अगर दुनिया की बत्ती गुल हो जाए तो..

  • 5 दिसंबर 2019
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ज़िंदगी को आसान बनाने के लिए इंसान ने जितने भी आविष्कार किए, उसमें सबसे अहम है बिजली. ये आधुनिक दौर की लाइफ़लाइन है.

बिजली के बिना आज जीवन की कल्पना असंभव सी लगती है. अगर सिर्फ़ एक घर की बत्ती गुल हो जाती है, तो घर का सारा काम ठप हो जाता है.

मानो ज़िंदगी ही ठहर जाती है. ऐसे में सोचिए, अगर कभी पूरे देश की बत्ती गुल हो जाए तो कैसा हाहाकार मचेगा. इसकी सबसे ताज़ा मिसाल हमने लैटिन अमरीकी देश वेनेज़ुएला में देखी.

वेनेज़ुएला में इसी साल मार्च महीने में अचानक पूरे देश की पावर सप्लाई बंद हो गई. पूरे देश में अंधेरा छा गया. अचानक पैदा हुई इस स्थिति के लिए देश पहले से तैयार नहीं था.

लिहाज़ा जैसे ही बिजली आपूर्ति रुकी, हर तरफ़ हाहाकार मच गया. सबसे ज़्यादा परेशानी तो अस्पतालों को झेलनी पड़ी. इमरजेंसी के लिए जो जेनरेटर या पावर बैंक थे, वो सभी इस्तेमाल होकर ख़त्म हो चुके थे.

डॉक्टर मोबाइल की टॉर्च जलाकर ऑपरेशन कर रहे थे. जो मरीज़ वेंटिलेटर पर थे, उन्हें हाथ के पंप के ज़रिए सांस देने की कोशिश की गई.

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आईसीयू में मशीनें बंद थीं. मरीज़ों की हालत बिगड़ रही थी और डॉक्टर लाचार थे. मरीज़ उनकी आंखों के सामने दम तोड़ रहे थे. पांच दिनों तक वेनेज़ुएला का यही हाल रहा.

इन पांच दिनों में बिजली न होने की वजह से देश भर में 26 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी.

जब मौत बनकर आया वेनेजुएला का ब्लैकआउट

बिजली आपूर्ति संकट के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं पर डेटा जमा करने वाले डॉक्टरों का कहना है, कि इस दौरान जितने मरीज़ों की मौत हुई उनमें बहुत से ऐसे थे जो डायलिसिस पर थे. अगर बिजली होती और मशीन चलती रहती तो उनकी जान बच सकती थी.

वेनेज़ुएला के इस पावर ब्लैकआउट का असर अस्पतालों तक ही नहीं सीमित रहा. बहुमंज़िला इमारतों में रहने वाले लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा.

लिफ़्ट ठप होने की वजह से सबसे ज़्यादा बुज़र्ग और बच्चे परेशान हुए. फ़्रिज बंद पड़े थे, तो खाना भी ख़ूब सड़ा. मोबाइल, कंप्यूटर की बैटरी ख़त्म हो गई तो संवाद का संकट खड़ा हो गया.

किसी को किसी की ख़ैरियत तक नहीं मिल पा रही थी. ट्रैफ़िक लाइट बंद हो गईं, तो जगह-जगह जाम लग गया. सड़कों पर हाहाकार मच गया. पानी जमा करने के लिए मोटर पंप नहीं चले तो लोगों को पास की नदियों और झरनों से पानी लाना पड़ा.

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वेनेज़ुएला ने इस साल कई बार बिजली का ऐसा संकट झेला. कभी ये संकट जल्द ख़त्म हुआ तो कभी ब्लैकआउट कई दिनों तक जारी रहा. कभी कुछ घंटों की कटौती हुई, तो कई बार कई दिनों के लिए. सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ वेनेज़ुएला के जुलिओ कास्त्रो का कहना है कि इस अगर किसी अस्पताल में चार घंटे के लिए भी बत्ती गुल हो जाए तो ये सामान्य नहीं है. सबसे ज़्यादा क़िल्लत पानी की होती है.

बिजली कटौती के दिनों में मरीज़ों को घर से पानी साथ लाने की सलाह दी जाने लगी.

वेनेज़ुएला दक्षिणी अमरीका का एक ऐसा देश है, जो प्राकृतिक तेल से मालामाल है. फिर भी यहां के लोगों को बिजली जैसी ज़रूरी चीज़ की कमी से जूझना पड़ा. हालांकि वेनेज़ुएला की सरकार ने इसका ठीकरा आतंकियों के सिर फोड़ा.

जबकि, कुछ जानकारों के मुताबिक़ देश में ऐसे हालात के लिए पुराने पड़ चुके बिजली के ग्रिड ज़िम्मेदार हैं. जिनकी लंबे समय से ना तो मरम्मत हुई और ना ही उनकी जगह पर नई लाइनें खींची गईं.

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लंबे समय और बड़े पैमाने पर बिजली आपूर्ति सप्लाई ठप होने को अंग्रेज़ी में ब्लैक स्काई इवेंट कहते हैं. ये स्थिति सिर्फ़ उन ही देशों में नहीं है, जहां टावरों की हालत खराब है, वायरिंग पुरानी है या रखरखाव ठीक नहीं है. बल्कि कनाडा और अमरीका जैसे विकसित देशों में भी कई बार ऐसे हालात पैदा हो जाते हैं कि बिजली लंबे समय के लिए गुल हो जाती है.

यहां भी लोगों को लंबे समय के लिए बिजली कटौती का सामना करना पड़ता है. लेकिन इन देशों में ऐसी स्थिति अक्सर प्राकृतिक कारणों जैसे समुद्री या बर्फ़ीले तूफ़ान की वजह से होती है.

जब सड़कों पर रुका ट्रैफिक

इसी साल जून महीने में लैटिन अमरीका के उरुग्वे, अर्जेंटीना और पराग्वे में बिजली गुल होने पर चार करोड़ लोगों को अंधेरे में रहना पड़ा था. इसी तरह अगस्त महीने में ब्रिटेन में क़रीब दस लाख लोगों को अंधेरे में रहना पड़ा. अचानक बिजली चली हो जाने से ज़िंदगी जैसे ठहर सी गई. जो लोग ट्रेन में सफ़र कर रहे थे, वो वहीं फंसे रह गए. सड़कों पर ट्रैफ़िक का हाल बेहाल हो गया.

गैस फ़ायर पावर प्लांट और विंड पावर प्लांट एक साथ बंद करने पड़े.

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हालांकि अभी पावर कट की ऐसी घटनाएं काफ़ी कम होती हैं लेकिन जानकारों को आशंका है कि बढ़ती आबादी के साथ-साथ जब बिजली की मांग बढ़ेगी, तो ऐसे ब्लैकआउट आम हो जाएंगे. हालांकि बिजली आपूर्ति के लिए पवन और सौर ऊर्जा विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किए जा रहे हैं.

लेकिन जिस तरह जलवायु परिवर्तन हो रहा है, उसे देखते हुए इन विकल्पों पर बहुत भरोसा नहीं किया जा सकता. दरअसल आज सारी दुनिया एक-दूसरे से जुड़ी हुई है. दुनिया भर के लोगों का एक दूसरे से संवाद होता है. एक दूसरे से कारोबारी रिश्ते हैं और ये सब होता है, कंप्यूटर की मदद से. और, कंप्यूटर चलता है बिजली से. लिहाज़ा एक जगह बिजली ठप होती है तो उसका असर दूर-दूर तक होता है.

पावर ग्रिड को होने वाले ख़तरों पर नज़र रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था, द इलेक्ट्रिक इन्फ़्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटी काउंसिल ने ब्लैक स्काई इवेंट के कई कारण बताएं हैं. इसमें प्राकृतिक और मानवीय दोनों कारण शामिल हैं. इनके मुताबिक़ साइबर टेररिस्ट अटैक या सुनियोजित रणनीति के तहत किसी पावर स्टेशन या ग्रिड को नुक़सान पहुंचाया जा सकता है.

इसके अलावा बड़े तूफ़ान, भूकंप और बारिश जैसे प्राकृतिक कारणों से भी बिजली सप्लाई ठप हो सकती है.

रिसर्चर मेलिसा लॉट का कहना है कि पावर ग्रिड को मानवीय और प्राकृतिक दोनों ही तरह के नुक़सान से बचाने के लिए उन्हें नई तकनीक से लैस करने और उन पर मोटी रक़म ख़र्च किए जाने की ज़रूरत है.

जब भारत में हुआ ब्लैकआउट

भारत में भी 2012 में ब्लैक आउट हुआ था और 60 करोड़ लोगों को दो दिन अंधेरे में गुज़ारने पड़े थे.

पुएर्टो रिको में समुद्री तूफ़ान मारिया की वजह से बिजली सप्लाई पूरी तरह बंद हो गई थी और पूरा देश अंधेरे में डूब गया. इसी तरह 2018 में जापान में भूकंप की वजह से होकैडो द्वीप पर पचास लाख लोगों को बिना बिजली के रहना पड़ा.

हालांकि, इन सभी देशों में प्राकृतिक कारणों से बिजली सप्लाई रूकी थी. लेकिन ऐसी घटनाओं से बचने के लिए बिजली के सिस्टम पर पैसा ख़र्च करना ज़रूरी है.

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हालांकि कई बार बिजली सप्लाई बंद होने की ऐसी वजह होती हैं जिन्हें पहले से भांपा नहीं जा सकता. मिसाल के लिए सितंबर 2003 में स्विटज़रलैंड में एक पावर लाइन पर पेड़ टूट कर गिर गया, जिसके चलते एक बड़े इलाक़े में बिजली बंद हो गई. इसके ठीक 24 मिनट बाद एक और पेड़ इटली में गिर गया और इस तरह दो बड़े ग्रिड ठप हो गए. और यूरोप से इनका संपर्क टूट गया. नतीजा ये हुआ कि पूरे इटली में अंधेरा छा गया.

आधुनिक पावर ग्रिड बहुत जटिल और एक दूसरे से बिंधे हुए हैं. लिहाज़ा किसी भी तरह की बाधा को पहले भांप लेना मुश्किल है. सबसे ज़्यादा जुड़े हुए बिजली के ग्रिड यूरोपीय देशों में हैं. जो क़रीब 24 देशों में 40 करोड़ लोगों को बिजली सप्लाई करते हैं. वहीं, अमरीका में पांच अलग-अलग पावर ग्रिड पूरे देश में बिजली आपूर्ति करते हैं.

हालांकि बदलती तकनीक के साथ बड़े बिजली घरों में किसी भी तरह की गड़बड़ी का पहले से पता लगाने के लिए आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का सहारा लिया जा रहा है. साथ ही ख़ास तरह कि आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस तकनीक विकसित की जा रही हैं, जो किसी भी गड़बड़ी को ख़ुद ही देख कर उसे ठीक कर देगी.

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Image caption जब उत्तरी ग्रिड फेल होने से रुकी दिल्ली

अमरीका का डिपार्टमेंट ऑफ़ एनर्जी इसके लिए 70 लाख डॉलर की आर्थिक मदद कर रहा है. साथ ही पावर ग्रिड में इतनी ताक़तवर बैटरी लगाई जा रही हैं कि सप्लाई बंद होने पर भी ग्रिड का जेनरेटर काम करता रहे.

रिसर्चर जूलिया मियां का कहना है कि हम कितनी ही सावधानी और सुरक्षा क्यों ना कर लें लेकिन पावर ग्रिड पूरी तरह ठप होने से बचा पाना असंभव है.

हां इतना ज़रूर किया जा सकता है कि ऐसे सिस्टम तैयार कर लिया जाएं, कि कोई भी ख़राबी आने पर उसे जल्द से जल्द ठीक किया जा सके. इसके लिए कई बड़ी संस्थाएं काम कर भी रही हैं.

हमें अपने स्तर पर भी ऐसे हालात से निपटने की तैयारी कर के रखनी चाहिए. जैसे कि घर में इमरजेंसी लाइट और टॉर्च वग़ैरह का इंतज़ाम हो. अतिरिक्त बैटरी के साथ हमेशा रखनी चाहिए. घर में पानी हमेशा स्टोर करके रखें, ताकि बिजली ग़ायब होने की सूरत में काम चलता रहे.

साथ ही घर में ऐसा खाना ज़रूर रखना चाहिए, जो बिना फ़्रिज के लंबे समय तक चल सके. इसके अलावा घर में कुछ नक़द पैसा ज़रूर रखें. सिर्फ़ क्रेडिट या डेबिट कार्ड के भरोसे ज़िंदगी ना जिएं. सबसे ज़रूरी एक और बात अपनी गाड़ियों में ईंधन हमेशा फ़ुल टेंक रखें और थोड़ा अतिरिक्त ईंधन में भी रखें, ताकि ज़रूरत पड़ने पर इस्तेमाल किया जा सके. बिजली कभी भी गुल हो सकती है.

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