ऑस्ट्रेलिया की इस कंपनी में बुधवार को छुट्टी क्यों?

  • 8 मई 2019
दुनिया की वो कंपनी जहां बुधवार को भी छुट्टी होती है इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption सांकेतिक तस्वीर

हर बुधवार को जब टिफ़ैनी श्रॉवेन के दोस्त काम में लगे होते हैं, वह टेनिस कोर्ट पर बैकहैंड की प्रैक्टिस कर रही होती हैं.

मेलबर्न की प्रोजेक्ट मैनेजर सुबह नौ बजे अपने लिए एक अभ्यास सत्र रखती हैं जिससे उनका खेल निखर रहा है.

श्रॉवेन कामचोरी नहीं करतीं. लगभग एक साल से वेर्सा नाम की जिस डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी में वह काम करती हैं, वह बुधवार को बंद रहती है.

ये कंपनी अपने कर्मचारियों से हफ्ते के चार दिन ही काम लेती है, मगर पैसे पूरे 5-दिन के सप्ताह के हिसाब से देती है.

वेर्सा के कर्मचारी सोमवार और मंगलवार को काम करते हैं, फिर गुरुवार-शुक्रवार को दो दिन के लिए ऑफि़स आते हैं.

बुधवार को कोई मीटिंग नहीं रखी जाती. लेकिन किसी ग्राहक को कोई ज़रूरी काम हो तो कंपनी के कर्मचारी फोन पर उपलब्ध रहते हैं.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

काम पूरा कैसे हो

श्रॉवेन को जब पहली बार इस योजना के बारे में बताया गया था तो वह चहक उठी थी, फिर उनको चिंता भी हो गई थी.

प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में वह कर्मचारियों और ग्राहकों के बीच की कड़ी हैं. इसलिए कोई डेडलाइन छूटने पर या दोनों पक्षों के बीच संवाद टूटने पर सारा ठीकरा उन्हीं के सिर फूटता.

लेकिन वेर्सा के कर्मचारियों ने कुशलता बढ़ाने के लिए काम करने के अपने ढंग को बदल लिया.

श्रॉवेन ध्यान रखती हैं कि कुछ निश्चित काम बुधवार के ब्रेक से पहले पूरे हो जाएं. बैठकें ज़्यादा केंद्रित होती हैं और फ़ालतू की चटर-पटर को बढ़ावा नहीं दिया जाता.

हर दो हफ्ते में कंपनी देखती है कि क्या काम हुआ और क्या नहीं हुआ.

श्रॉवेन कहती हैं, "सभी की कोशिश रहती है कि कि ये (व्यवस्था) काम करे क्योंकि हमें ये लचीलापन पसंद है. यदि मैं बुधवार को छुट्टी चाहती हूं तो मुझे अपने हफ्ते की योजना बेहतर बनानी होगी."

इमेज कॉपीरइट Getty Images

लचीलेपन की जरूरत का सम्मान

वेर्सा ने ये नीति पिछले साल जुलाई में लागू की थी. इस ऑस्ट्रेलियाई कंपनी की संस्थापक और सीईओ काथ ब्लैकहैम का कहना है कि इस बीच कंपनी का राजस्व 46 फीसदी बढ़ा है और मुनाफा लगभग तीन गुना हो गया है.

ब्लैकहैम इस क़ामयाबी का पूरा श्रेय 4-दिवसीय सप्ताह को नहीं देना चाहतीं. वो कहती हैं, "हमें काम मिला क्योंकि हम अच्छे काम के लिए जाने जाते हैं."

वो ये भी कहती हैं कि एजेंसी का टर्नओवर बहुत कम है और निर्देशों पर काम करने वाली टीमें व्यापारिक भागीदारों को आकर्षित कर सकती है.

ब्लैकहैम को अपनी कंपनी की लीडरशिप टीम को इस बात के लिए मनाने में खासी मशक्कत करनी पड़ी थी.

बुधवार की छुट्टी का प्रयोग नाकाम होने पर उन्होंने 5-दिवसीय सप्ताह में लौटने की कसम भी खाई थी.

उन्होंने दो छोटे-छोटे बच्चों के साथ कंपनी की शुरुआत की थी. वो ऐसी कंपनी का नेतृत्व करना चाहती थीं जिसका प्रदर्शन बेहतरीन हो, साथ ही जो लचीलेपन की जरूरत का सम्मान करे.

ब्लैकहैम कहती हैं, "मैं साबित करना चाहती थी कि कई-कई घंटों तक लगातार काम करने वाले युवाओं के लिए जाने जाने वाले सेवा आधारित उद्योग में भी यह क़ामयाब हो सकता है."

सप्ताह के बीच में मिलने वाली छुट्टी में कर्मचारी जिम जा सकते हैं, घर के काम निपटा सकते हैं, छोटे बच्चों की देखभाल कर सकते हैं, मुलाकातें तय कर सकते हैं, अपने स्टार्ट-अप पर काम कर सकते हैं या चाहें तो बस नेटफ्लिक्स देख सकते हैं.

ब्लैकहैम कहती हैं, "सिक लीव कम हो गए हैं, कर्मचारियों की संतुष्टि बढ़ गई है. सोमवार वाली फीलिंग सप्ताह में दो बार महसूस होती है."

इमेज कॉपीरइट Getty Images

बुधवार ही क्यों?

सप्ताह को दो हिस्सों में बांटने के फ़ैसले के पीछे काम में सोमवार वाली फीलिंग लाने का बड़ा हाथ है.

ब्लैकहेम तीन दिन का लंबा वीकेंड नहीं देना चाहती थीं, क्योंकि उनको डर था कि युवा कर्मचारी इसे और लंबे वीकेंड में बदलने की कोशिश करने लगेंगे.

अपनी छुट्टी का दिन तय करने का अधिकार कर्मचारियों को देने से दूसरे कर्मचारियों और ग्राहकों में भ्रम बनने लगा था कि कौन उपलब्ध होगा और कौन नहीं. इससे उत्पादकता भी प्रभावित हुई.

ऑकलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी में एचआर मैनेजमेंट के प्रोफेसर जरॉड हैर ने अपने रिसर्च के लिए वेर्सा के कर्मचारियों से बात की और पाया कि वे बुधवार की छुट्टी का सबसे ज़्यादा आनंद लेते हैं.

वो कहते हैं, "बुधवार की छुट्टी का मतलब है कि आप गुरुवार को तरोताज़ा होकर आएंगे और उनकी उत्पादकता बढ़ेगी."

प्रोफेसर हैर ने न्यूजीलैंड की इस्टेट मैनेजमेंट कपंनी पर्पेचुअल गार्डियन पर भी निगाह रखी है.

इस कंपनी ने पिछले साल 4-दिवसीय सप्ताह का प्रयोग किया था और उत्पादकता में कोई कमी नहीं आई.

बीमारी वाली छुट्टियां कम हो गई थीं और कर्मचारियों की खुशी बढ़ गई थी, हालांकि कुछ कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ी जो काम के नये तरीके में फिट नहीं हो पा रहे थे.

बदलाव का समय आ गया है

पर्पेचुअल गार्डियन के मालिक और सीईओ एंड्रयू बार्न्स का मानना है कि 4 दिवसीय सप्ताह का समय आ गया है.

वेर्सा की ब्लैकहैम ने दफ़्तर को लचीला और संतुलित बनाने के लिए इसे अपनाया है तो बार्न्स एक अध्ययन से प्रभावित हैं, जिसमें कहा गया था कि कर्मचारी दिन में केवल ढाई घंटे ही उत्पादक रहते हैं.

5 दिन का सप्ताह भी कोई बहुत पुरानी चीज नहीं है. कार निर्माता हेनरी फ़ोर्ड ने 1926 में अपने श्रमिकों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए उनको साप्ताहिक छुट्टी देना शुरू किया था.

तकनीक के आने के गवाह रहे अर्थशास्त्री जॉन मेनार्ड कीन्स ने 1930 में संभावना जताई थी कि ऐसा समय आएगा जब लोग सप्ताह में सिर्फ़ 15 घंटे काम करेंगे.

करीब 100 साल बाद दुनिया भर के संगठन सप्ताह में काम के घंटों को फिर से निर्धारित कर रहे हैं.

ग्रेट ब्रिटेन और आयरलैंड ने 4-दिवसीय कार्य सप्ताह में विशेष तौर पर रुचि दिखाई है.

ब्रिटेन में ट्रेड यूनियन कांग्रेस, आय़रलैंड में फ़ोर्सा, स्कॉटलैंड की नेशनल पार्टी और ब्रिटेन की लेबर पार्टी अलग-अलग स्तरों पर इस पर विचार कर रही है.

स्वीडिश क्षेत्र में भी दिन और सप्ताह में काम के घंटे कम करने के प्रयोग हो रहे हैं, जिसके मिले-जुले परिणाम रहे हैं.

काम के लंबे घंटों के लिए कुख्यात अमरीका में भी फ़ास्ट फ़ूड चेन शेक शैक ने इस साल मार्च में 4-दिवसीय सप्ताह का एलान किया.

लेकिन काम के घंटे कम देना ही क़ामयाब हो जाने की गारंटी नहीं है. ऐसे सभी प्रयोग सफल नहीं रहे.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

क़ामयाबी की गारंटी नहीं

स्वीडन में गुटेनबर्ग के सरकारी नर्सिंग होम्स में काम के घंटे घटाकर 6 करने का प्रयोग किया गया.

इससे बीमारी की छुट्टियां कम हुई और उत्पादकता बढ़ी, लेकिन कर्मचारियों पर ख़र्च भी बढ़ गया, क्योंकि पहले से अधिक कर्मचारियों की जरूरत पड़ने लगी.

अमरीका में चार दिन के सप्ताह का प्रयोग करने वाले कुछ स्टार्ट-अप्स को 5 दिवसीय सप्ताह में वापस लौटना पड़ा है, क्योंकि इससे कंपनी की प्रतिस्पर्धी क्षमता घट रही थी, जिससे कर्मचारियों का तनाव बढ़ रहा था.

वेर्सा की ब्लैकहैम और श्रॉवेन दोनों का मानना है कि लचीलापन महत्वपूर्ण है. ग्राहकों के जरूरी प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए दोनों ने ईस्टर के लंबे वीकेंड में लगातार काम किया.

ब्लैकहैम और बार्न्स दोनों का कहना है कि दूसरी कंपनियों के प्रमुखों ने उनके 4-दिवसीय सप्ताह का समर्थन किया, लेकिन वे कहते हैं कि इसे अपने यहां लागू करना संभव नहीं है.

बार्न्स का कहना है कि कर्मचारियों को अपने समाधान तलाशने की छूट देना और उत्पादन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए प्रेरित करना क़ामयाबी के लिए अहम हैं.

सामाजिक पहलुओं को भी देखें

बार्न्स की कंपनी फिलहाल करीब 50 कंपनियों को सलाह दे रही है कि 4-दिवसीय सप्ताह कैसे लागू करें.

उनका कहना है कि काम के घंटों में बदलाव से कई सामाजिक चुनौतियों का सामना किया जा सकता है. "हमारे पांच में से एक कर्मचारी हर वक़्त मानसिक तनाव से जूझते रहते हैं."

इसीलिए बार्न्स अपने कर्मचारियों और उनके परिवार की सेहत, बच्चों के साथ समय बिताने और उनकी शिक्षा को भी ध्यान में रखते हैं.

सिडनी यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर रे कूप का कहना है कि 4-दिन का सप्ताह एक और अहम मुद्दे को सुलझाता है. वह है कुशल महिला कर्मचारियों का मुद्दा.

वह कहती हैं, "ऑस्ट्रेलिया में औसत रूप से महिलाएं तीस के दशक में पहली बार मां बनती हैं. ये वो समय होता है जब हमारे करियर को लंबी छलांग मिलती है, आमदनी बढ़ती है और हम असल में बहुत उत्पादक कर्मचारी बनते हैं."

"लेकिन इसी समय महिलाएं काम छोड़ देती हैं, क्योंकि हम उन्हें मां और उत्पादक श्रमिक दोनों बने रहने का विकल्प नहीं देते."

वेर्सा की ब्लैकहेम इसी को बदलने के लिए बेताब हैं. वो ये सुनिश्चित करना चाहती हैं कि उनकी बेटी करियर और पारिवारिक जीवन, दोनों को एक साथ निभा सके.

वो कहती हैं, "किसी को लचीलेपन के लिए न लड़ना पड़े."

(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी फ्यूचर पर उपलब्ध है.)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

मिलते-जुलते मुद्दे

संबंधित समाचार