वो देश जहां काम के लिए न तो ऑफ़िस जाना ज़रूरी है और न समय तय है

  • 17 अगस्त 2019
बीबीसी वर्कलाइफ़

फ़िनलैंड में काम पूरा करने के लिए न ऑफिस आना ज़रूरी है, न ही तय समय पर काम शुरू करना. काम होना चाहिए चाहे आप जहां बैठकर करें.

मिका हर्कनन को फ़िनलैंड की राजधानी हेलसिंकी की सर्दियां नागवार लगती थीं, इसलिए छह महीने तक उन्होंने स्पेन में रहकर काम किया.

उनकी पत्नी कुछ ही समय पहले मां बनी थी और छुट्टी पर चल रही थीं.

हर्कनन ने स्पेन के मलागा में किराये का घर लिया और वहीं से आईटी कंपनी में सीनियर टीम मैनेजर की नौकरी करते हुए परिवार को भी समय दिया.

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उनके काम में अपनी टीम के 20 सदस्यों को मैनेज करना भी शामिल था. अब वह हेलसिंकी लौट आए हैं. उनका कहना है कि उनका समय "जितना सोचा था, उससे भी शानदार गुजरा."

हर्कनन ऑनलाइन मैसेजिंग टूल स्लैक और वीडियो कांफ्रेंस के ज़रिये अपने सहकर्मियों के संपर्क में रहते थे. बीच-बीच में वह फ़िनलैंड भी चले आते थे.

उनका शेड्यूल ऑफिस के घंटों में बंधा हुआ नहीं था, फिर भी वे महत्वपूर्ण बैठकों में फ़ोन पर संपर्क में रहते थे.

स्पेन का मौसम भी उनको रास आता था, जिसके बारे में उनको लगता है कि उससे उनकी उत्पादकता बढ़ती है.

हर्कनन अपनी आईटी कंपनी एंबिंशिया के पहले कर्मचारी थे जिनको इतनी दूर रहकर नौकरी करने की इजाज़त मिली. लेकिन यह कंपनी काम में लचीलेपन को बहुत पहले से तवज्जो दे रही थी.

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कहीं से भी करो काम

एंबिशिया में 200 कर्मचारी थे. 15 साल पहले इसने छोटे रीज़नल ऑफिस खोलने शुरू किए थे ताकि उसके कर्मचारियों को हेलसिंकी तक आने-जाने में समय न गंवाना पड़े.

दक्षता और रचनात्मकता बढ़ाने के लिए उसने कर्मचारियों को दूर से भी काम करने की आज़ादी दी.

टैलेंट को आकर्षित करने के लिए अब यह कंपनी काम करने के लिए और लचीले व चुस्त पैटर्न को अपना रही है.

फ़िनलैंड सिर्फ़ 55 लाख की आबादी वाला छोटा, मगर हरा-भरा देश है. यह यूरोप का बड़ा टेक्नोलॉजी हब है, जिसने नोकिया का उतार-चढ़ाव भरा इतिहास देखा है.

यहां बड़ी आईटी कंपनियां, गेमिंग स्टार्ट-अप्स और डिजिटल वित्तीय सेवाएं देने वाली कंपनियां हैं.

एंबिशिया की एचआर मैनेजर जेनी फ्रेडरिक्सन-बास कहती हैं, "सभी लोग बड़े शहरों की भीड़-भाड़ में नहीं रहना चाहते."

"टैलैंट अगर आपसे 5 घंटे की दूरी पर है तो उसका उपयोग न करना समझदारी नहीं है. वे झील के किनारे या जंगल के पास रह सकते हैं, फिर भी नौकरी कर सकते हैं."

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घंटे समायोजन का अधिकार

कर्मचारियों की ज़रूरत को समायोजित करने में फ़िनलैंड की हर कंपनी एंबिशिया की तरह नहीं है.

लेकिन काम के घंटे समायोजित करना फ़िनलैंड की कार्यसंस्कृति में पिछले दो दशकों से है. दूसरे देशों में आज भी इसे अधिकार की जगह अतिरिक्त सुविधा समझा जाता है.

फ़िनलैंड ने 1996 में वर्किंग आवर्स एक्ट बनाया था. यह क़ानून कर्मचारियों को अधिकार देता है कि वे काम शुरू करने और ख़त्म करने का समय अपने हिसाब से 3 घंटे पहले या बाद तक समायोजित कर सकते हैं.

2011 तक फ़िनलैंड काम के घंटों में लचीलेपन के मामले में अव्वल देश बन गया था.

वैश्विक लेखा कंपनी ग्रांट थॉर्नटन के एक अध्ययन के मुताबिक फ़िनलैंड की 92 फ़ीसदी कंपनियां कर्मचारियों को काम के घंटे समायोजित करने की इजाज़त देती हैं.

ब्रिटेन में 76 फ़ीसदी, रूस में 50 फ़ीसदी और जापान में सिर्फ़ 18 कंपनियां ऐसा करती हैं.

बड़ी वैश्विक कंपनियां इस अवधारणा को अपना रही हैं. ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन ने इसके लिए क़ानून बनाए हैं. लेकिन फ़िनलैंड सबसे आगे है.

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नया क़ानून

2020 में नया वर्किंग आवर्स एक्ट प्रभावी हो जाएगा. यह क़ानून पूर्णकालिक कर्मचारियों को यह तय करने का अधिकार देता है कि वे अपना कम से कम आधा काम कब करें.

फ़िनलैंड के पर्यावरण मंत्रालय की सलाहकार और वरिष्ठ अधिकारी तार्जा क्रोगर कहती हैं, "इसका मतलब आधुनिक दुनिया को अपनाना है."

नये क़ानून के मुताबिक कर्मचारियों को अब भी सप्ताह में औसत 40 घंटे काम करने होंगे लेकिन वे काम करने की जगह और काम शुरू करने का समय ख़ुद से तय करेंगे.

मतलब यह कि वे चाहें तो अपने कॉटेज या पसंदीदा कॉफ़ी शॉप से भी काम कर सकते हैं.

घर पर अगर बच्चों को संभालने की जिम्मेदारी हो या शाम को कसरत करने के लिए वक़्त निकालना हो तो वे सुबह अपना काम ज़ल्दी शुरू कर सकते हैं.

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कुछ युवा लंबे घंटों तक काम कर सकते हैं ताकि वे यात्राओं के लिए अपने खाते में समय जमा कर सकें.

वाई-फ़ाई और क्लाउड आधारित तकनीक की व्यापक उपलब्धता ने क़ानून में बदलाव की मांग तेज़ की है.

क्रोगर कहती हैं, "कई पेशों में यह संभव हो गया है कि कर्मचारी दूर बैठकर ही ऑफ़िस की तरह काम कर सकते हैं."

कंपनियों को भी इसके फायदे हैं, क्योंकि इससे कर्मचारियों की दक्षता और उत्पादकता बढ़ जाती है.

क्रोगर कहती हैं, "घर और दफ़्तर दोनों ज़िंदगियों में तालमेल बन जाए तो लोग ज़्यादा उत्पादक बन जाते हैं."

ब्रिटेन की टेक इंडस्ट्री के बारे में एचएसबीसी की एक हालिया रिपोर्ट में पाया गया कि काम के घंटे लचीले होने पर 89 फ़ीसदी उत्तरदाताओं को लगता है कि उनकी उत्पादकता बढ़ती है.

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर निकोलस ब्लूम ने चीन के कॉल सेंटर के 16 हज़ार कर्मचारियों का अध्ययन किया.

उन्होंने पाया कि लचीलापन होने से उनकी उत्पादकता 13 फ़ीसदी बढ़ती है और वे बीमारी की छुट्टी कम लेते हैं.

अमरीकी फर्म टिनीपल्स ने 2016 में पाया था कि दूर से काम करने वाले लोग अधिक ख़ुश रहते हैं और ख़ुद को दफ़्तरों में परंपरागत नौकरी करने वालों से अधिक मूल्यवान समझते हैं.

विश्वास की संस्कृति

फ़िनलैंड के लोग मानते हैं कि कामकाजी लचीलेपन की सफलता का राज़ यहां की विश्वास की संस्कृति में है, जो लोगों के मन में गहरे बैठी हुई है.

यहां के लोग एक-दूसरे पर जितना भरोसा करते हैं, उतना यूरोप के किसी भी दूसरे देश में नहीं दिखता.

हेलसिंकी से 10 किलोमीटर दूर ऑल्टो यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ़ बिजनेस में संगठन और प्रबंधन के प्रोफ़ेसर ईरो वारा इसका श्रेय समानता और वित्तीय सुरक्षा के मॉडल को दते हैं.

आम सहमति पर आधारित निर्णय लेने की संस्कृति से संस्थानों में लोगों का भरोसा बढ़ता है.वह कहते हैं, "इसकी जड़ें इतिहास में हैं. लोग इसके आदी रहे हैं. यह पिछले एक-दो दशक में पैदा हुई चीज़ नहीं है."

यह विश्वास हो तो उम्मीद रहती है कि जिस कर्मचारी ने दूर रहकर काम करने का फ़ैसला किया है, वह सुस्त नहीं पड़ जाएगा.

"अगर आप अच्छी तरह से काम करते हैं तो आपके साथ व्यवहार भी अच्छा होगा. किसी भी तरह की समस्या होने पर उसका भी निदान है."

"फ़िनलैंड या दूसरे नॉर्डिक देशों में संगठन दूसरी जगहों से अधिक सपाट हैं, पदों में अंतर कम हैं और यथार्थवाद मौजूद है. इन तत्वों ने कामकाजी लचीलेपन को संभव बनाया है."

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काम और ज़िंदगी का संतुलन

फ़िनलैंड के लोग काम और ज़िंदगी के बीच संतुलन पर पहले से ध्यान देते आए हैं. इसलिए भी यहां की कंपनियां काम के लचीले घंटों के लिए तैयार हैं.

यहां सिर्फ़ 4 फ़ीसदी कर्मचारी नियमित रूप से सप्ताह में 50 घंटे या अधिक काम करते हैं. यह पश्चिमी जगत के औसत से बहुत कम है.

वारा इसके पीछे कई तत्वों का हाथ मानते हैं. यहां मज़बूत संगठन की संस्कृति है जो काम के घंटों को बढ़ने नहीं देती. साथ ही, यहां के लोगों को झीलों और जंगलों से भी मुहब्बत है.

फ़िनलैंड के लोग यूरोप के किसी भी देश से ज़्यादा कसरत करते हैं. मौसम प्रतिकूल हो तो भी वे कई बाहर घर के बाहर ही करना पसंद करते हैं.

वारा कहते हैं, "चीज़ें थोड़ी बदल रही हैं. मैं कई लोगों को जानता हूं जो इतना काम कर रहे हैं जितना उनको नहीं करना चाहिए, फिर भी संतुलन बनाकर रखना फ़िनलैंड की कार्य संस्कृति के मूल में है."

हेलसिंकी के सबसे बड़े स्टार्ट-अप परिसर, मारिया 01, में यह नज़रिया साफ़-साफ़ झलकता है. यहां पहले एक अस्पताल था, मगर अब वहां 160 छोटी कंपनियों और स्केल-अप्स के दफ़्तर हैं.

इस हब के सीईओ वोइटो कांगस का कहना है कि किसी उत्पाद के लॉन्च के कुछ स्टार्ट-अप्स अपने कर्मचारियों को ज़्यादा घंटे काम करने के लिए कहते हैं, लेकिन उनको हमेशा अपनी छुट्टियों लेने और अवकाश का आनंद उठाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है.

"हममें से ज़्यादातर लोग यह मानते हैं कि काम में बिताया गया समय ही सब कुछ नहीं है. आपको ख़ुद को स्वस्थ रखना होता है, मानसिक सेहत दुरुस्त रखनी होती है. इसलिए हम संतुलन का प्रयास करते हैं."

मारिया 01 से चलने वाली एक कंपनी की कम्यूनिकेशन मैनेजर पाउलिना एलानेन कहती हैं, "यहां के लोग हफ़्ते में 40 घंटे काम को लेकर बहुत सख़्त हैं और लंच टाइम एक घंटे का होना चाहिए."

"यहां अमरीका की तरह नहीं है कि एक मीटिंग से दूसरी मीटिंग में जाने के बीच में बस कुछ सैंडविच जैसी चीज़ खा लें."

"जुलाई में अधिकतर लोग छुट्टियां लेते हैं. जुलाई में यहां कोई काम नहीं होता. सभी लोग समर कॉटेज में होते हैं."

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सहयोग और संचार

स्कैंडिनेविया के लोग सहयोग और आम सहमति से निर्णय लेने के लिए मशहूर हैं.

नियोक्ता संगठनों, श्रम संगठनों और राजनेताओं, सबने मिलकर नये क़ानून का मसौदा तैयार किया, जिसे मार्च 2019 में संसद ने पास किया. अक्तूबर में इस पर आख़िरी मुहर लगनी है.

इसलिए इस विचार का बहुत कम विरोध हुआ, हालांकि कुछ संगठन प्रतिनिधियों को चिंता है कि दूर से काम करने पर काम और निजी ज़िंदगी के बीच का फर्क मिटने लगेगा.

ट्रेड यूनियनों के केंद्रीय संगठन, SAK की वकील अनु-तुइजा लेहटो कहती हैं, "इसमें जोखिम है. नियोक्ता कर्मचारी को बहुत अधिक काम दे सकते हैं और वह यह कह नहीं पाएगा कि इतने काम के लिए समय नहीं होगा. कर्मचारी को अपना ख्याल ख़ुद रखना है."

कर्मचारियों और नियोक्ताओं के बीच लिखित करार के बाद भी स्टाफ को ऐसा महसूस होगा कि उन्हें हर समय ई-मेल देखते रहना चाहिए और फ़ोन कॉल्स का जवाब देते रहना चाहिए. इसका नतीजा होगा बिना वेतन का ओवरटाइम करना.

दुनिया भर में हुए शोध भी यही निष्कर्ष देते हैं कि अनियमित घंटों में काम करने वाले लोग निर्धारित घंटे काम करने वालों की तुलना में अधिक समय तक काम में लगे रहते हैं.

ईरो वारा का कहना है कि नये क़ानून के मुताबिक ख़ुद को ढाल रही कंपनियों के लिए संचार महत्वपूर्ण होगा.

मैनेजरों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके कर्मचारी ज़रूरी काम पूरे कर रहे हैं और व्यवसाय से जुड़े हुए महसूस कर रहे हैं.

"हो सकता है कि लोगों को पता ही न चले कि उनके सहकर्मियों या परियोजनाओं के साथ क्या हुआ है या उन्हें लगने लगे कि उन्हें सब कुछ बताया नहीं जा रहा."

वारा के मुताबिक इससे उस भरोसे का स्तर घटता चला जाएगा, जिसने फ़िनलैंड को कामकाजी लचीलापन अपनाने की जगह तक पहुंचाया है.

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अकेला कॉफी ब्रेक?

एक और प्रमुख चिंता सामाजिकता की है. ऑफिस की कॉफी दुकानों के पास मिलना-मिलाना हो जाता है. दूर बैठकर काम करने पर यह नहीं हो सकता.

मारिया 01 के एक कैफे में तीन सहकर्मियों के साथ लंच के लिए आई सेल्स मैनेजर टिया पानानेन कहती हैं, "मुझे तो ऑफिस से ही काम करना पसंद है क्योंकि आसपास की टीम मुझे पसंद है."

उनको डर है कि अगर नये क़ानून के बाद ढेर सारे लोग घर से काम करने लगे तो ऑफिस खाली हो जाएंगे.

"हो सकता है कि पूरे शहर में कैफेटेरिया और रेस्तरां खुल जाएं और लोग वहीं से काम करने लगें."

वारा यहां नेताओं और बिजनेस लीडर्स के लिए भी चुनौती देखते हैं. उनको लगता है कि फ़िनलैंड भी दूसरे कई देशों की तरह स्थायी नौकरियों से हायर और फायर वाली गिग इकॉनमी की ओर बढ़ रहा है.

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ख़तरे और भी हैं

फ्रीलांसिंग और छोटी अवधि के करार इस इकॉनमी की ख़ासियतें हैं. काम के लचीले घंटे भी गिग इकॉनमी की एक ख़ासियत है.

नया क़ानून लागू होने पर किसी एक जगह पर एक नियोक्ता के लिए काम करने वाले ज़्यादा लोग नहीं होगे.

उनकी नौकरियां मौजूदा क़ानूनों और नियोक्ता संगठनों और श्रम संघों के बीच हुए करार पर चल रही हैं. आगे ऐसा नहीं होगा.

मतलब यह है कि आने वाले क़ानून से संरक्षित लोगों की संख्या घटती जाएगी और लोगों को स्थायी नौकरी करने वाले लोगों से भी कम लचीली कार्य स्थितियां मिल सकती हैं.

वारा कहते हैं, "कर्मचारियों के ऐसे नये समूह सामने आ सकते हैं जो क़ानून से कम संरक्षित होंगे और उनको अपने अधिकारों का पता भी नहीं होगा."

"इसी तरह कंपनियों के मैनेजरों को भी पूरा पता नहीं होगा कि क्या सही है और ग़लत."

इन चुनौतियों के बावजूद वारा को लगता है कि फ़िनलैंड दुनिया भर के लिए लचीले कामकाज का एक प्रतीक बना रहेगा.

"फ़िनलैंड और नॉर्डिक देशों में सिर्फ़ बड़े नाम वाली कंपनियां लचीले कामकाज की पेशकश नहीं कर रही हैं. सभी जगह सकारात्मक रूप से ऐसा हो रहा है. इससे सभी के लिए चीज़ें बेहतर होंगी."

(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी वर्कलाइफ़ पर उपलब्ध है.)

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