सिर्फ़ 4 घंटे में तैयार हो जाते हैं ये छोटे घर

  • 13 फरवरी 2019
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फ़िलीपींस एशिया के उन देशों में से एक है जहां की आबादी सबसे तेज़ रफ़्तार से बढ़ रही है. बढ़ती आबादी के लिए घर की ज़रूरत है और फ़िलहाल वहां 50 लाख घरों की कमी है.

एक अनुमान के मुताबिक़ फ़िलीपींस को साल 2030 तक एक करोड़ 20 लाख नये घरों की ज़रूरत होगी.

इसका मतलब यह हुआ कि अगर फ़िलीपींस सबके लिए घर का सपना सच करना चाहता है तो उसे हर साल 10 लाख नये घर बनाने होंगे. ये काम 2019 से ही शुरू कर देना होगा.

फ़िलीपींस के लिए इतने घर बनाना बड़ी चुनौती है. इसके लिए भारी मात्रा में संसाधनों की ज़रूरत होगी, जिसे जुटाना आसान नहीं है.

इस तरह हल होगी समस्या

फ़िलीपींस की इस बड़ी समस्या को बांस के पेड़ सुलझा सकते हैं. इस देश की जलवायु में बांस तेज़ी से उगते और बढ़ते हैं. इनसे टिकाऊ बिल्डिंग मैटेरियल तैयार किया जा सकता है.

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अर्ल फ़ोर्लेल्स फ़िलीपींस की क्वेज़ॉन सिटी में रहने वाले युवा इंजीनियर और उद्यमी हैं. वह कहते हैं, "आवास की कमी तेज़ी से बढ़ती हुई समस्या है और इसके तुरंत समाधान की ज़रूरत है."

फोर्लेल्स ने फ़िलीपींस के पारंपरिक बांस के घरों (बहाय कूबो) को अपग्रेड करने की योजना बनाई है.

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वह कहते हैं, "बांस का इस्तेमाल कई तरह से किया जा सकता है. अगर आप इसे सही से प्रोसेस करें तो इसकी उम्र 50 साल तक हो सकती है."

फ़िलीपींस में बांस केवल 3 साल में तैयार हो जाते हैं. वह कहते हैं, "हमारे लिए अच्छी बात यह है कि यहां बांस की सप्लाई की कोई कमी नहीं है."

फ़ोर्लेल्स 'क्यूबो मॉड्यूलर' नाम की कंपनी के सीईओ हैं. उनकी कंपनी बांस से कॉम्पैक्ट घर बनाने के आइडिया पर काम कर रही है.

ये कंपनी बांस को प्रोसेस करती है. बांस को चौड़े प्लाइवुड की शक्ल दी जाती है. बांस की परतों को जोड़कर चौखट और खंभे भी बनाए जाते हैं.

बांस से तैयार इन बिल्डिंग मैटेरियल से प्री-फ़ैब्रिकेटेड घर बनाए जाते हैं.

Image caption इन घरों का बनाने वाले हैं अर्ल फ़ोर्लेल्स

घर के तमाम हिस्सों को बिल्डिंग साइट से दूर फ़ैक्ट्री में तैयार किया जाता है, जिसमें हफ़्ते भर से भी कम समय लगता है.

फोर्लेल्स की कंपनी घर के उन हिस्सों को साइट पर ले जाकर सिर्फ़ 4 घंटे में जोड़ देती है. इस तरह बिना लंबा इंतज़ार किए और बिना ज़्यादा ख़र्च के एक घर तैयार हो जाता है.

छोटे और आरामदायक घर

फोर्लेल्स कहते हैं, "यह हमारे पारंपरिक बहाय कूबो (बांस के घर) की तरह ही हैं."

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कूबो का कॉन्सेप्ट बहुत कॉम्पैक्ट होता है, लेकिन इसमें ज़रूरत की वे सभी चीज़ें होती हैं जिनको फ़िलीपींस के लोग अपने घरों में रखते हैं.

फोर्लेल्स के बनाए छोटे घरों में भी सोफ़ा, सेंट्रल टेबल, बेड, टीवी, फ़्रिज जैसा ज़रूरत की तमाम चीज़ें होती हैं. यहां तक कि छत पर जाने की सीढ़ी भी बनाई जाती है.

फोर्लेल्स बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही बांस की चीज़ों को ठोकने-पीटने, उनकी मरम्मत करने में मज़ा आता था.

वह अपनी मां से खिलौने ख़रीदने की ज़िद करते थे. खिलौने मिल जाने पर वह उनको खोलकर देखते थे कि यह काम कैसे करता है या इन्हें जोड़ कर बनाया कैसे जा सकता है.

कुछ नया करने की चाहत

वक़्त और उम्र के साथ भी फोर्लेल्स की आदत नहीं बदली.

वह बताते हैं, "कॉलेज में मैंने मैटेरियल साइंस और इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी. मैं जानना चाहता था कि चीज़ें आख़िर काम कैसे करती हैं और कैसे हम उनमें थोड़ा बदलाव लाकर उनको और अपनी ज़िंदगी को बेहतर बना सकते हैं."

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धंधा पानी

सवाल है कि क्या उनके पास फ़िलीपींस की आवास समस्या का समाधान है? और क्या इस आइडिया को दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी आज़माया जा सकता है?

फोर्लेल्स एशिया में ही नहीं, बल्कि लैटिन अमरीका और अफ़्रीकी देशों में भी बांस के घर बनाना चाहते हैं.

वह कहते हैं, "हम मानते हैं कि यह उपाय वहां भी आज़माया जा सकता है और लाखों लोगों की घर की ज़रूरत पूरी हो सकती है."

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युवा जोश

फ़ोर्लेल्स की कंपनी 'क्यूबो मॉड्यूलर' में काम करने वाले सभी लोग 20 से 30 साल के बीच के नौजवान हैं.

वह कहते हैं, "हममें अनुभव की जो कमी है उसे हम ऊर्जा और जुनून से पूरा कर लेते हैं."

फ़ोर्लेल्स कहते हैं कि आज यदि उन्हें अपने 16 साल की उम्र में वापस जाकर ख़ुद को कोई सलाह देनी हो तो वह यही सलाह देना चाहेंगे कि कोशिश करने में कभी घबराना नहीं चाहिए, ख़ास कर तब जबकि आपका लक्ष्य लोगों की मदद करना हो.

वो कहते हैं, "आप असर छोड़ने में कामयाब होंगे. आप उस मुक़ाम के रास्ते पर होंगे जिसे आप पाना चाहते हैं."

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