क्या गर्भनिरोधक गोली खाने से महिलाएं मोटी हो जाती हैं?

  • 9 अक्तूबर 2018
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गर्भनिरोधक गोलियों पर बहुत सारे इल्ज़ाम हैं.

इससे नदियां प्रदूषित होती हैं. शादियां बर्बाद होती हैं. हमारी यौनेच्छा यानी सेक्स करने की ख़्वाहिश ख़त्म होती है. फ़ेमिनिस्ट इसे मर्दवादी समाज की सबसे बड़ी साज़िश बताते हैं.

इल्ज़ाम तो ये भी है कि गर्भनिरोधक गोलियों की वजह से औरतें मर्दों जैसी होने लगती हैं.

मगर, तमाम इल्ज़ामात में से जो सबसे गंभीर आरोप है गर्भनिरोधक गोलियों पर, वो ये कि इससे महिलाएं मोटी हो जाती हैं.

गर्भनिरोधक गोलियां लगातार लेने से महिलाओं के मोटापे की शिकायतें बहुत आती हैं. लैब में बने एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन से तैयार गोलियों का ये सब से बड़ा साइड इफेक्ट है. दवा कंपनियां इस साइड इफेक्ट को गर्भनिरोधक के पैकेट पर भी लिखती हैं.

मगर, कई दशकों की रिसर्च के बाद भी पक्के तौर पर ये बात नहीं कही जा सकती कि गर्भनिरोधक गोलियां लगातार खाने से मोटापा बढ़ता है.

ऐसी 49 रिसर्च के रिव्यू से पता चलता है कि गर्भनिरोधक गोली खाने से मोटापे के आरोप की ठोस बुनियाद नहीं है.

चाहे एस्ट्रोजेन हो या प्रोजेस्टेरोन हार्मोन से बनी गोलियां, इस बात के बहुत कम सबूत मिलते हैं कि इनसे मोटापा बढ़ता है.

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अमरीका की ओहायो यूनिवर्सिटी की मारिया गैलो 49 रिसर्च के इस रिव्यू में शामिल रही हैं. वो कहती है कि गर्भनिरोधक गोलियों से मोटापे की हमारी सोच, हमारे पूर्वाग्रह का नतीजा है.

अगर वज़न बढ़ता है तो वजह क्या है

हर इंसान ख़ुद को एक्सपर्ट समझता है. वो आस-पास ऐसी तमाम ग़लतफ़हमियों के सबूत तलाश लेता है. इसे हम विज्ञान की भाषा में एपोफेनिया कहते हैं. इसीलिए लोग राजनेताओं की तुलना मिर्च से करते हैं. पेड़-पौधों और दीवारों में हैरी पॉटर सिरीज़ के विलेन देखते हैं.

इसी तरह कोई नई दवा शुरू करने पर हमें मोटे होने का डर सताता रहता है. ये ठीक उसी तरह की सोच है कि टीका लगाने से सेहत परेशान करती है. आबादी कोई भी हो, सेहत की कोई न कोई दिक़्क़त तो होगी ही. अब ये टीके से जुड़ी हो या गर्भनिरोधक से, ये आपकी सोच की बिनाह पर तय होगा.

मारिया कहती हैं कि औसत इंसान का हर साल औसतन आधा किलो वज़न बढ़ता है. इसकी शुरुआत वयस्क होने से होती है. कमोबेश इसी दौर में महिलाएं गर्भनिरोधक का इस्तेमाल शुरू करती हैं. ऐसे में खाने पर क़ाबू न रख पाने के बजाय मोटापे के लिए दवा को ज़िम्मेदार ठहराना आसान हो जाता है.

मारिया बताती हैं कि पिछले साल उन्होंने कुछ महिलाओं के शरीर में गर्भनिरोधक इम्प्लांट लगाए. इसके बावजूद वो महिलाएं ये शिकायत कर रही थीं कि उनका वज़न बढ़ रहा है.

वैसे, जानकार कहते हैं कि गर्भनिरोधक गोलियों का महिलाओं के शरीर पर यक़ीनन असर पड़ता है. लेकिन ये मोटापे की शक़्ल में ही दिखे, ये ज़रूरी नहीं.

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मांसपेशियों पर असर

2009 में टेक्सस की ए ऐंड एम यूनिवर्सिटी के स्टीवेन रीचमैन गर्भनिरोधक गोली के एक दिलचस्प असर को खोजा. वो भी महज़ इत्तिफ़ाक़न.

स्टीवन कोई और ही रिसर्च कर रहे थे, जब उन्होंने देखा कि गर्भनिरोधक गोलियां लेने वाली महिलाओं की पेशियां दूसरों के मुक़ाबले 40 फ़ीसद तक कम बढ़ीं. स्टीवन कहते हैं कि ये बड़ा फ़र्क़ था.

हम सब को पता है कि औरतों के मुक़ाबले मर्दों में ज़्यादा मांसपेशियां होती हैं. मर्दों के शरीर में 33 किलो वज़न पेशियों की वजह से होता है. इसकी बड़ी वजह ये होती है कि महिलाओं के बरक्स मर्द लंबे और ज़्यादा भारी होते हैं. मर्दों के शरीर का 38 फ़ीसद हिस्सा पेशियां होती हैं. वहीं महिलाओं के शरीर का महज़ 31 फ़ीसद हिस्सा पेशियां होती हैं.

पुरुषों के पास ऐसे हार्मोन होते हैं, जो शरीर को बढ़ने का निर्देश देते हैं. इनमें से एक है स्टेरॉयड डीएचईए. ये एड्रिनल ग्रंथियों से निकलता है, जो हमारे गुर्दों से जुड़ी हुई होती हैं. इस स्टेरॉयड का काम हमारी हड्डियों को मज़बूत रखने से लेकर बीमारियों से लड़ने की हमारी क्षमता को बनाए रखना होता है.

ये स्टेरॉयड खिलाड़ियों के बीच बेहद लोकप्रिय है. ये मांसपेशियों के निर्माण में मददगार होता है. इसका इस्तेमाल क़ानूनी भी है.

लेकिन, इसका अलग से इस्तेमाल हमारे जिगर को नुक़सान पहुंचा सकता है.

वैसे, डीएचईए स्टेरॉयड महिलाओं में भी निकलता है. हालांकि इसकी तादाद पुरुषों के मुक़ाबले कम होती है. गर्भनिरोधक गोलियों में तो इसकी तादाद और भी कम होती है.

वैसे, गर्भनिरोधक गोलियां लेने की वजह से महिलाओं की मांसपेशियां बनने की शिकायत हर महिला में नहीं थी.

स्टीवन रीचमैन कहते हैं कि गर्भनिरोधक गोलियों में पाया जाने वाला प्रोजेस्टेरोन हार्मोन ही इसके लिए ज़िम्मेदार है. शायद ये हार्मोन मांसपेशियां बढ़ाने के दिमाग़ के फ़रमान की अनदेखी करता है. मगर, ये बात भी अटकल ही है.

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वसा जमा करना

वैसे, गर्भनिरोधक गोलियों से महिलाओं के शरीर में दूसरे तरह के बदलाव आते हैं. ये शायद शरीर में फैट या वसा जमा करने के तरीक़े और जगह पर भी असर डालती है.

जब महिलाओं में मासिक धर्म शुरू होता है, तो एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन की वजह से उनमें महिलाओं वाले गुण विकसित होने लगते हैं. उनके स्तन बढ़ने लगते हैं. कूल्हे भारी होने लगते हैं. ऐसा शारीरिक बदलाव वसा के शरीर में संग्रह होने का ठिकाना बदलने की वजह से होता है.

महिला का आदर्श शरीर तब उभरता है, जब उनके शरीर में कटाव लाने वाली वसा सही जगह पर जमा हो, इसके लिए एस्ट्रोजेन हार्मोन ज़िम्मेदार होता है. महिलाओं के स्तन, कूल्हों और जांघों के भारी होने की वजह इस हार्मोन के रिसेप्टर होते हैं.

अब एस्ट्रोजेन हार्मोन का तालमेल बिगड़ने पर महिलाओं के शरीर के उतार-चढ़ाव पर भी फ़र्क़ पड़ सकता है. लेकिन अब तक रिसर्च ये नहीं साबित कर पाए हैं कि गर्भनिरोधक गोलियां लेने वाली महिलाओं के शरीर की बनावट पर इन गोलियों का गहरा असर पड़ता है.

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कोशिकाओं का मोटा होना

बहुत सी महिलाओं को डर लगता है कि गर्भनिरोधक गोलियां लेने से उनका शरीर थुलथुल हो जाएगा.

इसकी वजह भी हार्मोन एस्ट्रोजेन हो सकता है क्योंकि ये हार्मोन गुर्दे में बनने वाले कुछ ख़ास एंजाइम के बनने पर असर डालता है. इन प्रोटीन की वजह से शरीर के कुछ हिस्सों में पानी जमा होने लगता है. इससे कोशिकाएं मोटी हो जाती हैं. अब चूंकि महिलाओं के स्तनों, कूल्हों और जांघों पर ज़्यादा फैट जमा होती है, तो इन हिस्सों के और भी मोटे होने का डर होता है, अगर वो गर्भनिरोधक गोलियां ले रही होती हैं.

वैसे, कोशिकाएं उन महिलाओं की भी बढ़ती हैं, जो गर्भनिरोधक गोलियां नहीं ले रही होती हैं. ऐसी महिलाओं के मासिक धर्म के ठीक पहले कोशिकाओं में पानी जमा होने की वजह से शरीर के कुछ हिस्सों में थुलथुलापन महसूस होता है. गर्भनिरोधक गोलियों में लैब में बना एस्ट्रोजेन हार्मोन होता है. इससे पानी जमा होने की शिकायत और बढ़ जाती है. अब चूंकि ये गोलियां कमोबेश रोज़ाना ली जाती हैं तो ये शिकायत भी बढ़ जाती है.

यानी भले ही गर्भनिरोधक गोलियों की वजह से वज़न न बढ़ रहा हो. मगर कुछ महिलाओं को कपड़े तंग होने की शिकायत हो सकती है. इसी वजह से गर्भनिरोधक गोलियां लेने वाली महिलाएं अपनी ब्रा के कप साइज़ के बढ़ जाने की शिकायत करती हैं.

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स्वीडन के डॉक्टरों की एक रिसर्च ये भी कहती है कि दस साल से ज़्यादा वक़्त तक लगातार गर्भनिरोधक गोलियां लेने वाली महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है. इस रिसर्च के दौरान ये भी पता चला था कि लंबे वक़्त तक गर्भनिरोधक गोलियां लेने वाली महिलाओं के स्तन औसत से ज़्यादा बड़े हो गए थे. जिन महिलाओं ने कुछ वक़्त के लिए गर्भनिरोधक गोलियां ली थीं, उनके स्तन के आकार सामान्य ही पाए गए.

वैसे, रिसर्च के दौरान महिलाओं के गर्भनिरोधक गोलियां लेने से पहले के बस्ट साइज़ को नहीं नापा गया था. इसलिए पक्के तौर पर ये नहीं माना जा सकता है कि उनके स्तनों का आकार गर्भनिरोधक गोलियों की वजह से बढ़ा. हो सकता है कि वो उनका क़ुदरती ब्रेस्ट साइज़ ही रहा हो.

ऐसा भी हो सकता है कि लैब में बने हार्मोन की वजह से महिलाओं की कोशिकाओं में पानी जमा हो रहा हो, इसलिए उन की ब्रा के कप साइज़ बढ़ रही हो.

वैसे गर्भनिरोधक गोलियों का शरीर पर जो भी हल्का या ज़्यादा असर पड़ रहा हो, बहुत सी महिलाएं मानती हैं कि ये जोख़िम लिया जा सकता है क्योंकि इससे वो निश्चिंत होकर सेक्स का आनंद ले सकती हैं. बिना इस बात की फ़िक्र किए कि वो प्रेग्नेंट हो जाएंगी.

अब, गर्भनिरोधक गोलियों से किसी महिला का 10-12 किलो वज़न तो बढ़ भी नहीं जाएगा जितना गर्भधारण के नौ महीनों में बढ़ता है.

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