दवाई के साथ पेट में जाएगा ये कैमरा और फिर...

  • 8 जुलाई 2018
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विज्ञान ने आज इतनी तरक़्क़ी कर ली है कि कोई भी बीमारी इसकी पहुंच से परे नहीं है. जानलेवा बीमारियों को भी मेडिकल साइंस ने रिसर्च के ज़रिए क़ाबू में कर लिया है.

लेकिन, हमारी छोटी आंत की ऐसी बहुत सी बीमारियां थी जो इसकी गिरफ़्त में नहीं आ रही थीं. जैसे, कैंसर.

एंडोस्कोपी के ज़रिए भी सिर्फ़ बड़ी आंत या पेट तक ही पहुंचा जा सकता था.

जादुई दवाई

छोटी आंत की बीमारियां पहचान पाना मुश्किल होता था. लेकिन अब छोटी आंत की बीमारियां एक कैमरे के ज़रिए पकड़ में आ जाएंगी. डॉक्टरों ने वायरलेस तकनीक के ज़रिए एक मैजिक पिल तैयार की है.

इस गोली में माइक्रो कैमरा फिट होता है जो छोटी आंत के अंदर का हाल बयान करता है. ये माइक्रो कैमरा फोटो और वीडियो दोनों बना लेता है.

इस कैमरे से चमकीली सफ़ेद किरणें निकलती है, जो आंत के ऊतकों पर पड़ती हैं. इन्हीं के ज़रिए ये माइक्रो कैमरा छोटी आंत के हालात को बाहर स्क्रीन पर दिखाता है.

ये दवा पेट में गलती नहीं

जिस गोली में ये कैमरा फिट होता है, उसे ऐसी चीज़ से तैयार किया जाता है कि वो खाना पचाने के लिए निकलने वाले केमिकल से गलती नहीं. जांच के समय मरीज़ के पेट पर एक बेल्ट बांध दी जाती है, जिसमें रेडियो सेंसर और डेटा रिकॉर्डर लगा होता है.

कैमरे वाली गोली निगलने के साथ ही बेल्ट पर हर सेकेंड में दो इमेज आती हैं. अगर वीडियो ऑप्शन ऑन हो तो लाइव फ़ीड भी देखी जाती है.

मरीज़ के पाचन तंत्र से ये गोली दस से 48 घंटे के बीच निकलती है. 48 घंटे के बाद मरीज़ फिर से अस्पताल में आता है. जहां फोटो और वीडियो की मदद से कंप्यूटर पर छोटी आंत की कमियों की पड़ताल की जाती है. किसी बीमारी के होने-न होने का पता लगाया जाता है.

कैप्सूल वाले इस कैमरे की मदद से अब छोटी आंत में कैंसर होने का जल्द पता लगाया जा सकेगा.

(नोट- ये स्टोरी मूल अंग्रेज़ी स्टोरी का अक्षरश:अनुवाद नहीं है. हिंदी पाठकों के लिए कुछ प्रसंग जोड़े गए हैं.)

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