क्या सोयाबीन आपके लिए नुक़सानदेह है?

  • 26 अगस्त 2019
सोयाबीन इमेज कॉपीरइट Getty Images

सोया को आजकल सुपरफ़ूड कहा जाता है. भारत समेत बहुत से एशियाई देशों में सोया हज़ारों साल से खाया जा रहा है. हालांकि, पश्चिमी देशों की बात करें, तो वहां सोया खाने का चलन 60 वर्ष पुराना ही है.

आज की तारीख़ में पश्चिमी देशों के सुपरमार्केट सोया उत्पादों से भरे होते हैं. सोया मिल्क, सोया बर्गर, सोया सॉस और टोफ़ू जैसे उत्पादों की भारी मांग है. इन्हें प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है. ख़ास तौर से रेड मीट का. लाल मांस को कैंसर समेत कई बीमारियों की वजह पाया गया है. इस वजह से पश्चिमी देशों में आजकल लोग सोया उत्पाद को ही प्रोटीन का अच्छा स्रोत मानने लगे हैं. क्योंकि इसमें फैट भी कम ही होता है.

यही वजह है कि सोया खाने वालों को दिल की बीमारियां होने की आशंका कम हो जाती है. इसमें प्रोटीन, अनसैचुरेटेड फैट, विटामिन बी, फ़ाइबर, आयरन, कैल्शियम और ज़िंक जैसे इंसान की सेहत के लिए ज़रूरी तत्व पाए जाते हैं.

पर, आज जब बहुत से लोग सोया उत्पादों को अच्छी सेहत से जोड़ कर देखते हैं, तो कुछ लोगों ने इसे लेकर आशंकाएं भी जताई हैं. कहा जा रहा है कि ये हमारे हारमोन पर असर डालता है.

ये विवाद इसलिए है, क्योंकि सोया में आइसोफ्लेवन्स पाये जाते हैं. इनमें महिलाओं के हारमोन ओस्ट्रोजेन जैसे गुण होते हैं. तो, सोया में पाए जाने वाले आइसोफ्लेवन्स, ओस्ट्रोजेन जैसा काम करते हैं. ये शरीर में ओस्ट्रोजेन से जुड़ाव रखने वाले तत्वों से गठजोड़ करने लगते हैं. इसी वजह से कई लोग ये आशंका जताते हैं कि ज़्यादा सोया खाने से महिलाओं को स्तन कैंसर हो सकता है.

हालांकि वैज्ञानिकों ने पिछले एक दशक में आइसोफ्लेवन्स को लेकर बहुत रिसर्च की है. फिर भी इस सवाल का सीधा जवाब नहीं मिला है कि क्या सोया खाने से महिलाओं को स्तन कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है?

कई रिसर्च में तो ये बात सामने आई है कि सोया असल में कैंसर का कारण नहीं, बल्कि इससे बचाता है. पर, ये बात भी पक्के तौर पर कहने से जानकार बचते हैं.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

ब्रेस्ट कैंसर की आशंका

एशियाई देशों में कई सदियों से सोया खाया जा रहा है. इन देशों की महिलाओं में स्तन कैंसर की आशंका, अमरीकी महिलाओं के मुक़ाबले, 30 प्रतिशत तक कम हो जाती है. इसे इस बात से भी समझ सकते हैं कि जापान में हर महिला औसतन 30 से 50 मिलीग्राम तक आइसोफ्लेवन्स सोया के ज़रिए लेती है. जबकि यूरोपीय देशों और अमरीका में महिलाएं औसतन 3 मिलीग्राम आइसोफ्लेवन्स ही सोया के माध्यम से खाती हैं.

सोया के बारे में ये भी कहा जाता है कि ये महिलाओं में स्तन कैंसर की आशंका कम करता है. अमरीका की टफ्ट्स यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफ़ेसर फैंग फैंग झैंग ने ब्रेस्ट कैंसर की शिकार 6 हज़ार अमरीकी महिलाओं पर रिसर्च की.

उन्होंने पाया कि अगर स्तन कैंसर की शिकार महिलाएं अपने खान-पान में सोया का प्रयोग ज़्यादा करती हैं, तो उनके ब्रेस्ट कैंसर से मरने की आशंका 21 फ़ीसद तक कम हो जाती है.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

सोया के बारे में कोई राय बनाना आसान नहीं

सोया के कितने फ़ायदे होते हैं, इस बारे में जानकार पक्के दावे करने से बचते हैं. इसे अक्सर रेड मीट के विकल्प के तौर पर खाया जाता है. क्योंकि रेड मीट को दिल की बीमारियों और कैंसर का सबसे बड़ा कारण माना जाता है.

अब अगर सोया से ब्रेस्ट कैंसर कम होता है. तो, इसकी वजह इसमें पाए जाने वाले आइसोफ्लेवन्स हो सकते हैं. क्योंकि ये शरीर की कोशिकाओं में एपॉप्टोसिस की प्रक्रिया को बढ़ावा देते हैं. ऐसा तब होता है, जब किसी कोशिका का डीएनए कैंसर की वजह से विकृत हो जाता है, तो कोशिका ख़ुद को ख़त्म कर लेती है, ताकि ज़ख़्मी कोशिका से कैंसर न बने.

फिर, सोया से कैंसर होने की बात उठी कहां से?

प्रयोगशालाओं में सोया की वजह से कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को बढ़ते देखा गया है. ये प्रयोग वर्ष 2001 में चूहों पर किए गए थे. लेकिन, वर्ष 2010 में हुए एक प्रयोग में देखा गया कि सोया की वजह से ब्रेस्ट कैंसर पर कोई ख़ास असर नहीं होता.

वैज्ञानिक इसका कारण सोया में पाए जाने वाले तत्व आइसोफ्लेवन्स को मानते हैं. जब हम सोया खाते हैं, तो इनमें मौजूद आइसोफ्लेवन्स या तो अल्फा ओस्ट्रोजेन रिसेप्टर से जुड़ते हैं, या फिर बीटा से. अल्फा से जुड़ने वाले आइसोफ्लेवन्स कैंसर को बढ़ावा देते हैं. लेकिन, देखा ये गया है कि आइसोफ्लेवन्स अक्सर ओस्ट्रोजेन के बीटा रिसेप्टर से ही गठजोड़ करते हैं. इसीलिए इनकी वजह से कैंसर बढ़ने की आशंका कम हो जाती है.

एशियाई देशों में महिलाओं को गर्भ से ही आइसोफ्लेवन्स मिलने लगते हैं. वहीं, पश्चिमी देशों में सोया खाने की शुरुआत ज़्यादा देर से होती है. ये भी आइसोफ्लेवन्स के अलग-अलग बर्ताव की वजह हो सकती है.

शुरुआती जीवन से ही सोया खाने का एक फ़ायदा ये भी देखा गया है कि इससे दिल की बीमारियों की आशंका कम हो जाती है. एशियाई और पश्चिमी देशों की महिलाओं में हुई रिसर्च में ये बात पायी गई है. क्योंकि सोया में लो डेन्सिटी लिपोप्रोटीन कोलेस्ट्रॉल कम होता है. ये कोलेस्ट्रॉल दिल की बीमारियों का जोखिम बढ़ाता है.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

कैसे खाते हैं सोया?

सोया खाने का फ़ायदा ये भी है कि इस में ख़राब फैट यानी सैचुरेटेड फैट कम होते हैं. तो, ये नुक़सान भी कम करता है. एक रिसर्च में ये भी देखा गया है कि सोया, पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर की आशंका को भी कम करता है. अमरीका की इलिनॉय यूनिवर्सिटी की कैथरीन एपलगेट ने इस बारे में काफ़ी रिसर्च की है. एपलगेट का कहना है कि सोया प्रोस्टेट कैंसर के विकास को रोकने में मददगार होता है.

सोया आप किस तरह से लेते हैं, इसका भी बहुत फ़र्क़ पड़ता है. आप अगर सीधे सोयाबीन खाते हैं, तो इसमें आइसोफ्लेवन्स की मात्रा ज़्यादा होती है. पर, आप सोया मिल्क लेते हैं, तो इसमें आइसोफ्लेवन्स बहुत ही कम रह जाते हैं.

कुल मिलाकर, हम ये कह सकते हैं कि सोया से नुक़सान होता है, ये राय क़ायम करना सही नहीं होगा. पिछले कुछ दशकों में सोया पर बहुत सी रिसर्च हुई हैं. इनमें से एक भी पूरी तरह से सही नहीं साबित हुई हैं. तो, सोया के कुछ फ़ायदे हैं, तो रिसर्च में कुछ नुक़सान का भी पता चला.

लेकिन, वैज्ञानिकों की आम राय यही है कि सोया खाने से सेहत को फ़ायदा ज़्यादा है, और नु़क़सान कम.

(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी फ्यूचर पर उपलब्ध है.)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार