समुद्री डाकुओं पर नज़र रखेगा एल्बाट्रॉस

  • सैमेन्था पैट्रिक
  • बीबीसी फ्यूचर

वो अद्भुत है, अविश्वसनीय है, अकल्पनीय है. वो खुले आसमान में हवा के साथ क़दमताल करता है.

वो बिना थके, ज़मीन पर उतरे बिना एक महीने में 10 हज़ार किलोमीटर तक परवाज़ कर सकता है.

और अपनी पूरी ज़िंदगी में 85 लाख किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है.

उसके तीन मीटर लंबे पंख उसे ग़जब की ताक़त देते हैं. वो एक ही उड़ान में समुद्र का चक्कर लगा सकता है.

वो है, एल्बाट्रॉस यानी एक विशेष प्रकार का समुद्री पक्षी जिसे बहुत जल्द एक नया काम मिलने वाला है.

प्रशासन की मदद

एल्बाट्रॉस अब समुद्र से मछली चुराने वालों और समुद्री डाकुओं की ख़बर लेगा और उन्हें उनके अंजाम तक पहुंचाने में प्रशासन की मदद करेगा.

मछुआरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए जाल डालते हैं. लेकिन, बहुत बार उसमें अन्य पक्षी भी फंस जाते हैं.

बायकैचिंग की वजह से ही हज़ारों समुद्री पक्षी हर साल मौत के मुंह में समा जाते हैं. पिछले कई दशकों में बार-बार बायकैचिंग का मुद्दा उठाया गया.

ख़ास तौर से एल्बाट्रॉस और समुद्र काक का मुद्दा उठाया गया जो सबसे ज़्यादा प्रभावित होते हैं.

समुद्री लुटेरों पर नज़र

पर्यवेक्षकों के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से बायकैचिंग करने वाली नौकाओं पर कड़ी नज़र रखी गई.

जिसके बाद एलबेट्रोस की बायकैचिंग में ज़बरदस्त गिरावट आई.

इसके अलावा समुद्री लुटेरों पर नज़र रखने के लिए दक्षिणी महासागर में सैन्य जहाज़ भी गश्त करते हैं.

पर, सवाल ये है कि समुद्र में अवैध तरीक़े से मछलियां पकड़ने वाली नौकाओं की निगरानी कैसे की जाए?

अब कौन कानून असरदार साबित हो रहा है, और कौन नहीं, इसकी निगरानी का कोई सुनिश्चित तरीक़ा नहीं है.

अंतरराष्ट्रीय समुद्र

इसलिए एल्बाट्रॉस की बायकैचिंग पर नज़र रखना मुश्किल है. समुद्र में सभी देशों की अपनी सीमा होती है. उसके आगे समुद्र अंतरराष्ट्रीय है.

वहां किसी भी देश के लिए निगरानी करना बहुत मुश्किल है.

लेकिन, अब ये काम एल्बाट्रॉस करेंगे, जो 30 दिनों में 10 हज़ार किलोमीटर फ़ासला तय करेंगे और समुद्री लुटेरों की मुख़बिरी करेंगे.

मछली पकड़ने की रेखाओं में फंसने की वजह से अक्सर एल्बाट्रॉस मर रहे थे.

रिसर्चरों ने एल्बाट्रॉस और मछली पकड़ने की नौकाओं के बीच ओवरलैप का अध्ययन किया.

पक्षियों की बायकैचिंग

शोधकर्ताओं ने ये समझने का प्रयास किया कि समुद्री पक्षी मछली के संपर्क में कहां से आते हैं.

साथ ही ये भी जाना कि कौन-सा पक्षी किस तरह की नाव सबसे ज़्यादा पीछा करता है.

इससे ये समझने में मदद मिली कि पक्षियों की बायकैचिंग सबसे ज़्यादा कहां पर हो रही है.

ऑन बोर्ड मॉनिटरिंग सिस्टम से लिए गए डेटा की मदद से समुद्र में नौकाओं की मौजूदगी की मैपिंग संभव है. लेकिन ये रिकॉर्ड रियल टाइम नहीं होते.

पहले रिसर्चरों को ये अंदाज़ा नहीं था कि मछली पकड़ने वाली नौकाओं के साथ और खुले में समुद्री पक्षी कितना समय बिताते हैं.

मछली पकड़ने की गतिविधियां

जब रिसर्चरों को समय का अंदाज़ा हो गया. तो, उन्होंने एक ऐसा डेटा लॉगर विकसित किया जो एल्बाट्रॉस से जुड़ा था.

ये लॉगर नौकाओं का रडार पता लगाता है. और, अन्य कई प्रकार की जानकारियां जमा करता है.

आंकड़ों से पता चलता है कि मछली पकड़ने वाली नौकाओं के संपर्क में आने वाले हर परिंदे के लिंग और उसकी उम्र का भी ताल्लुक़ होता है.

उदाहरण के लिए नर पक्षी, अंटार्कटिका के क़रीब दक्षिण की ओर बढ़ते हैं. वहां मछली पकड़ने वाली नावें दुर्लभ हैं.

जबकि मादाएं उत्तर की ओर चलती हैं, जहां मछली पकड़ने की गतिविधियां ज़्यादा होती हैं.

वैश्विक मानचित्र

इस फ़र्क़ को समझना रिसर्च का पहला उद्देश्य था.

लॉगर से जो डेटा मिला वो एक तरह का बोनस साबित हुआ इससे खुले समुद्र में मछली पकड़ने की गतिविधियां मैनेज करने में मदद मिली.

मूल रूप से ये काम मछली पकड़ने वाली नौकाओं और सामान्य नौकाओं के बीच अंतर पता लगाने के लिए किया गया था.

साथ ही ये भी पता लगाने की कोशिश की गई कि क्या पक्षी मछली पकड़ने वाली नौकाओं के प्रति आकर्षित होते हैं या नहीं.

लेकिन जब लॉगर्स के डेटा को वैश्विक मानचित्र के साथ जोड़ दिया गया.

इमेज कैप्शन,

शोध के लिए सैमेन्था पैट्रिक ने सैमेन्था पैट्रिक पक्षियों को डेटा ट्रैकर लगाए थे

दक्षिण महासागर

तो, सभी नावों के स्थान को एक सक्रिय स्वचालित पहचान प्रणाली के साथ देखा जा सकता था.

इस रडार से नौकाओं के बीच होने वाले टकराव रोकने में मदद मिलती है.

एल्बाट्रॉस डेटा ने अनायास ही दक्षिण महासागर में अवैध मछली पकड़ने की संभावित सीमा और पैमाने को उजागर कर दिया था.

विशाल समुद्र में मछलियों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों की चोरी सिर्फ़ नौकाओं के ज़रिए रोकना मुश्किल है.

लेकिन एल्बाट्रॉस एक बड़े क्षेत्र को अकेले ही कवर कर सकता है.

जब एलबेट्रोस पर लगा डेटा किसी फ़िशिंग बोट का पता लगाता है तो लॉगर की मदद से आसपास की नौकाओं को इसकी जानकारी मिल जाती है और पूछताछ शुरू हो जाती है.

अगर समय रहते बड़े पैमाने पर डेटा संग्रह कर लिया जाए तो समुद्री लुटेरों पर नज़र रखी जा सकती है.

साथ ही एल्बाट्रॉस और अन्य समुद्री को बचाने में भी मदद मिलेगी.

(ये बीबीसी फ्यूचर की स्टोरी का अक्षरश: अनुवाद नहीं है. मूल कहानी पढ़ने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप बीबीसी फ्यूचर को फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं)

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