कुत्ते जो अंतरिक्ष पहुंचे, बने हीरो

  • 15 नवंबर 2017
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हम सुनते आए हैं कि किसी को बुरा-भला कहने के लिए अक्सर कुत्ते से तुलना की जाती है. मसलन, कुत्ता कहीं का; कुत्ते जैसी हरकत; कुत्ते की मौत मारूंगा...

ऐसे जुमलों ने कुत्ते जैसे वफ़ादार जानवर को लेकर हमारे ज़हन में ख़राब नज़रिया भर दिया है. मगर, इंसान की तरक़्क़ी में कुत्तों का बहुत योगदान रहा है.

और आज अगर हम आप को ये बताएं कि कुत्तों ने ही इंसान की अंतरिक्ष में लंबी छलांग लगाने में मदद की, तो शायद आप यक़ीन न करें.

तो चलिए आपको यक़ीन दिलाने के लिए पूरी कहानी सुनाते हैं.

क़िस्सा पचास और साठ के दशक का है. दूसरा विश्व युद्ध ख़त्म होते ही अमरीका और सोवियत संघ में शीत युद्ध छिड़ गया था. अमरीका ने पहले एटम बन बना लिया, तो सोवियत संघ अंतरिक्ष की रेस में अमरीका को पछाड़ने में जुट गया.

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Image caption लाइका को स्पुतनिक के ज़रिए अंतरिक्ष में भेजा गया था

आज से क़रीब 60 साल पहले यानी 3 नवंबर 1957 को सोवियत संघ ने स्पुतनिक 2 नाम का अंतरिक्षयान भेजा. असल में स्पुतनिक 1 की कामयाबी के बाद सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव ने अपने वैज्ञानिकों को एक महीने में एक कुत्ते को अंतरिक्षयान के साथ भेजने का निर्देश दिया था.

इस हुक्म की तामील करने के चक्कर में वैज्ञानिकों ने ये सोचा ही नहीं कि इसकी वापसी कब होगी. लाइका नाम का ये कुतिया जब स्पुतनिक पर सवार किया गया तो वैज्ञानिकों को पता था कि वो इसे आख़िरी बार ज़िंदा देख रहे हैं.

लंदन के साइस म्यूज़ियम के डग मिलार्ड कहते हैं कि लाइका के लिए अंतरिक्ष की ये उड़ान वन-वे थी. जब स्पुतनिक 2 अंतरिक्ष में पहुंच गया तो सोवियत संघ ने दुनिया को इसकी कामयाबी को बढ़ा-चढ़ाकर बताया. ये बताया गया कि लाइका ने अंतरिक्ष में एक हफ़्ते मज़े में बिताए.

ये बात तो 2002 में सामने आई कि लाइका की तो अंतरिक्ष में पहुंचने के सात घंटे के भीतर ही घबराहट और गर्मी से मौत हो गई थी. सोवियत संघ के लिए स्पुतनिक 2 मिशन इंटरनेशनल स्तर पर बड़ी कामयाबी थी. लाइका पूरे देश में हीरो बन गई. स्पुतनिक की कामयाबी से साबित हो गया था कि स्पेस रेस में सोवियत संघ अमरीका से बहुत आगे निकल गया था. ये काफ़ी भारी अंतरिक्षयान था. इससे संदेश ये गया कि सोवियत संघ एटमी हथियार से लैस रॉकेट से अमरीका पर निशाना लगा सकता था.

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Image caption फेलिसेट नाम की एक बिल्ली को साल 1983 में वेरोनिक एजीआई 47 साउंडिंग रॉ़केट के साथ अंतरिक्ष में भेजा गया था.

सोवियत संघ, अंतरिक्ष मिशन के शुरुआती दौर से ही कुत्तों को अंतरिक्ष के सफ़र पर भेजता रहा था, जब उनके हाथ जर्मन इंजीनियर वर्नहर वॉन ब्रॉन का फॉर्मूला लगा था. ब्रॉन के V2 रॉकेट की मदद से ये तजुर्बा किया जा रहा था. पहले तो धरती की कक्षा में यानी धरती का चक्कर लगाने के लिए यान भेजे जाते थे. ऐसे मिशन पर भेजे गए ज़्यादातर जानवर ज़िंदा लौट आए थे.

उस दौर में अमरीकी वैज्ञानिक अपने स्पेस मिशन के लिए बंदर और चिंपांजी का इस्तेमाल करते थे. वहीं सोवियत वैज्ञानिकों की पहली पसंद कुत्ते थे. मिशन के लिए सोवियत वैज्ञानिक अक्सर आवारा कुत्तों को पकड़ा करते थे. रात के वक़्त सुनसान सड़कों पर कुत्तों की तलाश में वैज्ञानिक निकला करते थे.

आवारा कुत्तों को अच्छा खाना-पीना और ट्रेनिंग देकर स्पेस मिशन के लिए तैयार किया जाता था. उन्हें अक्सर जोड़ों में अंतरिक्ष मिशन पर भेजा जाता था. इससे दो अलग-अलग जानवरों से मिले आंकड़ों की तुलना करने में मदद मिलती थी.

स्पुतनिक 2 के तीन साल बाद सोवियत संघ के कुत्तों ने अंतरिक्ष में एक और बड़ा कारनामा किया. 19 अगस्त 1960 को बेल्का और स्ट्रेइका नाम के दो कुत्ते, दो चूहों, एक ख़रगोश और कुछ मधुमक्खियों के साथ अंतरिक्ष की सैर को गए. सबको स्पेससूट पहनाकर भेजा गया था. आंकड़े बताते हैं कि कक्षा में पहुंचने के बाद दोनों शांत बैठे थे. लेकिन चौथे चक्कर के दौरान बेल्का को उल्टी आने लगी, इस शोर की वजह से स्ट्रेइका भी चौकन्ना हो गया. हालांकि अंतरिक्षयान के अंदर रिकॉर्ड किए गए वीडियो में दोनों ही कुत्ते ज़्यादा तनाव में नहीं दिखाई दिए.

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Image caption बेल्का और स्ट्रेइका

अंतरिक्ष में धरती के 17 चक्कर लगाने के बाद वैज्ञानिकों ने स्पेसक्राफ्ट को वापस धरती पर आने का आदेश दिया. धरती पर वापसी के बाद बेल्का और स्ट्रेइका दोनों ही ख़ुशमिज़ाज दिखे.

इसके बाद तो सोवियत संघ के ये स्पेस रिटर्न कुत्ते दुनिया भर में मशहूर हो गए. ये कई टीवी शो में भी शामिल हुए. दूसरे देशों में भी इनके नाम पर डाक टिकट और पोस्टर छापे गए.

जून 1961 में जब सोवियत संघ के नेता निकिता ख्रुश्चेव और अमरीकी राष्ट्रपति जॉन कैनेडी के बीच वियना में शिखर वार्ता हुई. इस दौरान दोनों नेताओं के बीच माहौल बेहद ठंडा था. इसे हल्का करने के लिए कैनेडी की पत्नी जैकी ने ख्रुश्चेव से कहा कि वो अंतरिक्ष से लौटी स्ट्रेइका के बच्चों से में कुछ को उन्हें दे दे.

ख्रुश्चेव ने स्ट्रेइका के बच्चे पुशिन्का को अमरीकी राष्ट्रपति की पत्नी को तोहफ़े के तौर पर भेजा. इसकी सख़्ती से जांच करने के बाद पुशिन्का को व्हाइट हाउस में रखा गया. हालांकि जॉन कैनेडी को कुत्ते पसंद नहीं थे. मगर उनकी पत्नी और बच्चे अक्सर पुशिन्का और दूसरे कुत्तों के साथ खेलते थे. पुशिन्का और व्हाइट हाउस के कुत्ते चार्ली के मेल से कुछ बच्चे भी हुए.

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जानकार कहते हैं कि पुशिन्का को तोहफ़े के तौर पर देने की वजह से सोवियत संघ और अमरीका के बीच तनातनी भी कम हुई. कुछ लोग तो ये कहते है कि क्यूबा के मिसाइल संकट के दौरान ख्रुश्चेव और कैनेडी के बीच बातचीत का माहौल भी पुशिन्का की वजह से बना.

पुशिन्का के दो बच्चे अमरीकी बच्चों को दान में दिए गए थे. 1963 में कैनेडी की हत्या के बाद पुशिन्का को व्हाइट हाउस के माली को दान में दे दिया गया था. उसके बाद सोवियत नस्ल के इस कुत्ते की आने वाली पीढ़ियों का क्या हुआ, कुछ पता नहीं.

सोवियत संघ ने अंतरिक्ष में कुत्तों वाली उड़ान की कामयाबी के बाद कुत्तों को अंतरिक्ष भेजना बंद कर दिया था. ब्रिटेन के डग मिलार्ड कहते हैं कि इन कुत्तों को दुनिया को हीरो के तौर पर याद रखना चाहिए. मिलार्ड मानते हैं कि दुनिया इन्हें उस तरह से सम्मान नहीं देती, जिसके वो हक़दार हैं.

आख़िर सितारों की तरफ़ इंसान के क़दम कुत्तों, बंदरों और चिंपैंजियों की मदद से ही तो बढ़े थे.

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