अक्सर थका हुआ महसूस करना कितना ख़तरनाक है?

  • 25 जून 2019
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1970 के दशक की शुरुआत में अगर आपने बर्नआउट से पीड़ित होने की बात की होती तो तय मानिए कि कुछ भौंहें ज़रूर तन जातीं.

उन दिनों अनौपचारिक रूप से इस शब्द का इस्तेमाल नशीली दवाइयों के सेवन से पड़ने वाले दुष्प्रभावों को बताने में किया जाता था.

मसलन दिमाग की सक्रियता घट जाना, जो अक्सर पार्टियों में जाने वालों के लिए आम बात थी.

न्यूयॉर्क में जर्मन-अमरीकी मनोवैज्ञानिक हर्बर्ट फ्रायडेनबर्गर ने 1974 में पहली बार नशेड़ियों और बेघर लोगों के एक क्लीनिक में इस समस्या की पहचान की. लेकिन वह नशेड़ियों के बारे में नहीं सोच रहे थे.

क्लीनिक चलाने वाले स्वयंसेवक मुश्किलों से गुज़र रहे थे. उनके पास बहुत काम था, प्रेरणा की कमी थी और वे मानसिक रूप से थक गए थे.

यह काम पहले उनको बहुत फायदेमंद लगता था, लेकिन अब वे चिड़चिड़े और खिन्न रहने लगे थे. वे अपने रोगियों का भी उतना ख्याल नहीं रख पा रहे थे जिसके वे हकदार थे.

विश्वव्यापी बीमारी

फ्रायडेनबर्गर ने इस चिंताजनक स्थिति को लंबे समय तक ज़्यादा काम करने से होने वाली थकान के रूप में परिभाषित किया. इसका वर्णन करने के लिए उन्होंने 'बर्नआउट' शब्द को चुना.

यह शब्द तुरंत ही लोकप्रिय हो गया. आज दुनिया भर में इसे जाना जाता है.

बर्नआउट कितना व्यापक है, इसके आंकड़े आने बहुत मुश्किल हैं. 2018 में अकेले ब्रिटेन में ही काम के तनाव से 5,95,000 लोग पीड़ित थे.

खिलाड़ी इससे पीड़ित हैं. यूट्यूब के सितारे इसके शिकार हैं. उद्यमी इससे परेशान हैं. ख़ुद फ्रायडेनबर्गर इसके शिकार हो गए थे.

पिछले महीने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस विश्वव्यापी समस्या को बीमारी की मान्यता दी.

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बीमारियों के वर्गीकरण के अंतरराष्ट्रीय मैनुअल में इसे लगातार काम के तनाव से उत्पन्न सिंड्रोम बताया गया.

WHO के मुताबिक बर्नआउट के तीन तत्व हैं- थकान, नौकरी से ऊब और ख़राब प्रदर्शन.

इसे नज़रंदाज़ करना और इसके इलाज में देरी करना ठीक नहीं है. किसी भी दूसरी बीमारी की तरह इसे बढ़ने देना और देर हो जाने पर इलाज ढूंढना कारगर नहीं हो सकता.

काम से ऊब

यह कैसे पता लगाएं कि आप लगभग निढाल हो चुके हैं.

आयरलैंड की डबलिन काउंटी की मनोचिकित्सक सिओबन मरे कहती हैं, "बर्नआउट से पहले के संकेत और लक्षण बहुत हद तक अवसाद जैसे होते हैं."

मरे ने "दि बर्नआउट सॉल्यूशन" नामक किताब भी लिखी है. वह शराब और शुगर के ज़्यादा इस्तेमाल से बचने की सलाह देती हैं.

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थकान यदि नहीं उतर रही है तो उस पर भी ध्यान दीजिए.

सुबह 10 बजे तक सोने पर भी अगर फिर से सोने की इच्छा करे या टहलने की ऊर्जा ना मिले तो सतर्क हो जाइए.

जैसे ही आप इस तरह महसूस करना शुरू करते हैं, मरे डॉक्टर के पास जाने की सलाह देती हैं.

वह कहती हैं, "अवसाद और बर्नआउट से पहले की स्थिति एक जैसी है. बर्नआउट को बीमारी मान लेने के बारे में बहुत उत्साह है, लेकिन इसे अब भी पेशेगत घटना ही माना गया है."

दोनों में अंतर समझने वाले पेशेवर चिकित्सक की सहायता लेना बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि अवसाद के इलाज के लिए तो कई विकल्प मौजूद हैं लेकिन बर्नआउट का सबसे बेहतर इलाज अब भी जीवनशैली के बदलाव में ही है.

ख़तरा करीब है

आप कैसे जानेंगे कि आप बर्नआउट के क़रीब हैं और चुनौतीपूर्ण समय से गुज़र रहे हैं?

मरे कहती हैं, "तनाव वास्तव में बहुत महत्वपूर्ण है और बेताबी हमें अच्छा काम करने के लिए प्रेरित करती है."

"लेकिन जब हम लगातार तनाव और बेचैनी से गुजरते हैं और हमें इनसे फुरसत नहीं मिलती तब यह बर्नआउट में बदलने लगता है."

मिसाल के लिए, उस बड़े प्रोजेक्ट के बारे में सोचिए जिस पर आप काम कर रहे हैं. उसके बारे में सोचने से उत्तेजना महसूस करना आम बात है. हो सकता है यह रात में भी आपको जगाए रखता हो.

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लेकिन यदि आप इस प्रोजेक्ट के ख़त्म हो जाने के बाद भी बेचैनी महसूस करते हैं तो जान लीजिए कि आप बर्नआउट के ख़तरे में हैं.

मरे कहती हैं, "अगले दिन भी अगर आप में वही बेचैनी है तो आप इसे लगातार बढ़ा रहे हैं."

बर्नआउट के करीब पहुंचने का एक और संकेत है चिड़चिड़ाहट.

अगर आप यह महसूस करने लगे हैं कि आपके काम की कद्र नहीं है, आप सामाजिक प्रतिबद्धताओं से बचने लगे हैं और निराशा आपको घेर रही है तो तो संभल जाइए.

काम पर असर

लंदन की मनोचिकित्सक और बर्नआउट विशेषज्ञ जैकी फ्रांसिस वॉकर कहती हैं, "बर्नआउट की कगार पर खड़ा व्यक्ति भावनात्मक रूप से सुन्न और मानसिक दूरी महसूस करना शुरू कर देगा, मानो उसमें जीवन की सामान्य चीजों में शामिल होने की भी क्षमता न हो."

वॉकर बर्नआउट की एक अंतिम पहचान पर ध्यान देने की सलाह देती हैं. यह है काम की गुणवत्ता गिरने का अहसास.

वह कहती हैं, "लोग कहते हैं कि यह मैं नही हूं. मैं इस तरह नहीं हूं. मैं तो एक्स वाई ज़ेड सारे काम कर सकता हूं."

"लेकिन जाहिर है अगर शारीरिक क्षमता घट रही है तो वे सामान्य क्षमता से काम नहीं कर रहे."

मस्लक बर्नआउट इंवेंट्री (MBI) टेस्ट बर्नआउट मापने के लिए डिजाइन किया गया है.

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सबसे व्यापक इस्तेमाल एमबीआई-जनरल सर्वे का होता है, जो थकान और चिड़चिड़ाहट के साथ-साथ यह भी मापता है कि काम करते हुए आप कितने बेहतर तरीके से सोच पाते हैं.

यह पहली बार 1981 में प्रकाशित हुआ था. तब से अब तक सैकड़ों अध्ययनों में इसे उद्धृत किया गया है.

हालांकि यह सबसे अच्छा रिज़ल्ट तब देता है बर्नआउट चरम पर हो, लेकिन कोई कारण नहीं कि बर्नआउट के करीब होने पर इसे आजमाया नहीं जा सकता.

बर्नआउट से कैसे बचें?

बर्नआउट को रोकने का एकमात्र तरीका है इसकी जड़ को ख़त्म करना.

मरे पूछती हैं, "आपके जीवन में जो चल रहा है उसे आप अस्थायी या स्थायी रूप से होने दे सकते हैं? मिसाल के लिए, चिंता को छोड़कर ख़ूब नींद लेने से बर्नआउट के शारीरिक संकेतों से उबरा जा सकता है."

वॉकर तीन चरण का एक प्रोग्राम सुझाती हैं, जिसमें उस अंतर का पता लगाना शामिल होता है कि कोई व्यक्ति क्या करने की पेशकश करता है और जब उसे काम करने को कहा जाता है तो वह क्या महसूस करता है.

"कभी-कभी ऐसा इसलिए होता है कि क्योंकि वे परफ़ेक्ट होने की कोशिश करते हैं या फिर उन्हें इस बात का डर सताता है कि लोग उसे जितना काबिल समझते हैं उस पर खरा उतरने के लिए बहुत मेहनत की ज़रूरत पड़ेगी."

कभी-कभी काम के माहौल से भी समस्या होती है.

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2018 में 7,500 अमरीकी श्रमिकों पर किए गए गैलप स्टडी के मुताबिक, काम के दौरान अनुचित व्यवहार, काम के असहनीय बोझ और किसी व्यक्ति की भूमिका के बारे में अस्पष्टता से बर्नआउट होता है.

श्रमिकों को मैनेजर से मदद न मिले और समय का अनुचित दबाव डाला जाए तो भी तनाव बढ़ता है.

मूल्यों का टकराव

वॉकर कहती हैं, "एक और मुद्दा कंपनी के मूल्यों का व्यक्तिगत मूल्यों से मेल न खाना भी हो सकता है. इससे तनाव और असंगति की भावना पैदा होती है, क्योंकि उन्हें वह करना पड़ता है जिसमें उनका विश्वास नहीं है."

कुछ मामलों में, लोग बाहर के कुछ काम करके ख़ुद को संतुष्ट कर लेते हैं, लेकिन कई बार वे कंपनी या पेशा बदल लेने का फ़ैसला कर लेते हैं.

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बर्नआउट का कारण जो भी हो, मरे का सुझाव यही होता है कि अपने प्रति दयालु रहें.

मरे के अनुभव के मुताबिक बर्नआउट नामक महामारी का प्रमुख कारण सब चाहने की संस्कृति है.

सब कुछ मिलना संभव नहीं

कई बार यह मुमकिन नहीं होता कि आपका सामाजिक जीवन भी स्वस्थ रहे, आप बड़ी परियोजना भी पूरी करें और फिटनेस के अपने निजी लक्ष्यों को भी हासिल करें.

ऐसे में प्राथमिकता तय करना बहुत महत्वपूर्ण है. खुद से बहुत ज़्यादा की अपेक्षा न करें.

अगर दूसरे लोग घर और दफ़्तर में, निजी और सामाजिक जीवन में, हर जगह परिपूर्ण दिख रहे हैं तो शायद वे हमें गुमराह कर रहे हैं- या फिर उन्हें कहीं से बहुत मदद मिल रही है.

यदि आपको लगता है कि आप बर्नआउट क्लब में शामिल होने के करीब हैं तो एक कदम पीछे खींचिए, क्या ग़लत हो रहा रहा है उसकी पहचान कीजिए और ख़ुद को इसके चंगुल से बचा लीजिए.

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