ये हैं 2018 की दस सबसे बेहतरीन विदेशी फ़िल्में

  • 30 दिसंबर 2018
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1. अ क्वाइट प्लेस

जॉन क्रासिंस्की की लिखी और निर्देशित इस फ़िल्म में उनकी पत्नी एमिली मैरी पॉपिन्स ब्लंट ने भी काम किया है. ये एलियन के हमले से ख़ुद को बचाने की कहानी है. ये एलियन ऐसे हैं, जो सुन नहीं सकते हैं. ऐसे में फ़िल्म में जॉन का परिवार, यानी वो, उसकी पत्नी और बेटी को ऐसे रहना है कि ज़रा सी भी आवाज़ न हो, वरना एलियन उन्हें मार डालेंगे. ये एक शानदार थ्रिलर है, जिसमें आप काल्पनिक दुनिया में पहुंच कर भी असली डर महसूस करते हैं. हर सीन में रोमांच है. फ़िल्म के किरदार जान बचाने के लिए नंगे पैर चलते हैं और संकेतों की ज़बान में बात करते हैं. आप उनकी चतुराई देखकर हैरान होंगे, तो जिस डर से वो वाबस्ता हैं, वो भी आप को बेहद क़रीब लगेगा.

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2. शॉपलिफ्टर

जापानी फ़िल्मकार हिरोकाज़ू कोरे-एडा की ये फ़िल्म कुछ मामूली चोरों की कहानी है. वो फ़र्ज़ीवाड़ा करते हैं. बच्चों को अगवा करते हैं और दूसरे छोटे-मोटे अपराध कर के अपनी ज़िंदगी बसर करते हैं. चोरों का संयुक्त परिवार है. इस परिवार का मुखिया है ओसामू और उसकी पत्नी है नोबुयो. टोक्यो के एक छोटे से बंगले में आबाद ये बड़ा सा परिवार अपनी वैधानिक आमदनी के अलावा चोरी और दूसरे अपराध से ज़िदगी का ख़र्च निकालता है. निर्देशक ने इस फ़िल्म में जुर्म का महिमामंडन नहीं किया है. लेकिन, फ़िल्म देखते हुए आप को इन चोरों से हमदर्दी हो जाएगी. आप को लगेगा कि जीवन बसर करने के लिए ये ज़रूरी है. एक-दूसरे से बेहद प्यार करने वाले इस परिवार की कहानी को कान फ़िल्म फेस्टिवल में पाम डि ओर पुरस्कार मिला था.

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3. कोल्ड वार

पोलैंड की ये फ़िल्म 1950 के दशक की कहानी है, जब यूरोप में पूरब और पश्चिम के बीच भयंकर शीत युद्ध छिड़ा हुआ था. पश्चिमी यूरोप और पूर्वी यूरोप के बीच लोहे की दीवार थी. ऐसे में दो प्रेमी जो एक-दूसरे के बिना नहीं रह पाते, मगर एक-दूसरे के साथ भी नहीं रह सकते हैं. विक्टर और ज़ुला संगीत के शैदाई हैं. वो एक सरकारी लोकगीत मंडली जुटा रहे हैं. निर्देशक पॉवेल पॉवलिकोवस्की की ये फ़िल्म उनकी ऑस्कर जीतने वाली फ़िल्म इडा से आगे की कहानी कहती है. एक-दूसरे से मिलने के बाद भी ये प्रेमी संतुष्ट नहीं होते. निर्देशक पॉवेल कहते है कि ये उनके मां-पिता की कहानी है. एक जोड़े के तौर पर उनके बीच बहुत लड़ाइयां होती थीं, मगर वो एक-दूसरे के बिना नहीं रह पाते थे.

ब्लैक ऐंड व्हाइट में शूट की गई इस फ़िल्म में शीत युद्ध के ऐतिहासिक दौर को बख़ूबी दिखाया गया है.

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4. इफ़ बील स्ट्रीट कुड टॉक

ये कहानी एक युवा प्रेमी जोड़े की है. स्टीफ़न जेम्स और किकी लेन ने इस में प्रेमी जोड़े का किरदार निभाया है, जो ग़रीबी, पुलिस के ज़ुल्म और नस्लवाद की वजह से एक-दूसरे से बिछड़ जाते हैं. जेम्स बाल्डविन के उपन्यास पर आधारित इस फ़िल्म का निर्देशन बैरी जेनकिंस ने किया है. इसे नस्लवाद के पीड़ित जोड़े के क्रोध के तौर पर भी पेश किया जा सकता था. मगर बैरी जेनकिंस ने इस फ़िल्म को रूमानी तकलीफ़ की नज़्म के तौर पर पेश किया है, जहां पर मुहब्बत ज़िंदगी के ज़ख्मों पर मरहम का काम करती है. फ़िल्म का किरदार डेव फ्रैंको कहता है, 'मैं उन लोगों को तलाशता हूं, जो एक-दूसरे से प्यार करते हैं. फिर वो काले हैं, गोरे हैं, हरे हैं या किसी और रंग के, मुझे फ़र्क़ नहीं पड़ता.' बैरी जेनकिंस ने एक सपनों सरीखी फ़िल्म बनाई है.

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5. द फ़ेवरेट

ग्रीक निर्देश योर्गस लैंथिमो मौजूदा समाज की बेतरतीब तस्वीर पेश करने के लिए जाने जाते हैं. लेकिन, उनकी ये फ़िल्म अंग्रेज़ी शाही परिवार पर आधारित एक ऐतिहासिक फ़िल्म है. बड़े आराम से, तफ़रीह के मूड वाली रफ़्तार से चलने वाली इस फ़िल्म का हर किरदार मज़ाहिया है. संवेदनशील है. ये सत्रहवीं सदी के ब्रिटिश शाही परिवार की कहानी है. जिसमें बीमार महारानी एन अपनी क़रीबी दोस्त सारा, डचेज़ ऑफ़ मार्लबोरो की मदद से महत्वाकांक्षी सामंतों को साधती हैं. लेकिन, जब फ़िल्म में सारा की चचेरी बहन एमा स्टोन की एंट्री होती है, तो राजमहल नई साज़िशों का अड्डा बन जाता है. यौन संबंधों की भरमार हो जाती है और महारानी का नज़दीकी बनने की रेस शुरू हो जाती है. डेबोरा डेविस और टोनी मैक्नमारा की कहानी मज़ेदार है. फ़िल्म के तीनों अहम किरदार आप के फ़ेवरिट हो जाते हैं.

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6. स्पाइडरमैन:इन टू द स्पाइडर-वर्स

सुपरहीरो पर आधारित फ़िल्मों के लिए ये साल बहुत अच्छा रहा था. ब्लैक पैंथर में अफ्रीकी मूल के लोगों को नई ऊंचाई के साथ पेश किया गया. इसके अलावा द एवेंजर्स सिरीज़ की नई किस्त इनफिनिटी वार में किरदारों का ढेर लगा हुआ था. लेकिन, इन सब से अलहदा फ़िल्म रही स्पाइडरमैन:इन टू द स्पाइडर-वर्स एकदम अलग ही कहानी बयां करती है. इस में डिजिटल किरदारों के साथ हाथ से बनाए गए एनिमेशन का बेहतरीन संतुलन पेश किया गया. ये फ़िल्म एक कॉमिक्स की किताब ज़्यादा लगती है. स्पाइडर की थीम पर आधारित सुपरहीरो आप को अपने ही आस-पास के लोग मालूम होते हैं. ये न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन इलाक़े के एक किशोर की कहानी है. स्पाइडरमैन का किरदार गढ़ने वाले स्टैन ली और स्टीव डिटको, दोनों की इसी साल मौत हो गई थी. ये फ़िल्म उन्हें सबसे अच्छी श्रद्धांजलि है.

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7. द राइडर

ये चीन की निर्देशक क्लोए झाओ की लेखक-निर्देशक के तौर पर दूसरी फ़िल्म है. ये कहानी एक युवा रोडियो राइडर ब्रैड जैनड्रू की कहानी है, जिसके सिर में एक घोड़ा दुलत्ती मार देता है. उसे पता है कि अगर वो दोबारा घुड़सवारी की दुनिया में लौटता है, तो वो अपनी ज़िंदगी को दांव पर लगाएगा. घोड़े की वजह से उसके क़रीबी दोस्त के ज़हन में गहरी चोट लगती है. लेकिन, ब्रैडी को समझ में नहीं आता कि आख़िर वो और करे तो क्या. चोट से धीरे-धीरे उबरने की उसकी कहानी को क्लोए ने बहुत ही संवेदनशील तरीक़े से दिखाया है. उन्होंने कल्पना और हक़ीक़त का एक परफेक्ट संतुलन फिल्म में दिखाने की कोशिश की है. ब्रैडी जिस इलाक़े में रहता है वो अमरीका का वाइल्ड वेस्ट कहा जाता है. बड़े-बडे ठिकानों से भरपूर लोग अपने आस-पास के माहौल से ही वहशत खाते हैं. उन्हें समझ में ही नहीं आता कि और कहां जाएं.

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8. लीव नो ट्रेस

अमरीकी निर्देशक डेब्रा ग्रैनिक की ये फ़िल्म अमरीकी समाज मे हाशिए पर पड़े तबके पर आधारित है. आठ बरस पहले डेब्रा की फ़िल्म विंटर्स बोन ने ख़ूब वाहवाही बटोरी थी. इस फ़िल्म में बेन फ़ोस्टर नाम के एक युद्ध से लौटे बुज़ुर्ग की कहानी है. वो घने जंगलों में रहता है. उसकी किशोर उम्र बेटी के तौर पर थोमासिन मैकेंजी ने भी शानदार किरदार निभाया है. कसी हुई कहानी वाली ये फ़िल्म एक पिता और बेटी के संबंध को बहुत अच्छे से पेश करती है. बेटी को एहसास होता है कि उसका पिता जिस तरह की ज़िंदगी बसर कर रहा है, वैसी ज़िंदगी वो नहीं जी सकती. वो अपने पिता को अलविदा कहते हुए, जो बातें कहती है, वो जज़्बातों से भरपूर है.

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9. फर्स्ट मैन

ये फ़िल्म चांद पर क़दम रखने वाले पहले इंसान नील आर्मस्ट्रॉन्ग की कहानी है. ये रोल रेयान गॉसलिंग ने निभाया है. फ़िल्म का निर्देशक ला ला लैंड से शोहरत बटोरने वाले डैमियन शैज़ेल ने किया है. फ़िल्म में ये दिखाया गया है कि किस तरह दुनिया के सबसे कठिन वाहन पर सवार होकर एक शख़्स ख़तरों से खेलते हुए चांद तक पहुंचने का सफ़र पूरा करता है. अच्छी बात ये है कि नील के किरदार को एक सुपरहीरो की तरह पेश न कर के उसे आम इंसान की तरह दिखाया गया है, जो चुनौतियों से लड़ने के दौरान कई बार कमज़ोर पड़ता है. उसे भी तनाव होता है. डर लगता है. कई लोगों को नील के किरदार की ख़ामोशी बोरिंग लग सकती है. मगर, वो बहुत इंसानी है. अपने निजी दुखों को पीछे छोड़ कर वो पेशेवर चुनोतियों का सामना कैसे करता है, ये फ़िल्म उसे बहुत ही संवेदनशील तरीक़े से पेश करती है. आख़िर में आप के ज़हन में सवाल उठता है कि चांद पर जाने वाला पहला इंसान क्या कभी धरती पर ख़ुश रह सकेगा?

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10. स्वीट कंट्री

ये फ़िल्म ऑस्ट्रेलिया के इतिहास को बयान करने वाली सबसे अहम मूवी कही जाए, तो ग़लत नहीं होगा. ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासी सैम की ज़िंदगी पर आधारित ये फ़िल्म क़ानून के राज, ग़ुलामी, धर्म और आदिवासियों को समाज की मुख्यधारा में लाने की कोशिशों की मिली-जुली कहानी है. सैम, अपनी पत्नी के बलात्कारी की चाकू से हत्या कर के भाग जाता है. रेगिस्तान में उसकी क़ानून से लुका-छिपी चलती है. कभी फ़िल्म फ्लैशबैक में जाती है, तो कभी आगे आने वाले वक़्त को दिखाती है. हर फ्रेम, हर सीन में कोई न कोई मक़सद है. गोरों से मुक़ाबिल होने पर ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासी अक्सर ख़ामोश हो जाते हैं. फ़िल्म के अहम किरदार सैम का रोल करने वाले हैमिल्टन मॉरिस ने बेहद शानदार तरीक़े से इसे जिया है. ये फ़िल्म इंसाफ़ के आदिवासी नज़रिए को पेश करती है.

(यह लेख बीबीसी कल्चर की कहानी का अक्षरश: अनुवाद नहीं है. हिंदी पाठकों के लिए इसमें कुछ संदर्भ और प्रसंग जोड़े गए हैं. मूल लेख आप यहांपढ़ सकते हैं. बीबीसी कल्चरके दूसरे लेख आप यहां पढ़ सकते हैं.)

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