ज़रूरी नहीं कि सफ़ेद दांत स्वस्थ हों

  • 14 दिसंबर 2017
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सब को चमकदार सफ़ेद दांतों की ख़्वाहिश होती है. कुछ लोगों को ये क़ुदरती नेमत हासिल होती है. जिनके पास चमकीले सफ़ेद दांत नहीं होते, वो इसकी ख़्वाहिश लिए घूमते हैं. कई तरह के जतन करते हैं.

एक प्रयोग से मालूम हुआ है कि 18 से लेकर 52 फ़ीसद तक लोग अपने दांतों की रंगत से नाख़ुश होते हैं.

अमरीका जैसे देशों में तो दांत सफ़ेद कराने की अर्ज़ी लेकर अक्सर लोग दांतों के डॉक्टर के पास पहुंच जाते हैं. वहीं ब्रिटेन में अगर किसी के दांत पीले हैं, तो वो मज़ाक़ बन जाता है. अख़बारों में, टीवी में और पत्रिकाओं में अक्सर करीने से लगे चमकदार सफ़ेद दांतों वाली तस्वीरें नुमायां होती हैं.

सफ़ेद दांतों का हमारे ज़हन पर इस क़दर राज है कि हम सफ़ेद दांतों को स्वस्थ दांत समझ बैठे हैं. ये हमारा मुग़ालता ही है.

सब के दांत सफ़ेद नहीं होते. लोगों के दांतों के अलग-अलग रंग होते हैं. इसकी वजह हमारे दांतों की बनावट, हमारे जीन्स और हमारा खान-पान होता है. कई लोग सिगरेट-बीड़ी पीते हैं. तंबाकू खाते हैं. पान और मसाला खाते हैं. इससे उनके दांतों की रंगत बिगड़ जाती है. कई बार हम जो दवाएं खाते हैं, उनके असर से भी दांतों का रंग बदल जाता है.

जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, हमारे दांतों की ऊपरी परत यानी इनेमल उतरने लगता है. इससे भी दांतों का रंग बदला हुआ नज़र आता है.

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किन वजहों से दांत पीले पड़ जाते हैं ?

हम जो टोमैटो सॉस खाते हैं. या कॉफी पीते हैं. उससे दांतों में पीलापन आ जाता है. इसकी वजह इनमें पाया जाने वाला क्रोमोजीन नाम का केमिकल होता है. इसके अलावा अगर मुंह की साफ़-सफ़ाई नहीं की जाती, तो दांतों में कीटाणु पनपने लगते हैं. इससे कई लोगों के दांत हरे, भूरे या किसी और रंग के हो जाते हैं.

दांतों पर प्रयोगशाला में जो प्रयोग होते हैं, वो अक्सर जानवरों के दांतों पर आज़माए जाते हैं. जैसे कि गाय के दांत. पर कई बार इंसानों के दांत भी प्रयोग में इस्तेमाल होते हैं.

न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के मॉर्क वूल्फ़ ने एक बार गायों के दांतों के साथ कई तरह के एक्सपेरीमेंट किए. उन्होंने दांतो को ब्लैक टी, रेड और व्हाइट वाइन में डुबोकर रखा. सबसे ज़्यादा बुरा असर रेड वाइन का पड़ा था. वहीं ब्लैक टी का कोई दाग़ दांतों पर नहीं छूटा. हां, अगर आप ने ब्लैक टी से पहले व्हाइट वाइन पी रखी है, तो ज़रूर ब्लैक टी, दांतों पर असर दिखाएगी.

बहुत सी चीज़ें खाने से दांतों का रंग बदल जाता है. इसका ये मतलब नहीं होता कि दांतों की सेहत ठीक नहीं. आप के मोती जैसे दांत भी कैविटी और मसू़ढ़ों में इनफेक्शन के शिकार हो सकते हैं.

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दांतों पर काले धब्बे

कई बार आप को दांतों की जड़ों की तरफ़ यानी मसूढ़ों के पास काले धब्बे दिखाई देते हैं. इन्हें लेकर आप ज़्यादा फ़िक्रमंद न हों. हालिया रिसर्च से पता चला है कि ये दांत की सुरक्षा के लिए बना क़ुदरती कवच होता है. ये कैल्शियम, फॉस्फ़ेट और आयरन से मिलकर बने हुए धब्बे होते हैं.

जिन बच्चों के दांतों में ऐसे काले धब्बे होते हैं, उनमें पाया गया है कि उनके दांत जल्दी ख़राब नहीं होते. यानी इन काले धब्बों में पनाह लेने वाले बैक्टीरिया दांतों की हिफ़ाज़त करते हैं.

लेकिन, दांतों पर लगा हर धब्बा उनकी सुरक्षा करता हो, ये भी ज़रूरी नहीं. यानी अगर आप को दांतों पर काले धब्बे नज़र आएं, तो आप को फ़ौरन दांतों के डॉक्टर के पास जाना चाहिए.

कहने का मतलब ये है कि न तो सफ़ेद दांत, अच्छे दांतों की निशानी हैं. और न ही, दांतों पर काले धब्बे, ख़राब दांतों की निशानी हैं.

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आज की तारीख़ में दांतों को सफ़ेद करने के तमाम नुस्खे बाज़ार में मौजूद हैं. दंत मंजन से लेकर जेल और दूसरी चीज़ें. इनमें केमिकल होता है, जो दांतों की ऊपरी परत को नुक़सान पहुंचाते हैं. कई जेल में ऐसे केमिकल होते हैं, जो दांतों को हल्का नीला रंग देते हैं, जिससे उनका पीलापन छुप जाए.

डॉक्टर अक्सर दांतों की ब्लीचिंग करके उन्हें सफ़ेद बनाते हैं. हालांकि हर ब्लीचिंग एजेंट कारगर ही हो, ये भी ज़रूरी नहीं.

दांतों की सफ़ेदी क़ायम रखने के लिए आप को ये ब्लीचिंग लगातार कराती रहनी पड़ती है. वरना, दांतों पर पहले जैसे ही धब्बे आ जाते हैं.

तो, आप इस भुलावे में मत रहिए कि सफ़ेद दांत ही सेहतमंद होते हैं. हां, उनका रख-रखाव सही तरीक़े से करते रहने पर आपके दांतों में बुरी बीमारियां नहीं पनपेंगी.

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