Valentine's Day: रिलेशनशिप और सच्चे प्यार में यकीन के स्याह पक्ष

  • 14 फरवरी 2019
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क्या आपने पार्टनर के साथ मतभेद के किसी मुद्दे को अपने किसी दोस्त से शेयर किया है, यह मानते हुए कि वो बातें इतनी महत्वपूर्ण नहीं हैं कि उन्हें तवज्जो दी जाए?

या अपने दोस्त को किसी ऐसे के साथ रोमांस की शुरुआत करते देखा है जो आपकी नज़रों में उसके मुनासिब नहीं था, और फिर आप देखते हैं कि धीरे-धीरे दोनों का प्यार परवान चढ़ने लगता है.

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, हमारे रिश्ते की शुरुआत कैसे होती है और हम कैसे इसे बनाए रखते हैं, इसे प्रभावित करने वाले दो बड़े पैमाने होते हैं.

पहला पैमाना यह है कि हम एक दूसरे के कितने अनुकूल हैं, इसके शुरुआती संकेतों और पहली नज़र में पड़े प्रभाव को कितना महत्व देते हैं, जबकि दूसरा पैमाना यह कि रिश्ते में आने वाली समस्याओं को हम कैसे सुलझाते हैं?

ये किसी रिश्ते के निहित सिद्धांत हैं (क्योंकि हम अक्सर उनके बारे में बातें नहीं करते).

सहज रूप से हम ये सोच सकते हैं कि हमें सच्चे प्यार में कमोबेश विश्वास है, लेकिन इस पर हम तब तक अपने साथी के साथ खुलकर बातें नहीं करते जब हम नए रिश्ते की शुरुआत करते हैं.

ये दोनों पैमाने हमें बताते हैं कि क्या हम अपने पार्टनर के साथ मतभेद के मुद्दों पर बातें करने से कतराते हैं, उन जगहों पर त्रुटियों को निकालते हैं जहां वो मौजूद ही नहीं होतीं, और रिश्ते से बाहर निकलने का उपाय ढूंढते हैं.

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इसमें निहित मनोभाव का जो अंतर है वो भी हमें यह समझने में मदद कर सकता है कि दोस्त या अन्य किसी की रोमांटिक पसंद हमें मुनासिब क्यों नहीं लगते हैं.

चलिये दो क़्विज़ के माध्यम से यह जानने का प्रयास करते हैं आप इसके बारे में क्या सोचते हैं.

जीवनसाथी पैमाना

नीचे दिये गये प्रश्नों को उत्तर 1 से 7 के पैमाने पर दें, जहां 1 का अर्थ पूरी असहमति और 7 का अर्थ पूरी सहमति है.

1. एक रोमांटिक रिश्ते की सफलता ज़्यादातर इस बात पर आधारित होती हैं कि इसमें लोग एक दूसरे के लिए "सही" हैं या नहीं.

2. एक ऐसा शख्स तो है जो मेरे लिए एकदम (या क़रीब-क़रीब) सही है.

3. शादी में, कई लोग अपने जीवनसाथी के साथ गहरे अंतरंग लगाव ढूंढते (या पता लगाते) हैं.

4. यह बेहद ज़रूरी है कि मैं और मेरा जीवनसाथी शादी के बाद एक दूसरे के साथ बेहद प्यार से रहें.

5. मैं तब तक किसी से शादी नहीं कर सकता/सकती जब तक कि इस बात का यकीन न हो कि हमारे बीच प्यार बहुत पक्का है.

6. "मिस्टर राइट" या "मिस राइट" जैसी कोई चीज नहीं है.

7. मुझे उम्मीद है कि मेरा भावी पति या पत्नी आज तक मिले किसी भी शख्स में सबसे अद्भुत शख़्स होगा.

8. जो परफेक्ट मैच की तलाश में हैं वो अपना समय बर्बाद कर रहे हैं.

9. अधिकतकर शादियों के असफल होने का कारण यह होता है कि दोनों एक दूसरे के उपयुक्त नहीं हैं.

10. आप जब एक दूसरे से मिलते हैं, उससे पहले ही आप दोनों के बीच एक बांड हो जाता है.

जानिए, आपको कितने नंबर मिले?

अब स्कोरिंग के लिए सबसे पहले आपको सवाल संख्या 1, 2, 3, 4, 5, 7, 9 और 10 के अंकों को जोड़ना है.

प्रश्न 6 और 8 के लिए, आपको 8 नंबर से प्रत्येक के जवाब को घटाना होगा. अब जो नया अंक मिला है वो ही इनके जवाब हैं.

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वर्क-इट-आउट पैमाना

1 से 7 के पैमाने पर नीचे दिये गये सवालों के जवाब दें, जहां 1 का अर्थ पूरी असहमति और 7 का अर्थ पूरी सहमति है.

1. रोमांटिक रिलेशनशिप की सफलता अधिकतर इस पर निर्भर करती है कि लोग इसे बनाए रखने को लेकर कितनी कोशिशें करते हैं.

2. शादी के मामले में, एक दूसरे के लिए कितने योग्य हैं इसकी तुलना में इसे बनाए रखने की कोशिश अधिक महत्वपूर्ण है.

3. रिश्ते के मामले में दोनों के बीच प्यार पनपता (पाया जाता) है.

4. यदि पति-पत्नी कोशिश करेंगे तो उनके शादी के सफल होने की संभावना अधिक है.

5. यदि उचित व्यक्ति है तो मैं ज़्यादातर ऐसे लोगों के साथ खुशी-खुशी विवाह कर सकता/सकती हूं.

6. विवाह के असफल होने का बहुत हद तक कारण यह है कि लोग इसे बचाने का प्रयास नहीं करते.

7. किसी को आप कितनी अच्छी तरह से जानते हैं, यह निर्भर करता है कि आप उसे कब से जानते हैं.

8. यदि मैं बिना सोचे समझे किसी से भी शादी करता/करती, तो मैं संतुष्ट होता/होती.

9. बीतते समय के साथ ही आप अपने साथी के बारे में जान सकते हैं.

अपना स्कोर जानने के लिए 1 से 9 तक के सवालों पर दिये अपने जवाब को जोड़े और फिर उनके योग को 9 से भाग दें.

इस क़्विज़ में लिए गए प्रश्न इलिनोइस स्थित अरोरा यूनिवर्सिटी के रेने फ्रानियक के रिलेशनशिप थ्योरी में पूछे गए सवालों से लिए गए हैं.

फ्रानियक ने 'जीवनसाथी' और 'वर्क-इट-आउट' पैमाने को समझाया. अन्य शोधकर्ता ऐसे ही पैमानों की व्याख्या 'किस्मत' और 'ग्रोथ' से करते हैं.

आपने 'जीवनसाथी' पैमाने में अधिक स्कोर किया और आप इसे लेकर हैरान है तो आप अकेले नहीं हैं. लोगों को लगता है कि वो 'वर्क-इट-आउट' किस्म के हैं लेकिन, हम 'जीवनसाथी' को लेकर बहुत अधिक समर्थन देखते हैं.

जब हम लोगों से इन सिद्धांतों की बातें करते हैं तो वो 'जीवनसाथी' पर नहीं बोलते क्योंकि ये वैज्ञानिक नहीं केवल शब्द है.

रोमांटिक विश्वासों में यकीन दिलाने के लिए हम इसे कुछ और बुला सकते हैं.

इसमें आश्चर्य की बात नहीं है कि हम इन विचारों पर यकीन करना चाहते हैं जबकि पश्चिमी सभ्यता में लोगों को इसकी तरफ मोड़ने का बहुत प्रयास किया जा रहा है.

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रिश्ते में खटास

अब आपके पास अपना स्कोर है, तो इसमें आपको क्या देखना चाहिए? जब रिश्ते में खटास आती है तो जिन लोगों ने ग्रोथ पैमाने में अच्छा किया है वो इसका सबसे अच्छे तरीके से सामना करते हैं. वास्तव में, रिश्ते में ऐसी समस्या के होने से जिस पर आप काम कर सकते हैं, रिश्ता और मजबूत ही होता है.

ग्रोथ पैमाने पर अधिक स्कोर करने वाला जोड़ा वास्तव में मतभेद की स्थिति से उबरने के बाद बेहतर महसूस करता है.

ऐसे जोड़े के बीच रिश्ते में एक साथ बने रहने के लिए छोटे और असंगत मुद्दे अहम हो सकते हैं.

एक जोड़ा इसमें जितना समय देगा वो इसे लेकर उतना ही अधिक प्रतिबद्ध होगा. वो चुनौतियों का बड़े ही आनंद से सामना करते हैं.

इन्हीं कारणों से, ग्रोथ में यकीन रखने वाले जोड़े आपसी योग्यता में बड़े अंतर की अनदेखी करेंगे.

उनके लिए, योग्यता का तालमेल बहुत हद तक समय के साथ है- और ये कुछ ऐसा है जिसपर काम करने की ज़रूरत होती है.

जिन्हें 'किस्मत' में ज़्यादा यकीन है, उनके साथ कुछ संभावित नुकसान वाले परिणाम के साथ इसका विपरीत होता है.

खास कर, रिलेशनशिप जब अपने शुरुआती दौर में होता है तो कोई एक मुद्दा ही ब्रेक-अप का कारण बन सकता है, क्योंकि किस्मत में यकीन रखने वाले यह मानने लगते हैं कि वो उनका "परफेक्ट" जीवनसाथी है ही नहीं.

किस्मत में यकीन करने वाले यह तर्क दे स कते हैं कि 'उनका साथी वास्तव में उन्हें कभी समझ ही नहीं पाया' या एक छोटी ग़लती का मतलब यह "सबूत है कि हम एक दूसरे के योग्य" ही नहीं हैं.

फ्रानियक पाती हैं कि जब जोड़ा एक दूसरे से बहुत हद तक मेल खाता है तो भी ऐसे मामले सामने आते हैं.

बदतर तो ये कि वो बेहद कठोर तरीके से रिलेशनशिप तोड़ देते हैं. जिन लोगों को सच्चे प्यार में यकीन है वो अपने पूर्व-पार्टनर से पूरी तरह से संबंध तोड़ लेते हैं- वो उससे संपर्क करने से भी तब तक बचते हैं जब तक कि दूसरा व्यक्ति उनसे बात करना छोड़ नहीं देता.

शायद इसलिए क्योंकि ऐसा करने वाला यह मानता है कि, चूंकि दूसरा व्यक्ति रिश्ते के उपयुक्त नहीं है लिहाजा उसे जवाब देने का कोई फायदा नहीं है.

सेंट मैरी कॉलेज ऑफ़ मैरीलैंड की मनोवैज्ञानिक गिली फ्रीडमैन कहती हैं, "सेंट मैरीज कॉलेज ऑफ मैरीलैंड के मनोवैज्ञानिक गिल्ली फ्रीडमैन कहती हैं, "वे इसे नकारात्मक चीज़ के रूप में नहीं देखते हैं."

सामाजिक बहिष्कार विषय का गहन अध्ययन करने वाली फ्रीडमैन कहती हैं, "ग्रोथ के पैमाने पर आपके स्कोर का ओवरऑल नतीजे पर कम असर पड़ता है, हालांकि, यदि आपने ग्रोथ पर बहुत अधिक स्कोर किया है तो पूरी तरह से संबंध तोड़ने के बारे में आपकी राय नकारात्मक होने की बहुत अधिक संभावना है."

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यदि वो किसी मुद्दे पर ब्रेकअप नहीं करते और फिर ये भी मानते हैं कि उन्हें सच्चा प्यार नहीं मिला तो इसका मतलब ये है कि किस्मत में यकीन रखने वाले जोड़े एक साथ आपसी मुद्दे की अनदेखी कर रहे हैं.

फ्रानियक कहती हैं कि किस्मत में यकीन रखने वाले एक दूसरे की ग़लतियों पर रहमदिल और लड़ाई से बचने वाली प्रवृति के होते हैं क्योंकि वो यह मानना चाहते हैं कि सामने वाला व्यक्ति ही उनका हमसफ़र है.

वो कहती हैं, "मामूली लगने वाली असहमति के लिए यह सकारात्मक हो सकता है लेकिन यदि आप बड़े विवाद के मुद्दों की अवहेलना करते हैं तो आप उस व्यक्ति के साथ रह रहे हैं जो आपके लिए अच्छा नहीं है."

और इसके परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं. लंबे वक्त से साथ रह रहे किस्मत में यकीन करने वालो के बीच ऐसे मुद्दों पर एक दूसरे की अनदेखी की बहुत संभावना है, यह मानते हुए खुद को ठगना कि हम बेहतर जोड़ी हैं क्योंकि हमारा लंबा साथ रहा है.

फ्रानियक कहती हैं, "हमने पाया कि किस्मत में यकीन रखने वाले उनके साथ रिश्ते में थे जो उनके लिए सही नहीं थे, उनके बीच हिंसा की घटनाएं ज़्यादा हुईं थीं. उन्होंने समस्याग्रस्त रिश्ते को कम महत्व दिया. वो अन्य लोगों की तुलना में अपने साथी को कहीं अधिक मौका देते हैं. कुछ लोग चेतावनी को ज़ल्दी पहचान लेते हैं और रिश्ते को ख़त्म कर देते हैं तो वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो यह नहीं मानते कि वो सही रिश्ते में हैं, बावजूद इसके वो आर्थिक वजहों से उस रिश्ते में बने रहते हैं.

ऐसा लगता है कि रोमांस में विश्वास रखने वालों का यकीन समय के साथ और पुख्ता होता जाता है. इसलिए, किस्मत में यकीन करने वाले हमेशा किस्मत पर ही यकीन करते हैं.

फ्रानियक कहती हैं, "ये सिद्धांत पक्के हैं. कोई व्यक्ति अपने 20वें या 30वें साल में आता है तो उसके व्यक्तित्व में बहुत स्थिरता आती है. व्यक्तित्व की तरह ही, रिश्ते का निर्माण कम उम्र में विकसित किया जाता है- बच्चे इन विचारों को अपने इर्द-गिर्द मौजूद रिश्तों के आधार पर बनाते हैं."

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फ्रीडमैन कहती हैं, "हालांकि, दोनों सिद्धांतों के आपस में एक्सक्लूसिव होने की ज़रूरत नहीं है. जोड़े भले ही आपसी तालमेल से रिश्ते में सुधार कर सकते हैं, लेकिन यकीन यह भी है कि कोई परफेक्ट व्यक्ति अभी भी आपके लिए मौजूद है."

वो कहती हैं, "बहुत से लोग ऐसे नहीं हैं जो सोचते हों कि रिश्ते में ग्रोथ संभव नहीं है. और हम अभी भी उस यकीन को व्यक्त करने के तरीकों को बदल सकते हैं. हम यह उम्मीद करते हैं कि पिछले अनुभव से हम यह सीखते हैं कि नए रिश्ते की ओर कैसे बढ़ा जाए."

तो भले ही आप रोमांटिक किस्मत में यकीन रखते हों, अपने रिश्ते को आप बेहद संवेदना के साथ ख़त्म कर सकते हैं न कि फीके तरीके से, और समस्याओं की अनदेखी करने के बजाय उन्हें सुलझाने का संजीदगी से प्रयास कर सकते हैं.

वो कहते हैं न कि सच्चे प्यार का रास्ता आसान नहीं होता- लेकिन यदि हमें हमारी खुद की रूमानी आदतों का पता हो तो इसके उबड़-खाबड़ रास्ते में मिलने वाले उछाल और मोड़ों में ये हमारा मार्गदर्शन करते हैं.

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(यह लेख बीबीसी फ़्यूचर की कहानी का अक्षरश: अनुवाद नहीं है. हिंदी पाठकों के लिए इसमें कुछ संदर्भ और प्रसंग जोड़े गए हैं. मूल लेख आप यहां पढ़ सकते हैं. बीबीसी फ़्यूचर के दूसरे लेख आप यहां पढ़ सकते हैं.)

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