झील में तेल गिराकर पर्यावरण बचाने की कोशिश

  • 23 जुलाई 2018
तेल का रिसाव, समुद्र, समुद्री जीव, रिसर्च इमेज कॉपीरइट Alamy

हम अक्सर तेल लेकर जा रहे टैंकरों, जहाज़ों के हादसे के शिकार होने और फिर पूरे इलाक़े में तेल के फैल जाने की ख़बरें सुनते हैं. इस 'ऑयल स्पिल' से पर्यावरण को बहुत नुक़सान होता है.

कनाडा में पिछले दिनों हुई ऐसी कई घटनाओं के बाद एकदम अलग तरह का तजुर्बा किया जा रहा है.

कनाडा के ओंटैरियो शहर में एक झील में तेल गिराकर उसके असर को समझने की कोशिश की जा रही है.

ऑयल स्पिल से पानी तो दूषित होता ही है, सबसे बड़ा ख़तरा समुद्र के जीवों के लिए पैदा हो जाता है. ऐसे में इस तजुर्बे के ज़रिए वैज्ञानिक पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि आख़िर तेल के कौन से तत्व समुद्री जीवों के लिए सबसे ज़्यादा ख़तरनाक हैं.

इसी साल जून महीने में कनाडा के वैज्ञानिकों ने ओंटैरियो की एक बेनाम झील में कई बाड़े बनाए और इन्हें इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट एक्सपेरिमेंटल लेक एरिया (IISD-ELA) का नाम दिया.

यहां ऑयल सैंड से रिसने वाला बिटुमेन यानी अलकतरा नाम का शीरा डाला गया है. इस तजुर्बे के तहत वैज्ञानिक पानी में रहने वाले मेंढक, छोटी मछलियों और अन्य जीवों पर तेल के रासायनिक, भौतिक, जैविक घातक असर का मुआयना कर रहे हैं.

अभी तक ऐसे तजुर्बे प्रयोगशालाओं में ही होते रहे हैं. ऐसा पहली बार हो रहा है कि वैज्ञानिकों ने झील को ही प्रयोगशाला बना लिया है.

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Image caption बाड़े को सुरक्षित करने के लिए एक डाइवर झील के अंदर सैंडबैग्स ले जाता हुआ.

जल स्रोतों को बचाने में मदद

वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस प्रयोग में उन्हें सफलता ज़रूर मिलेगी और भविष्य में वो कनाडा के जल स्रोतों को बचाने के उपाय कर सकेंगे. साथ ही हादसे के बाद जहाज़ों से निकलने वाले तेल को पानी से हटाने में मदद मिलेगी.

इस प्रयोग में वैज्ञानिकों के साथ बहुत से छात्र-छात्राएं भी अपना योगदान दे रहे हैं जोकि अपने बैग में रेत भरकर ट्रैक्टर बाइक या लॉरी में लाद कर यहां तक लाते हैं. यहां से रेत के भरे बैग नावों में लाद दिए जाते हैं.

ग्रेजुएशन के छात्र सैम पैटर्सन कहते हैं कि रेत लादने के अलावा उनके और भी कई अहम काम हैं जैसे बाड़े में पानी पर बिटुमेन फैलाने से पहले और बाद में मछलियों के सैंपल जमा करना. इसी तरह मेढक के काले चित्ती वाले अंडों को ट्रीटेड और अनट्रीटेड पानी में रखना और उसके असर को समझना.

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Image caption वैज्ञानिक झील में मौजूद छोटी मछलियों की जांच कर रहे हैं.

उम्मीद की जा रही है कि इस साल सर्दी में इस झील के जमने से पहले काफ़ी डेटा जमा हो जाएगा. इस डेटा की बुनियाद पर क़रीब 30 वैज्ञानिक रिपोर्ट तैयार करेंगे और उसे एकेडमिक जर्नल में प्रकाशित किया जाएगा. उसके बाद इसके नतीजों से आम जनता को वाबस्ता कराया जाएगा.

IISD-ELA के रिसर्च प्रमुख और प्रोजेक्ट के लीडर विंस पैलेस का कहना है कि झील में बाड़े बनाने का मक़सद है प्रयोग में ज़रूरत के मुताबिक़ पानी का इस्तेमाल करना. इन बाड़ों की वजह से झील में तेल गिराने के बावजूद सारा पानी दूषित नहीं होता है.

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बिटुमेन बना मुसीबत

केमिकल वैज्ञानिक ब्रूस होलिबोन का कहना है कि रिसर्च के दौरान कई बार सैंपल के साइज़ को लेकर कई तरह की दिकक्तें आती हैं. इसे वैज्ञानिक स्केलिंग कहते हैं. रिसर्च की ज़रूरत के मुताबिक़ स्केलिंग बढ़ती और घटती रहती है. इसीलिए इस तरह के प्रयोग लैब में संभव नहीं हैं.

फिलहाल वैज्ञानिकों ने अपने इस प्रोजेक्ट का उपनाम बोरियल रखा है. इसकी वजह ये है कि इस प्रयोग से कनाडा के ईकोसिस्टम पर तेल गिरने के असर की पड़ताल की जा रही है. और, कनाडा का ज़्यादातर इकोसिस्टम बोरियल कहा जाता है.

ब्रूस होलिबोन कहते हैं कि बोरियल ने उन्हें बड़े स्केल पर काम करने का मौक़ा दिया है. इसके अलवा पानी पर तेल के रिसाव को लेकर अभी तक की रिसर्च समुद्र में ही की गई है. जिसमें रिसर्च का स्केल काफ़ी बड़ा हो जाता है. और स्केल बड़ा होने की वजह से बहुत सी छोटी चीज़ें नज़र अंदाज़ हो जाती हैं.

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Image caption बिटुमिन का खनन कनाडा में विवादित मसला बन गया है.

बोरियल प्रोजेक्ट में सैंपल का साइज़ ना तो बहुत बड़ा है और ना ही बहुत छोटा. लिहाज़ा इसके ज़रिए बोरियल ईकोसिस्टम को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है.

बिटुमेन कनाडा के ईकोसिस्टम के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है. होलिबोन कहते हैं कि पिछले एक दशक में कनाडा में कई जंगलों और नमी वाली जगह पर बिटुमेन का रिसाव हो चुका है. इस रिसाव से निपटने के लिए जानकारी के स्तर पर वैज्ञानिक भी अभी पिछड़े हुए हैं.

बिटुमेन काफ़ी गाढ़ा और चिपचिप होता है. किसी और तेल के साथ मिलकर ये पाइप में बहने तो लगता है. लेकिन, जब ये ताज़े पानी पर बहता है तो पूरे वॉटर सप्लाई सिस्टम को हिला कर रख देता है.

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Image caption एक अन्य अध्ययन के दौरान शोधकर्ता कनाडा की एक झील में बिटुमिन डालते हुए.

क्या ढूंढा जाएगा

इसके अलावा रिसर्च के ज़रिए ये भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि घुले हुए बिटुमेन के टुकड़े ताज़े पानी पर कितनी देर तक तैरते हैं. इसके दूसरे केमिकल कितनी देर में हवा में मिलकर ख़त्म हो जाते हैं. कौन से ऐसे घटक हैं जो तलछट के साथ मिलकर ख़त्म हो जाते हैं.

बिटुमेन हवा, पानी, तलछट मेंढक और छोटी-छोटी मछलियों पर कैसे और क्या असर डालता है इसके लिए अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं.

ये सभी टीमें पॉली साइक्लिक अरोमैटिक हाईड्रोकार्बन यानी PAHs की गणना करती हैं. PAHs रसायनों के समूह का एक घटक है जो ऑर्गेनिक मैटीरियल, जैसे तेल में पाया जाता है. इसके हरेक हिस्से में कार्सिनोजेन्स होते हैं.

साथ ही ये भी जानने की कोशिश की जा रही है कि पानी पर केमिकल फैलने के बाद किस तरह के बैक्टीरिया पैदा होते हैं और समुद्र में रहने वाले छोटे जीवों को कितना कमज़ोर करते हैं.

रिसर्चर ये भी जानने की कोशिश कर रहे हैं कि बिटुमेन समुद्री जीवों में हालात से लड़ने की क्षमता मज़बूत करता है और जीवों के लिए खाना तैयार करने में कितना मददगार होता है.

रिसर्चरों की इस टीम के सदस्य जूलियस ब्लेइस का कहना है कि ये तजुर्बा अपने आप में काफ़ी अनूठा है. इससे पहले इतिहास में कभी भी इस तरह की रिसर्च नहीं की गई.

हालांकि अभी रिसर्च जारी है लिहाज़ा किसी भी नतीजे का एलान करना जल्दबाज़ी होगी. लेकिन इतना ज़रूर है कि इस रिसर्च के नतीजे कनाडा में मीठे पानी के बड़े स्रोतों को बर्बाद होने से बचाने का कोई कारगर रास्ता ज़रूर सुझाएंगे.

(नोटः ये लेज़ली ऐवन्स ऑग्डन की मूल स्टोरी का अक्षरश: अनुवाद नहीं है. हिंदी के पाठकों के लिए इसमें कुछ संदर्भ और प्रसंग जोड़े गए हैं)

(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिककरें, जो बीबीसी फ्यूचर पर उपलब्ध है.)

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