बांग्लादेश में बाघों का ख़ात्मा करने वाले माफ़िया

  • निकी रस्ट
  • बीबीसी अर्थ
बाघ

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जंगली जानवरों में यूं तो बहुत से खूंखार और आदमख़ोर हैं, लेकिन इन सभी खूंखार जानवरों का शिकार नहीं किया जाता. बाघ ऐसा जंगली जानवर है जिसका बड़े पैमाने पर शिकार किया जाता है.

बाघ को खतरनाक जानवर माना जाता है. एक वक़्त था जब बांग्लादेश में इनकी अच्छी ख़ासी तादाद थी. लेकिन आज यहां सिर्फ़ सौ बाघ बाक़ी बचे हैं. ये सभी सुंदरबन के सदाबहार जंगलों में रहते हैं.

अंग्रेज़ों के राज में हिंदुस्तान में ख़ूब शिकार किया जाता था. इनमें सबसे ज़्यादा शेर और बाघों को ही निशाना बनाया जाता था. इसी वजह से बांग्लादेश के सुंदरबन के जंगलों में बाघों की तादाद काफ़ी कम हो गई. हालांकि बांग्लादेश में 1974 में जाकर जंगली जानवरों के शिकार पर रोक लगा दी गई. मगर, चोरी-छुपे बाघों का शिकार बदस्तूर जारी है.

सवाल यह है कि आखिर बाघों का शिकार ही इतने बड़े पैमाने पर क्यों किया जाता है?

ब्रिटेन की केंट यूनिवर्सिटी की प्रोफ़ेसर साइमा सैफ़ ने इस सवाल के जवाब के लिए काफ़ी मेहनत की. उनकी स्टडी 2016 में ओरिक्स नाम की पत्रिका में छपी.

साइमा का कहना है बाघों के शिकार के पीछे सबसे बड़ी वजह इस खूंखार जानवर से अपनी हिफ़ाज़त करना है. वजह यह है कि इंसानों के क़रीब रहने वाले बाघ अक्सर आदमख़ोर हो जाते हैं. सुंदरबन के आसपास के इलाक़ों में अब तक बाघ क़रीब 30 लोगों को अपना निवाला बना चुके हैं.

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आम तौर पर बाघ हिरण जैसे जानवरों का शिकार करके अपना पेट भरते हैं. लेकिन जब हिरण नसीब नहीं होते, ये दूसरे जानवरों का शिकार भी कर लेते हैं. इनकी चपेट में कई बार इंसानों के पालतू जानवर जैसे गाय-भैंसें और बकरियां आते हैं. इन्हें बचाने के चक्कर में कई बार इंसान भी बाघों के शिकार बन जाते हैं.

ऐसे में सुंदरबन के आसपास के इलाक़ों में जो किसान खेती करते हैं, उन्हें बाघों की वजह से काफ़ी नुकसान उठाना पड़ता है. अपने जानवरों को बचाने के लिए ये किसान भी बाघों को मार देते हैं.

बाघों के जिस्म के बहुत से हिस्सों का इस्तेमाल रवायती दवाओं में किया जाता है. इसकी खाल भी बहुत तरीकों से इस्तेमाल की जाती है. घर की सजावट के लिए इसका इस्तेमाल होता है. इसके दांतों से बहुत सी चीज़ें बनाई जाती है.

कुल मिलाकर, बाघ पैसे कमाने के लिए एक फ़ायदे का जानवर है. लिहाज़ा जंगलों की चीज़ें चुराकर बेचने वाले तस्कर इनका शिकार करते हैं.

सुंदरबन में बहुत से गैंग हैं, जिन्हें स्थानीय लोग पायरेट या लुटेरे कहते हैं. इन जंगलों में इनका राज इतालवी माफ़ियाओं की तरह है.

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पूरे जंगल में इनके अपने अपने इलाक़े बंटे होते हैं. ये शिकारी गैंग अपने-अपने इलाक़े की गश्त करते हैं. इनके इलाक़े में जो मछुआरे शिकार के लिए आते हैं, उन्हें भी ये बंधक बना लेते हैं. इन्हें 'टाइगर किलर' के नाम से भी जाना जाता है. स्थानीय लोगों का कहना है ये लोग बिल्कुल भरोसे के लायक़ नहीं होते.

इनके पास आधुनिक हथियार होते हैं. ये पल भर में बाघ का शिकार कर लेते हैं. कई बार अपने शौक़ के लिए शिकार करते हैं तो कई बार ताक़त की नुमाइश के लिए.

एक पायरेट ने प्रोफ़ेसर साइमा को बताया कि जब वे किसी नए इलाक़े में जाते हैं तो वहां बाघों के पंजों के निशान देखते हैं. फिर इन निशानों के सहारे बाघ के मक़ाम तक पहुंच कर उसका शिकार कर लेते हैं.

अब तक ये पायरेट कितने बाघों को मार चुके हैं कहना मुश्किल है. लेकिन जिन लोगों को इन डकैतों ने बंधक बनाया था, उनका कहना है ये लोग अक्सर ही बाघों का शिकार करते रहते हैं.

इसके अलावा बाघों का शिकार सुंदरबन की संस्कृति का हिस्सा भी बन चुका है. बहुत बार गुड लक या खुशक़िस्मती लाने के लिए भी शिकार होता है.

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एक और दिलचस्प बात तो यह है कि ये शिकारी, परोपकार के लिए भी बाघों का शिकार करते हैं. जब लोग आदमखोर बाघों से परेशान हो जाते हैं, तो, इन लुटेरों से उन आदमखोरों को मारने के लिए कहते हैं.

इसके एवज़ में स्थानीय लोग इन्हें पैसे देते हैं. लेकिन इस पैसे को ये लुटेरे मस्जिदें बनाने के लिए दे देते हैं.

एशिया के बहुते से देशों की तरह बांग्लादेश में भी बाघ के जिस्म के हिस्सों का इस्तेमाल रूहानी और हक़ीमी मक़सद के लिए किया जाता है. ये लुटेरे बाघ के दांत का लॉकेट अपने गले में पहनते हैं. या उसकी अंगूठी पहनते हैं. खास तौर से जब ये अपने गांव, परिवार से मिलने आते हैं तब तो ज़रूर ही बाघ के दांत से बनी चीज़ें पहनकर आते हैं.

माना जाता है कि इससे घर में बरकत आती है. दूसरे सेक्स की ख्वाहिश भी बढ़ जाती है. प्रोफ़ेसर साइमा को एक पायरेट की बीवी ने बताया कि जब उसे जोड़ो में दर्द की शिकायत हुई तो उसके शौहर ने उसे शेर के दांत वाली अंगूठी दी.

हालांकि सरकार ने शेरों की हिफ़ाज़त के लिए सुंदरबन के जंगलों में सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए हैं. लेकिन ये लुटेरे इन सुरक्षाकर्मियों से नहीं डरते, क्योंकि इनके पास अत्यआधुनिक हथियार हैं. साल 2009 में इन लुटेरों ने दो सुरक्षाकर्मियों को ही मार डाला था. इसी साल में बांग्लादेश टाइगर एक्शन प्लान बनाया गया.

इसके तहत जंगलों में होने वाले जुर्म पर लगाम कसने के लिए कड़े प्रावधान की बात कही गई. रिसर्चर साइमा का कहना है दुनिया के बहुत से हिस्सों में जंगली जानवरों के शिकारी वाइल्ड लाइफ़ ट्रैकर बन गए हैं. सुंदरबन के इन शिकारियों को भी यही काम करने को कहा जा सकता है, क्योंकि वो जंगलों से बखूबी वाक़िफ़ हैं. इससे शिकार पर भी रोक लग जाएगी. और सुंदरबन के बाघों को बचाया जा सकेगा.

(अंग्रेज़ी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी अर्थ पर उपलब्ध है.)

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