स्वीडन, जहाँ स्टार्टअप के लिए मिलती है छुट्टी

  • 11 फरवरी 2019
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जना केगिन को अपनी कंपनी खोलने का कभी ख़याल भी नहीं आया था.

स्टॉकहोम के उपनगर इकिया में अपने मंगेतर के साथ सोफा ख़रीदते समय उनको इसका विचार आया.

उनको पसंद का सोफा नहीं मिल रहा था. सोफे की ऊंचाई के विकल्प बहुत सीमित थे. उन्होंने इंटरनेट पर भी तलाशा लेकिन निराशा हाथ लगी.

तब उन्होंने फ़र्नीचर पार्ट्स बनाने की अपनी कंपनी खोलने का निश्चय किया. केगिन कहती हैं, "हमें इसका ख्याल आया और हम इसमें लग गए."

केगिन ने अपनी नौकरी से लंबी छुट्टी ली और अपनी कंपनी को जमाने में लग गईं. स्वीडन में उनके पास "लीव ऑफ़ एवसेंस" लेने का अधिकार था जिससे उनको मदद मिली.

जना जिस कंपनी में नौकरी करती थीं वह स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देने के लिए एक प्रोग्राम चलाती थी.

इसमें कर्मचारियों को कोचिंग दी जाती थी, वर्कशॉप में भेजा जाता था और नये काम में सहारा दिया जाता था.

जना कहती हैं, "उन दिनों अगर मुझे नौकरी भी करनी पड़ती तो मैं यह सब शुरू नहीं कर पाती."

उनको मालूम था कि अगर बिजनेस नहीं चला तो वह अपनी पुरानी नौकरी में वापस जा सकती थीं. इससे आर्थिक जोखिम उठाने का हौसला मिला.

जना के पार्टनर क्रिएटिव एंडस्ट्री में फ्रीलांसर थे और आमदनी की गारंटी नहीं थी.

"उद्यमी बनने के बारे में मैंने कभी नहीं सोचा था, इसलिए इस तरह की सुरक्षा और भरोसे का होना बहुत बड़ी बात थी. मुझे लगता है कि इसकी बड़ी भूमिका रही."

जना को पुरानी नौकरी में वापस जाने की ज़रूरत नहीं पड़ी. आज उनकी ई-कॉमर्स कंपनी 30 देशों में कारोबार करती है और उसके 6 फुल-टाइम कर्मचारी हैं.

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क़ानूनी अधिकार

सभी नई कंपनियां इतनी सफल नहीं हो पातीं, लेकिन जना केगिन को उनकी नौकरी से लंबी छुट्टी मिलना स्वीडन में अनोखी बात नहीं है.

स्वीडन में पिछले दो दशकों से स्थायी नौकरी वाले कर्मचारियों को अपनी नई कंपनी खोलने के लिए छह महीने की छुट्टी लेने का अधिकार है. पढ़ाई के लिए या किसी रिश्तेदार की देखरेख के लिए भी यह छुट्टी ली जा सकती है.

छुट्टी देने से बॉस केवल तभी मना कर सकते हैं जब उस कर्मचारी के बिना काम चलाना मुश्किल हो या नई कंपनी से सीधे प्रतियोगिता का ख़तरा हो.

छुट्टी ख़त्म होने के बाद कर्मचारी को पुराने पद पर ही लौटना होता है.

स्टॉकहोम स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स की पोस्ट-डॉक्टोरल रिसर्चर क्लेयर इनग्राम बोगज़ कहती हैं, "मेरी जानकारी में यह अकेला देश है जहां उद्यमी बनने के लिए लंबी छुट्टी लेने का क़ानूनी अधिकार है."

बहुत से लोग अपने बॉस की इजाज़त लेकर कुछ नया काम शुरू करते हैं. वे अपने काम को ऐसे मैनेज करते हैं कि उनकी नौकरी पर असर न पड़े.

जब उनका बिजनेस खड़ा हो जाता है तब वे लंबी छुट्टी लेते हैं और देखते हैं कि क्या वे वास्तव में इसे चला सकते हैं."

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Image caption मैक्स फ्रीबर्ग

पसंद का काम

यह बहुत सामान्य है, खासकर उच्च कौशल वाले उद्यमियों में. 31 साल के मैक्स फ्रीबर्ग ऐसे ही एक उद्यमी हैं. वह एक सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म चलाते हैं.

फ्रीबर्ग ने ग्लोबल कंसल्टिंग फर्म की अपनी नौकरी छोड़ने की जगह वहां से छुट्टी ली.

वह पिछले एक साल से अपने खाली समय में अपने प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे और उनको भरोसा था कि उनका आइडिया चल निकलेगा.

उनको वित्तीय असुरक्षा के साथ-साथ सामाजिक रुतबे की भी चिंता थी, जिसके लिए उन्होंने वर्षों मेहनत की थी. अवैतनिक छुट्टी की संभावना ने उनकी चिंताओं को बहुत हद तक दूर कर दिया.

वह कहते हैं, "मैं खुद से पूछता था कि क्या मैं पागलपन करने जा रहा हूं? लेकिन मैं वापस अपनी जगह लौट सकता हूं, यह जानकर मेरा डर निकल गया."

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नई सोच

करीब एक करोड़ की आबादी वाला स्वीडन नये विचारों को तरजीह देने वाला देश है.

यहां स्टार्ट-अप विकसित होने के कई कारण हैं, जैसे- डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, सहयोग की संस्कृति और सस्ती निजी बेरोज़गारी बीमा. यह दूसरे देशों के मुक़ाबले ज़्यादा सामाजिक सुरक्षा देता है.

लंबी अवैतनिक छुट्टियों के अधिकार ने इसमें कितना योगदान दिया है, इसके आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं. फिर भी शिक्षाविदों, श्रम संगठनों और नियोक्ताओं ने इसका योगदान माना है.

आंकड़े यह ज़रूर दिखाते हैं कि लीव ऑफ़ एवसेंस बढ़ने के साथ-साथ स्वीडन में अपनी कंपनी खड़ी करने वाले कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ रही है.

2017 में 25 से 54 साल के 1,75,000 लोगों ने ऐसी छुट्टियां ली थीं. 2007 में यह संख्या 1,63,000 थी.

2007 में 27,994 कंपनियां रजिस्टर्ड हुई थीं. जो 2017 में बढ़कर 48,542 हो गई.

सवाल है कि दुनिया स्वीडन के इस सिस्टम से क्या सीख सकती है?

बोगज़ के मुताबिक छुट्टी लेकर अपना बिजनेस शुरू करने की प्रवृत्ति के पीछे नॉर्डिक देशों के कड़े रोज़गार क़ानून हैं.

इन देशों में किसी कर्मचारी को नौकरी से निकाल देना दूसरे देशों जितना आसान नहीं है.

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आर्थिक सुरक्षा

बोगज़ को लगता है कि इससे कर्मचारियों को छुट्टी लेकर अपना बिजनेस शुरू करने की प्रेरणा मिलती है, क्योंकि उनकी नौकरी पर ख़तरा नहीं होता.

"एक बार मिल जाने पर लोग आसानी से अपनी नौकरी नहीं छोड़ते, जैसे घर या फ्लैट मिल जाने पर आप उसे आसानी से नहीं छोड़ते."

स्वीडन में पेशेवर कर्मचारियों के कंफेडरेशन के प्रमुख सैमुअल इंगब्लॉम का कहना है कि सरकार, श्रम संगठन और नियोक्ता, सभी श्रम बाज़ार में गतिशीलता बढ़ाने के लिए छुट्टी लेने के इस अधिकार का समर्थन करते हैं.

ज़्यादातर कर्मचारी असुरक्षित बिजनेस के लिए सुरक्षित समझी जाने वाली नौकरी को छोड़ने में संकोच करते हैं.

"उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए आप इसके मुनाफ़े को बढ़ा सकते हैं. इसके साथ ही आप इसे कम असुरक्षित बनाकर भी बढ़ावा दे सकते हैं."

वर्जीनिया यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर टिंग शू भी मानते हैं कि अवैतनिक छुट्टियों के अधिकार को बढ़ाना उद्यमिता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है.

ऐसा उन देशों में भी हो सकता है जहां ज़्यादा लचीले श्रम बाज़ार हैं.

2016 के एक अध्ययन से पता चला था कि नाकामी के डर से पीछे हट जाने वाले संभावित टेक उद्यमियों को सबसे बड़ी चिंता वित्तीय जोखिम की थी, मगर करियर का जोखिम भी उतना ही अहम था.

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नाकामी का डर

शू कहते हैं, "स्टार्ट-अप फेल हो जाने पर स्थायी करियर को खो देने का डर बहुत से लोगों को पीछे खींच लेता है."

"बहुत से देश उद्यमियों को वित्तीय सब्सिडी देते हैं. लेकिन करियर के जोखिम को कम करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. नीतियां बनाने वाले अक्सर इसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं."

शू 2001 में कनाडा में पैरेंटल लीव में नौकरी की सुरक्षा देने वाले सुधार लागू कराने वाली टीम में थे.

उन्होंने पाया कि जिन महिलाओं को ज़्यादा छुट्टियां लेने के मौके मिले, पांच साल बाद उनके उद्यमी बनने की संभावना बढ़ गई.

वह कहते हैं, "ये नतीजे इस बात के पक्के सबूत हैं कि यदि हम करियर के जोखिम को खत्म करते हैं तो उद्यमिता बढ़ती है."

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ख़तरे भी हैं

कुछ पर्यवेक्षकों की राय है कि बिजनेस चलाने के लिए लंबी छुट्टी लेने वाले कर्मचारियों को फिर से पुरानी नौकरियों पर रखना स्वीडन से बाहर के नियोक्ताओं के लिए ज़्यादा मुश्किल हो सकता है.

तरक्की देने में और सैलरी बढ़ाते समय इनके साथ भेदभाव हो सकता है. स्वीडन में इस तरह के दुराग्रह कानून के ख़िलाफ़ हैं.

बोगज़ कहती हैं, "कुछ नया करने की कोशिश करने वालों को वापस आने का मौका देना नकारात्मक नहीं है."

"यह तटस्थ है और शायद सकारात्मक भी, क्योंकि व्यक्ति को लगता है कि यह काम असल में मेरे लिए ही है."

स्वीडन ने काम और ज़िंदगी में जो संतुलन बनाया है उसका बड़ा योगदान है, लेकिन अन्य जगहों पर यह बहुत प्रासंगिक नहीं भी हो सकता है.

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संतुलन ज़रूरी है

"स्वीडन में लोगों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने रोज़गार में एक संतुलन बनाएं- सिर्फ़ निजी जीवन में ही नहीं, बल्कि उनके व्यक्तिगत विकास के लिए मायने रखने वाले दूसरे पहलुओं में भी संतुलन जरूरी है. नया बिजनेस शुरू करना इसका हिस्सा हो सकता है."

जेसिका पैटर्सन उन लोगों में शामिल हैं जिनको इस रुख से फ़ायदा हो रहा है.

30 साल की पैटर्सन ने चैरिटी के लिए वर्चुअल असिस्टेंट प्रोडक्ट लॉन्च करने के लिए छुट्टी ली थी जो अब ख़त्म होने वाली है.

उन्होंने पुरानी नौकरी में वापस लौटने का फ़ैसला किया है.

"मैं अपनी कंपनी से इतना नहीं कमाती कि मेरा काम चल जाए. मैं जल्द ही एक अपार्टमेंट ख़रीदना चाहती हूं. इसलिए मैं अपनी पुरानी नौकरी में वापस जा रही हूं जिससे कि मुझे एक निश्चित सैलरी मिलती रहे."

पैटर्सन के मैनेजर उसके वापस आने से खुश हैं और उन्होंने उनको कुछ अन्य प्रोजेक्ट भी दिए हैं.

पेशेवर कर्मचारियों के कंफेडरेशन के सैमुअल इंगब्लॉम का कहना है कि कुछ नियोक्ता अवैतनिक छुट्टियों के प्रति सकारात्मक रुख दिखाते हैं, लेकिन दूसरों को इसमें मुश्किल भी होती है.

"उनके पास से ऐसा आदमी चला जाता है जिसे काम आता है. कुशल कर्मचारियों की कमी हो तो इससे समस्या खड़ी हो सकती है."

जिन देशों की अर्थव्यवस्था स्वीडन जितनी सुदृढ़ न हो, वहां समस्याएं ज़्यादा विकराल रूप ले सकती हैं.

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Image caption क्लेयर इनग्राम बोगज़

नया भविष्य?

अवैतनिक छुट्टियों के फ़ायदे और इसकी चुनौतियों की प्रासंगिकता तभी है जब कर्मचारी स्थायी हों.

स्वीडन में बहुतायत में लोगों के पास स्थायी नौकरियां हैं, लेकिन हाल के वर्षों में अस्थायी नौकरियों और गिग इकोनॉमी (अल्पकालीन कांट्रैक्ट और फ्रीलांस वाली अर्थव्यवस्था) का विस्तार हुआ है. इससे युवा श्रमिकों पर बहुत प्रभाव पड़ा है.

2017 में 16 से 24 साल के युवाओं में से लगभग 50 फ़ीसदी और 25 से 34 साल के लोगों में से करीब 18 फ़ीसदी लोग अस्थायी काम कर रहे थे.

2009 के मुक़ाबले इसमें क्रमशः 44 फ़ीसदी और 14 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई.

यह समस्या अकेले स्वीडन की नहीं है. दुनिया के दूसरे देशों में भी स्थायी नौकरियों वाले और अस्थायी काम करने वाले लोगों का ध्रुवीकरण हो रहा है.

बोगज़ कहती हैं, "गिग इकोनॉमी के श्रमिकों और फ्रीलांसर्स के लिए लीव ऑफ़ एवसेंस नहीं होना इस खाई को चौड़ी कर रहा है."

स्वीडन के क़ानून निर्माता इस पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं. एक सरकारी कमेटी को यह पता करने का जिम्मा सौंपा गया है कि ऐसे श्रमिकों को और कितनी सुरक्षा की ज़रूरत है.

इस बीच स्थायी कर्मचारियों के लंबी छुट्टी लेने का अधिकार पर कोई ख़तरा नहीं दिख रहा.

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कई श्रम संगठनों ने नियोक्ताओं के साथ करार किए हैं जिसमें 6 महीने की जगह 12 महीने की छुट्टी देने का प्रावधान किया गया है.

इनग्राम बोगज़ के मुताबिक स्वीडन के सभी उद्यमियों को याद रखना चाहिए कि उनके पास छुट्टी लेने का अधिकार हो या न हो, नया बिजनेस शुरू करना जोखिम भरा है.

वह कहती हैं, "स्थायी नौकरियां छोड़कर उद्यम की ओर जाना दुनिया भर में कम हो रहा है. आप अच्छी सैलरी वाली नौकरी छोड़कर कम आमदनी वाले अस्थायी काम की ओर जाते हैं."

"लीव ऑफ़ एवसेंस होने का मतलब है कि आपके पास दोनों तरफ के मौके हैः नौकरी बचे रहने की सुरक्षा है और अपनी पसंद का काम करने के लिए आपके पास छुट्टी है."

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