आर्ट्स की 'बेकार' डिग्री भी ज़िंदगी संवार सकती है

  • 28 अप्रैल 2019
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यूनिवर्सिटी में जब मैं लोगों को बताती थी कि मैं इतिहास में डिग्री की पढ़ाई कर रही हूं तो मुझसे लगभग एक जैसे सवाल पूछे जाते- "क्या आपको टीचर बनना है?"

मैं उनसे कहती, "नहीं, मैं पत्रकार बनना चाहती हूं". इस पर मुझसे पूछा जाता- "आप संचार की पढ़ाई क्यों नहीं करतीं?"

उन दिनों कुलीन वर्ग के गिने-चुने लोग ही यूनिवर्सिटी में पढ़ पाते थे. तब शायद यह भी नहीं माना जाता था कि डिग्री सीधे कोई नौकरी दिला देगी.

आज नौकरी पाने के लिए डिग्री ज़रूरी है. डिग्री होने पर बेरोज़गार रह जाने की आशंका आधी हो जाती है. फिर भी, डिग्री होना नौकरी पा लेने की गारंटी नहीं है.

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महंगी पढ़ाई

डिग्री हासिल करने का ख़र्च बढ़ता जा रहा है. अमरीका में कमरे के किराये सहित प्राइवेट यूनिवर्सिटी में पढ़ाई का औसत ख़र्च सालाना 48,510 डॉलर है.

ब्रिटेन में घरेलू छात्रों को सिर्फ़ ट्यूशन फीस में ही 9,250 पाउंड (12,000 डॉलर) देने पड़ते हैं. विदेशी छात्रों की फीस इससे ज़्यादा है.

सिंगापुर की प्राइवेट यूनिवर्सिटी में चार साल का कोर्स करने पर 69,336 सिंगापुर डॉलर (51,000 अमरीकी डॉलर) लग सकते हैं.

इतने पैसे लगाने के बाद ज़्यादातर लोग चाहते हैं डिग्री आमदनी बढ़ाने में सहायक हो. ऐसा होता भी है.

मिसाल के लिए, अमरीका में बैचलर डिग्री वाले लोग बिना डिग्री वाले लोगों के मुक़ाबले प्रति सप्ताह 461 डॉलर ज़्यादा कमाते हैं.

ज़्यादातर लोग पढ़ाई पर किए गए निवेश का फ़ायदा बढ़ाना चाहते हैं. पत्रकार बनना है तो पत्रकारिता की पढ़ाई. वकील बनना है तो क़ानून की पढ़ाई. इंजीनियर या आईटी विशेषज्ञ बनना है तो STEM (विज्ञान, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और गणित) की पढ़ाई.

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कला विषयों की पूछ नहीं

इस आपाधापी में कला और गैर-व्यावसायिक विषयों- समाज विज्ञान, गणित और मानविकी, जैसे- इतिहास, दर्शन और भाषा की पढ़ाई की पूछ नहीं होती.

कला विषयों को लेकर दुनिया के सभी देशों में यही हाल है. अमरीका में सीनेटर मार्को रुबियो से लेकर पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा तक के बयानों में इनकी उपेक्षा दिखी है (ओबामा ने बाद में माफ़ी मांग ली थी).

चीन में सरकार ने 42 विश्वविद्यालयों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विश्व-स्तरीय संस्थानों में बदलने की योजना बनाई है.

ब्रिटेन में STEM विषयों पर सरकार के फ़ोकस के कारण अंग्रेज़ी के ए-लेवल में छात्रों की तादाद 20 फीसदी घट गई है. लिबरल आर्ट्स विषयों में छात्रों की तादाद 15 फ़ीसदी कम हुई है.

इस चक्कर में हम दुनिया को और ख़ुद को समझने के एक अहम तरीके से हाथ धो रहे हैं.

कुछ डिग्रियों के कीमती होने और कुछ दूसरी डिग्रियों के बेकार होने की धारणा कुछ छात्रों को अनावश्यक रूप से तनावग्रस्त कर सकती है.

यह धारणा उन्हें उन रास्तों पर धकेल सकती है जिन पर जीवन का सुख न मिले.

इससे वंचित वर्ग के छात्र और पढ़ाई पर निवेश से तुरंत लाभ की आशा रखने वाले लोग हतोत्साहित हो सकते हैं.

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सामान्य कौशल, तार्किक सोच

जॉर्ज एंडर्स 2012 से 2016 के बीच फ़ोर्ब्स के टेक्नोलॉजी रिपोर्टर थे. उनका कहना है कि सिलिकॉन वैली में यह धारणा थी कि STEM विषयों की पढ़ाई के अलावा दूसरी कोई पढ़ाई ही नहीं.

लेकिन बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए जब प्रबंधकों की नियुक्ति की बात होती तो दूसरी सच्चाई सामने आती.

"नाखुश सवारियों और ड्राइवरों से निपटने के लिए ऊबर मनोविज्ञान के डिग्रीधारकों की भर्ती कर रहा था. ओपेनटेबल रेस्तरां मालिकों को डेटा की अहमियत समझाने के लिए अंग्रेजी के डिग्रीधारकों को रख रहा था."

एंडर्स कहते हैं, "मुझे अहसास हुआ कि लोगों के साथ संवाद करने और दूसरों के मन में क्या चल रहा है इसे समझने का कौशल भी दूसरे कौशल की तरह महत्वपूर्ण है. मीडिया को छोड़कर सब जगह इसे सराहा जाता है."

इस अहसास के बाद एंडर्स ने एक किताब लिखी- "यू कैन डू एनीथिंग: द सरप्राइजिंग पावर ऑफ़ ए यूज़लेस लिबरल आर्ट्स एजुकेशन."

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नियोक्ता अपने कर्मचारियों में कैसा कौशल तलाशते हैं?

लिंक्डइन के शोध में पाया गया कि जिन तीन खूबियों की सबसे ज़्यादा तलाश होती है, वे हैं- रचनात्मकता, राज़ी करने की कला और सहयोग.

ब्रिटेन के 56 फ़ीसदी नियोक्ता मानते हैं कि उनके कर्मचारियों में टीम के साथ काम करने का कौशल नहीं है.

46 फ़ीसदी नियोक्ताओं को लगता है कि उनके कर्मचारी भावनाओं को संभाल नहीं पाते, चाहे वे उनकी अपनी भावनाएं हों या दूसरों की.

सिर्फ़ ब्रिटेन में ऐसा नहीं है. 2017 का एक सर्वे कहता है कि पिछले 30 साल में अमरीका में सबसे तेज़ी से उभरने वाली सभी नौकरियों में उच्च स्तर के सामाजिक कौशल की ज़रूरत होती है.

दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट के दो शीर्ष अधिकारियों ने हाल में लिखा था, "जैसे-जैसे कंप्यूटर इंसानों की तरह व्यवहार करेंगे, समाज विज्ञान और मानविकी और भी महत्वपूर्ण होते जाएंगे."

"भाषा, कला, इतिहास, अर्थशास्त्र, नीतिशास्त्र, दर्शन, मनोविज्ञान और मानव विकास के पाठ्यक्रम दर्शन और नैतिकता-आधारित कौशल सिखा सकते हैं, जो कृत्रिम मेधा के विकास और प्रबंधन में अहम भूमिका निभाएंगे."

बेशक आप लिबरल आर्ट्स की डिग्री के बिना अच्छे संचारक और तार्किक विचारक हो सकते हैं. यूनिवर्सिटी की कोई भी अच्छी शिक्षा (सिर्फ़ अंग्रेज़ी और समाज विज्ञान की नहीं) इन खूबियों को और निखार सकती है.

डबलिन की शैक्षणिक सलाहकार और करियर कोच ऐनी मैंगन कहती हैं, "कोई भी डिग्री आपको लिखने में सक्षम होने, तर्क प्रस्तुत करने, शोध, समस्या-समाधान, टीमवर्क और तकनीक से परिचित होने जैसे सामान्य कौशल देती है.

लिबरल आर्ट्स, खासकर मानविकी के कुछ पाठ्यक्रम लिखने, बोलने और तार्किक सोचने के कौशल को बढ़ा देते हैं. सेमिनार में वाद-विवाद, थीसिस लेखन या किसी कविता के विश्लेषण के जरिये ये कौशल आ जाते हैं.

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रचनात्मकता, जिज्ञासा और संवेदना

रोज़गार के लिए तैयार मानविकी स्नातक में कौन से तीन गुण होने चाहिए, इसे बतानें में एंडर्स संकोच नहीं करते. वह कहते हैं- "रचनात्मकता, जिज्ञासा और संवेदना."

इनमें से संवेदना सबसे बड़ा गुण है. इसका मतलब सिर्फ़ लोगों की तक़लीफ जानकर दुःखी होना नहीं है. यह विविधता से भरे समूह की ज़रूरतों और इच्छाओं को समझने की क्षमता है.

"ऐसे लोगों के बारे में सोचिए जो दवाइयों के क्लिनिकल टेस्ट की निगरानी करते हैं. उनको डॉक्टर, नर्स, नियामक अधिकारी सभी की जरूरत होती है. साथ ही उन्हें उस 72 साल की महिला के बारे में भी सोचना है जिस पर लंबे समय तक दवा का परीक्षण किया जा रहा है. यह संवेदना का काम है."

सामान्य तौर पर मानविकी की डिग्री का फ़ायदा यह है कि यह छात्रों को सोचने, आलोचना करने और राज़ी करने की क्षमता बढ़ाने पर जोर देता है.

यह आश्चर्य की बात है कि मानविकी के स्नातक सभी तरह के क्षेत्रों में जाते हैं.

अमरीका में मानविकी के स्नातक सबसे ज़्यादा (15%) प्रबंधन पदों पर काम कर रहे हैं. 14 फीसदी मानविकी ग्रैजुएट ऑफिस और प्रशासनिक पदों पर काम कर रहे हैं.

13 फ़ीसदी सेल्स में और 12 फ़ीसदी शिक्षा क्षेत्र में हैं. अन्य 10 फ़ीसदी कारोबार और वित्त क्षेत्र में हैं.

मानविकी के स्नातकों को इंजीनियरों और डॉक्टरों की तरह अच्छी नौकरियां नहीं मिलने की धारणा सही नहीं है.

ऑस्ट्रेलिया में 10 सबसे तेज़ी से उभरने वाले पेशों में से तीन पेशे हैं- सेल्स असिस्टेंट क्लर्क, विज्ञापन और जनसंपर्क और सेल्स मैनेजर. इन सभी क्षेत्रों में मानविकी के स्नातक हैं.

ग्लासडोर के नये सर्वे में पाया गया कि ब्रिटेन में 10 सबसे अच्छी नौकरियों में से आठ नौकरियां प्रबंधक पदों की हैं. इनमें संचार कौशल और भावनात्मक मेधा की ज़रूरत होती है. इन पदों पर STEM आधारिक उद्योगों से बाहर के लोग हैं.

तीसरी सबसे अच्छी नौकरी मार्केटिंग मैनेजर की है, चौथी प्रोडक्ट मैनेजर की और पांचवीं सेल्स मैनेजर की.

इंजीनियरों का स्थान सूची में 18वें नंबर पर आया- संचार, एचआर और प्रोडक्ट मैनेजमेंट के भी नीचे.

30 देशों के 1,700 लोगों पर किए गए एक हाल के अध्ययन में पाया गया कि नेतृत्व के पदों पर बैठे लोगों के पास या तो समाज विज्ञान की डिग्री है या मानविकी की.

45 साल से कम उम्र के नेतृत्वकर्ताओं पर यह विशेष रूप से लागू होता है. इससे ज़्यादा उम्र के नेताओं के STEM विषय पढ़ने की संभावना ज़्यादा मिली.

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करियर के लिए तैयार रहिए

यह कहना सही नहीं होगा कि लिबरल आर्ट्स की डिग्री आसान रास्ता है.

कुछ स्नातकों की पहली चुनौती यह रहती है कि उनको जीवन में क्या करना है, यह पता नहीं रहता.

कुछ दूसरे ग्रैजुएट अपने साथियों (जैसे आईटी ट्रेनी) की तरह तकनीकी कौशल नहीं होने से परेशान रहते हैं.

लेकिन एक पेशेवर डिग्री हासिल करने के अपने जोखिम हैं. हर किशोर को यह पता नहीं होता कि वे अपने जीवन में क्या करना चाहते हैं और समय के साथ उनके करियर की आकांक्षाएं बदलती रहती हैं.

एक रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन के एक तिहाई लोग अपने जीवन में करियर बदल लेते हैं.

लिंक्डइन ने पाया है कि 40 फ़ीसदी पेशेवर अपने करियर का एक केंद्र बिंदु बनाने में रुचि रखते हैं- युवा इसमें सबसे ज़्यादा रुचि रखते हैं.

कोई कौशल अधिक से अधिक तरह की नौकरियों में कारगर हो, इस नजरिये से सोचने पर तार्किक सोच जैसे व्यापक कौशल अब उतने महत्वपूर्ण नहीं रह गए हैं.

नौकरी बाज़ार में विशिष्ट तकनीकी कौशल की भी पूछ है. लेकिन उनको हासिल करने के कई तरीके हैं.

करियर डेवलपमेंट कोच क्रिस्टिना जॉर्गला कार्यस्थल पर बुनियादी कौशल सीखने के लिए इंटर्नशिप और एप्रेंटिसशिप पर जोर देती हैं

"मैं तो सलाह दूंगी कि यूनिवर्सिटी के बाद कहीं घूमने-फिरने की बजाय एक साल का वक़्त निकालें और विभिन्न तरह की इंटर्नशिप करें. भले ही वह एक ही क्षेत्र में हो, जैसे टीवी में प्रसारण, उत्पादन और प्रस्तुति. आपको इसका अंतर दिखेगा."

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ऊंची बेरोज़गारी, कम तनख़्वाह

यह सच है कि मानविकी के क्षेत्र में बेरोज़गारी के जोखिम ज़्यादा हैं, लेकिन उतना नहीं जिनता आप सोचते हैं.

अमरीका में 25 से 34 साल के युवाओं में मानविकी डिग्रीधारकों की बेरोज़गारी दर 4 फीसदी है. इंजीनियरिंग और बिजनेस डिग्रीधारकों की बेरोज़गारी 3 फ़ीसदी से कुछ ज़्यादा है. यानी कुल अंतर 100 में से केवल एक व्यक्ति का है.

तनख़्वाह का मामला इतना सीधा नहीं है. ब्रिटेन में सबसे ज़्यादा पैसे वे कमाते हैं जिन्होंने दवा, दंत चिकित्सा, अर्थशास्त्र या गणित पढ़ी हो.

अमरीका में इंजीनियरिंग, भौतिक विज्ञान या बिजनेस की पढ़ाई करने वाले ज़्यादा कमाते हैं.

मानविकी के कुछ सबसे लोकप्रिय विषयों- जैसे इतिहास और अंग्रेज़ी के ग्रैजुएट कमाई के मामले में निचले पायदान पर हैं.

लेकिन कुछ नौकरियों में एक पेशेवर डिग्री की जगह मानविकी में डिग्री के साथ शुरुआत करना बेहतर है.

अमरीका में वकील, जज या मजिस्ट्रेट बनने के इच्छुक युवा जो क़ानून की डिग्री लेते हैं, वे साल में 94 हजार डॉलर की आमदनी की उम्मीद कर सकते हैं.

दर्शन या धार्मिक अध्ययन में डिग्री लेने वाले युवा 1,10,000 डॉलर की कमाई कर सकते हैं.

नस्लीय और सभ्यताओं का अध्ययन करने वाले 1,24,000 डॉलर की कमाई करते हैं.

अमरीका का इतिहास पढ़ने वाले 1,43,000 डॉलर कमाते हैं और जिन्होंने विदेशी भाषाएं पढ़ी हों वे 1,48,000 डॉलर कमा सकते हैं.

मार्केटिंग, विज्ञापन और जनसंपर्क जैसे क्षेत्रों में भी ऐसे ही उदाहरण मिलते हैं. तनख़्वाह की यह गैरबराबरी सिर्फ़ डिग्री की वजह से नहीं है.

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लैंगिक भेदभाव

मानविकी के स्नातकों के महिला होने की संभावना अधिक रहती है. हम सभी जानते हैं कि महिलाओं की तनख़्वाह में कैसा भेदभाव होता है. मानविकी के क्षेत्र में यह और स्पष्ट दिखता है.

अमरीका में मानविकी स्नातक पुरुषों की औसत आमदनी 60,000 डॉलर है, जबकि महिलाओं की सिर्फ़ 48,000 डॉलर.

चूंकि मानविकी की पढ़ाई करने वाले 10 लोगों में से 6 महिलाएं हैं इसलिए इसका दोष लिंग भेद को दीजिए, डिग्री को नहीं.

जैसे-जैसे ज़्यादा महिलाएं किसी क्षेत्र में कदम रखती हैं तो उस क्षेत्र की औसत आमदनी घटती जाती है.

यह देखते हुए इसमें कोई हैरत नहीं कि अंग्रेजी की पढ़ाई (जिसमें 10 में से 7 महिलाएं हैं) करने वाले इंजीनियरों (10 में से 8 पुरुष) से कम कमाते हैं.

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जो अच्छा लगे वह कीजिए

ऐनी मैंगन कहती हैं, "यूनिवर्सिटी में जो भी पढ़ाई हो उसमें छात्रों को सिर्फ़ अच्छा ही नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें आनंद भी लेना चाहिए."

"मैं देखती हूं कि नियोक्ता सिर्फ़ यह जानना चाहते हैं कि आप कॉलेज में हैं और आपने अच्छा किया है. इसलिए जिस चीज़ में आपकी रुचि हो वह करना बहुत ज़रूरी है. तभी आप अच्छा करते हैं."

चाहे जो भी हो, औसत तनख़्वाह के आधार पर करियर चुनना अच्छा कदम नही है.

मैंगन कहती हैं, "आर्थिक क़ामयाबी ही काफी नहीं है. आप वह काम करने पर ध्यान दें जो करना आपको पसंद है और जिसमें आपका जोश जगता है. लोग ख़ुद आपको काम देना चाहेंगे. फिर उस नौकरी में तरक्की कीजिए."

किसी छात्र को STEM चुनना चाहिए या मानविकी और पेशेवर पाठ्यक्रम चुनना चाहिए या लिबरल आर्ट्स, ये सवाल गुमराह कर सकते हैं.

किसी विषय में सभी लोगों का जुनून एक जैसा नहीं होता. बहुत से लोगों को पता होता है कि उनको क्या पसंद है. उन्हें बस यह पता नहीं होता कि उसमें आगे बढ़ें या नहीं. अख़बारों की सुर्खियां उनकी मदद नहीं करतीं.

मैंगन का कहना है कि यहां अभिभावकों और शिक्षकों को एक कदम पीछे रहना चाहिए.

"यहां केवल एक विशेषज्ञ है. अपने बारे में मैं विशेषज्ञ हूं. आप अपने बारे में सबसे बेहतर जानते हैं. वे अपने बारे में एक्सपर्ट हैं और वास्तव में दूसरा कोई नहीं बता सकता कि उनको क्या करना चाहिए और कैसे करना चाहिए."

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