शहर की पहचान होती है उसकी स्काईलाइन

  • जोनाथन ग्लेंसी
  • बीबीसी कल्चर
लंदन का मशहूर सेंट पॉल्स कैथेड्रल

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दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान लंदन शहर का नज़ारा

क्षितिज, वो मंज़र है, जहां ज़मीन और आसमान एक होते नज़र आते हैं. इसे स्काईलाइन भी कहा जाता है.

जिस तरह चमचमाती सड़कें, बड़े बड़े पार्क, क़रीने से बने मकान किसी शहर के वजूद का एहसास कराते हैं. उसी तरह ये स्काईलाइन किसी शहर की पहचान होती हैं.

जिस तरह हमारे लिए हमारे अपनों के चेहरे अज़ीज़ होते हैं, उसी तरह किसी शहर की स्काईलाइन भी अज़ीज़ होती है. हम भले ही इन शहरों से दूर रहें लेकिन यहां बनी इमारतें, चहल-पहल हमारे ज़ेहन में ताज़ा रहती है. क्योंकि शहर अपने आप में तारीख़ समेटे होते हैं.

शहर के बहुत से कोने हमारी यादों को ताज़ा करते हैं. ये शहर हमें हमारे वजूद के होने का एहसास कराते हैं. जैसे अगर किसी ने एडिनबरा, न्यूयॉर्क के मैनहटन और हॉन्गकॉन्ग शहर देखा हो, क्या वो उसे कभी भुला पाएगा?

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दुबई कभी मछुआरों का कस्बा हुआ करता था, आज वहां आकाश चूमती इमारतों का जंगल है

जिस तरह इंसान का चेहरा उम्र के साथ बदलता जाता है, उसी तरह किसी शहर की तस्वीर भी वक़्त के साथ बदलती जाती है. पुरानी इमारतों की जगह नई इमारतें आ जाती हैं. ख़ाली मैदान में मकान बन जाते हैं.

आबादी के साथ शहर का दायरा बढ़ता जाता है, शहरों में भाग-दौड़ बढ़ती जाती है. जिसने पुराने शहरों की खूबसूरती को भी मद्धम कर दिया है. जैसे आज के लंदन को ही देखिए. पूरा का पूरा शहर नए कलेवर में नज़र आता है. पुराने लोगों को लंदन का नया कलेवर उतना ख़ूबसूरत नहीं लगता, जैसा उनके दौर में था.

लंदन का मशहूर सेंट पॉल्स गिरजाघर. इसकी पुरानी तस्वीर देखिए. यह दूसरे विश्व युद्ध के दौरान की तस्वीर है. इसमें गिरजाघर अपने आस-पास की सभी इमारतों से ऊंचा और बेहद शानदार नज़र आता है.

मगर अब मंज़र बदल गया है. आज सेंट पॉल्स कैथेड्रल के इर्द-गिर्द ऊंची इमारतें बन गई हैं. इन्हें देख कर लगता है यह मुस्कराकर अपनी तरफ़ आपका ध्यान खींचने की कोशिश कर रही हैं.

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यमन के शहर शिबम को 'शिकागो ऑफ़ द डेज़र्ट' कहते हैं

मुमकिन है, आप में से बहुत लोगों को दक्षिणी चीन के शेनज़ेन शहर का पुराना नज़ारा याद हो. उस वक़्त यह समंदर किनारे मछलियों का छोटा सा बाज़ार था, जो ख़ाली वक़्त दक्षिण चीन सागर से उठने वाली लहरों को निहारता सा लगता था. लेकिन आज वहां भी आसमान छूती इमारतों की भीड़ लगी है.

कुछ ऐसा ही हाल दुबई का भी था. एक वक्त था जब यह इलाक़ा मोती तलाशने वाले गोताखोरों के लिए जाना जाता था. लेकिन आज यहां आसमान से बातें करती ऊंची इमारतें और इन इमारतों को साफ़ करने वाले कर्मचारियों की फ़ौज ही यहां की पहचान बन गई है.

पिछले 30 सालों में सारी दुनिया में इतने बड़े पैमाने पर निर्माण काम हुए कि सारी दुनिया का नक़्शा ही बदल गया. शहरों में जगह की कमी के चलते, सब जगह ऊंची ऊंची इमारतें बन गईं.

ऐसा नहीं है कि सिर्फ़ आधुनिक दौर में ही ऊंची इमारतें बनाई जा रही हैं. इटली के शहर सैन गिमिग्यानो को ही लीजिए.

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हॉन्ग कॉन्ग की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है

इस शहर में आज भी मध्य युग की ऊंची इमारतें सिर उठाए यूं खड़ी हैं, मानो नए दौर को चुनौती दे रही हैं. सैन गिमिग्यानो का मज़र काफ़ी हद तक न्यूयॉर्क के मैनहटन की झलक दिखलाता है.

यमन के शहर शिबम के बारे में कुछ ऐसा ही कहा जाता है. पहाड़ी के किनारे बसे इस छोटे से शहर में आज भी सोलहवीं सदी की कई ऊंची इमारते बची हुई हैं. दो हज़ार से भी कम लोगों की आबादी वाला यह शहर बीच रेगिस्तान में बसा हुआ है.

इसके आस पास दस मंज़िली इमारतें खड़ी हैं. इन इमारतों का निर्माग उस ज़माने में बद्दू लुटेरों से लोगों की हिफ़ाज़त के लिए किया गया था. लेकिन दूर से देखने पर आज भी शिबम का नज़ारा किसी आधुनिक शहर सा लगता है. इसीलिए इस शहर को 'शिकागो ऑफ़ द डेज़र्ट' या 'मैनहटन ऑफ़ मिडिल ईस्ट' कहा जाता है.

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एडिनबरा की गोथिक शैली बरक़रार है

पुराने वक़्त में सुरक्षा कारणों से शहरों का निर्माण ऊंचाई वाले इलाक़ों में किया जाता था. शहरों के चारों तरफ़ ऊंची ऊंची मीनारें और टावर बनाए जाते थे.

दक्षिण फ्रांस का शहर कारकसों उन्नीसवीं सदी में बसा था. यह आज भी बेहद रूमानी एहसास दिलाता है. कंक्रीट से बनी इसकी गलियों में घूमते सैलानी, बेहद दिलकश नज़ारा पेश करते हैं. यहां दूर दूर तक अंगूर के बाग़ीचे नज़र आते थे.

यही हाल इंग्लैंड के शहर डरहम का है. यहां का नज़ारा आज भी मध्य युग की याद दिलाता है, जबकि इस शहर के एक तरफ़ स्कॉटलैंड का सबसे बड़ा शहर एडिनबरा बसा है तो दूसरी तरफ़ है किंग्ज़ क्रॉस.

सैलानियों को लुभाने के लिए लॉस एंजिलिस, वैंकूवर और सिएटल शहरों की ऐसी तस्वीर पेश की जाती है जैसे वहां, ऊंची इमारतों से झांकता आसमान बस आपका ही इंतज़ार कर रहा है. मगर जब आप उस शहर पहुंचते हैं तो ऐसे नज़ारे को खोजते ही रह जाते हैं.

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सैन गिमिग्यानो के 72 टॉवर में से सिर्फ़ 14 बचे हैं

हाल के कुछ सालों में अगर किसी शहर की स्काईलइन बनने की बात की जाए तो शायद ईडन गार्डन ही ऐसा शहर है जिसे बहुत अच्छी प्लानिंग से बसाया गया है. इसके क्षितिज से शहर का जो मंज़र नज़र आता है, वह शायद ही किसी औऱ शहर का नज़र आता हो.

समंदर और पहाड़ों के बीच बड़े बड़े घास के मैदान, ख़ूबसूरत इमारतें और पहाड़ यहां का नज़ारा ही बदल देते हैं. लेकिन हैरत की बात है कि अगर आप ऑन लाइन खोज करेंगे तो आपको वहां की ऊंची ऊंची इमारतें ही नज़र आएंगी और लगभग सभी इमारते एक जैसी लगती हैं.

अगर आप वैंकूवर या लॉस एंजिलिस जैसे शहरों में ऐसे खूबसूरत मंज़र की तलाश में निकलेंगे तो हो सकता है वो सब आपको नज़र ना आए. यहां की ख़ूबसूरती को पेशेवर फोटोग्राफर ही अपने कैमरे में क़ैद कर सकते हैं.

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रियो डी जनीरो के स्काईलाइन की पृष्ठभूमि में इसकी प्राकृतिक खूबसूसरती है

इनके मुक़ाबले हॉन्गकॉन्ग अपनी ऊंची इमारतों के बावजूद दिलचस्प तस्वीर पेश करता है.

वहीं दक्षिण अफ्रीका का केपटाउन और ब्राज़ील का रियो डे जनीरो अपने क़ुदरती नज़ारों के लिए मशहूर हैं. समंदर किनारे बसे ये शहर आधुनिक हैं, मगर पुराने दौर की याद दिलाते हैं. शहर के एक तरफ़ समुद्र का साहिल है तो दूसरी तरफ़ ऊंचे पहाड़ हैं.

अचानक बसे शहर भी कई बार आपकी आंखों को सुकून देते हैं. जैसे चीन का पुदोंग शहर. शंघाई के क़रीब बसा यह शहर स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन घोषित होने के बाद देखते ही देखते विशाल बस्ती में तब्दील हो गया. यहां एक से एक ऊंची इमारतें बन गईं. मगर जब सबको इकट्ठा करके एक तस्वीर के तौर पर देखो, तो अच्छा लगता है.

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हेलसिंकी स्कईलाइन पर छाया हुआ है कार्ल लुडविग एंजेल का गिरजाघर

ऊंची इमारतों वाले शहरों से अलग, फिनलैंड का हेलसिंकी और इटली का वेनिस शहर. ये काठ की इमारतों और खुले आसमान की वजह से अलग तरह की ख़ूबसूरती ज़ाहिर करते हैं. ख़ास तौर से नाव पर बैठकर जब आप इन शहरों की सैर को निकलते हैं, तो नज़ारा दिल को छू जाता है.

बहरहाल, समय के साथ साथ बहुत से शहरों का रूप-रंग बदल जाता है. लेकिन वेनिस, हेलसिंकी और एडिनबरा जैसे शहरों पर ज़्यादा ध्यान देने की ज़रूरत है. जिस तरह लंदन पहचान में ना आने वाली हद तक बदल गया है, कहीं ये शहर भी ऐसे ही ना बदल जाएं.

तरक़्क़ी के लिए ऊंची इमारतों की ज़रूरत है, तो दिल को सुकून देने वाले नज़ारे भी हमें चाहिए. वरना कई बार ऊंची इमारतों में घिरकर इंसान को दहशत होने लगती है. इसीलिए ज़रूरी है कि शहरों के पुराने, खुले हिस्सों को भी सही देख-रेख के साथ रखा जाए.

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