दुनिया के सबसे महंगे शहर किसके लिए महंगे?

  • 28 मार्च 2019
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2019 मार्च महीने के मध्य में द इकोनॉमिस्ट इंटेलीजेंस यूनिट (EIU) ने दुनिया के सबसे महंगे शहरों की अपनी छमाही सूची छापी.

पिछले साल जून में कंसल्टेंसी फर्म मर्सर ने इसी तरह की सूची प्रकाशित की थी.

उसी साल दूसरी कंसल्टेंसी फर्म ईसीए इंटरनेशनल ने अपनी सूची छापी थी. कई और कंपनियां पूरे साल इसी तरह के काम करती रहती हैं.

इससे पहले कि आप "सबसे महंगे शहर" शीर्षक देखकर उसमें अपने शहर का नाम ढूंढ़ना शुरू कर दें, कुछ चीजें जान लेनी जरूरी हैं.

पहली बात यह कि ऐसी सूचियां किनके लिए बनाई जाती हैं, इन सूचियों को बनाने के मानदंड क्या हैं और जीवन-यापन का ख़र्च कैसे निर्धारित किया जाता है.

एक के बाद दूसरी सूची

ये सूचियां स्थानीय निवासियों के लिए नहीं बनाई जातीं. ये सूचियां उन बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए बनाई जाती हैं, जो विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने की सोच रही हैं.

महंगे शहरों की रैंकिंग देखकर यह पता लगाया जाता है कि विदेशी श्रमिकों को कितना वेतन दिया जाना चाहिए.

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मिसाल के लिए, यदि आप नौकरी देने वाले मैनेजर हैं और आपको एक विश्लेषक को कुआलालंपुर भेजना है तो आपके लिए यह जानना जरूरी है कि वहां रहने का ख़र्च कितना है.

कुआलालंपुर में रहने का ख़र्च जानकर ही आप उचित भुगतान कर सकते हैं. पहले से तैयार सूची की मदद लेना अपना शोध करने से ज़्यादा आसान है.

इन सूचियों का इस्तेमाल करने वाली अधिकांश कंपनियां अत्यधिक कुशल पेशेवरों या मैनेजरों को नियुक्त करती हैं जो औसत स्थानीय तनख़्वाह से ज़्यादा कमाते हैं.

यह महत्वपूर्ण कारक इन सूचियों को बनाने में अहम भूमिका निभाता है और इसी से यह तय होता है कि किन शहरों को रैंकिंग में ऊपर जगह मिलती है.

हर सूची के मानदंड में कुछ अंतर हो सकता है, लेकिन इन सूचियों को बनाने में कुछ व्यापक समानताएं हैं.

शोधकर्ता सैकड़ों शहरों में विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं की कीमत का पता लगाते हैं.

महंगा या सस्ता

इसमें किराने का सामान, बाल कटाई, सिनेमा टिकट, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक सामान और फर्नीचर की कीमत शामिल हो सकती है.

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कुछ कंपनियां किराये और कार रखने का ख़र्च भी जोड़ती हैं. इसी वजह से सिंगापुर सिटी ऐसी सूचियों में अक्सर दिखती है, क्योंकि वहां कार रखना बहुत महंगा पड़ता है.

अन्य कारकों, जैसे मुद्रा विनिमय दर और टैक्स की दर, की भी सूची बनाने में अहम भूमिका हो सकती है.

विभिन्न शहरों में वस्तुओं और सेवाओं की दरों की तुलना करने के लिए एक मानक का उपयोग किया जाता है.

मिसाल के लिए, EIU सभी मुद्राओं को अमरीकी डॉलर में बदलकर न्यूयॉर्क सिटी की दर से उनकी तुलना करता है.

किसी शहर में वस्तु और सेवाएं कितनी महंगी या सस्ती हैं, उससे सूची में उनकी जगह निर्धारित होती है.

EIU के प्रमुख अर्थशास्त्री रॉबर्ट वुड कहते हैं, "यह उन विदेशी कंपनियों के लिए एक औजार की तरह है, जो विभिन्न शहरों में प्रवासी कर्मचारी नियुक्त करते हैं."

"यह औजार उनको प्रवासी कर्मचारियों की तनख़्वाह निर्धारित करने में मदद देता है."

दूसरे शब्दों में, वे दुनिया के सबसे महंगे शहर हैं, लेकिन लोगों के एक विशिष्ट समूह के लिए ही.

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सूची सबके लिए नहीं

वैश्विक कंपनियों और उनके विदेशी श्रमिकों के लिए ये सूची बहुत उपयोगी हैं.

इससे प्रवासी कर्मचारियों को अंदाज़ा लगता है कि नये देश में अपनी जीवन-शैली और ख़र्च करने की आदत को बनाए रखने के लिए वे कितना ख़र्च करेंगे और कंपनियों को कितना भुगतान करना चाहिए.

मर्सर के सलाहकार विंस कॉर्डोवा कहते हैं, "वास्तव में पूरी आबादी से इसका वास्ता नहीं है. यह अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों और पेशेवरों के एक वर्ग के लिए है."

"जरूरी नहीं ये पेशेवर स्थानीय लोगों की तरह ही खरीदारी करें और उनके लिए वही कीमत हो. वे खरीदारी करने वहां जाएंगे जहां आम तौर पर प्रवासी पेशेवर जाते हैं."

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कॉर्डोवा का कहना है कि विभिन्न सूचियों में दर्ज कीमतें एक निश्चित गुणवत्ता के कुछ उत्पादों पर आधारित होती हैं जिनको किसी अन्य बाज़ार और अन्य देश के कुछ निश्चित लोगों के लिए बनाया जाता है.

यह उन प्रवासी पेशेवरों के लिए है जो दूसरे देश में भी अपनी जीवन-शैली और ख़र्च करने की आदत में बदलाव नहीं करते.

आप क्या कर सकते हैं?

तो अगर आप प्रवासी पेशेवर या एक्ज़ीक्यूटिव सैलरी पर नहीं हैं तो आप यह कैसे निर्धारित कर सकते हैं कि कोई शहर आपके लिए कितना महंगा होगा?

दुर्भाग्य से, शीर्ष की 10 रैंकिंग्स यहां लागू नहीं होती. आपको ख़ुद अपना होमवर्क करना होगा और ख़ुद से पूछना होगा कि आप वहां क्यों रहना चाहते हैं.

वहां आपकी क्या करने की योजना है? आप कैसी जीवनशैली जीना चाहते हैं? क्या आप अकेले रहेंगे, परिवार और बच्चे के साथ रहेंगे या दोस्तों के साथ रहेंगे?

ये सारे कारक तय करेंगे कि कोई शहर आपके लिए कितना महंगा होगा.

न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर लॉरेंस व्हाइट कहते हैं, "इसका कोई आसान जवाब नहीं है. आपको वास्तव में अपना रिसर्च ख़ुद करना है."

"मैं उस शहर में कहां रहना चाहता हूं. सार्वजनिक परिवहन के करीब रहना कितना महत्वपूर्ण है. क्या कोई बिक्री कर भी लगता है? क्या बिक्री कर सभी चीजों पर लगता है? क्या भोजन पर भी टैक्स है या वे टैक्स से मुक्त हैं? क्या कपड़ों पर टैक्स लगता है?"

इस शोध में अपने तरीकों का इस्तेमाल करें जो आप पर लागू होता है, न कि विशिष्ट लोगों के एक समूह पर.

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EIU के वुड कहते हैं, "देखिए कि आपके अपने देश में अपनी मुद्रा में क्या हो रहा है. क्या कुछ चीजों की कीमतें दूसरी चीजों से ज़्यादा तेज़ी से बढ़ रही हैं और उनसे उपभोक्ता आदतें कैसे बदलती हैं?"

वुड परिवहन ख़र्च और किराने के सामान जैसी चीजों की ओर संकेत करते हैं और अपने ही देश के दूसरे शहरों से इनकी तुलना करने को कहते हैं.

सच तो यह है कि अगर आप किसी शहर, किसी भी बड़े शहर, में रहना चाहते हैं तो इसके लिए भुगतान करने को तैयार रहें, भले ही आप प्रवासी पेशेवर हों या न हों.

शहरों में जो भी सुविधाएं और संपर्क आपको मिलते हैं वह आपके भुगतान पर निर्भर करते हैं, भले ही वह शहर सूची में ऊपर हो या नीचे.

(यह लेख बीबीसी कैपिटल की कहानी का अक्षरश: अनुवाद नहीं है. मूल लेख आप यहांपढ़ सकते हैं. बीबीसी कैपिटल के दूसरे लेख आप यहां पढ़ सकते हैं.)

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