क्या है सुपर फूड, क्यों इससे बचना चाहिए?

इमेज कॉपीरइट Thinkstock
Image caption तो सूपरफूड एक छलावा है?

बदलते वक़्त के साथ लोगों के खाने की आदतें बदली हैं. अपने खान-पान को लेकर लोग काफ़ी एहतियात बरतने लगे हैं. शहरों में तो अक्सर लोग अपने खाने के साथ तरह-तरह के तजुर्बे करते ही रहते हैं. क्या खाएं क्या ना खाएं, इसके लिए गूगल तक का सहारा लेते हैं.

इंटरनेट पर संतुलित आहार तलाशें तो एक क्लिक पर इतने रिज़ल्ट सामने आ जाते हैं कि ये तय करना मुश्किल हो जाता है कि किस डाइट चार्ट पर अमल किया जाए और किस पर नहीं. किसी में लिखा होता है कि कार्बोहाड्रेड मत खाएं. ज़्यादा प्रोटीन वाली चीज़ें खाएं. अपने खाने में थोड़े से मेवे शामिल कर लें.

पढ़ें- पेट के लिए खाते हैं, पेट माफ़ नहीं करेगा!

किसी में लिखा होता है गर्म मसाले भी सेहत के लिए अच्छे होते हैं, लिहाज़ा उनसे परहेज़ मत कीजिए. कुछ लोग तो इंटरनेट पर मिली इस जानकारी पर ही अमल करना शुरू कर देते हैं कि उन्हें अपनी उम्र और क़द के हिसाब से कितनी कैलरी लेनी चाहिए.

डॉक्टर रोज़मेरी स्टैंटन का कहना है कि आजकल तमाम कंपनियां, लोगों को बरग़लाने के लिए अपने प्रोडक्ट के बारे में तमाम दावे करती हैं. रोज़मेरी आगाह करती हैं कि 'सुपर फूड' जैसी कोई चीज़ होती ही नहीं. अपने खाने और खाने की आदतों के प्रति ये सिर्फ़ लोगों का एक पागलपन है. हमारे शरीर को किसी एक पोषक तत्व की ज़रूरत नहीं होती है. बल्कि सही तादाद में सभी पोषक तत्व हमारे खाने में शामिल होने चाहिए.

इमेज कॉपीरइट Thinkstock
Image caption हमारे खान-पान में रेडीमेड चीज़ों की तादाद बढ़ गई है

मुश्किल इसी बात की है कि लोग किसी एक ख़ास पोषक तत्व के पीछे पड़ जाते हैं. जैसे अक्सर लोगों को लगता है कि कार्बोहाईड्रेड अपने आहार से निकालने हैं और ज़्यादा प्रोटीन शामिल करना है. हालांकि यह ग़लत है. डॉ. रोज़मेरी कहती हैं कि हमारा ध्यान आज ताज़ा फल-सब्ज़ियों से हट चुका है.

हमारे खान-पान में रेडीमेड चीज़ों की तादाद बढ़ गई है. चूंकि इन खानों को बनाने वाले ये जानते हैं कि आपको कैसे खाने की तलाश है. लिहाज़ा आपकी उसी कमज़ोरी को वो अपना हथियार बना लेते हैं और बड़े-बड़े दावों के साथ बाज़ार में उत्पाद उतारने शुरू कर देते हैं, जबकि जिस पोषक तत्व का वो दावा करते हैं वो उस खाने में नाममात्र को ही होते हैं.

डॉ रोज़मेरी कहती हैं हमें उचित मात्रा में हरेक चीज़ का लुत्फ़ लेना चाहिए. आपके खाने में फल और सब्ज़ियां दोनों शामिल होनी चाहिए. मोटा अनाज, थोड़ी मात्रा में प्रोटीन, मछली और समुद्री खाने ख़ास तौर पर आहार के हिस्से होने चाहिए. लेकिन हां, अगर अपने खाने से मीठा हटा दें या कम कर दें तो कोई हर्ज नहीं. आपके शरीर को जितने मीठे की ज़रूरत है वो आपके खाने में शामिल चीज़ों से मिल जाएगी.

इमेज कॉपीरइट Thinkstock
Image caption सुपरफूड के दावों में उलझ गए हैं लोग?

डॉ. रोज़मेरी का कहना है कि खान-पान बेहद संतुलित होना चाहिए. जो आहार अभी उपलब्ध हैं उसके अलावा भी ऐसे खानों पर ध्यान दिया जाए जो पर्यावरण को नुक़सान पहुंचाने वाले न हों. जैसे हमें 'सी-वीड' या 'समुद्री घास' को खान-पान में शामिल करना चाहिए. इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन, ओमेगा-3, फाइबर, एंटी- ऑक्सिडेंट, विटामिन और खनिज होते हैं. इतने पोषक तत्व मछली या किसी अन्य समुद्री जानवर के अंदर हो सकते हैं, वो सभी पोषक तत्व सी-वीड में मिल जाएंगे. इसकी ख़ासियत के बारे में अभी लोगों को पता नहीं. ज़रूरत है कि लोग खाने की आदतों को बदलने के बजाय इसे अपने खाने में शामिल करें.

रोज़मर्रा के खान-पान में सी वीड को शामिल करके इसके प्रति लोगों की दिलचस्पी बढ़ाई जा सकती है. जैसे बर्गर-पास्ता ऐसे रेडीमेड खाने हैं, जिन्हें सारी दुनिया में बड़े चाव से खाया जाता है. अगर समुद्र की इस जादुई घास को इन खानों का हिस्सा बना दिया जाए तो लोगों को ज़रूरी पोषक तत्व मिलने लगेंगे और उनकी जानकारी भी बढ़ेगी.

इस घास की खेती से पर्यावरण को भी फ़ायदा होगा. मछलियां पकड़ने और उन्हें कोल्ड स्टोरेज ले जाकर रखने तक की प्रक्रिया बेहद जटिल और लागत वाली है. इस घास की खेती से समुद्र का किनारा भी हरा भरा रहेगा और माहौल भी साफ़ सुथरा होगा.

कुल मिलाकर, हमें किसी ऐसे खाने की तलाश बंद कर देनी चाहिए, जिससे चमत्कार होगा. इसके बजाय आदतों और खान-पान में छोटे बदलाव से हम अपने मौजूदा खाने को ही सुपरफूड में तब्दील कर सकते हैं.

अंग्रेज़ी में मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. यहा बीबीसी फ्यूचर पर उपलब्ध है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)