शाकाहारी कंडोम कैसे शारीरिक रिश्ते के लिए फ़ायदेमंद हैं?

  • 23 दिसंबर 2019
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2015 में फिलिप सीफ़र और वाल्डेमर ज़ाइलर अपने न कारोबार के लिए क्राउड फ़ंडिंग कर रहे थे.

सीफ़र कहते हैं, "पैसे दान देने वाले हमसे एक ही सवाल पूछते थे- क्या कंडोम शाकाहारी हैं?

सीफ़र और ज़ाइलर को तब अहसास भी नहीं था कि कंडोम के रबर को मुलायम बनाने के लिए आम तौर पर जानवरों के प्रोटीन का इस्तेमाल होता है.

बर्लिन के दोनों उद्यमी पर्यावरण के प्रति जागरुक ग्राहकों के ज़रिए 8 अरब डॉलर के वैश्विक कंडोम बाज़ार में अपने लिए जगह बनाने की कोशिश कर रहे थे.

वे हैरान थे कि ऐसे लोगों की तादाद बहुत बड़ी है. चार साल बाद टिकाऊ और शाकाहारी उत्पादों के उनके ब्रांड का सालाना कारोबार 50 लाख यूरो तक पहुंच गया है.

उनकी कंपनी का नाम है आइन्हॉर्न जिसका जर्मन में मतलब होता है यूनिहॉर्न.

इस शब्द का इस्तेमाल एक अरब डॉलर का कारोबार करने वालीस्टार्ट-अप कंपनियों (जैसे- Airbnb और Deliveroo) के लिए किया जाता है.

सीफ़र और ज़ाइलर की कंपनी अभी उस मुकाम तक नहीं पहुंची है लेकिन वे टिकाऊ पर्यावरण को केंद्र में रखकर कारोबार खड़ा करने में सफल रहे हैं. इससे कारोबारी समूह के लिए संभावनाओं के नए दरवाज़े खुले हैं.

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कोई पशु उत्पाद नहीं

जर्मनी में गर्भनिरोध के लिए गोली के बाद कंडोम दूसरा सबसे लोकप्रिय उपाय है. लेकिन अपनी गर्लफ्रेंड के साथ ख़रीदारी करते वक़्त सीफ़र को उसकी ब्रांडिंग पुरानी लग रही थी.

उनको लगा कि आज का उपभोक्ता शायद नए पर्यावरण-अनुकूल वैकल्पिक उत्पाद को पसंद करे.

ज़ाइलर ने पहले इस विचार को ख़ारिज कर दिया, फिर वह इस पर सहमत हो गए. उनको यह उत्पाद ई-कॉमर्स के लिए आदर्श लगा.

वे ऐसा कारोबार खड़ा करना चाहते थे जो न सिर्फ़ धरती के लिए बल्कि कंपनी के श्रमिकों के लिए भी सही और टिकाऊ हो.

वे दस साल से स्टार्ट-अप बिजनेस में थे और अपने सपने साकार करने का रास्ता ढूंढ रहे थे.

सीफ़र कहते हैं, "अगर बचपन में मुझसे पूछा जाता कि बड़े होकर मैं क्या बनना चाहता हूं तो मैं कहता कि करोड़पति."

10 साल तक उद्यमी रहने के बाद वह अपने सहयोगियों और दोस्तों को करोड़पति बनते देख रहे थे, लेकिन वे ख़ुश नहीं थे.

कारोबार शुरू करने के लिए उन्होंने क्राउड फ़ंडिंग का सहारा लिया, जिससे उन्होंने एक लाख यूरो (1,11,000 डॉलर या 84,400 पाउंड) जुटाए.

यही वह समय था जब शाकाहारवाद आइन्हॉर्न की प्रॉडक्ट प्लानिंग का हिस्सा बन गया.

सीफ़र ऐसा उत्पाद बनाना चाहते थे जिसे आसानी से बेचा जा सके, ऑनलाइन भेजा जा सके और वापसी से निपटना न पड़े, क्योंकि ऑनलाइन बिक्री में सबसे ज़्यादा लागत इसी की होती है.

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"कंडोम हमारे लिए सही उत्पाद थे. पहले हमने यह सोचा भी नहीं था कि वे शाकाहारी होंगे या नहीं."

भेड़ की आंतों से कंडोम बनाने के दिन गुजर चुके हैं, लेकिन बाजार में उपलब्ध ज़्यादातर विकल्पों में अब भी पशु प्रोटीन केसीन होता है.

कंडोम का मुख्य घटक रबर है- जिसे मुख्य रूप से एशिया के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में होने वाले रबर के पेड़ों से निकाला जाता है.

केसीन प्रोटीन व्यापक रूप से स्तनधारियों के दूध में मिलता है, जिससे रबर को नर्म बनाया जाता है.

आइन्हॉर्न ने केसीन प्रोटीन का इस्तेमाल नहीं किया- उन्होंने प्राकृतिक पेड़ों से मिलने वाली चिकनाई को चुना. वे यह भी ध्यान रखते हैं कि रबर पर्यावरण के अनुकूल हो.

लेकिन आइन्हॉर्न शाकाहारी कंडोम बनाने वाली पहली कंपनी नहीं है. उत्तर अमरीकी ब्रांड ग्लाइड ने 2013 में ही इसे बना लिया था.

तब से कंडोम बाज़ार में कई विकल्प आ चुके हैं. अनुमान है कि 2026 तक यह बाज़ार 15 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा.

शाकाहारी कंडोम का बाज़ार अभी नया है. आइन्हॉर्न के ज़्यादातर ग्राहक 20 से 40 साल के बीच हैं और 60 फ़ीसदी ख़रीदारी महिलाएं करती हैं.

सीफ़र कहते हैं, "अब भी बहुत से लोग कंडोम जैसी चीज़ें ख़रीदने में शर्म महसूस करते हैं और ख़रीदारी के वक़्त उनको दूसरी चीज़ों के नीचे छिपाते हैं."

"इसलिए हम चाहते थे कि हम ग्राहकों तक एक टिकाऊ उत्पाद लेकर जाएं साथ ही मज़ेदार डिज़ाइनों से उनकी झिझक को ख़त्म करें."

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Image caption फिलिप सीफ़र और वाल्डेमर ज़ाइलर

रसायन-मुक्त रबर

पिछले 30 सालों में बड़े पैमाने पर रबर के पेड़ लगाए गए हैं जिससे जंगल की कटाई बढ़ी है. इससे वन्य जीवन पर भी असर पड़ा है.

इसका मुक़ाबला करने के लिए आइन्हॉर्न पारंपरिक वृक्षारोपण नहीं करता बल्कि थाईलैंड के छोटे किसानों के एक समूह के साथ मिलकर काम करता है.

ये किसान कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं करते और जहां संभव हो वहां खर-पतवार को मशीनों से हटाते हैं. इसका मक़सद रबर के बगान को पूरी तरह केमिकल-मुक्त बनाना है.

मिट्टी की जांच से यह भी निर्धारित किया जा रहा है कि कौन सी स्थानीय प्रजाति जैव विविधता को बढ़ावा देगी.

कुछ रबर बगानों में काम की स्थितियों से जुड़े गंभीर मुद्दे हैं इसलिए कंपनी की फेयरस्टेनेबिलिटी टीम के सदस्य साल में कम से कम 3 महीने तक साइट पर जाकर उत्पादन पर निगरानी में मदद करते हैं.

किसानों को न्यूनतम मज़दूरी से 15 फ़ीसदी अधिक भुगतान किया जाता है और मज़दूरों को उनको अधिकारों के बारे में बताने के लिए कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं.

पर्यावरण के अनुकूल पैकेजिंग करने का काम भी प्रगति पर है. कंपनी की मूल पैकेजिंग 100 फ़ीसदी दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले कागज से हो रही है. अगला चरण एल्युमिनियम रहित रैपर बनाना है.

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धरती के लिए संकल्प

आइन्हॉर्न को उम्मीद है कि अन्य कारोबार में भी उसकी अवधारणा अपनाई जाएगी. इसका एक तरीक़ा उद्यमी संकल्प हो सकता है जिस पर कारोबार शुरू करते समय दस्तखत किए जाते हैं.

इसकी प्रेरणा "द गिविंग प्लेज" से ली गई है जिसे 2010 में बिल गेट्स और वॉरेन बफ़ेट ने शुरू किया था.

इस संकल्प के मुताबिक़ आइन्हॉर्न अपने मुनाफ़े का आधा हिस्सा पर्यावरण अनुकूल परियोजनाओं में निवेश करता है.

2018 में इसने अपने मुनाफ़े का 10 फ़ीसदी हिस्सा सीओ2 ऑफसेट्स में निवेश किया जो ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने वाली परियोजनाओं को फ़ंड करता है.

अन्य लाभार्थियों में बायोरे फ़ाउंडेशन शामिल है जो टिकाऊ जैविक कपास की खेती को बढ़ावा देता है.

तब से 100 अन्य उद्यमियों ने संकल्प पर दस्तखत किए हैं जिससे आइन्हॉर्न के कारोबार को निश्चित रूप से बढ़ावा मिला है.

इसे बड़ी क़ामयाबी तब मिली जब जर्मन टॉयलेटरीज़ और घरेलू उत्पादों की दिग्गज कंपनी DM के साथ करार हुआ.

सीफ़र कहते हैं, "जब हमने डीएम को अपनी ख़रीद और खुदरा क़ीमतों के बारे में बताया तो वह आश्वस्त नहीं हुई."

आइन्हॉर्न के 7 कंडोम के पैक का खुदरा मूल्य 6 यूरो के क़रीब था जबकि इंडस्ट्री की बड़ी कंपनियां 8 कंडोम के पैक को 5 यूरो के क़रीब में बेच रही थीं.

"फिर हमने उनको बताया कि हम मुनाफे का 50 फीसदी हिस्सा फिर से निवेश करने जा रहे हैं. आप हमसे मोलभाव में जो भी पैसे लेंगे वह पैसा एक अच्छे मकसद से दूर हो जाएगा."

डीएम ने मोलभाव बंद कर दिया और आइन्हॉर्न को जर्मनी के खुदरा बाजार की मुख्यधारा में एक प्लेटफॉर्म मिल गया.

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डीएम के मार्केटिंग और ख़रीद विभाग के मैनेजिंग डायरेक्टर सेबेस्टियन बायर का कहना है कि ग्राहक धीरे-धीरे टिकाऊ विकास के प्रति जागरूक हो रहे हैं इसलिए वह टिकाऊ उत्पाद का विकल्प देना चाहते हैं.

जर्मन पर्यावरण एजेंसी के मुताबिक़ जर्मनी के उपभोक्ताओं ने 2016 में हरित उत्पादों पर 60 अरब डॉलर ख़र्च किए और यह प्रवृत्ति जारी रहने की उम्मीद है.

लुनेबर्ग के ल्यूफाना यूनिवर्सिटी की रिसर्च फेलो एना सुंदरमन का कहना है कि टिकाऊ उत्पादों के बाज़ार में आइन्हॉर्न के उत्पादों का स्वागत किया जाना चाहिए लेकिन पर्यावरण पर इनके दीर्घकालिक प्रभाव सीमित हैं.

सुंदरमन कहती हैं, "ये छोटे उत्पाद ठीक हैं लेकिन हमें यातायात और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों पर अधिक ध्यान देने की ज़रूरत है जिनका कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन पर सबसे ज़्यादा प्रभाव पड़ता है."

फिर भी उनको लगता है कि पारंपरिक उत्पादों के जितने ज़्यादा टिकाऊ विकल्प उपलब्ध होंगे उतना ही अच्छा होगा.

"आइन्हॉर्न जैसी कंपनियों का नेटवर्क ग्लोबल सप्लाई चेन की समस्याओं को दूर करने में सहायक हो सकता है."

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नए उत्पाद, नई पहल

आइन्हॉर्न ने पिछले साल 45 लाख से ज़्यादा कंडोम बेचे. 2019 की शुरुआत में इसने 100 फ़ीसदी जैविक कपास से बने माहवारी उत्पादों की श्रृंखला भी लॉन्च की.

सीफ़र कहते हैं, "हमें अभी ख़ुद को भी विश्वास दिलाना है कि यह मज़बूत होता जा रहा है."

कंपनी ने 2020 की गर्मियों में होने वाले बर्लिन ओलंपियास्टेडियन के लिए बड़े इवेंट की योजना बनाई है.

आइन्हॉर्न की योजना 60 हजार लोगों के साथ एक दिन का कार्यक्रम करने की है जिसमें जर्मनी की संसद को जलवायु परिवर्तन नीतियों और लैंगिक समानता से जुड़े कई सारे ई-पिटीशन दिए जाएंगे.

सीफ़र और ज़ाइलर ने अपने शेयरआइन्हॉर्न को देने का इरादा किया है. वे कंपनी में अपनी हिस्सेदारी कंपनी को ही दे देंगे.

इसका मतलब यह होगा कि उनको बेचा नहीं जा सकेगा और संस्थापक टिकाऊ मूल्यों को आर्थिक, पर्यावरण और सामाजिक रूप से संरक्षित किया जाएगा.

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