स्वीडन के लोग पैसे के बारे में बात क्यों नहीं करते

  • 8 नवंबर 2019
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स्टॉकहम के ऑयस्टरमम तट पर प्राइवेट यॉट और तैरते कॉकटेल बार की भरमार है. पास में ही स्ट्रैंडवगेन के रियल इस्टेट सबसे महंगे हैं. यहां एक्सक्लूसिव बुटीक और रेस्तरां भी हैं.

यहां के क़रीब ही 18वीं सदी की सुंदर इमारतें, शानदार ऑफ़िस और प्राइवेट मेंबर बार हैं. यह जगह डिज़ाइनर चश्मे पहनकर धूप सेंकने वाले लोगों से भरी रहती है.

यहां किसी ऐसे व्यक्ति को ढूंढ़ना लगभग नामुमकिन है जो अपनी दौलत के बारे में सहज रूप से बात कर सके. 24 साल के विक्टर हेस एक बड़े स्वीडिश ब्रांड के लिए इंटरनेशनल टैलेंट प्रोग्राम को ज्वाइन करने वाले हैं, लेकिन वह सैलरी नहीं बताते.

स्वीडन के बारे में आम धारणा है कि यहां सामाजिक लोकतंत्र है, टैक्स की दरें ऊंची हैं और आमदनी की गैरबराबरी कम है. लेकिन 1990 के दशक से ही अमीरों और गरीबों के बीच की खाई चौड़ी हो रही है. ऊपर की 20 फीसदी आबादी अब नीचे की 20 फीसदी आबादी के 4 गुणा ज़्यादा कमाती है.

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डींग हांकने की मनाही

ऊंची आमदनी कई देशों में क़ामयाबी की पहचान मानी जाती है, लेकिन स्वीडन की एक परंपरा लोगों को इस बारे में बात करने से रोकती है.

हमने कुछ धनी युवाओं से बात करने की कोशिश की तो कुछ ने अनौपचारिक रूप से दूसरे बड़े घर, परिवार के यॉट, स्पोर्ट्स कार या नाइट क्लब में शैंपेन पीने के बारे में खुशी-खुशी बात की.

लेकिन यही बातें औपचारिक तरीके से पूछने पर उनसे कुछ भी कहलवाना बहुत मुश्किल था.

एक टेक्स्ट मैसेज में लिखा था- "मुझे लगता है कि ऐसा करना डींग हांकने जैसा होगा, जिससे मैं सहज महसूस नहीं करता." कई लोगों की भावना ऐसी ही है.

अन्य लोग पहले इंटरव्यू के लिए राजी थे लेकिन बाद में "बहुत व्यस्त" हो गए या भूल गए.

ऐसा क्यों है? दुनिया के कुछ हिस्सों मे दौलत के बारे में बातें करने में कुछ भी बुरा नहीं समझा जाता, लेकिन स्टॉकहोम में किसी को भी अमीर होने पर गर्व क्यों नहीं है?

जांटेलगेन की अवधारणा

स्वीडन की संस्कृति के बारे में लिखने वाली लोला अकिन्मेड एकरस्ट्रॉम एक दशक से भी लंबे समय से स्टॉकहोम में रह रही है. उनका कहना है कि पैसे के बारे में बात करना स्वीडन में बहुत असहज विषय है.

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Image caption लोला अकिन्मेड

किसी अजनबी के सामने शेखी बघारने या तनख्वाह पर चर्चा करने से ज़्यादा सहज तरीके से लोग सेक्स पर चर्चा कर लेते हैं.

28 साल की स्वीडिश पत्रकार स्टिना डलग्रेन ने पिछले कई साल अमरीका में बिताए हैं. वह भी एकरस्ट्रॉम से सहमत हैं.

"अमरीका में जब आप कहते हैं कि आप ढे़र सारे पैसे कमा रहे हैं तो लोग आपके लिए खुश होते हैं और शाबाशी देते हैं. लेकिन यहां स्वीडन में जब आप कहते हैं कि आपकी तनख्वाह अच्छी है तो लोग सनकी समझते हैं."

कई सांस्कृतिक कमेंटेटर मानते हैं कि पैसे के बारे में बातें न करने की एक वजह जांटेलगेन नाम का नॉर्डिक कोड है जिसकी जड़ें गहरी हैं.

यह इस विचार को बढ़ावा देता है कि आप कभी न सोचें कि आप किसी और से बेहतर हैं.

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एकरस्ट्रॉम कहती हैं, "जांटेलगेन एक अनकहा सामाजिक नियम है जो स्वीडन और अन्य नॉर्डिक देशों में मौजूद है."

उन्होंने अपनी किताब "लगोम: द स्वीडिश सीक्रेट ऑफ़ लिविंग वेल" में लिखा है- "यह दिखावा नहीं करने, बेमतलब की शेखी नहीं बघारने के बारे में है."

"यह समूह के सभी लोगों को बराबर समझने और तनाव दूर रखने का तरीका है."

सदियों पुरानी परंपरा

जांटेलगेन का मतलब है जांटे का नियम- यह शब्द नियमों को मानने वाले शहर जांटे से लिया गया है, जिसका जिक्र नॉर्वेजियन-डेनिश लेखक अक्सेल सैंडेमोस ने 1933 में अपनी कहानियों की किताब में किया था.

स्कॉटिश-नॉर्वेजियन शिक्षाविद डॉ. स्टीफेन ट्रॉटर का मानना है कि यह धारणा नॉर्डिक देशों- ख़ासकर ग्रामीण इलाकों में- सदियों से मौजूद है.

वह कहते हैं, "जांटेलगेन सामाजिक नियंत्रण का एक तंत्र है. यह सिर्फ़ पैसे के बारे में नही है. इसमें दूसरों से अधिक जानने का ढोंग करने की भी मनाही है."

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शालीनता और विनम्रता के मामले में यह ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में लोकप्रिय "टॉल पॉपी सिंड्रोम" जैसा ही है.

स्कॉटलैंड में लोग "केकड़ा मानसिकता" का जिक्र करते हैं जिसमें बाल्टी में रखे केकड़े में से अगर कोई केकड़ा बाहर निकलने की कोशिश करता है तो दूसरे केकड़े उसे वापस खींच लेते हैं.

ट्रॉटर कहते हैं, "स्कैंडिनेविया ने एकदम सही शब्द चुना है."

ट्रॉटर के मुताबिक स्वीडन और अन्य नॉर्डिक देशों में जांटेलगेन जिस तरह से काम करता है, वह उन देशों के ख़ास सांस्कृतिक मानदंडों से जुड़ा है.

"आप अपने दूसरे घर और वहां की सुख-सुविधाओं के बारे में बातें कर सकते हैं- यह सामान्य बात है क्योंकि नॉर्डिक में कई लोगों के पास दूसरे घर हैं.

"लेकिन अगर आपने यह बताया कि आपने दो लैम्बोर्गिनी कार पर इतने ही पैसे ख़र्च किए हैं तो लोग आप पर हंसेंगे."

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बंद दरवाजे के पीछे

एकरस्ट्रॉम का कहना है कि स्वीडन ने वर्गविहीन सामाजिक लोकतंत्र की अपनी वैश्विक छवि बनाए रखने में बहुत मेहनत की है, फिर भी कई लोग अपनी हैसियत वालों के साथ ही उठते-बैठते हैं.

इसका मतलब यह है कि जांटेलगेन का नियम समूह के लोगों के आधार पर बदल सकते हैं. समान पृष्ठभूमि के लोगों के बीच डींग हांकना अधिक स्वीकार्य है.

"बंद दरवाजे के पीछे एक जैसी हैसियत वाले लोगों के बीच वे (अमीर लोग) ज़्यादा सहज होते है."

ऑयस्टरमम में 33 साल के आंद्रेस केन्सेन एक स्मार्ट बुटीक में दोपहर बाद का वक़्त बिता रहे हैं. वह भी मानते हैं कि जांटेलगेन संदर्भगत है.

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Image caption आंद्रेस केन्सेन

"मैं निश्चित तौर पर अपने दोस्तों से कहूंगा कि हम बाहर घूम रहे हैं. इसे इंस्टाग्राम या फेसबुक पर दिखाएंगे. लेकिन ये बातें मैं किसी अजनबी से नहीं कहूंगा जो मुझे अभी-अभी मिला है."

विरोध के स्वर

क़ामयाब युवाओं ने जांटेलगेन की आलोचना शुरू कर दी है. वे दौलत और क़ामयाबी के बारे में खुलापन चाहते हैं.

22 साल की निकोले फ़ाल्कियानी उन्हीं में से एक हैं. उन्होंने टीन एज़र रहते हुए ब्लॉगिंग से पैसे कमाने शुरू किए थे और अब एक प्रभावशाली हस्ती हैं. इंस्टाग्राम पर उनके 3,54,000 फॉलोअर्स हैं.

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Image caption निकोले फ़ाल्कियानी

शहर के बाहर एक कैफे में वह ग्लैमरस वेडिंग-थीम्ड ज्वैलरी शूट कर रही हैं. फ़ीस के बारे में पूछने पर वह पलकें नहीं झपकातीं. उनकी फ़ीस है 20 हजार डॉलर.

फ़ाल्कियानी ये पैसे डिजाइनर बैग और यात्राओं पर ख़र्च करती हैं. 20 साल की उम्र में ही उन्होंने सिटी सेंटर में एक घर खरीदा था.

वह कहती हैं, "मुझे खुशी होगी अगर यह जांटेलगेन गायब हो जाए. वह यहां रहने वाले सभी लोगों के लिए अच्छा होगा. यदि हम पैसे के बारे में बात करें तो हमारा समाज कहीं ज़्यादा खुला होगा."

"बराबरी का विचार अच्छा है लेकिन इससे काम नहीं चलता, क्योंकि अगर आप दूसरों से अधिक मेहनत कर रहे हैं तो आपको उस पर गर्व होना चाहिए."

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सोशल मीडिया का असर

नॉर्वे की बर्गेन यूनिवर्सिटी में राजनीति के एसोसिएट प्रोफेसर कॉर्नेलियस कैप्पेलेन का मानना है कि सोशल मीडिया के उभार ने युवाओं को जांटेलगेन के ख़िलाफ़ कर दिया है.

ब्लॉगिंग और वीडियो-ब्लॉगिंग ने उग्र व्यक्तिवाद को बढ़ाया है जो भीड़ से अलग खड़े होने का समर्थन करता है.

हाल के दिनों तक दूसरे पश्चिमी देशों, ख़ास तौर पर अमरीका, की तुलना में नॉर्डिक देशों में ऐसा कम था.

वह कहते हैं, "अब ज़्यादा लोग अब इस शब्द को गाली की तरह मानते हैं- ख़ासकर कई युवा खुलेआम कहते हैं कि वे इस मानसिकता से नफरत करते हैं."

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एकरस्ट्रॉम भी मानती हैं कि सोशल मीडिया का बड़ा असर पड़ा है, क्योंकि फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम पर डींग हांकना आम बात हो गई है.

स्वीडन में जिनकी निजी उपलब्धियां हटकर हैं वे इसे सार्वजनिक करने में अधिक सहज महसूस करने लगे हैं.

"वे बहुत कुशल, प्रतिभाशाली लोग हैं जो जांटेलगेन से दबाए गए हैं, लेकिन वे देखते हैं कि औसत दर्जे के लोग ऑनलाइन शेखी बघारते हैं."

"जांटेलगेन धीरे-धीरे ख़त्म हो जाएगा क्योंकि जो लोग चुप रहते थे वे खड़े होंगे और कहेंगे- तुम्हें पता है मैं इसमें अच्छा हूं. सोशल मीडिया आपको उन लोगों से भी जोड़ता है जो जांटेलगेन को नहीं जानते."

एकरस्ट्रॉम को यह भी लगता है कि आप्रवसान बढ़ने से जांटेलगेन की लोकप्रियता घटी है.

स्वीडन में अन्य नॉर्डिक देशों से अधिक विविधता है. करीब 25 फीसदी लोगों का जन्म विदेश में हुआ है या उनके माता-पिता अलग-अलग देशों के हैं.

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विविधता से भरा देश

"दूसरी संस्कृतियां अपने साथ क़ामयाबी का, प्रतिभाशाली लोगों का या कौशल का जश्न मनाने की परपंरा ला रही हैं."

फ़ाल्कियानी इससे सहमत हैं. वह स्वीडन में पैदा हुईं और यहीं पली-बढ़ी लेकिन उनके माता-पिता इटली के हैं.

उन्हें यह समझने में मुश्किल होती थी कि जिस विषय पर वह घर में या इटली के रिश्तेदारों से बात करती हैं उस पर बात करना स्वीडन के समाज में स्वीकार्य है या नहीं.

"मुझे लगता है कि यह बेहतर होगा क्योंकि हम अधिक यूरोपीय हो रहे हैं, स्वीडन में अधिक विदेशी रह रहे हैं और वे अपनी संस्कृति यहां ला रहे हैं. हम कई अमरीकी टीवी प्रोग्राम देखते हैं और उनमें जांटेलगेन बिल्कुल नहीं है."

लेकिन निकोले को नहीं लगता कि यह परंपरा पूरी तरह ख़त्म हो जाएगी क्योंकि स्वीडन या स्कैंडिनेविया की संस्कृति में इसकी जड़ें बहुत गहरी धंसी हुई हैं.

कैप्पेलेन को भी नहीं लगता कि यह अवधारणा ज़ल्दी ख़त्म होगी. "मुझे इसकी सादगी के बचे रहने की उम्मीद है. मुझे लगता है कि इसका नकारात्मक पहलू- कामयाब लोगों की अनदेखी करना- ख़त्म हो जाएगा."

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आप्रवासियों की पसंद

स्वीडन में रहने वाले कुछ आप्रवासियों का कहना है कि उन्होंने जांटेलगेन को अपना लिया है.

35 साल की नतालिया इरिबारा उन्हीं में से एक है. तीन साल पहले वह चिली से स्टॉकहोम आई हैं.

"मुझे लगता है कि चिली में हमारा समाज बहुत ही आत्ममुग्ध है जहां उपलब्धियां वास्तव में बहुत मायने रखती हैं- जैसे शैक्षणिक योग्यता, खेल, सुंदरता, कार, स्कूल, घर वगैरह."

"यहां एक मॉडल हमारी पड़ोसी हैं लेकिन वह कभी नहीं कहतीं कि मैं फलां मैग्जीन में छपी हूं."

"पड़ोस में ही एक फोटोग्राफर हैं जिनकी बड़ी उपलब्धियां हैं. वह भी इस बारे में कभी बात नहीं करते."

"मेरे लिए विनम्रता बहुत अहम है. स्वीडन में जो चीज़ मुझे सबसे ज़्यादा पसंद है वह यह है कि जांटेलगेन में भौतिक चीज़ें बहुत मायने नहीं रखतीं."

(मूल लेख अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी वर्कलाइफ़ पर उपलब्ध है.)

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