समुद्र में कैसे डूब जाते हैं विशालकाय जहाज़?

  • 3 नवंबर 2018
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समुद्र में जब हम बड़े-बड़े जहाज़ तैरते देखते हैं तो लगता है ये जहाज़ समुद्र से लोहा लेने के लिए उसके सीने पर सवार हैं.

लेकिन हक़ीक़त ये है कि अपने साइज़ से डरा देने वाले ये जहाज़ कभी समुद्र के एक थपेड़े से पलट जाते हैं, तो कभी खुद अपने ही वज़न से डूब जाते हैं.

विशाल मालवाहक जहाज़ों में बहुत तरह का सामान लाद कर एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जाता है. इसमें बहुत तरह की धातु, अयस्क और खनिज रेत भी ले जाए जाते हैं. लेकिन इन जहाज़ों पर लदा माल ही इनके डूबने की वजह बनता है.

लिक्विफैक्शन की प्रक्रिया

अभी तक अनगिनत जहाज़ समुद्र में समा चुके हैं. एक अंदाज़े के मुताबिक़ हर साल लगभग 10 बड़े मालवाहक जहाज़ समंदर में समा जाते हैं.

और इन जहाज़ों पर सवार कर्मचारी बेमौत मारे जाते हैं. कार्गो जहाज़ों में धातुओं के जो अयस्क लादे जाते हैं, अक्सर वो केमिकल रिएक्शन से गलने लगते हैं. इस प्रक्रिया को लिक्विफैक्शन कहते हैं.

2015 में 56 किलो टन का मालवाहक जहाज़ ज्यूपिटर दक्षिण-पश्चिम वियतनाम के पास समुद्र में डूब गया था. इसमें सवार 19 कर्मचारियों में से सिर्फ़ एक बचाया जा सका था.

इस हादसे के बाद इंटरनेशनल मेरीटाइम ऑर्गेनाइज़ेशन यानी (आईएमओ) ने कार्गों पर लादे जाने वाले एल्युमिनियम के अयस्क बॉक्साइट के बारे में चेतावनी जारी की थी.

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माल लादने में गलती

दरअसल मालवाहक जहाज़ों पर माल लादते वक़्त ख़ास एहतियात बरतने की ज़रूरत होती है. लेकिन इसकी अनदेखी की जाती है. लापरवाही से माल लादने की वजह से जहाज़ के नीचे पानी में तेज़ी से उछाल होता है, जिसकी वजह से अयस्क हिलने-डुलने लगते हैं.

इससे जहाज़ के संतुलन पर असर पड़ता है. पानी का दबाव बढ़ने की वजह से माल कई बार जहाज़ के एक ही हिस्से में जमा हो जाता है.

जहाज़ लंबे समय तक एक ही कोण पर झुका रहता है और गलने लगता है. यही नहीं कई बार जलपोत पानी में इतना ज़्यादा झुक जाता है कि समुद्र का पानी इसमें आने लगता है और जहाज़ को डुबोने में अपना किरदार निभाता है.

इंटरनेशनल मेरीटाइम ऑर्गेनाइज़ेशन ने लिक्विफैक्शन रोकने के लिए मानक तय किए हैं. जिसके मुताबिक़ ये तय कर दिया गया है कि कितनी नमी वाला सामान ले जाया जा सकता है. लेकिन फिर भी हादसे रुक नहीं रहे हैं.

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जहाज़ में सामान कैसे रखें?

अगर जहाज़ पर माल लादने के तरीक़े में ही थोड़ा सा बदलाव कर दिया जाए तो बड़े हादसों को रोका जा सकता है. इसके अलावा माल लादने से पहले ये सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि कौन से अयस्क लादे जाएं और कौन से नहीं.

साथ ही ये भी देखा जाए कि पानी का दबाव होने पर किस अयस्क में कौन से रासायनिक परिवर्तन होंगे. कहीं ये केमिकल रिएक्शन जहाज़ गलने की वजह तो नहीं बन जाएंगे.

साथ ही जहाज़ पर माल सही तरीक़े से लादा जाए ये भी ध्यान रखना होगा. ताकि जहाज़ के किसी एक हिस्से पर दबाव ज़्यादा ना बने और जहाज़ असंतुलित होने से बचा रहे.

इसमें नई तकनीक अहम रोल निभा सकती है. जहाज़ों में पानी के दबाव के लिए सेंसर लगा दिए जाएं तो उससे काफ़ी मदद मिल सकती है.

इसके अलावा जितने भी अयस्क लादे जाएं उन सब पर नज़र रखी जाए. जो अयस्क समंदर की उथल-पुथल में गलने लगते हैं, उन्हें फ़ौरन जहाज़ से निकाल दिया जाए.

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इसमें कार्गो कर्मचारियों को भी सतर्क रहने की ज़रूरत है. मिसाल के लिए अगर शिप में पानी आ रहा हो तो उसे तुरंत निकाल दें.

मौसम का मिज़ाज देखते हुए जहाज़ का रास्ता बदल दिया जाए. अगर ऐसी छोटी-छोटी बातों का ध्यान रख लिया जाए तो बड़े हादसों को टाला जा सकता है.

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