'क्वारंटीन' से लेकर 'कोविडियट्स' तक, कोरोना वायरस के लिए हमने नई भाषा क्यों बनाई

  • क्रिस्टीन रो
  • बीबीसी वर्कलाइफ़
कोरोना वायरस

चुनौतियों से भरे हालात उन परिस्थितियों को जाहिर करने के नये तरीकों को जन्म देते हैं.

19वीं सदी के लेखक जॉर्ज एलियट उस समय की कठोर लैंगिक और जीवनशैली की पाबंदियों से निराश थे तो उन्होंने पहली बार 'फ्रस्ट्रेटिंग' शब्द का इस्तेमाल किया.

हाल में, ब्रेग्ज़िट ने 'ब्रेमेन' और 'ब्रेग्रेट' जैसे कई नये शब्दों को जन्म दिया. 'बैकस्टॉप' जैसे कई पुराने शब्दों को नये अर्थ मिले.

बर्किंघम सिटी यूनिवर्सिटी के समाज-भाषाशास्त्री रॉबर्ट लॉसन का कहना है कि ब्रेग्ज़िट भले ही सबसे हाल का उदाहरण हो, लेकिन कोविड-19 के कारण भाषायी परिवर्तन की गति अभूतपूर्व है.

लॉसन इसकी कई वजह बताते हैं- तेज़ी से फैलता वायरस, मीडिया में इसकी प्रमुखता और वैश्विक संपर्क, वो भी ऐसे समय जब सोशल मीडिया और दूर के संपर्क अहम हो गए हैं.

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दिन में डॉक्टर, रात में रैपर

महामारी के समय

हाल में लोकप्रिय हुए कई शब्द सामाजिक दूरी वाले मानवीय संपर्क से संबंधित हैं, जैसे 'वर्चुअल हैप्पी ऑवर', 'कोवीडियो पार्टी' और 'क्वारंटीन एंड चिल'.

कई लोग 'कोरोना' को उपसर्ग की तरह इस्तेमाल करते हैं, जबकि पोलैंड के लोगों ने 'कोरोनावायरस' को क्रिया में बदल दिया है.

'कोरोनाबेबीज़' शब्द उन बच्चों के लिए बना है जो इस महामारी के समय पैदा हुए या जो इस समय गर्भ में हैं.

कुछ शब्दों के संक्षिप्त नाम भी चल निकले हैं और सर्वव्यापी हो गए हैं, जैसे डब्लूएफएच (वर्क फ्रॉम होम) और पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट).

दूसरे सभी लोगों की तरह शब्दकोश बनाने वाले भी महामारी के कारण आए बदलावों को सहेजने में जूझ रहे हैं.

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नये अर्थ में पुराने शब्द

ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी की सीनियर एडिटर फियोना मैकफर्सन के मुताबिक दिसंबर तक 'कोरोनावायरस' शब्द का इस्तेमाल दस लाख टोकन (शब्दकोश के लिए संग्रह की जाने वाली भाषा की सबसे छोटी इकाई) में सिर्फ़ 0.03 बार हो रहा था.

'कोविड-19' शब्द तो इसी फरवरी में बनाया गया जब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वायरस को आधिकारिक नाम दिया.

लेकिन अप्रैल आते-आते 'कोविड-19' और 'कोरोनावायरस' का इस्तेमाल प्रति दस लाख टोकन में करीब 1750 बार तक पहुंच गया.

इससे यह भी संकेत मिलता है कि ये दोनों शब्द करीब-करीब बराबर इस्तेमाल हो रहे हैं.

अप्रैल में ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में जोड़ने के लिए चुने गए सभी शब्द किसी न किसी तरह इस महामारी से संबंधित हैं.

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क्या ग़रीबी कोरोना वायरस को और घातक बना देती है?

'स्टे-एट-होम ऑर्डर'

इनमें 'इन्फोडेमिक' (सूचनाओं की महामारी) और 'एल्बो बंप' (हाथ मिलाने की जगह कोहनी टकराना) भी शामिल हैं.

लेकिन मैकफर्सन मानती हैं कि शब्दकोश में शामिल किया एकमात्र असल शब्द 'कोविड-19' ही है.

बाकी शब्द पहले से मौजूद हैं, लेकिन नये हालात में उनको नया अर्थ मिल गया है.

अलग-अलग देशों के लोग अलग-अलग आदेशों के अधीन हैं- जैसे अमरीका में 'स्टे-एट-होम ऑर्डर', मलेशिया में 'मूवमेंट कट्रोल ऑर्डर' और फिलीपींस में 'एनहांस्ड कम्युनिटी क्वारंटीन'.

वह कहती हैं, "इस समय हम बहुत से ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं जो पहले से मौजूद हैं, लेकिन वे शब्द एकदम नये लग रहे हैं. 'कोरोनावायरस' शब्द भी 1960 के दशक का है."

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नक्शे पर

दुनिया भर में पुष्ट मामले

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स्रोत: जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी, राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसियां

आंकड़े कब अपडेट किए गए 5 जुलाई 2022, 1:29 pm IST

युद्ध काल के शब्दों से नुकसान!

मैकफर्सन का कहना है कि पहले से मौजूद शब्दों में नया अर्थ डालना कुछ मामलों में हानिकारक भी हो सकता है.

जैसे युद्धकाल के शब्दों- 'बैटल' और 'फ्रंट-लाइन' का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल हो रहा है.

युद्ध की आपात स्थितियों की तरह सोचने से दीर्घकालिक संरचनात्मक बदलाव करने की ज़रूरतों से हमारा ध्यान भटक सकता है.

इससे #रीफ्रेमकोविड परियोजना की शुरुआत हुई है जिमसें भाषाविद युद्धकाल के शब्दों के विकल्प को एकत्र कर रहे हैं.

स्पेन में नवार्रा यूनिवर्सिटी की भाषाविद आइनेस ओल्ज़ा का कहना है कि उन्होंने अचानक ही ट्विटर पर इस परियोजना को शुरू किया.

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COVER STORY: क्या वायरस की मैपिंग से खुलेगा राज़?

'प्राकृतिक आपदा' और 'तूफान'

आइनेस ओल्ज़ा युद्धकाल के शब्दों के इस्तेमाल के पीछे के प्रलोभन को समझती हैं, ख़ासकर महामारी की शुरुआत में जब एकता कायम करने और तेज़ी से कदम उठाने की सख़्त ज़रूरत थी.

मगर उनका मानना है कि युद्ध के रूपकों के लगातार इस्तेमाल और विकल्पों की कमी से बेचैनी पैदा हो सकती है और महामारी के बारे में सोच विकृत हो सकती है.

'प्राकृतिक आपदा' और 'तूफान' जैसे शब्दों से ऐसी धारणा बनती है कि यह महामारी होनी ही थी और इसे रोका नहीं जा सकता था.

इससे उन राजनीतिक, आर्थिक और पर्यावरणीय संदर्भों की उपेक्षा हो जाती है जिसमें कुछ लोगों के इस बीमारी की चपेट में आने की आशंका बढ़ती है.

स्वास्थ्य सेवा के कुछ लोगों ने 'हीरो' कहे जाने पर निराशा जाहिर की है. वे ख़ुद को ऐसे भयभीत व्यक्ति के रूप में देखते हैं जो अपनी ड्यूटी कर रहा है. उनको बचाव के उपकरणों और नीतियों की ज़रूरत है, न कि कुर्बानी देनी है.

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हंसी-मज़ाक किस तरह मददगार है?

ओल्ज़ा कहती हैं, "वक्ता जो चाहें वे रूपक इस्तेमाल करने के लिए आज़ाद हैं. हम सेंसर नहीं हैं."

लेकिन वह और उनके कुछ साथी भाषाविदों का मानना है कि महामारी पर चर्चा के लिए सैन्य भाषा से अलग वैकल्पिक फ्रेम का होना महत्वपूर्ण है.

गैर-युद्धक शब्दों को ढूंढ़ने में जर्मनी के लोग आगे रहे. उन्होंने लॉकडाउन खोलने को लेकर शुरू हुई अंतहीन बहस के लिए भूले-बिसरे शब्द 'Öffnungsdiskussionsorgien' को ढूंढ़ा जिसका अर्थ होता है "चर्चा की उत्पत्ति".

शब्दकोश के बाहर भाषाई रचनात्मकता का खज़ाना मौजूद है. लॉसन का कहना है कि भाषा के नये-नये प्रयोग से हम दुनिया में जो भी चल रहा है उसको नया नाम देते हैं.

"एक बार आप जब कार्यप्रणालियों, घटनाओं और किसी एक घटना के इर्द-गिर्द बनी सामाजिक स्थितियों को नाम दे देते हैं तो लोगों को एक साझा शब्द-भंडार मिल जाता है, जिसे वे शॉर्टहैंड की तरह इस्तेमाल करते हैं."

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कार में बैठकर कॉन्सर्ट का मज़ा

'फ्लैटेन द कर्व'

लॉसन का कहना है, "मुझे लगता है कि जब आप इसे नाम दे सकते हैं तो आप इसके बारे में बातें कर सकते हैं और जब आप इस बारे में बातें कर सकते हैं तो लोगों का इसका सामना करने और मुश्किल हालात को संभालने में मदद मिलती है."

लेखिका करेन रसेल को लगता है कि व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाला शब्द 'फ्लैटेन द कर्व' आश्वस्त करने वाला है.

यह व्यक्तिगत और सामूहिक, दोनों तरह के प्रयासों के महत्व को बताता है और डर को दूर करता है.

कनाडा और भारतीय अंग्रेजी में इस्तेमाल हो रहे शब्द 'caremongering' (मदद की पेशकश) भाषायी और व्यवहार के तौर पर 'scaremongering' (भयभीत करना) का एक बेहतर विकल्प है.

इस तरह के गंभीर शब्दों से हटकर कुछ हल्के-फुल्के शब्द भी बने हैं. जर्मन का 'कोरोनास्पेक' अंग्रेजी के 'कोविड 19' की तरह घर पर रहने के आदेश के बीच तनाव मिटाने से संबंधित है.

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कोरोना: रेस्तरां कारोबारियों की मुश्किल

स्पेनिश के 'कोविडियोटा' और 'कोरोनाबरो' शब्द उन लोगों का मज़ाक उड़ाने के लिए बनाए गए जो सार्वजनिक स्वास्थ्य सलाहों की अनदेखी करते हैं (बरो का अर्थ है गधा).

'डूम्सस्क्रॉलिंग' का मतलब है कि इंटरनेट पर लगातार बुरी ख़बरों को पढ़ते जाना.

लॉसन का पसंदीदा शब्द 'ब्लर्सडे' उस अवस्था को बताता है जब कई दिन यूं ही गुजर जाने के बाद समय और तारीख को लेकर हमारी संवेदना कमज़ोर पड़ जाती है.

ऑस्ट्रेलियाई अंग्रेजी में भी हल्के-फुल्के अर्थ वाले संक्षिप्त शब्दों के ख़ूब प्रयोग होता है. वहां क्वारंटीन के लिए 'क्वाज़' और सैनेटाइज़र के लिए 'सैनी' बनाया गया.

दक्षिण और पूर्वी एशिया में भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले सबसे अधिक हैं. .  .

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कोरोना या 'मिस रोना'?

अश्वेत समुदाय अक्सर भाषा में नये प्रयोग करते रहते हैं. उन्होंने कोरोना वायरस को 'मिस रोना' कहना शुरू किया.

जो कहा न सके उसके लिए हमेशा इमोजी मौजूद रहता है. जुड़े हुए हाथ वाले इमोजी, मेडिकल मास्क वाले इमोजी और माइक्रोब वाले इमोजी इस महामारी के समय पहले से ज़्यादा लोकप्रिय हो गए हैं.

मैकफर्सन का कहना है कि इनमें से कुछ इमोजी और शब्द कम गंभीर लग सकते हैं लेकिन "अंधेरे में थोड़ी बहुत रोशनी होने से लोग हालात को हल्का बना रहे हैं."

लॉसन भी इससे सहमत हैं, "यदि आप उस पर हंस सकते हैं तो आप उसे मैनेज करने लायक बना सकते हैं और मनोवैज्ञानिक रूप से कमज़ोर लोगों की मदद कर सकते हैं."

मगर भाषाविदों का यह भी मानना है कि वर्तमान में प्रचलित कई शब्द टिक नहीं पाएंगे.

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दुनिया को हंसाने वाले क्यों रो रहे हैं...

महामारी के बाद उन्हीं शब्दों के टिके रहने की संभावना होगी जो स्थायी व्यवहार परिवर्तन को बताते हैं, जैसे 'ज़ूमबॉम्बिंग' जो 'फोटोबॉम्बिंग' शब्द से प्रभावित है. यह किसी और के वीडियो कॉल में अतिक्रमण करने की आदत को बताता है.

मैकफर्सन का मानना है कि ज़ूम कंपनी का प्रभुत्व ख़त्म होने के बाद भी 'ज़ूमबॉम्बिंग' एक सामान्य शब्द बना रह सकता है.

वर्तमान की कठिनाइयां कोरोना शब्दों की तरह हमेशा के लिए नहीं रहेंगी. ओल्ज़ा कहती हैं, "मैं अपने सामान्य एजेंडे पर वापस आउंगी. तब तक क्वारंटीन चलेगा."

सवाल और जवाब

कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस क्या है? लीड्स के कैटलिन से सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले

    कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है

    सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं

    कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.

    ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.

    कोरोना वायरस के अहम लक्षणः ज्यादा तेज बुखार, कफ़, सांस लेने में तकलीफ़

    लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.

  • एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता? बाइसेस्टर से डेनिस मिशेल सबसे ज्यादा पूछे गए सवाल

    जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.

    यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.

    ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.

    यह नया वायरस उन सात कोरोना वायरस में से एक है जो मनुष्यों को संक्रमित करते हैं.
  • कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है? जिलियन गिब्स

    वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.

    कोविड-19 के कुछ लक्षणों में तेज बुख़ार, कफ़ और सांस लेने में दिक्कत होना शामिल है.

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.

    इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.

  • क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है? सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक

    दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.

    ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.

    फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.

    • बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
    • जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
    • खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
  • आप कितने दिनों से बीमार हैं? मेडस्टोन से नीता

    हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.

    इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.

    अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.

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मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

आपके सवाल

  • अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है? फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन

    अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.

    अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.

  • क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है? स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड

    ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.

    ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

  • जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं? कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे

    कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.

    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

    कोरोना वायरस की वजह से वायरल निमोनिया हो सकता है जिसके लिए अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अपने आप को और दूसरों को बचाना

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है? हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए? मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए? लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

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मैं और मेरा परिवार

आपके सवाल

  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा? बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

  • मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए? मीव मैकगोल्डरिक

    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

  • बच्चों के लिए क्या जोखिम है? लंदन से लुइस

    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

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(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी वर्कलाइफ़ पर उपलब्ध है.)

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