कोरोना और लॉकडाउन: कहीं तलाक़ तो कहीं शादी, यूं बदल गई रिश्तों की दुनिया

  • यी-लिंग लिउ
  • बीबीसी फ़्यूचर
कोरोना वायरस का रिश्तों पर असर

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कितने अजीब रिश्ते हैं यहां के...

दो पल मिलते हैं,साथ-साथ चलते हैं

जब मोड़ आए तो बच के निकलते हैं...

कोविड-19 की महामारी के बाद की दुनिया को बॉलीवुड फ़िल्म 'पेज थ्री' का ये गाना बिल्कुल सटीक बयां करता है. एक वायरस ने दुनिया में रिश्तों को पूरी तरह से बदल डाला है.

लॉकडाउन के दौरान जब बहुत से लोग एक ही छत के नीचे रहने को मजबूर हुए. साथ-साथ ज़्यादा वक़्त बिताने लगे तो रिश्तों का तनाव खुलकर सामने आ गया.

मज़े की बात ये है कि हम जिन परिवार वालों से दूर-दूर रहते थे, लॉकडाउन के दौरान उनके साथ ज़्यादा वक़्त बिताने लगे. वहीं, दफ़्तर के जिन सहकर्मियों और अपने दोस्तों के साथ ज़्यादा रहते थे, उनसे दूरी बनाने लगे.

कोविड-19 से बचने के लिए लोग घरों की चारदीवारी में क़ैद हुए. फिर अर्थव्यवस्था बंद होने से रिश्तों पर आर्थिक दबाव भी पड़ा. नतीजा ये कि रिश्तों की डोर खिंच गई. तनाव बढ़ गया.

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कोविड-19 ने रिश्तों को किस तरह बदला है?

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ड्रामा क्वीन

समाप्त

इसे समझने के लिए हमें चीन और हॉन्ग कॉन्ग की मिसालें देखनी होंगी. क्योंकि नए कोरोना वायरस ने सबसे पहले चीन और हॉन्ग कॉन्ग पर ही हमला बोला था.

कोरोना वायरस के रिश्तों पर बुरे प्रभाव की सबसे बड़ी मिसाल चीन के शांक्ची प्रांत में देखने को मिली है. यहां के शियान शहर में तलाक़ के मामलों की बाढ़ सी आ गई है. ऑनलाइन दुनिया में शियान डिवोर्स के नाम से हैशटैग पर क़रीब सवा तीन करोड़ पोस्ट किए गए.

वुहान शहर, जहां से इस महामारी की शुरुआत हुई, वहां पर भी दांपत्य जीवन ख़तरे में नज़र आ रहे हैं. वुहान में भी सोशल मीडिया पर तलाक़ के मामलों की भारी संख्या देखने को मिली है.

वैसे तो चीन में तलाक़ के मामले 2003 से ही लगातार बढ़ रहे हैं. आज वहां लोग सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म वीचैट पर भी तलाक़ की अर्ज़ी दे सकते हैं.

लॉकडाउन के दौरान घरों में साथ-साथ ज़्यादा समय गुज़ारने को मजबूर दंपतियों के बीच घरेलू हिंसा और तलाक़ के मामलों में भारी इज़ाफ़ा हो गया है. घरेलू हिंसा के मामले तो यूरोप में भी बढ़ गए हैं. इनसे बचने की हेल्पलाइन पर कॉल की तादाद में बेतहाशा वृद्धि हुई है.

चीन और हॉन्ग कॉन्ग में भी यही स्थिति देखी जा रही है. घरेलू हिंसा से बचने के लिए महिलाएं अपने बच्चों के साथ शेल्टर होम में पनाह ले रही हैं.

हॉन्ग कॉन्ग में ऐसे ही शेल्टर होम में पनाह लेने वाली एक महिला पिंग पिंग (बदला हुआ नाम) बताती हैं कि लॉकडाउन से पहले भी उनका पति उनके साथ मार-पीट करता था. लेकिन, लॉकडाउन के बाद जब से वो घर में रहने लगा, तो बात-बात पर झगड़ा होने लगा. घर की साफ़-सफ़ाई से लेकर खाना बनाने तक, हर बात को लेकर तनाव बढ़ गया. वो अक्सर पिंग पिंग का बनाया हुआ खाना फेंक देता था. अब पिंग पिंग कहती हैं कि वो जल्द से जल्द तलाक़ ले लेना चाहती हैं.

हॉन्ग कॉन्ग की स्वयंसेवी संस्था हार्मनी हाउस की सुज़ाना लैम कहती हैं , "हालांकि हॉन्ग कॉन्ग में पूरी तरह से कभी लॉकडाउन नहीं लगाया गया. लेकिन जिन घरों में हिंसा नहीं हुई, वहां अलग तरह के तनाव देखने को मिले. घर की साफ़-सफ़ाई हो या फिर फ़िज़िकल डिस्टेंसिंग का पालन कैसे किया जाए. इन मसलों को लेकर घरों में झगड़े बढ़ गए हैं.

हॉन्ग कॉन्ग की सामाजिक मनोचिकित्सक शर्मीन श्रॉफ़ कहती हैं, "आज की तारीख़ में छोटी-छोटी बातों पर झगड़े हो रहे हैं. जैसे कि बच्चों को खेलने के लिए बाहर भेजा जाए या नहीं. इसके कारण परिवारों पर दबाव बढ़ा है. लॉकडाउन ने रिश्तों का सख़्त इम्तिहान लिया है."

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लॉकडाउन के कारण एक और बड़ी समस्या ये पैदा हुई है कि घर के काम काज में इज़ाफ़ा हो गया है. घर में ही लोगों को क्वारंटीन किया गया. फिर बच्चों के स्कूल बंद होने से उन्हें पढ़ाने की चुनौती बढ़ गई और इस बढ़े हुए काम के बोझ का ज़्यादा हिस्सा महिलाओं को ही उठाना पड़ रहा है.

आज चीन में महिलाएं, घर के काम-काज में पहले के मुक़ाबले ढाई गुना ज़्यादा समय देने को मजबूर हैं. जानकार कहते हैं कि कोविड-19 के कारण नौकरी गंवाने का ज़्यादा दुष्प्रभाव महिलाएं ही झेल रही हैं. इसकी प्रमुख वजह तो ये है कि एक तो उनकी नौकरियां चली गईं. फिर उन्हें घर के काम का भी ज़्यादा बोझ उठाना पड़ रहा है.

महिलाएं ज़्यादातर उन उद्योगों में काम करती हैं जिन पर कोविड-19 की सबसे अधिक मार पड़ी है. जैसे कि होटल, रेस्टोरेंट, एयरलाइन या टूरिज़्म.

शंघाई की सुसी गाओ लॉकडाउन से पहले से ही नई नौकरी तलाश रही थीं. वो ऑनलाइन रिटेल सेक्टर में काम करती हैं. अब अर्थव्यवस्था की तालाबंदी के कारण वो घर पर रहने को मजबूर हैं. अपनी दो साल की बेटी की पूरी ज़िम्मेदारी सुसी के ही ऊपर आ गई है.

वो कहती हैं, "मैं जितने परिवारों को जानती हूं, उनमें से ज़्यादातर में आर्थिक बोझ मर्दों पर पड़ा है, तो घर के काम-काज का बोझ महिलाओं को उठाना पड़ रहा है."

चीन में जिन लोगों की नौकरी गई है उनमें से ज़्यादातर प्रवासी कामगार हैं जो चीन के ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों में आकर काम कर रहे थे. लॉकडाउन से पहले नए साल की छुट्टियों पर वो घर गए तो वहीं पर अटक गए.

हू शियाओहोंग ऐसी ही कामकाजी महिला हैं, जो बीजिंग में काम करती थीं. जनवरी में नए साल की छुट्टियों पर वो अपने पति और दो बच्चों के साथ गांव गईं, तो वहीं अटक गईं. क्योंकि लॉकडाउन लागू हो गया. अब वो काम पर नहीं लौट सकी हैं. लेकिन, गांव में रहने वाला उनका एक बेटा बहुत ख़ुश है. उसे मां-पिता के साथ ज़्यादा वक़्त बिताने को मिल रहा है.

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डिजिटल नेटवर्क

आम तौर पर घरेलू रिश्तों के तनाव से बचने के लिए लोग दोस्तों और सहकर्मियों का सहारा लेते हैं. लेकिन, सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों के चलते लोगों का ये सपोर्ट सिस्टम भी दूर हो गया है.

हॉन्ग कॉन्ग की शर्मीन श्रॉफ़ कहती हैं, "पुरानी गतिविधियां जैसे कि लोगों से मिलना-जुलना, जिम जाना और बाहर खाना-पीना लॉकडाउन के दौरान बंद हो गया. तो हम दूसरे लोगों से जुड़ने के लिए डिजिटल नेटवर्क जैसे की सोशल मीडिया, वीडियो कॉल, मैसेज वग़ैरह के भरोसे ज़्यादा हो गए."

मगर, दुनिया में बहुत से लोग ऐसे हैं, जिनके पास इस तकनीक का सहारा नहीं है. हॉन्ग कॉन्ग की चाइनीज़ यूनिवर्सिटी की मनोवैज्ञानिक फैनी च्यूंग कहती हैं, "तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता को लेकर बहुत असमानता है. आज भी बहुत से लोगों के पास संवाद के ये साधन नहीं हैं."

वहीं, युवा पीढ़ी आज इसी डिजिटल सपोर्ट सिस्टम के सहारे है. हो सकता है कि फ़ौरी तौर पर ये वर्चुअल दुनिया राहत देती हो. मगर, इस आभासी दुनिया में ज़्यादा वक़्त बिताने के बाद युवा पीढ़ी और भी अकेलापन महसूस करने लगती है.

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कोरोना के कारण सामने आई एक नई दुनिया

वैसे तो महामारी ने जीवन में कई नई चुनौतियों को जन्म दिया है. मगर, बहुत से लोगों ने इस मुश्किल दौर में रिश्तों की नए सिरे से समीक्षा भी की है. शर्मीन श्रॉफ़ कहती हैं, "मैंने देखा है कि कई लोगों ने पुराने संबंधों को नए सिरे से जीवित करने की कोशिश की है. न सिर्फ़ दूसरे लोगों के साथ, बल्कि ख़ुद अपने जीवन में भी वो कई बदलाव लाए हैं."

चीन की सुसी गाओ कहती हैं, "इस महामारी के कारण मेरे पति, बेटी और बेटा आज ज़्यादा वक़्त साथ बिता रहे हैं. एक परिवार के तौर पर हम आज आपस में ज़्यादा संवाद करते हैं. मैं अपनी बच्ची के साथ ज़्यादा खेल पाती हूं. मेरा ये मानना है कि इस संकट के दौरान एक परिवार के तौर पर हम ज़्यादा क़रीब आए हैं."

वुहान में भले ही तलाक़ लेने की घटनाएं बढ़ गई हैं. मगर साथ ही शादी की अर्ज़ियां देने वालों की तादाद में भी इज़ाफ़ा हुआ है. जनवरी से अप्रैल के बीच, वुहान में शादी की अर्ज़ियों में 300 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है.

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महामारी के मनोवैज्ञानिक प्रभाव

जानकार कहते हैं कि महामारी के बाद अचानक से मनोचिकित्सा की ज़रूरत बढ़ सकती है. 2003 में सार्स की महामारी ख़त्म होने के लंबे समय बाद भी लोग तनाव के शिकार रहे थे.

लेकिन, महामारी से सिर्फ़ बुरी ख़बरें भी नहीं निकल रही हैं. इसके कुछ सकारात्मक प्रभाव भी सामने आए हैं. इसके कारण परिवार और दोस्तों के बीच रिश्ते बेहतर हुए हैं. आज लोग परिवार की ज़्यादा चिंता करने लगे हैं. रिश्तों की अहमियत उन्हें क़रीब से समझ में आई है.

मानसिक स्वास्थ्य के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ी है. चीन और भारत जैसे देशों में जहां मानसिक बीमारियों को ख़राब माना जाता है, वहां पर इसके प्रति लोगों की संवेदनशीलता बेहतर हुई है.

लॉकडाउन के दौरान लोगों ने जिस तरह से मिल कर थाली बजाई और दिए जलाकर फ़्रंटलाइन कार्यकर्ताओं की हौसला अफ़ज़ाई की, उससे सामुदायिक भावना बढ़ी है.

हॉन्ग कॉन्ग की शर्मीन श्रॉफ़ कहती हैं, "आज लोगों में सामुदायिक एकता की भावना मज़बूत हुई है. आज लोगों में दूसरों की मदद का भाव भी बढ़ा है. ऐसा पहले नहीं देखा गया था."

(बीबीसी फ़्यूचर पर प्रकाशित मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)

सवाल और जवाब

कोरोना वायरस के बारे में सब कुछ

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस क्या है? लीड्स के कैटलिन से सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले

    कोरोना वायरस एक संक्रामक बीमारी है जिसका पता दिसंबर 2019 में चीन में चला. इसका संक्षिप्त नाम कोविड-19 है

    सैकड़ों तरह के कोरोना वायरस होते हैं. इनमें से ज्यादातर सुअरों, ऊंटों, चमगादड़ों और बिल्लियों समेत अन्य जानवरों में पाए जाते हैं. लेकिन कोविड-19 जैसे कम ही वायरस हैं जो मनुष्यों को प्रभावित करते हैं

    कुछ कोरोना वायरस मामूली से हल्की बीमारियां पैदा करते हैं. इनमें सामान्य जुकाम शामिल है. कोविड-19 उन वायरसों में शामिल है जिनकी वजह से निमोनिया जैसी ज्यादा गंभीर बीमारियां पैदा होती हैं.

    ज्यादातर संक्रमित लोगों में बुखार, हाथों-पैरों में दर्द और कफ़ जैसे हल्के लक्षण दिखाई देते हैं. ये लोग बिना किसी खास इलाज के ठीक हो जाते हैं.

    कोरोना वायरस के अहम लक्षणः ज्यादा तेज बुखार, कफ़, सांस लेने में तकलीफ़

    लेकिन, कुछ उम्रदराज़ लोगों और पहले से ह्दय रोग, डायबिटीज़ या कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ रहे लोगों में इससे गंभीर रूप से बीमार होने का ख़तरा रहता है.

  • एक बार आप कोरोना से उबर गए तो क्या आपको फिर से यह नहीं हो सकता? बाइसेस्टर से डेनिस मिशेल सबसे ज्यादा पूछे गए सवाल

    जब लोग एक संक्रमण से उबर जाते हैं तो उनके शरीर में इस बात की समझ पैदा हो जाती है कि अगर उन्हें यह दोबारा हुआ तो इससे कैसे लड़ाई लड़नी है.

    यह इम्युनिटी हमेशा नहीं रहती है या पूरी तरह से प्रभावी नहीं होती है. बाद में इसमें कमी आ सकती है.

    ऐसा माना जा रहा है कि अगर आप एक बार कोरोना वायरस से रिकवर हो चुके हैं तो आपकी इम्युनिटी बढ़ जाएगी. हालांकि, यह नहीं पता कि यह इम्युनिटी कब तक चलेगी.

    यह नया वायरस उन सात कोरोना वायरस में से एक है जो मनुष्यों को संक्रमित करते हैं.
  • कोरोना वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड क्या है? जिलियन गिब्स

    वैज्ञानिकों का कहना है कि औसतन पांच दिनों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं. लेकिन, कुछ लोगों में इससे पहले भी लक्षण दिख सकते हैं.

    कोविड-19 के कुछ लक्षणों में तेज बुख़ार, कफ़ और सांस लेने में दिक्कत होना शामिल है.

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड 14 दिन तक का हो सकता है. लेकिन कुछ शोधार्थियों का कहना है कि यह 24 दिन तक जा सकता है.

    इनक्यूबेशन पीरियड को जानना और समझना बेहद जरूरी है. इससे डॉक्टरों और स्वास्थ्य अधिकारियों को वायरस को फैलने से रोकने के लिए कारगर तरीके लाने में मदद मिलती है.

  • क्या कोरोना वायरस फ़्लू से ज्यादा संक्रमणकारी है? सिडनी से मेरी फिट्ज़पैट्रिक

    दोनों वायरस बेहद संक्रामक हैं.

    ऐसा माना जाता है कि कोरोना वायरस से पीड़ित एक शख्स औसतन दो या तीन और लोगों को संक्रमित करता है. जबकि फ़्लू वाला व्यक्ति एक और शख्स को इससे संक्रमित करता है.

    फ़्लू और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं.

    • बार-बार अपने हाथ साबुन और पानी से धोएं
    • जब तक आपके हाथ साफ न हों अपने चेहरे को छूने से बचें
    • खांसते और छींकते समय टिश्यू का इस्तेमाल करें और उसे तुरंत सीधे डस्टबिन में डाल दें.
  • आप कितने दिनों से बीमार हैं? मेडस्टोन से नीता

    हर पांच में से चार लोगों में कोविड-19 फ़्लू की तरह की एक मामूली बीमारी होती है.

    इसके लक्षणों में बुख़ार और सूखी खांसी शामिल है. आप कुछ दिनों से बीमार होते हैं, लेकिन लक्षण दिखने के हफ्ते भर में आप ठीक हो सकते हैं.

    अगर वायरस फ़ेफ़ड़ों में ठीक से बैठ गया तो यह सांस लेने में दिक्कत और निमोनिया पैदा कर सकता है. हर सात में से एक शख्स को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.

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मेरी स्वास्थ्य स्थितियां

आपके सवाल

  • अस्थमा वाले मरीजों के लिए कोरोना वायरस कितना ख़तरनाक है? फ़ल्किर्क से लेस्ले-एन

    अस्थमा यूके की सलाह है कि आप अपना रोज़ाना का इनहेलर लेते रहें. इससे कोरोना वायरस समेत किसी भी रेस्पिरेटरी वायरस के चलते होने वाले अस्थमा अटैक से आपको बचने में मदद मिलेगी.

    अगर आपको अपने अस्थमा के बढ़ने का डर है तो अपने साथ रिलीवर इनहेलर रखें. अगर आपका अस्थमा बिगड़ता है तो आपको कोरोना वायरस होने का ख़तरा है.

  • क्या ऐसे विकलांग लोग जिन्हें दूसरी कोई बीमारी नहीं है, उन्हें कोरोना वायरस होने का डर है? स्टॉकपोर्ट से अबीगेल आयरलैंड

    ह्दय और फ़ेफ़ड़ों की बीमारी या डायबिटीज जैसी पहले से मौजूद बीमारियों से जूझ रहे लोग और उम्रदराज़ लोगों में कोरोना वायरस ज्यादा गंभीर हो सकता है.

    ऐसे विकलांग लोग जो कि किसी दूसरी बीमारी से पीड़ित नहीं हैं और जिनको कोई रेस्पिरेटरी दिक्कत नहीं है, उनके कोरोना वायरस से कोई अतिरिक्त ख़तरा हो, इसके कोई प्रमाण नहीं मिले हैं.

  • जिन्हें निमोनिया रह चुका है क्या उनमें कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं? कनाडा के मोंट्रियल से मार्जे

    कम संख्या में कोविड-19 निमोनिया बन सकता है. ऐसा उन लोगों के साथ ज्यादा होता है जिन्हें पहले से फ़ेफ़ड़ों की बीमारी हो.

    लेकिन, चूंकि यह एक नया वायरस है, किसी में भी इसकी इम्युनिटी नहीं है. चाहे उन्हें पहले निमोनिया हो या सार्स जैसा दूसरा कोरोना वायरस रह चुका हो.

    कोरोना वायरस की वजह से वायरल निमोनिया हो सकता है जिसके लिए अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ सकती है.
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अपने आप को और दूसरों को बचाना

आपके सवाल

  • कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकारें इतने कड़े कदम क्यों उठा रही हैं जबकि फ़्लू इससे कहीं ज्यादा घातक जान पड़ता है? हार्लो से लोरैन स्मिथ

    शहरों को क्वारंटीन करना और लोगों को घरों पर ही रहने के लिए बोलना सख्त कदम लग सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं किया जाएगा तो वायरस पूरी रफ्तार से फैल जाएगा.

    क्वारंटीन उपायों को लागू कराते पुलिस अफ़सर

    फ़्लू की तरह इस नए वायरस की कोई वैक्सीन नहीं है. इस वजह से उम्रदराज़ लोगों और पहले से बीमारियों के शिकार लोगों के लिए यह ज्यादा बड़ा ख़तरा हो सकता है.

  • क्या खुद को और दूसरों को वायरस से बचाने के लिए मुझे मास्क पहनना चाहिए? मैनचेस्टर से एन हार्डमैन

    पूरी दुनिया में सरकारें मास्क पहनने की सलाह में लगातार संशोधन कर रही हैं. लेकिन, डब्ल्यूएचओ ऐसे लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहा है जिन्हें कोरोना वायरस के लक्षण (लगातार तेज तापमान, कफ़ या छींकें आना) दिख रहे हैं या जो कोविड-19 के कनफ़र्म या संदिग्ध लोगों की देखभाल कर रहे हैं.

    मास्क से आप खुद को और दूसरों को संक्रमण से बचाते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा जब इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और इन्हें अपने हाथ बार-बार धोने और घर के बाहर कम से कम निकलने जैसे अन्य उपायों के साथ इस्तेमाल किया जाए.

    फ़ेस मास्क पहनने की सलाह को लेकर अलग-अलग चिंताएं हैं. कुछ देश यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके यहां स्वास्थकर्मियों के लिए इनकी कमी न पड़ जाए, जबकि दूसरे देशों की चिंता यह है कि मास्क पहने से लोगों में अपने सुरक्षित होने की झूठी तसल्ली न पैदा हो जाए. अगर आप मास्क पहन रहे हैं तो आपके अपने चेहरे को छूने के आसार भी बढ़ जाते हैं.

    यह सुनिश्चित कीजिए कि आप अपने इलाके में अनिवार्य नियमों से वाकिफ़ हों. जैसे कि कुछ जगहों पर अगर आप घर से बाहर जाे रहे हैं तो आपको मास्क पहनना जरूरी है. भारत, अर्जेंटीना, चीन, इटली और मोरक्को जैसे देशों के कई हिस्सों में यह अनिवार्य है.

  • अगर मैं ऐसे शख्स के साथ रह रहा हूं जो सेल्फ-आइसोलेशन में है तो मुझे क्या करना चाहिए? लंदन से ग्राहम राइट

    अगर आप किसी ऐसे शख्स के साथ रह रहे हैं जो कि सेल्फ-आइसोलेशन में है तो आपको उससे न्यूनतम संपर्क रखना चाहिए और अगर मुमकिन हो तो एक कमरे में साथ न रहें.

    सेल्फ-आइसोलेशन में रह रहे शख्स को एक हवादार कमरे में रहना चाहिए जिसमें एक खिड़की हो जिसे खोला जा सके. ऐसे शख्स को घर के दूसरे लोगों से दूर रहना चाहिए.

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मैं और मेरा परिवार

आपके सवाल

  • मैं पांच महीने की गर्भवती महिला हूं. अगर मैं संक्रमित हो जाती हूं तो मेरे बच्चे पर इसका क्या असर होगा? बीबीसी वेबसाइट के एक पाठक का सवाल

    गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर को समझने के लिए वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन अभी बारे में बेहद सीमित जानकारी मौजूद है.

    यह नहीं पता कि वायरस से संक्रमित कोई गर्भवती महिला प्रेग्नेंसी या डिलीवरी के दौरान इसे अपने भ्रूण या बच्चे को पास कर सकती है. लेकिन अभी तक यह वायरस एमनियोटिक फ्लूइड या ब्रेस्टमिल्क में नहीं पाया गया है.

    गर्भवती महिलाओंं के बारे में अभी ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि वे आम लोगों के मुकाबले गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं. हालांकि, अपने शरीर और इम्यून सिस्टम में बदलाव होने के चलते गर्भवती महिलाएं कुछ रेस्पिरेटरी इंफेक्शंस से बुरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं.

  • मैं अपने पांच महीने के बच्चे को ब्रेस्टफीड कराती हूं. अगर मैं कोरोना से संक्रमित हो जाती हूं तो मुझे क्या करना चाहिए? मीव मैकगोल्डरिक

    अपने ब्रेस्ट मिल्क के जरिए माएं अपने बच्चों को संक्रमण से बचाव मुहैया करा सकती हैं.

    अगर आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबॉडीज़ पैदा कर रहा है तो इन्हें ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पास किया जा सकता है.

    ब्रेस्टफीड कराने वाली माओं को भी जोखिम से बचने के लिए दूसरों की तरह से ही सलाह का पालन करना चाहिए. अपने चेहरे को छींकते या खांसते वक्त ढक लें. इस्तेमाल किए गए टिश्यू को फेंक दें और हाथों को बार-बार धोएं. अपनी आंखों, नाक या चेहरे को बिना धोए हाथों से न छुएं.

  • बच्चों के लिए क्या जोखिम है? लंदन से लुइस

    चीन और दूसरे देशों के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर बच्चे कोरोना वायरस से अपेक्षाकृत अप्रभावित दिखे हैं.

    ऐसा शायद इस वजह है क्योंकि वे संक्रमण से लड़ने की ताकत रखते हैं या उनमें कोई लक्षण नहीं दिखते हैं या उनमें सर्दी जैसे मामूली लक्षण दिखते हैं.

    हालांकि, पहले से अस्थमा जैसी फ़ेफ़ड़ों की बीमारी से जूझ रहे बच्चों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

End of मैं और मेरा परिवार

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