क्या छक कर खाने से जुड़ा है तोंद निकलना?

  • 21 दिसंबर 2019
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त्योहारों के सीज़न में हम ख़ूब खाते हैं. ढेर सारे पकवान बनाने और खाने का चलन जो होता है. दावतें होती हैं. एक-दूसरे से मिलने जाते हैं. हर जगह भारी भरकम दस्तरख़्वान सजता है.

लेकिन, अकसर ये होता है कि ढेर सारा खाने के बाद भी हमें भूख महसूस होती है.

क्या आपने भी ऐसा महसूस किया है? क्या आपके ज़हन में ये सवाल आया कि आख़िर ऐसा क्यों होता है? इतना सारा खाने के बाद भी भूख क्यों महसूस होती है?

कई लोगों का ख़याल होता है कि ज़्यादा खाने से उन के पेट का आकार बढ़ जाता है. इसीलिए वो और ज़्यादा भूख महसूस करते हैं.

मगर, इन सवालों का ये जवाब सही नहीं है. हक़ीक़त ये है कि हम ज़्यादा खा लें, तभी हमें और भी भूख लगती है.

भूख लगना एक पेचीदा प्रक्रिया है.

ये सच है कि हम खाते हैं या पेट ख़ाली होता है, तो हमारे पेट का आकार बढ़ जाता है. जब खाना पच रहा होता है, तो हमारा पेट सिकुड़ता है, ताकि खाने को आगे की तरफ़ धकेल सके. जब पेट ऐसा कर रहा होता है, तब हमें गुड़गुड़ाहट सुनाई देती है. ये भूख लगने का पहला संकेत होता है. इस गर्जना के बाद पेट खाने की आमद के इंतज़ार में बढ़ जाता है.

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खाने से पेट के आकार का संबंध

हालांकि ये सच नहीं है कि खाने से पेट का आकार बढ़ जाता है. हमारा पेट काफ़ी लचीला होता है. जब हम ज़्यादा खाते हैं, तो इसका आकार बढ़ जाता है. खाना पचने के बाद ये सिकुड़ जाता है. आप ये जान कर हैरान होंगे कि ज़्यादातर लोगों के पेट का आकार कम-ओ-बेश एक जैसा होता है. लंबाई और मोटाई से इसका कोई वास्ता नहीं होता.

भूख लगने पर हमारे पेट से घ्रेलिन नाम का हॉर्मोन निकलता है. ये दिमाग़ को भूख का संदेश देता है. जिस के बाद हमारे ज़हन से एनपीवाई और एजीआरपी नाम के दो हॉर्मोन निकलते हैं. इन्हीं की वजह से हमें भूख महसूस होती है.

मज़े की बात ये है कि मोटे लोगों की बनिस्बत, दुबले-पतले लोगों में घ्रेलिन हॉर्मोन ज़्यादा निकलता है.

भूख लगने के लिए इन्हीं तीन हॉरमोन की ज़रूरत होती है. लेकिन, हमें खाने से तसल्ली का एहसास कराने के लिए एक दर्जन हॉर्मोन को काम करना पड़ता है. कुछ हार्मोन जैसे जीआईपी और जीएलपी-1 कार्बोहाइड्रेट को नियंत्रित करने वाले इंसुलिन के स्राव के लिए ज़िम्मेदार होते हैं. तो कई हॉर्मोन हमारे पेट से खाना गुज़रने की रफ़्तार धीमी करते हैं. ताकि, हमारा पेट खाने को पचा सके.

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भूख के अहसास की वजह क्या है?

दो हॉर्मोन, सीकेके और पीवाईवाई भूख के एहसास को कम करने में अहम रोल अदा करते हैं.

यूं तो भूख और पेट भरने का एहसास कराने की ज़िम्मेदारी इन हॉरमोन की होती है. इसके साथ-साथ दिन और रात के समय हम जब खाना खाते हैं, तो इस के संकेत भी हमारा दिमाग़ नोट करता है. फिर, उसी हिसाब से हमें भूख लगती है.

मतलब ये कि अगर आपने दोपहर में ढेर सारा खाना खाया है, तो भी, रात के खाने के वक़्त आप को भूख का एहसास होगा.

अगर आप टीवी देखते वक़्त कुछ न कुछ खाते हैं, तो ये आदत भी आप का दिमाग़ नोट करता है. फिर आप जम कर खाने के बाद भी अगर टीवी देखने बैठते हैं, तो आप का मन कुछ खाने का होता है.

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कुछ करते वक़्त खाने की आदत

नीदरलैंड की मास्ट्रिख़्ट यूनिवर्सिटी की कैरोलिन वान डेन एक्कर कहती हैं कि ज़्यादा खाना बहुत बुरी बात नहीं है. लेकिन, कुछ ख़ास काम करते वक़्त खाने की आदतें ऐसी होती हैं, जिन से छुटकारा पाना आसान नहीं होता.

जब हम किसी ख़ास खाने की चीज़ से लगाव करते हैं, तो उन की ख़ुशबू से ही हमें भूख महसूस होने लगती है. इस से हमारे शरीर में भी बदलाव आते हैं. जैसे कि लार निकलने लगती है.

पावलोव नाम के वैज्ञानिकों ने कुत्तों पर ऐसा ही प्रयोग किया था. जब घंटी बजाने के बाद कुत्तों को खाना दिया जाता था. बाद में देखा गया कि घंटी बजते ही कुत्तों की लार निकलने लगती थी.

वैज्ञानिक मानते हैं कि हमारी स्थिति भी कुछ वैसी ही होती है. ये बात कई प्रयोगों से साबित हो चुकी है. कैरोलिन एक्कर कहती हैं कि ये आदत एक दो ग्राम चॉकलेट खाने से भी बन सकती है. आप अगर नियत समय पर रोज़ चॉकलेट खाते हैं. तो, केवल चार दिनों बाद आप का शरीर उस समय के आने का इंतज़ार करने लगता है.

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ज़्यादा खाने की आदत के कई कारण

ख़राब मूड या थके होने पर भी बहुत से लोग ज़्यादा खाना खाते हैं. असल में उस वक़्त लोगों के जज़्बात खाने से जुड़ जाते हैं.

सैद्धांतिक तौर पर हमारा अच्छा मूड भी हमें कई बार ज़्यादा खाने के लिए प्रेरित करता है. जैसे कि हम दोस्तों या परिवार वालों के साथ होते हैं, तो ज़्यादा खा लेते हैं. क्योंकि, लोगों के साथ होने की ख़ुशी में हम भूल जाते हैं कि हम कितना खा रहे हैं. पेट भर जाने का एहसास भी नहीं होता.

ये जानकारी खाने की बुरी आदतों से छुटकारा पाने में भी मददगार हो सकती है.

कैरोलिन कहती हैं कि, "जब हम लोगों को उनकी ख़ुराक कम करने में मदद कर रहे होते हैं, तब हम उन्हें खाने की पुरानी आदतों से छुटकारा पाने को कहते हैं. फिर उन्हें ये बताया जाता है कि अगर किसी चीज़ को खा कर उन्हें अच्छा लगता है, तो इसका ये मतलब नहीं कि अगले दिन फिर से उसे खाना चाहिए."

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क्योंकि अक्सर हम खाने की जिन बुरी आदतों से छुटकारा पा लेते हैं, वो दोबारा हमें जकड़ लेती हैं.

तो, हैरानी नहीं होनी चाहिए, जब बड़ी दावत उड़ाने के बाद भी हमें भूख लगे. इसकी वजह ये होती है कि हम ख़ास मौक़ों पर ज़्यादा खाने के आदी होते हैं. तो, हमारा दिमाग़ वो संकेत पाते ही भूख वाले हॉर्मोन छोड़ने का निर्देश देता है.

तो, अगली बार दावत उड़ाएं और फिर भूख लगे, तो ये न सोचिए कि आप का पेट बढ़ गया है.

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