बच्चों से कुछ करवाने के बदले उन्हें इनाम का लालच देना कितना सही?

  • 27 दिसंबर 2019
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ए ग्रेड के वादे एफ़ ग्रेड का डर दिखाने की जगह कुछ सीखने के लिए बच्चों को तैयार करना क्या एक सपना है? शायद नहीं.

अबोध अवस्था में बच्चे स्वाभाविक रूप से अपने आसपास की चीज़ों को जानना चाहते हैं.

घास के परीक्षण से लेकर पालतू जानवरों के साथ खेलने तक, वे जानना चाहते हैं कि चीज़ें कैसे काम करती हैं और उनका स्वाद कैसा होता है.

विशेषज्ञों के मुताबिक़ अबोध बच्चे इनाम पाने या सज़ा से बचने लिए कुछ नहीं करते.

स्वाभाविक जिज्ञासा आंतरिक प्रेरणा है और इनाम बाहरी प्रेरणा.

बच्चों को कुछ सीखने के लिए प्रेरित करने के लिए इनमें से क्या बेहतर तरीक़ा है? क्या पुरस्कार दिए बिना उनमें सीखने की खुशी बढ़ाई जा सकती है?

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स्वाभाविक जिज्ञासा

क्यूबेक की लावल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर फ्रेडरिक गुए कहते हैं, "आंतरिक प्रेरणा से आप ज़ल्दी काम शुरू करते हैं. बच्चे सक्रिय और स्वभाव से जिज्ञासु होते हैं. शिक्षकों को उस प्रेरणा का पोषण करने की ज़रूरत होती है."

गुए और उनके सहयोगियों ने आंतरिक प्रेरणा और परिणाम विषय पर प्राइमरी से लेकर यूनिवर्सिटी स्तर के दो लाख से अधिक छात्रों पर किए गए 344 अध्ययनों का मेटा-विश्लेषण किया.

छात्रों ने विभिन्न प्रकार की प्रेरणाओं को मापने के लिए तैयार प्रश्नावली को भरा और उनके ग्रेड रिपोर्ट कार्ड से लिए गए.

शोधकर्ताओं ने देखा कि जिन विषयों में छात्रों को ज़्यादा आनंद मिलता था उनमें उन्हें अच्छे नंबर आए और उनकी रचनात्मकता भी बढ़ी.

अन्य शोध भी इसका समर्थन करते हैं कि आंतरिक रूप से प्रेरित छात्र सीखने में बेहतर होते हैं.

जर्मनी में हुए एक अध्ययन में पाया गया कि 7 से 9 साल के जो छात्र कहानियों को पढ़ने में डूब जाते थे वे अपठित गद्यांशों को पढ़ने और समझने में प्रतिस्पर्धी छात्रों से आगे रहे.

एक और जर्मन अध्ययन में 8 से 10 साल के बच्चों में पढ़ने की आंतरिक प्रेरणा और उपलब्धियों के बीच पारस्परिक संबंध पाया गया, लेकिन बाह्य प्रेरणा होने पर ऐसा कोई संबंध नहीं मिला.

प्रदर्शन पर आंतरिक प्रेरणा के लाभ बच्चों तक सीमित नहीं हैं.

वेस्ट प्वाइंट सैन्य अकादमी के कैडेट्स में प्रेरणा का स्तर जांचने वाले एक अध्ययन में पाया गया कि जो विशुद्ध रूप से आंतरिक रूप से प्रेरित थे उनके कमीशंड अधिकारी बनने, सेवा बढ़ाने और शुरुआती प्रोन्नति पाने की संभावना उन कैडेट्स से ज़्यादा थी, जो आंतरिक और बाह्य दोनों रूप से प्रेरित थे.

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हम स्टिकर्स क्यों देते हैं?

आंतरिक प्रेरणा की अहमियत के सबूत होने के बावजूद स्कूलों में इनाम संस्कृति ज़ल्दी पहुंच जाती है. अच्छे व्यवहार पर बच्चों को स्टिकर्स मिलते हैं और उपलब्धियों को दर्ज करके रिपोर्ट कार्ड दिए जाते हैं.

किंडरगार्टन से लेकर पांचवी क्लास तक के बच्चों के शिक्षक उनकी तारीफ करके हौसला बढ़ाते हैं. लगभग 80 फीसदी शिक्षक साप्ताहिक आधार पर इनाम देते हैं.

इनमें पुरस्कार खरीदने का टोकन या मज़ेदार गतिविधियों के लिए अतिरिक्त समय देने जैसे इनाम हो सकते हैं.

क्रिस्टीन डेवर्ट ने 9 साल तक कैलिफोर्निया में 5 से 6 साल के बच्चों को पढ़ाया है.

यूनिवर्सिटी में उनकी पढ़ाई के दिनों में आंतरिक प्रेरणा पर जोर था और बहुत ज़्यादा पुरस्कारों से परहेज किया जाता था. लेकिन रोजमर्रा के पेशेवर अनुभव में वह पुरस्कारों की अहमियत समझती हैं.

उनका कहना है कि किसी एक छात्र के अच्छे व्यवहार की तारीफ से अन्य छात्र भी वैसा करने के लिए प्रेरित होते हैं.

डेवर्ट एक शरारती और आक्रामक छात्र के बारे में बताती हैं, "मैं दुर्व्यवहार के लिए उसको सिर्फ़ सज़ा नहीं देना चाहती थी, इसलिए मैंने पुरस्कारों को शामिल करके एक व्यवहार योजना शुरू की."

"नियंत्रित व्यवहार के हर 15 मिनट के बदले वह 1 मिनट का फ्री समय कमाता था, जिसे वह बाद में इस्तेमाल कर सकता था."

"15 मिनट को बाद में 30 मिनट किया गया और फिर उसे पूरे एक अध्याय तक कर दिया गया, जिसमें उस बच्चे ने शांत और ध्यानमग्न रहना सीख लिया. यह पूरी प्रक्रिया वास्तव में एक इनाम से शुरू हुई थी."

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क्या आंतरिक प्रेरणा को बढ़ाया जा सकता है?

यदि बच्चों को पढ़ाना उनकी जिज्ञासा बढ़ाने और पुरस्कृत करने का जटिल मिश्रण है तो क्या काम को ही पुरस्कार बनाया जा सकता है?

एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी में विकासात्मक मनोविज्ञान की सीनियर लेक्चरार सारा मैकजियोन का कहना है कि शिक्षक और माता-पिता बच्चे की आंतरिक प्रेरणा को बढ़ा सकते हैं.

पढ़ने के लिए सही स्तर की किताबें ढूंढ़ना बहुत अहम है, क्योंकि इससे छात्र पाठक बनते हैं, भले ही वे उपन्यास की जगह कॉमिक किताबें या पत्रिकाएं पढ़ें.

मैकजियोन कहती हैं, "बच्चे जिन शैलियों या लेखकों का आनंद ले सकें उनकी पहचान करने में मदद करना वाकई अहम है."

गुए का मानना है कि बच्चों को यह महसूस कराना ज़रूरी है कि उनके पास विकल्प हैं और वे अपनी मर्जी से पढ़ रहे हैं.

"पुरस्कारों की जगह छात्रों के साथ संबंध की गुणवत्ता पर ध्यान दें. इसका मतलब है बच्चों को सुनना और उनकी नकारात्मक भावनाओं को भी स्वीकार करना."

गुए का सुझाव है कि जो गतिविधियां मज़ेदार नहीं हैं उनके बारे बच्चों की नकारात्मक भावनाओं का निवारण करने और उनकी अहमियत बताने के लिए समय निकालें.

"जो छात्र सीखने को अहमियत देते हैं, भले ही उसमें मज़ा हो या न हो, वे उसी तरह के सकारात्मक नतीजे देते हैं जैसा उच्च कोटि की आंतरिक प्रेरणा वाले बच्चों में दिखती है."

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फ़ीडबैक क्या ग्रेड की जगह लेंगे?

ग्रेड के लिए इसके क्या मायने हैं, जो शायद स्कूली छात्रों के लिए सबसे बड़ा बाहरी प्रेरक है?

गुए और मैकजियोन दोनों का कहना है कि ग्रेड पर कम और इस प्रक्रिया के दौरान किए गए प्रयासों पर अधिक ध्यान देना चाहिए. लेकिन कुछ शिक्षक इससे आगे जाना चाहते हैं.

हाई स्कूल में अंग्रेजी पढ़ाने वाले शिक्षक आरोन ब्लैकवेल्डर ने तीन साल पहले फ़ेसबुक ग्रुप "टीचर्स गोईंग ग्रेडलेस" बनाने में मदद की. शुरुआत में इसके कुछ सौ सदस्य थे, जो अब बढ़कर 5,000 से ज़्यादा हो गए हैं.

वह 1980 के दशक में हुए अध्ययनों से प्रेरित थे जिनमें 10 से 12 साल के बच्चों को ग्रेड, ग्रेड और फ़ीडबैक दोनों या सिर्फ़ फ़ीडबैक लेने का विकल्प दिया जाता था.

दिलचस्पी और प्रदर्शन उन छात्रों का सबसे बेहतर था जो सिर्फ़ फ़ीडबैक लेते थे. ग्रेड या ग्रेड के साथ फ़ीडबैक लेने से उनकी दिलचस्पी घट गई और प्रदर्शन भी गिर गया.

ग्रेड देने की जगह ब्लैकवेल्डर छात्रों को कुशलता की एक सूची देते हैं जिनमें उनको महारत हासिल करनी होती है. असाइनमेंट के लिए वह शुद्ध रूप से फ़ीडबैक मॉडल चुनते हैं.

कुछ शिक्षक उनके तरीकों को लेकर सशंकित रहते हैं लेकिन उनका ख़ुद का मानना है कि वे कारगर हैं.

कुछ बच्चे हमेशा ऐसे होते हैं जो इन गतिविधियों में हिस्सा नहीं लेते. उनकी तादाद नहीं बढ़ी है, जबकि हिस्सा लेने वाले बच्चों की संख्या तेज़ी से बढ़ी है.

"वे रचनात्मक फ़ीडबैक के लिए मुझ पर भरोसा करते हैं क्योंकि मेरे कार्यों को दंडात्मक नहीं माना जाता."

छात्र एक दूसरे पर भी भरोसा करते हैं क्योंकि उनके बीच सबसे ज्यादा अंक या सबसे अच्छा ग्रेड पाने की होड़ नहीं होती."

ब्लैकवेल्डर को भी, अपने पसंदीदा मॉडल के बावजूद, टर्म के अंत में ग्रेड देने की ज़रूरत पड़ती है.

लेकिन शिक्षा सुधार थिंक टैंक थॉमस बी. फ़ोर्डम इंस्टीट्यूट के एसोसिएट डायरेक्टर एडम टाइनर का कहना है कि ग्रेड एक व्यावहारिक मकसद के लिए है.

"ग्रेड का मुख्य फायदा यह है कि यह छात्रों के प्रदर्शन को एकल पैमाने पर लाता है जिसे माता-पिता और छात्र समझ सकते हैं."

शिक्षक ग्रेड में छात्र के शैक्षणिक प्रदर्शन के साथ-साथ उसके रोजाना के व्यवहार को भी शामिल कर सकते हैं.

यानी उसमें न सिर्फ़ छात्रों का विषय ज्ञान शामिल होता है, बल्कि यह भी पता चल सकता है कि उनमें सहयोग जैसे गैर-संज्ञानात्मक कौशल कितने हैं.

जिन शिक्षकों ने क्लासरूम में केवल फ़ीडबैक मॉडल को अपनाया उनको भी अंतिम ग्रेड प्वाइंट देना पड़ता है.

यह तथ्य एक सामाजिक हक़ीक़त भी है. जब हम बड़े होते हैं और नौकरी करते हैं तो तनख्वाह के रूप में मिलने वाली बाहरी प्रेरणा हमारी ज़िंदगी में बड़ी भूमिका निभाती है.

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पढ़ाई में पुरस्कार की जगह

आंशिक तौर पर इससे पता चलता है कि क्यों बड़े छात्रों के लिए बाह्य प्रेरणाएं उनके प्रदर्शन को बढ़ावा दे सकती हैं.

टाइनर अमरीका की नेशनल मैथ एंड साइंस इनिशिएटिव (NMSI) के "कॉलेज रेडीनेस प्रोग्राम" के बारे में बताते हैं जिसमें हाई स्कूल के छात्रों को एडवांस ट्रेनिंग दी जाती है, साथ ही सफल छात्रों और शिक्षकों को वित्तीय प्रोत्साहन भी मिलता है.

नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री किराबो जैक्सन ने इस प्रोग्राम का मूल्यांकन किया और पाया कि इससे कॉलेज में उपस्थिति 4.2 फीसदी बढ़ी.

कुछ उपसमूहों में इसके नतीजे हैरान करने वाले रहे. NMSI प्रोग्राम में हिस्सा लेने वाले स्पेनिश भाषी छात्रों की आमदनी 11 फीसदी बढ़ी.

टाइनर का कहना है कि बाहरी प्रेरक वर्तमान उच्च आंतरिक प्रेरणा को दबा सकते हैं, लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता और बच्चे शुरुआत करने के लिए हमेशा आंतरिक रूप से प्रेरित नहीं होते.

वह कहते हैं, "शोधकर्ताओं ने एक बात स्पष्ट की है कि जब आंतरिक प्रेरणा पहले से ही ऊंची हो तो बाहरी प्रेरक ख़तरनाक हो सकते हैं."

"मज़े के लिए किए जाने वाले काम में आर्थिक प्रोत्साहन जुड़ जाने से अनुभव एकदम बदल जाता है."

"मुझे संदेह है कि अधिकांश किशोरों के लिए स्कूल के काम, ख़ास तौर पर गणित जैसे मुश्किल और तकनीकी विषयों में हमें छात्रों की आंतरिक प्रेरणा घटने पर चिंता करनी चाहिए."

दोनों प्रेरणाएं एक दूसरे का समर्थन कर सकती हैं. "यदि बाहरी प्रेरणा से छात्र कुछ सीखते हैं और सीखना यदि सशक्त होना है तो बाहरी प्रेरक अप्रत्यक्ष रूप से छात्रों को सशक्त बना सकते हैं."

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