ओपन ऑफिस में प्राइवेसी चाहिए तो फोन बूथ में जाइए

  • 15 अगस्त 2019
ऑफ़िस

वे बिल्कुल फोन बूथ जैसे दिखते हैं, लेकिन उनमें टेलीफोन नहीं होता. उनमें बैठ कर या खड़े होकर बात की जा सकती हैं.

कांच के दरवाजे के आर-पार सब कुछ दिखता है, लेकिन उनकी साउंड-प्रूफ दीवारें कोई आवाज़ बाहर नहीं आने देती.

यदि आपने पिछले कुछ वर्षों में केबिन रहित खुले दफ़्तरों में काम किया है तो आपने वहां ऐसे बूथ ज़रूर देखे होंगे.

वे मुंबई के दफ़्तरों से लेकर जापान के रेलवे स्टेशनों तक और उत्तर अमरीका से लेकर ब्रिटेन तक के निजी दफ़्तरों में मिलने लगे हैं.

2015 में फ़िनलैंड की फ्रेमरी इकलौती कंपनी थी, जिसने कॉमर्शियल डिज़ाइन की सालाना प्रदर्शनी नियोकॉन में अपना ऑफ़िस "फोन बूथ" प्रदर्शित किया था.

नियोकॉन के उपाध्यक्ष बायरन मॉर्टन के मुताबिक इस साल करीब दर्जन भर कंपनियों ने अपने फोन बूथ का प्रदर्शन किया. इनमें से कई कंपनियां नई हैं.

फ्रेमरी ने पिछले साल 10 हजार फोन बूथ बनाए थे. इस साल उसे 15 हजार बूथ बनाने की उम्मीद है.

कनाडा की वनटूसिक्स कंपनी एक जनरल डिज़ाइन कंपनी के रूप में स्थापित हुई थी, लेकिन अब यह अपने "लूप" फोन बूथ की डिज़ाइन और उत्पादन पर ही ध्यान केंद्रित कर रही है.

इस कंपनी के सह-संस्थापक निक कज़कॉफ़ का कहना है कि लूप फोन बूथ उनके कारोबार का बड़ा हिस्सा बन चुका है, जिससे कंपनी का करीब 60 से 70 फीसदी बिजनेस आता है.

लूप फोन बूथ को खरीदने के इच्छुक लोगों के इन्क्वायरी कॉल पिछले साल के मुकाबले 5 गुना बढ़ गए हैं.

छोटे बूथों में देर तक नहीं बैठा जा सकता, लेकिन कुछ कर्मचारियों के लिए वे शोरगुल से भरे खुले दफ़्तरों में राहत की इकलौती जगह हैं.

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ऑफिस में घर जैसी जगह

हाल के दिनों में काम करने के लिए निजी जगहों की मांग बढ़ी है, लेकिन खुले दफ़्तर और उनकी समस्याएं करीब आधी सदी से मौजूद हैं.

"क्यूब्ड: ए सीक्रेट हिस्ट्री ऑफ़ दि वर्कप्लेस" के लेखक निकिल सावल का कहना है कि 20वीं सदी की शुरुआत में यूरोपीय दफ़्तर "अमरीकी प्लान" को अपनाने लगे थे. नये दफ़्तरों में डेस्क एक-दूसरे से समकोण पर होते थे.

1958 में जर्मनी के दो भाइयों वोल्फगैंग और एबरहार्ड श्नेले ने Bürolandschaft डिजाइन पेश की.

सावल कहते हैं, "यह पहले से अधिक तार्किक योजना थी जिसमें इस बात का ख़्याल रखा गया था कि नये दफ़्तरों में लोग कैसे चलेंगे और सूचनाओं का प्रवाह कैसे होगा."

यूरोप ने इस योजना को चुनिंदा तरीके से अपनाया, लेकिन अमरीका ने इसे हाथों हाथ लिया. 2014 तक अमरीका के 70 फीसदी दफ़्तर केबिन रहित हो गए.

लेकिन अमरीकी श्रमिकों को ये पसंद नहीं आते. एक सर्वे से पता चला कि सिर्फ़ 28 फीसदी कर्मचारियों को ऐसे दफ़्तर पसंद हैं.

सवाल है कि यदि ओपन प्लान ऑफिस में कुछ नया नहीं है तो ऑफिस फोन बूथ का बाज़ार क्यों इतनी तेज़ी से बढ़ रहा है?

नफा या नुकसान?

रॉयल सोसाइटी ने पिछले साल एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसके मुताबिक खुले दफ़्तरों ने मेल-मुलाकात और आमने-सामने की बातचीत 70 फीसदी तक कम कर दी है और इलेक्ट्रॉनिक संचार में 20 से 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के एसोसिएट प्रोफेसर और शोध के लेखकों में से एक ऐथन एस. बर्नस्टीन कहते हैं, "निश्चित रूप से उनकी लागत कम है, लेकिन वे मेल-जोल रोकते हैं, इसलिए सहयोग घटता है."

लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि हम फिर से केबिन वाले बंद दफ़्तरों की ओर बढ़ रहे हैं, बल्कि जगह को लेकर हमारे दफ़्तर पहले से भी अधिक लचीले हो रहे हैं.

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स्टार्ट-अप्स उस खाई को भर रहे हैं. इनके फोन बूथ को ऑनलाइन ऑर्डर करके मंगाया जा सकता है और इसके पुर्जों को ख़ुद ही आसानी से जोड़कर बूथ खड़ा किया जा सकता है.

बर्नस्टीन 2018 में शुरू हुई अमरीका की फोन-बूथ कंपनी रूम की एक केस स्टडी पर काम कर रहे हैं. उनका कहना है कि कम लागत वाले ये पॉड्स अपने निजी दफ़्तर को खो देने की थोड़ी भरपाई है.

युवा (मिलेनियल्स) श्रमिकों के लिए यह सही है. फोन बूथ बनाने वाले भी युवा हैं और उनको अपनी कंपनियों के लिए खरीदने वाले भी युवा हैं.

बर्नस्टीन के मुताबिक यह मिलेनियल्स की धारणाओं के अनुकूल है. गैर-मिलेनियल्स को अपने दफ़्तर का रूप-रंग बदलने में झिझक होती है, लेकिन मिलेनियल्स हर तरह के माहौल में काम करने के आदी होते हैं.

"मुझे लगता है कि वे प्रयोग करने, एक ऑफिस स्पेस लेने और उसे घर जैसा बनाने की अधिक संभावना रखते हैं."

फोन बूथ कुछ हजार डॉलर में ही आ जाते हैं. उनको खड़ा करने में हफ्तों या महीनों की जगह कुछ दिन ही लगते हैं. लचीलेपन और अस्थायित्व की आदी पीढ़ी के लिए वे बिल्कुल सही हैं.

ओह, क्या बात है

शेविंग कंपनी हैरीज़ जनवरी 2018 में न्यूयॉर्क सिटी के अपने नये दफ़्तर में शिफ्ट हुई थी.

यहां अलग-अलग आकार के कई कांफ्रेंस रूम थे. एक बड़ा मल्टीपरपस एरिया था और दो-दो लोगों के बैठने लायक 10 छोटे केबिन थे.

हैरीज़ लैब्स के डायरेक्टर रिच चेन (31 साल) का कहना है कि न्यूयॉर्क ऑफिस पिछले डेढ़ साल में तेज़ी से बढ़ा. 2018 में यहां 200 लोग काम करते थे, 2019 में 300 लोग काम करते हैं.

कांफ्रेंस रूम को बुक करना मुश्किल हो गया और कर्मचारियों को लगने लगा कि उन्हें ऐसी जगह चाहिए जो पूरी तरह से साउंड-प्रूफ हो. इसलिए फरवरी में, हैरीज़ ने दो फोन बूथ खरीदे.

चेन कहते हैं, "ऑफिस में कोई निर्माण करना मुश्किल था, क्योंकि लोग पहले से यहां काम कर रहे थे." फोन बूथों को एक वीकेंड पर ही लगा दिया गया. सभी ने उनको पसंद किया.

कंपनी ने महसूस किया कि कर्मचारियों का रिस्पांस बहुत सकारात्मक रहा.

चेन कहते हैं, "मैं फाइनेंस और लीगल टीम के करीब बैठता हूं. मैं देखता हूं कि उस टीम के लोग उन बूथों का रोज इस्तेमाल करते हैं." हैरीज़ के फैसिलिटी मैनेजर तो एक या दो और बूथ मंगाना चाहते हैं.

Change.org के ऑपरेशंस एंड लीगल अफेयर्स के उपाध्यक्ष डैनी मोल्दोवन का कहना है कि उनके न्यूयॉर्क ऑफिस में लगे तीन फोन बूथ ने ऑफिस की संस्कृति सुधार दी है.

"टीम को राहत है कि उनके निजी कॉल के लिए अधिक विकल्प मौजूद हैं. उनकी बातचीत से दूसरे लोगों को परेशानी नहीं होती और वे अधिक उत्पादक बने रहते हैं."

उनका कहना है कि फोन बूथ हर समय उपयोग किए जाते हैं. शुरुआत में तो लोग उनके खाली होने का इंतज़ार करते थे. इसलिए ऑफिस में जितनी जगह हो सकती थी, उतने में हमने उनकी तादाद बढ़ा दी."

मोल्दोवन कंपनी के विक्टोरिया, कनाडा ऑफिस के लिए भी फोन बूथ खरीदना चाहते हैं.

यहां एकांत है

टेक्नोलॉजी ने पतले से फोन बूथ से भी काम करना संभव कर दिया है. लैपटॉप, वीडियो चैट और स्मार्टफोन से पहले के जमाने में ऐसा अगर नामुमकिन नहीं था तो भी बहुत मुश्किल था.

बर्नस्टीन कहत हैं, "ज़्यादातर युवा या कहें तो ज़्यादातर लोग अपने सभी उपकरण साथ रखते हैं. छोटी जगह में भी हम उनका इस्तेमाल कर सकते हैं क्योंकि उसके लिए आपको तार वाले टेलीफोन की ज़रूरत नहीं होती."

कस्टमर इंगेजमेंट प्लेटफॉर्म ब्रेज ने अपने न्यूयॉर्क ऑफिस में 2016 में फोन बूथ लगाया था.

उनके पुराने ऑफिस में करीब 15 बूथ थे. जून में वे नये ऑफिस में शिफ्ट हुए और 236 कर्मचारियों के लिए 17 बूथ का ऑर्डर दिया.

ब्रेज के सॉफ्टवेयर इंजीनियर रेयान स्कॉट कैंपबेल कहते हैं, "पुराने ऑफिस में मैं हफ्ते में कई बार कॉल करने या बैठकर काम करने के लिए उनका इस्तेमाल करता था."

वहां बैठकर उन्होंने कई बार घंटे-घंटे भर लंबा रिमोट कोडिंग इंटरव्यू भी लिया है.

वह कहते हैं, "हमारा ओपन फ्लोर-प्लान ऑफिस है. इसलिए शांति की कुछ जगह होना बहुत अच्छा था."

हैरीज़ के चेन को लगता है कि कॉल लेने या अपना निजी परफॉर्मेंस रिव्यू लिखने के लिए एकांत के अलावा यह स्टार्ट-अप्स और युवाओं के अनौपचारिक नज़रिये के लिए भी माकूल है. चेन ने हमसे बात करने के लिए भी अपने ऑफिस के एक बूथ का इस्तेमाल किया.

चलो थोड़ा टहलकर आएं

दुनिया भर में कुल श्रमशक्ति का आधा हिस्सा मिलेनियल्स का होने वाला है. पिछली पीढ़ियों ने जो खुले दफ़्तर बनाए हैं, उसकी समस्याएं उनको विरासत में मिली हैं.

वे काम करने की जगह को लेकर बहुत मांग नहीं करते, बल्कि ख़ुद को समायोजित करना जानते हैं.

क्यूब्ड के लेखक सावल कहते हैं, "इस मामले में मिलेनियल्स के पास ज़्यादा विकल्प नहीं हैं. न ही ज़्यादातर लोगों के पास इस बात के विकल्प हैं कि उनके ऑफिस कैसे दिखने चाहिए."

"पीढ़ियों के पास इच्छाएं नहीं होतीं, उनके आगे बस अड़चनें होती हैं और संभवतः मिलेनियल्स पीढ़ी को सबसे ज़्यादा चुनौतियां मिली हैं."

ये छोटे बूथ थोड़ी सी निजता और स्वायत्तता वापस देते हैं. बर्नस्टीन इस सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश कर रहे हैं कि वे कहां तक पर्याप्त हैं.

उन्होंने एक विचार पेश किया कि किसी ऑफिस में काम करने वाले हर व्यक्ति का अपना निजी फोन बूथ हो.

"मेरे लिए प्रश्न यह है कि अब यह हमारे पोर्टफोलियो का हिस्सा है तो हममें से कितनों को इसकी वास्तव में ज़रूरत है और अगर यह नहीं होता तो उस जगह का हम क्या करते?"

बर्नस्टीन पूछते हैं कि अगर कंपनियां अपने ओपन प्लान की समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए ऐसे ज़्यादा से ज़्यादा फोन बूथ लगा रही हैं तो क्या हम वहीं नहीं पहुंच रहे हैं, जहां (केबिन) से हम चले थे.

"हो सकता है कि पुरानी जगह तक पहुंचने के लिए हमने और सघन रास्ता अख्तियार किया हो."

म्यूजियम ऑफ़ मॉडर्न आर्ट के वास्तुकला और डिजाइन विभाग की सीनियर क्यूरेटर पाओला एंटोनेली मिलेनियल्स पीढ़ी की नहीं हैं. उन्होंने फोन बूथ का एक विकल्प सुझाया है.

एक फोन बूथ कंपनी के डिजाइन देखने के बाद एंटोनेली की प्रतिक्रिया थी- "नहीं, मेरे लिए यह बहुत चरम स्थिति है."

मैंने उनसे पूछा कि क्या वह एक बेहतर समाधान सुझा सकती हैं. उनका उत्तर था- "हां, टहलने के लिए निकल जाना."

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