दुनिया की सबसे कठिन चुनौती का सामना

  • 12 अप्रैल 2019
युवा पीढ़ी के सामने चुनौती

हाल के हफ़्तों में हमने दुनिया भर के 30 साल से कम उम्र के उद्यमियों और अन्वेषकों से आपका परिचय कराया है.

हमने उनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों- ख़ुद से जुड़ने वाले स्पेस आर्किटेक्चर और बीमारियों का पता लगाने वाली मशीनी मेधा से लेकर वायरल यूट्यूब क्लासरूम और जैतून के बीजों से तैयार होने वाले प्लास्टिक के पीछे की कहानी आपको बताई.

हमने ब्राजील के वर्षावन के अंदर जाकर देखा कि कैसे वे ख़ूबसूरत धरती को बचाने की कोशिश कर रहे हैं.

एवलांच से बचाव की तकनीक देखने के लिए हम फ़्रांस में आल्प्स की चोटियों पर गए.

मनीला में कुछ ही घंटों में तैयार होने वाले किफायती घरों को भी हमने देखा. अदीस अबाबा के टेक हब जाकर हमने देखा कि अगली पीढ़ी कैसे कोड बनाना सीख रही है.

वे नये क्षितिज की ओर कदम बढ़ाने के लिए अपने विचारों को मांज रहे हैं, इसलिए हम उनके सफ़र से आपको रूबरू करा रहे हैं.

हमने सभी अन्वेषकों से पूछा कि वे पीछे मुड़कर क़ामयाबी के अपने सफ़र को देखें और उससे मिली सीख का सार बताएं.

हम अपने विशेषज्ञों द्वारा चुनी गई थीम पर भी लौटे जिनको देखना सबसे महत्वपूर्ण है.

बी डाउनटाउन की 25 वर्षीय लेग-कैथरीन बॉनर कहती हैं, "वह जो कुछ भी है उसे ढूंढ़िए जो आपको लक्ष्य की ओर ले जाता है."

वहीं बायोलिव के 25 साल के अहमत पतह आयस कहते हैं, "हमारी परियोजना सिर्फ़ हमारे लिए नहीं, पूरी मानवता और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण है."

एमआईटी मीडिया लैब स्पेस एक्सप्लोरेशन इनिशिएटिव की 26 वर्षीय एरियल इकब्ला कहते हैं, "मैं चाहता हूं कि लोग उसी तरह आसमान में देख सकें जैसे वे अपोलो युग में देखते थे और मुझे विश्वास है कि अपने इसी जीवन में वे ऐसा कर सकेंगे."

हमारे विशेषज्ञों के लिए प्राथमिकता के दो मुद्दे थे- ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण.

वायुमंलीय रसायनशास्त्री गुस वेल्डर्स ओज़ोन परत पर गैसों के प्रभाव का अध्ययन करते हैं.

उनका कहना है कि जलवायु पर चल रही बहस उपयोगी है, लेकिन अभी तक हमें इसके नतीजों का अनुभव नहीं हुआ है.

"सही दिशा में तत्काल बड़े कदम उठाने की ज़रूरत है, लेकिन लगता है कि उस तरफ किसी का ध्यान नहीं है. हमें शुरुआत करनी है, कल की बजाय आज से ही."

ग्लोबल वार्मिंग का समाधान ढूंढ़ रहे संगठन ड्राडाउन के वाइस-प्रेसिडेंट चैड फ्रिशमैन का कहना है कि आगे बढ़ने का मतलब हमेशा नई चमकदार तकनीक में निवेश करना नहीं होता.

हमेशा नई तकनीक पर ध्यान देने से मौजूदा परंपराओं को सुधारने और उन्हें बेहतर और सस्ता बनाने की संभावना की अनदेखी होती है.

मिसाल के लिए, सौर ऊर्जा के पैनल को हमेशा धरती से ऊपर उठाकर रखने की जरूरत नहीं होती.

"हमें पैनलों को अधिक टिकाऊ, लचीला, सस्ता और कहीं भी लगा देने देने लायक बनाने के बारे में सोचना चाहिए."

23 वर्षीय अर्ल फ़ोर्लेल्स कहते हैं, "हमारे पास अनुभव को जो कमी है, उसकी भरपाई हम ऊर्जा और जुनून से करते हैं."

24 साल के अहमद अल गैंडोर कहते हैं, "मैं एक जुनूनी पाठक हूं जिसे पढ़ना और ज्ञान फैलाना पसंद है. इसलिए मैंने वो काम किए जिनसे मुझे खुशी मिलती है."

27 वर्षीय रेनर मल्लोल कहती हैं, "तकनीक और कृत्रिम मेधा हमारे अच्छे के लिए यहां है. ये हमारी मदद करने वाले हैं."

उभरती हुई रोजगार अर्थव्यवस्था में भविष्य के दफ़्तर और कर्मचारी कैसे होंगे?

डिजाइन सॉफ्टवेयर कंपनी इनविजनएप्प के सीईओ क्लार्क वालबर्ग कहते हैं, "टेक कल्चर के रूप में हम खुले दफ़्तरों से आगे बढ़कर उन तकनीकी प्रणालियों के करीब जा रहे हैं जो हर वक़्त लोगों को जोड़े रखते हैं भले ही वे कहीं भी हों."

लेकिन अहम समस्याएं अब भी मौजूद हैं. दुनिया भर में 19.3 करोड़ लोग बेरोज़गार हैं और दफ़्तरों में गैर बराबरी है.

2018 के एक अध्ययन के मुताबिक, महिला संस्थापकों की कंपनियों के बेहतर वित्तीय प्रदर्शन करने के बावजूद उनको अपने पुरुष समकक्षों के मुक़ाबले आधे से भी कम फ़ंड मिलता है.

ऑक्सफैम इंटरनेशनल की एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर विन्नी बायनीमा का कहना है कि सरकारों, व्यवसायों और व्यक्तियों के बीच समन्वय और सहयोग के प्रयासों से ही समाधान मिल सकता है.

"राजनेताओं की नई पीढ़ी एक अलग और अधिक मानवीय अर्थव्यवस्था के बारे में कल्पनाशील है. भविष्य के लिए बेहतर नींव रखने का यह सही समय है."

नयूक्लिरियो के 28 वर्षीय पेड्रो रटमैन कहते हैं, "मुझे इस परियोजना के मकसद ने प्रेरित किया. इससे न सिर्फ़ मुझे और मेरे बगल के व्यक्ति को, बल्कि पूरी दुनिया को फ़ायदा होगा."

27 साल की एलिसा मंसूर कहती हैं, "रियो डि जनेरो में बड़े होने का मतलब है भारी असमानताओं के साथ जीना. इसी ने मुझे अहसास कराया कि इसे बदलने के लिए कुछ किया जा सकता है."

हम मशीनी मेधा के युग में पहुंच चुके हैं. स्वास्थ्य सेवा और परिवहन से लेकर शिक्षा और कला तक, तकनीक हर जगह पहुंच रही है.

यह उन उद्योगों पर भी असर डाल रही है जो अब तक पूरी तरह मानवीय मेधा और श्रम से चल रहे हैं.

यूनिसेफ में ग्लोबल इनोवेशन की डायरेक्टर सिंथिया मैकफ्रे कहती हैं, "यह हकीकत अपने साथ बड़ी मात्रा में अवसर और जोखिम लेकर आई है."

"मशीन की कृत्रिम बुद्धि हमारी वैश्विक और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ाएगी तो स्वचालन से नौकरियों का परिदृश्य बदल जाएगा. वर्तमान और भावी पीढ़ियों के लिए हम पूरी तरह से भविष्यवाणी नहीं कर सकते."

विशेषज्ञ इस बात से सहमत हैं कि कृत्रिम मेधा का आना समाज और अर्थव्यवस्था के लिए नई नींव पड़ने का संकेत है.

सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी स्टीवन काउली बहुत आगे निकल जाने से बचने की सलाह देते हैं.

रोगों के प्रसार से लेकर पेस्ट्री के स्वाद तक यदि सब कुछ पहले से अनुमानित किया जाने लगे तो दुनिया में सरप्राइज की कमी हो जाएगी.

वह कहते हैं, "क्या सच में हम ऐसा चाहते हैं कि कोई सरप्राइज न हो? तो फिर मॉडल और डेटा का मालिक कौन होगा?"

भविष्य के बारे में अनुमान लगाने की ताक़त बढ़ने से जिम्मेदारियां भी बढ़ती हैं. भविष्य के डिजाइनरों को कृत्रिम मेधा के प्रभुत्व को संतुलित करके रखना होगा.

आईकॉग एनीवन कैड कोड की 20 वर्षीय बेटेल्हम डेसी कहती हैं, "जब मैं उन्हें- खासकर लड़कियों को- कुछ ऐसा करते हुए देखती हूं जिसमें टेक्नोलॉजी के जरिये समाज को प्रभावित किया जा सकता है तो यह मुझे सबसे ज़्यादा प्रेरित करता है."

23 वर्षीय टिटौन पारंड का कहना है, "बहुत सारी परियोजनाएं हैं जो उनको पूरा करने वाले का इंतज़ार कर रही हैं. कोशिश नहीं करना सबसे बड़ी ग़लती होगी. आगे बढ़िए क्योंकि आपको हमेशा एक समाधान मिलेगा."

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