दोपहर में ऑफिस से निकलकर फुटबॉल खेलने के लिए इकट्ठा होते हैं.

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लंच के दौरान

एलेन को यह विचार उनकी पिछली नौकरी में एक लंच ब्रेक के दौरान आया था जब उन्होंने दोपहर में फुटबॉल खेलने वाले कुछ लोगों को देखा था.

वो कहते हैं, "उन दिनों मैं सप्ताह के कुछ दिनों में लंच के दौरान अपने कुछ सहकर्मियों के साथ दौड़ा करता था. मुझे उस रूटीन में कुछ अलग करने का विचार अच्छा लगा."

एलेन अकेले नहीं हैं. दफ्तर धीरे-धीरे बदल रहे हैं. लंच ब्रेक के दौरान कसरत करना अब कई लोगों के लिए आसान हो गया है.

कई कंपनियां ऑफिस कैंपस में ही जिम खोल रही हैं. कई जिम खुद को बड़े दफ्तरों के साथ जोड़ रहे हैं.

लग्जरी जिम इक्विनॉक्स ने कर्मचारियों और फ्री-लांसर्स को लुभाने के लिए ट्रेड मिल और क्रॉस ट्रेनर के पास बड़े-बड़े टेबल और जूस बार लगा दिए हैं.

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फिटनेस सेंटर

वहां इन मशीनों पर कसरत करते हुए भी लैपटॉप पर नज़र रखी जा सकती है. कुछ स्टार्ट-अप कंपनियां अपने मुख्य ऑफिस की तरह इन जगहों पर दुकानें लगा रही हैं.

क्या होगा अगर आप कसरत के लिए पूरे एक घंटे या ज़्यादा वक़्त नहीं निकाल पाते हैं? विशेषज्ञों का कहना है कि इससे बहुत ज़्यादा फर्क नहीं पड़ता.

आप छोटे-छोटे टुकड़ों में भी कसरत कर सकते हैं. इसके लिए ऑफिस में फैंसी फिटनेस सेंटर की भी जरूरत नहीं है.

सैन डियागो के आइडिया हेल्थ एंड फिटनेस एसोसिएशन की एडिटर-इन-चीफ़ सैंडी टॉड वेबस्टर कहती हैं, "पांच मिनट की कसरत हो या एक घंटे की, दिन में किसी भी तरह की शारीरिक गतिविधियों से फ़ायदा होता है."

इस संगठन ने दुनिया भर के 14 हजार से ज़्यादा पर्सनल ट्रेनर और फिटनेस पेशेवरों को जोड़ा है.

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कसरत की अहमियत

सैंडी कहती हैं, "अगर आप चलने या किसी भी तरह खुद को आगे लाने में सक्षम हैं तो ऐसा जरूर करें. आपको जिम की जरूरत नहीं है. चलने-फिरने के मौके तो सब जगह होते हैं."

"अपने साथ एक जोड़ी एथलेटिक जूते और मोजे रखें और 5, 10 या 20 मिनट के लिए जब भी मौका मिले थोड़ा टहल लें."

"यदि आपके ऑफिस की बिल्डिंग में सीढ़ियां हैं तो उनका इस्तेमाल करें. ऑफिस जाने के लंबे रास्तों पर चलें. इन सबका भी फ़ायदा होता है."

आपके व्यक्तिगत लक्ष्य चाहे जो भी हों, ऑफिस का माहौल चाहे जैसा भी हो, विशेषज्ञ कहते हैं कि दिन में एक घंटे की कसरत को उतनी ही अहमियत मिलनी चाहिए जितना कि किसी मीटिंग को.

सैंडी कहती हैं, "कामयाबी समय का शेड्यूल बनाने में है. अपने वर्कआउट को कैलेंडर पर लिखकर रखें और उसका पालन करें."

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सहकर्मियों से बात करें

ये सब कहना आसान है करना मुश्किल. इसमें बॉस का अड़ंगा हो सकता है. जिम के बाद शॉवर लेने की सुविधा न होने का बहाना भी हो सकता है.

कुछ नौकरियों में डेस्क से दूर नहीं रहा जा सकता.

एलेन कहते हैं कि वह खुशकिस्मत हैं कि उन्होंने ऐसी जगहों पर काम किया जहां काम और जीवन में संतुलन को तवज्जो दी जाती है. लेकिन यह हमेशा आसान नहीं होता.

काम का अनियमित शेड्यूल आपकी योजनाओं को मटियामेट कर सकता है. सहकर्मियों पर भी इसका असर पड़ता है.

शारीरिक गतिविधियां

एलेन का कहना है कि उन्होंने हमेशा टीम के हिस्से के रूप में काम किया है इसलिए उन्हें यह देखना पड़ता है कि कसरत के लिए ब्रेक लेने से उनके सहकर्मियों पर काम का बोझ न बढ़ जाए.

"मेरे लिए यह देखना जरूरी है कि मेरे सहयोगी मुझसे ईर्ष्या न रखें या मुझसे ख़फ़ा न हों."

लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि शारीरिक गतिविधियों को प्राथमिकता देने में कोई डर होना चाहिए.

एलेन कहते हैं, "आप क्या कर रहे हैं और यह आपके लिए क्यों महत्वपूर्ण है, इस बारे में आप लोगों को बता सकते हैं."

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