क्या होता अगर विज्ञान ने नाम नहीं दिए होते

  • 26 जनवरी 2020
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जीवाश्म आख़िर क्या है? आप ये सवाल किसी 12 बरस के बच्चे से पूछें, या किसी नौकरीपेशा वयस्क से. बहुत से ऐसे लोग हैं, जो इसे समझाने में मुश्किल महसूस करेंगे.

बहुत सी स्थानीय भाषाओं में विज्ञान से जुड़े शब्दों के लिए लफ़्ज़ नहीं होते.

दक्षिण अफ़्रीका की ज़बान ज़ुलू या आईज़ुलू को ही लीजिए. यहां बहुत से पढ़ने वाले बच्चों के लिए विज्ञान पढ़ना दोहरी चुनौती होती है. पहले तो उसे अंग्रेज़ी में समझें. फिर उसे अपनी मादरी ज़बान ज़ुलू में अनुवाद करें.

अक्सर होता ये है कि जीवाश्म जैसे वैज्ञानिक शब्द के लिए ज़ुलू भाषा में शब्द नहीं होते.

दक्षिण अफ़्रीका में क़रीब सवा करोड़ लोग ज़ुलू भाषा बोलते हैं. इन्हें बहुत से वैज्ञानिक विचारों पर चर्चा करने में दिक़्क़त होती है.

विज्ञान संवाहक सिबुसिसो बिएला ऐसे बच्चों की मदद कर रहे हैं. उन्होंने एक कक्षा में जीवाश्म का मतलब पूछा. तो, एक बच्ची ने जवाब दिया-इलाहले यानी कोयला. ये कुछ हद तक ठीक भी है. क्योंकि, कोयला जीवाश्म ईंधन ही तो है.

एक और लड़के ने कहा कि जीवाश्म को उस की ज़बान में-अमाथाम्बो अमाडाला अथोलाकाला एम्हालाबाथिनी या ज़मीन के भीतर पायी जाने वाली पुरानी हड्डियां भी कह सकते हैं. ये जीवाश्म या फॉसिल (Fossil) का ज़ुलू में पर्यायवाची हो सकता है. लेकिन, पूरी तरह से नहीं. क्योंकि जीवाश्म में बहुत से पौधों के अवशेष भी आते हैं.

दुनिया भर में लोग वैज्ञानिक अवधारणाओं का अपनी ज़बान में अलग-अलग और कई बार मज़ेदार अनुवाद करते हैं. मसलन, उत्तरी अमरीका के आदिवासियों की भाषा सिकसिका या ब्लैकफ़ुट में आइंस्टाइन की थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी को बिसातसिनसीमान यानी ख़ूबसूरत पेड़-पौधे कहा जाता है.

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वैज्ञानिक शब्दों का अनुवाद

स्कॉटलैंड के एक मेडिकल के छात्र ने डीएनए के एक टुकड़े को बताने के लिए साइन लैंग्वेज में एक शब्द विकसित किया.

सिबुसिसो बिएला कहते हैं कि किसी वैज्ञानिक शब्द के लिए स्थानीय भाषा में कौन सा शब्द ईजाद किया जाता है, ये महत्वपूर्ण नहीं है. असल में अहम तो वो फॉर्मूला है, जिस के आधार पर ऐसे शब्दों को गढ़ा जाता है.

ख़ुद बिएला ने 'द ओपेन नोटबुक' के नाम से एक लेख लिखा है. जिस में उन्होंने अंग्रेज़ी के बहुत से वैज्ञानिक शब्दों का ज़ुलू में अनुवाद किया है.

इस में डायनासोर से लेकर शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली या Immune System तक के लिए ज़ुलू ज़बान में शब्द बनाए गए हैं.

बिएला कहते हैं कि ख़ुद डायनासोर भी सही शब्द नहीं है. क्योंकि ये ग्रीक शब्द है, जिसका मतलब होता है-भयंकर छिपकली. बिएला ने ज़ुलू में डायनासोर के लिए इसिलवाने सासेमान्डुलो शब्द बनाया है, जिस का मतलब होता है प्राचीन काल के जानवर.

इसी तरह इम्यून सिस्टम या शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए ज़ुलू भाषा में जो शब्द गढ़ा गया है, वो है-अमासोशा ओमज़िम्बा. जिस का मतलब होता है-शरीर के अंगरक्षक या सैनिक.

ये कई मामलों में इम्यून सिस्टम का बेहतर विकल्प है.

स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाले लोग अक्सर इन मुश्किलों से दो-चार होते हैं. असम के टुकराझार में स्वास्थ्यकर्मी प्रदीप नरज़री कहते हैं कि वो अक्सर गर्भाशय बढ़ने का संकेत देने के लिए हवा में एक गोला बनाते हैं. या गुर्दे में पानी जमा होने के लिए इसी तरह के संकेत से स्थानीय लोगों को समझाते हैं.

हालांकि उन्हें कई बार ट्यूमर और कैंसर जैसे अंग्रेज़ी के शब्द भी इस्तेमाल करने पड़ते हैं.

बहुत से वैज्ञानिक लेख कम स्थानीय भाषाओं में नहीं छापे जाते. जिस की वजह से किसी ख़ास इलाक़े के लोगों के लिए उन्हें समझ पाना मुश्किल होता है.

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अंग्रेज़ी ही प्रमुख ज़बान

कनाडा की टोरंटो यूनिवर्सिटी की सुज़ी ओलिविएरा डे लीमा, अमेज़न के जंगलों में रहने वाले आदिवासियों की भाषा पर काम करती हैं.

वो कहती हैं कि जब स्थानीय आदिवासियों की भाषा में किसी के लिए शब्द नहीं होता, तो वो ब्राज़ील की पुर्तगाली ज़बान से कोई शब्द ले कर उसे अमेज़न के आदिवासियों की भाषा युदजा में अनुवाद करती हैं.

अब कोई भाषा अरबों लोग बोलते हों, या फिर कुछ सौ लोग. उन्हें भी तो विज्ञान की ताज़ा-तरीन बातें जानने का हक़ है.

आज विज्ञान और मेडिकल क्षेत्र में अंग्रेज़ी ही प्रमुख ज़बान है. कभी ये दर्जा ज़र्मन भाषा को हासिल था. लेकिन, इस का नतीजा ये हुआ है कि बहुत से आदिवासियों ने स्थानीय जड़ी बूटियों के नाम और उन के असर को व्यक्त करने के लिए जो शब्द गढ़े हैं, वो अंग्रेज़ी भाषी मेडिकल समुदाय की पहुंच से बाहर हैं.

ए के रहीम, बांग्लादेश में शरण लेने वाले म्यांमार के रोहिंग्या समुदाय के बीच काम करते हैं. वो कहते हैं कि बहुत से अकादेमिक और वैज्ञानिक शब्दों के विकल्प रोहिंग्या भाषा में नहीं हैं. ऐसे में इन शरणार्थियों को समझा पाना बहुत मुश्किल होता है.

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शब्दों के विकल्प न जानना...

चूंकि रोहिंग्या ज़बान लिखने से ज़्यादा बोली जाती है. तो, इस में वाक्यों, पैराग्राफ़, लेख वग़ैरह के लिए शब्द ही नहीं हैं.

गणित के शब्द तो बर्मा की भाषा से उधार लिए गए हैं. वहीं, रोहिंग्या समुदाय शब्द के लिए अपनी भाषा में जो शब्द इस्तेमाल करता है, उसे अरबी ज़बान से लिया गया है.

इसी वजह से रोहिंग्या शरणार्थियों के बीच काम करने वालों के लिए अपनी बात समझा पाना बड़ी चुनौती है.

उन के बीच जो पोषण देने वाले पैकेट बांटे जाते हैं, उन्हें शूजी कह कर बुलाया जाता है. क्योंकि, शूजी असल में सूजी है, जिस का रोहिंग्या समुदाय ख़ूब इस्तेमाल करता है. कभी हलवा तो कभी अन्य व्यंजन बनाने में.

ए के रहीम कहते हैं कि डायरिया या वैक्सीन जैसे शब्दों के विकल्प न जानना इन लोगों के बीच ख़तरनाक हो सकता है.

उनका संगठन 'ट्रांसलेटर्स विदाउट बॉर्डर्स' इस फ़ासले को कम करने की कोशिश करता है. लोगों से बात कर के उन की भाषा और संस्कृति को समझा जाता है. फिर उन की भाषा में से शब्द चुने जाते हैं, जिन के ज़रिए बात को समझाया जा सके.

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स्थानीय भाषाओं की समृद्ध परंपरा

अलग-अलग सभ्यताओं में ख़ास चीज़ों पर ज़ोर होता है.

जैसे कि थाईलैंड में ख़ुशबू के ज़रिए बहुत से भाव व्यक्त होते हैं. इस के लिए कई शब्द भी हैं. वहीं, अग्रेज़ी चूंकि देख कर विकसित हुई ज़बान है, तो उस में अलग-अलग ख़ुशबुओं में फ़र्क़ कर पाने वाले शब्द कम ही हैं.

ब्रिटेन की क्वीन्स यूनिवर्सिटी की भाषाविद् एनेस्तासिया रीह्ल आशंका जताती हैं कि बहुत सी संस्कृतियों के कई शब्द गुम होते जा रहे हैं. क्योंकि आधुनिक दौर में उन के इस्तेमाल नहीं होते.

जैसे कि युगांडा की लुलामोगी भाषा. जिस में सफ़ेद चींटियों को फंसाने, पकड़ने और खाने के लिए कई शब्द हैं.

लेकिन, अब सफ़ेद चींटियां पकड़ कर खाने का चलन कम हो रहा है. तो इस से जुड़े लुलामोगी ज़बान के शब्द भी गुम होते जा रहे हैं.

इस के लिए ज़रूरी है कि हम स्थानीय भाषाओं की समृद्ध परंपरा को बचाए रखें.

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