धरती पर कैसा था शुरुआती जन-जीवन?

  • जेस्मिन फॉक्स स्केली
  • बीबीसी फ़्यूचर
दक्षिणी-पूर्वी किनारे पर ऊबड़-खाबड़ चट्टानों वाला एक इलाक़ा

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कनाडा के सूबे न्यूफाउंडलैंड के दक्षिणी-पूर्वी किनारे पर ऊबड़-खाबड़ चट्टानों वाला एक इलाक़ा है. इसे मिसटेकेन प्वाइंट कहते हैं. क्योंकि, इस जगह को बहुत से जहाज़ों ने ग़लती से वो समझा, जो वो नहीं था. और इन चट्टानों से टकरा कर डूब गए.

अब न्यूफाउंडलैंड की ये जगह एक और बहस के केंद्र में है. सवाल ये है कि हमारी धरती पर पेचीदा जीवों की उत्पत्ति कब और कैसे हुई थी?

इस समुद्र तट पर टहलते हुए फ्रैंकी डुन कहते हैं कि अगर आप इन चट्टानों के आस-पास टहलते हैं, तो आप देखेंगे कि इन की सतह पर हज़ारों जीवाश्म मौजूद हैं. फ्रैंकी डुन, ब्रिटेन की ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में जीवाश्म वैज्ञानिक हैं.

चट्टानों पर जमा ये जीवाश्म आज से क़रीब 57 करोड़ साल पुराने हैं. उसे धरती का एडिकरन कल्प कहा जाता है. ये जीव उस दौर में हो रहे ज्वालामुखी विस्फोट में जल कर भस्म हो गए थे. और इन चट्टानों पर जीवाश्म के तौर पर दर्ज हो गए. आज ये उस दौर के क़ुदरती दस्तावेज़ के तौर पर दर्ज हैं.

फ्रैंकी डुन कहते हैं कि इन चट्टानों के बीच चलते हुए आपको पॉम्पेई शहर में होने का एहसास होता है. इटली का पॉम्पेई शहर ज्वालामुखी विस्फ़ोट की वजह से भस्म हो गया था. लावा ने इतनी तेज़ी से शहर पर धावा बोला था कि लोगों को भागने तक का मौक़ा नहीं मिला था. जो जहां था, वहीं भस्मीभूत हो गया था. आज भी इस शहर में लोगों के जीवाश्म वैसी हालत में मिलते हैं, जिस हाल में लावे ने उन्हें लील लिया था.

न्यूफाउंडलैंड के तट पर मिलने वाले एडिकरन कल्प के जीवाश्म हमारी धरती के इतिहास का महत्वपूर्ण दस्तावेज़ हैं. इन जीवों से पहले के क़रीब चार अरब वर्षों तक समंदर में केवल एक कोशिका वाले जीव ही आबाद थे. एडिकरन कल्प में अचानक बहुकोशिकीय जीवों का उद्भव धरती पर हुआ था. और ये बड़े विचित्र क़िस्म के जीव थे. आज इनके जैसा कोई जीव धरती पर नहीं दिखता.

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दक्षिणी नामीबिया में एक जगह है, जहां के जीवाश्मों को वैज्ञानिकों ने 'नामा समूह' का नाम दिया है.

इनका आकार अजब तरह का है. कोई छोटी पत्तियों जैसे दिखते थे. कोई झाड़ी जैसे, तो कोई पत्ता गोभी के आकार का था. किसी की सूरत तकिए जैसी तो किसी की ऐसी की बताई ही न जा सके.

अमरीका की वांडरबिल्ट यूनिवर्सिटी के जीवाश्म वैज्ञानिक साइमन डैरोच कहते हैं, 'एडिकरन कल्प के ज़्यादातर जीव केंचुओं या किसी अन्य चिपचिपे जीव जैसे थे. उस वक़्त तक जीवों में कंकाल विकसित नहीं हुआ था.'

इन जीवाश्मों के चलते, धरती पर जीवन के विकास की पहेली सुलझी भी है, तो उलझी भी है. साइमन डैरोच कहते हैं कि, 'एडिकरन कल्प के जीव आज से एकदम अलग थे.'

वैज्ञानिकों का मानना है कि ये जीव आज से क़रीब साठ करोड़ साल पहले धरती पर आबाद थे और कैम्ब्रियन महायुग से पहले विलुप्त हो गए थे. कैम्ब्रियन महायुग के दौरान ऐसे जीवों की उत्पत्ति हुई, जिनके शरीर के अलग-अलग अंगों के जीवाश्म मिले हैं. मतलब, उस दौर में ज़्यादा पेचीदा बनावट वाले जीव विकसित होने लगे थे.

आज बड़ा सवाल ये है कि एडिकरन युग के ये अजीब जीव विलुप्त कैसे हो गए? क्योंकि एक दौर ऐसा था, जब ये जीव रूस से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक और नामीबिया से लेकर चीन तक पाए जाते थे. इन जीवों के जीवाश्म इनकी उतपत्ति के क़रीब तीस करोड़ साल बाद की चट्टानों से लापता हैं.

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कैम्ब्रियन जीवों की उत्पत्ति

एडिकरन और कैम्ब्रियन जीवों के बीच धरती पर क्या हुआ, इसका पता हमें अफ्रीकी देश नामीबिया से मिल सकता है. दक्षिणी नामीबिया में एक जगह है, जहां के जीवाश्मों को वैज्ञानिकों ने 'नामा समूह' का नाम दिया है.

आज से क़रीब 56 करोड़ साल पहले धरती पर बर्फ़ का महायुग ख़त्म हो रहा था. समंदरों का विस्तार हो रहा था. तब नामीबिया के इस इलाक़े में भी उथला समुद्र था. उस समंदर में रहने वाले जीवों के जीवाश्म यहां आज भी पाए जाते हैं.

वैज्ञानिक मानते हैं कि ये जगह, धरती के एडिकरन कल्प से कैम्ब्रियन कल्प में प्रवेश करने की गवाही देती है. ये धरती के जैविक इतिहास का सब से ज़्यादा उठा-पटक वाला दौर कहा जाता है.

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साइमन डरोच को नामीबिया में 2013 में कुछ ऐसे जीवाश्म मिले थे जो बिलों में रहा करते थे. इस का मतलब ये हुआ कि कुछ ऐसे जीव विकसित हो चुके थे, जो समंदर की तलहटी में अपने लिए चारा तलाशते थे.

इनके मुक़ाबले एडिकरन कल्प के जीव बहुत साधारण थे. वो ज़्यादा चलते फिरते नहीं थे और अपनी रिहाइश के आस-पास ही चारा तलाशते थे.

लेकिन, नामीबिया से मिले जीवाश्म बताते हैं कि क़रीब 54 करोड़ साल पहले जीवों के दूर तक खाना तलाशने जाने और बिल बना कर रहने के संकेत मिलने लगे थे.

साइमन डरोच कहते हैं कि इन नए जीवों की उत्पत्ति के बाद ही एडिकरन कल्प के जीवों के लिए संकट खड़ा हुआ होगा और वो मुक़ाबला न कर पाने की वजह से ख़त्म हो गए.

वैसे, कुछ वैज्ञानिक कहते हैं कि एडिकरन दौर के जीवों के ख़ात्मे की ये वजह नहीं है. क्योंकि धरती पर अलग दौर में उत्पन्न हुए जीव करोड़ों बरस तक साथ रहे थे. इसके पक्के सुबूत मिलते हैं. स्कॉटलैंड की एडिनबरा यूनिवर्सिटी की रैशेल वुड कहती हैं कि, 'ये जीव समंदर के अलग-अलग हिस्सों में रह रहे थे. ऐसे में इन का आपस में सामना भी नहीं हुआ होगा.'

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जब क़यामत आई

कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि एडिकरन युग के ये जीव तब विलुप्त हुए, जब समुद्र के पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बेहद कम हो गई.

अमरीका की वर्जिनिया टेक यूनिवर्सिटी के जीवाश्म वैज्ञानिक चिआओ शुहाई कहते हैं कि, 'हमारे पास इस बात के सबूत हैं कि एक दौर में समुद्र के पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बेहद कम हो गई थी.'

जब ये कम ऑक्सीजन वाला पानी उथले समुद्री इलाक़ों में फैला, तो इस की मार उन जीवों पर पड़ी, जो इन उथले इलाक़ों में आबाद थे. एडिकरन युग के जीव भी इन में शामिल थे. चूंकि वो जीव ज़्यादा चल फिर नहीं सकते थे, तो उन के बचने का ये रास्ता भी बंद था. वो दूसरी जगह बच कर जा नहीं सके. और बदले हुए हालात का सामना न कर पाने की वजह से विलुप्त हो गए.

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एडिकरन जीवों के विनाश की जो भी वजह रही हो. लेकिन, उन के विलुप्त होने से कैम्ब्रियन जीवों का धरती पर आग़ाज़ हुआ. आज जितने भी जीव धरती पर पाए जाते हैं, उन सभी के पुरखों का ताल्लुक़ किसी न किसी तौर पर कैम्ब्रियन युग के जीवों से पाया जाता है.

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