जब तेंदुए को देखकर मैंने मां को श्रद्धांजलि दी

  • 31 जनवरी 2019
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वो बड़ा ठहरा हुआ सा दिन था. इस बात का कोई इशारा कहीं से नहीं मिला था कि एक बुरी ख़बर बड़ी तेज़ रफ़्तार से मेरी तरफ़ आ रही है.

ये ऐसी बुरी ख़बर थी जो मेरी ज़िंदगी को दो टुकड़ों में बांटने वाली थी. मैं कॉफ़ी और रस्क लेकर अपने कैम्प के बाहर बैठी ही थी.

मैं अफ़्रीकी देश बोत्सवाना के ओकावांगो डेल्टा में एक जंगल सफ़ारी पर निकली थी. मैं इस सफ़ारी पर एक रिपोर्टिंग असाइनमेंट पर आई थी.

सुबह में जंगल की सैर के बाद, मैं थोड़ी देर के लिए ठहर कर उन चीज़ों पर ग़ौर करना चाहती थी जो मैंने अब तक देखी थी.

मैंने जंगल में तरह-तरह के जानवरों का दीदार किया था. पालथी मारे बैठे बबून, दरियाई घोड़े के पैरों के निशान, मक्खियां खाने वाले जीव, हरे रंग के परिंदे.

सुबह के वक़्त ऐसी रंग-बिरंगी ख़ूबसूरती निहारना दिलकश तजुर्बा था.

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बारिशों के दिन

दो दिन पहले ही हमारे गाइड सिमोन बाइरन मुझे और मेरे साथी फ़ोटोग्राफ़र फेलिक्स ओडेल को दलदली रास्तों से होते हुए यहां लेकर आए थे.

हम जंगल में बड़ी दूर तक आ गए थे. हमारी रातें स्याह नदी के किनारे टेंट में बीत रही थीं. ओकावांगो डेल्टा में तीन क़िस्तों वाले हमारे इस अभियान का ये दूसरा दौर था.

पहला दौर बड़ा शहाना था. जब हम सुबह से शाम तक बड़ी गाड़ियों में सफ़र करते थे. गाड़ी में बैठकर ही हम जंगली जीवों का दीदार करते थे. बारिशों के दिन ख़त्म हो रहे थे.

जंगल में जानवरों की भरमार थी. बरसाती घास पर बसर करने वाले जीव बड़ी तादाद में मौजूद थे. हाथी और जिराफ़ के बच्चे अपनी माओं के साथ लड़खड़ाते चलते दिखते थे.

जंगली सुअर के छोटे बच्चे अपने मां-बाप के पीछे छलांग लगाते अक्सर दिख जाते थे. सवाना का ये मैदान ज़िंदगी से लबरेज़ नज़र आता था.

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फूलों की ख़ुशबू

लेकिन, अब तक हम ने यहां के मशहूर तेंदुए का दीदार नहीं किया था. वो सबसे घात लगाकर शिकार करने वाला जानवर माना जाता है.

बोत्सवाना में तेंदुए को देखने की चाहत मेरे अंदर सबसे ज़्यादा थी. इस सफ़र के अगले हिस्से में हम जंगल के अनदेखे हिस्से में जाने वाले थे.

इस दौरान हमारे साथ कोई गैजेट नहीं था, जो हमारी शांति को भंग कर सके. जंगली पौधों और फूलों की ख़ुशबू पूरे इलाक़े में फैली हुई थी.

मुझे ख़याल आया कि कहीं ये क़ुदरती नशा तो नहीं, जो हमारी नसों में समाया जा रहा है. बाइरन ने हमें बताया कि उसने एक तेंदुए की आवाज़ सुबह के वक़्त सुनी है.

हमें बोत्सवाना में कुछ दिन और गुज़ारने थे. तो, एक उम्मीद जगी कि शायद कोई तेंदुआ हमें दिख जाए. उसी दिन दोपहर में बाइरन को एक संदेश मिला.

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भयंकर बर्फ़ीला तूफ़ान

उसने मुझे कहा कि अपने घर फ़ोन कर लो हमारे पास दुनिया से जुड़ने का एक ही तरीक़ा था, एक सैटेलाइट फ़ोन. मेरे ज़ेहन में किसी अनहोनी की आशंका हुई.

मुझे लगा कि मेरे किसी बच्चे को कुछ हो गया है. लेकिन, जब मैंने घर फ़ोन किया तो, उधर से आवाज़ आई, 'वो शांति से इस दुनिया से विदा हुईं. उनके कष्ट दूर हो गए.'

इसके बाद फ़ोन कट गया. मेरी मां गुज़र गई थीं. फिर भी मुझे एक अजीब सा सुकून था. मैंने उन्हें अपने बोस्टन के घर में अभी एक हफ़्ते पहले ही देखा था.

उस वक़्त न्यू इंग्लैंड में भयंकर बर्फ़ीला तूफ़ान आने वाला था. मैं घर में कॉफ़ी, पॉपकॉर्न और दूसरी खाने-पीने की चीज़ें जमा कर रही थी.

तभी मेरे पिता का फ़ोन आया कि मां ने मेरे पास आने से मना कर दिया है. फिर मैं तूफ़ान के बीच ही मां के पास जाने के लिए रवाना हो गई थी.

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एक अनजाना डर

मेरी मां पिछले चार साल से अल्ज़ाइमर की शिकार थीं. वो कोई भी ज़बान न बोल पाती थीं और न ही समझ पाती थीं. वो एक अनजाने डर से ग्रस्त थीं.

वो अक्सर अपने परिवार के सदस्यों पर हमला कर देती थीं. जबकि एक वक़्त में चार बच्चों में मैं उनकी सबसे दुलारी बेटी हुआ करती थी.

लेकिन अब वो मुझे या किसी और को नहीं पहचानती थीं. वो जीकर मर रही थीं. मैंने उन्हें बहुत पहले खो दिया था.

अब जब उनकी मौत की ख़बर सुनी तो मुझे उनसे आख़िरी मुलाक़ात की याद आ रही थी. उनका कमरा गर्म था.

मेरे पिता और मेरी एक बहन उनका पसंदीदा संगीत सुना रहे थे. मैंने लेमोनेड में एक फाहा डुबोया और उन्हें चटाया. उन्होंने उसे काट लिया और मुस्कुरा दीं.

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रहस्यमयी बीमारी

बच्चों की तरह वो जैसे लॉलीपॉप खा रही थीं. मैंने उन्हें पोते-पोतियों के क़िस्से सुनाए. उनका चेहरा शांत था. वहीं, तूफ़ान से पूरा मैसाचुसेट्स सूबा ठप हो गया था.

हम दो दिनों तक घर में ही क़ैद रहे. हम सब मां के पास ही ज़मीन में गद्दे बिछाकर सोया करते थे. बाहर 29 इंच मोटी बर्फ़ की चादर बिछ गई थी. मेरे पिता एक डॉक्टर हैं.

उन्हें इस बात की उम्मीद नहीं थी कि मां नींद से दोबारा उठेंगी. लेकिन, इस रहस्यमयी बीमारी में आगे क्या होगा, कोई पक्के तौर पर नहीं बता सकता था.

मेरा अफ़्रीका जाने का प्लैन पहले से तय था. परिवार ने मुझे कहा कि मैं अपने सफ़र पर निकल जाऊं.

मैंने अपनी मां के कान में फुसफुसाया, "आप से दो हफ़्ते बाद मिलती हूं मां. मैं तुम्हारे प्रिय तेंदुए को खोजूंगी. वादा रहा."

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मिशन अधूरा रहेगा...

मेरी मां क़ुदरती तौर पर रास्ता तलाशने के हुनर से लैस थीं. उन्हें कभी नक़्शे देखने की ज़रूरत नहीं पड़ती थी. हम दोनों साथ-साथ अमेज़न नदी के डेल्टा के सफ़र पर गए थे.

लेकिन, उनका सबसे पसंदीदा टूर था मेरे पिता के साथ कीनिया में सफ़ारी पर जाना. उन्होंने उस सफ़ारी के दौरान एक तेंदुआ देखा था, जिसे वो लेपिड कहती थीं.

मेरी मां को तेंदुए बहुत पसंद थे. उनकी रफ़्तार मेरी मां को बहुत लुभाती थी. उनकी ताक़त पर वो हैरान होती थीं.

अब जबकि उनके गुज़र जाने की ख़बर आई, तो मुझे ऐसा लगा कि इस सफ़ारी के दौरान अगर मैंने तेंदुआ नहीं देखा तो ये मिशन अधूरा रहेगा.

मुझे अपनी मां को श्रद्धांजलि के तौर पर तेंदुए का दीदार करना था. बाइरन और फेलिक्स ओडेल आग के पास मेरा इंतज़ार कर रहे थे. मैं सुन्न थी.

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रंग-बिरंगे परिंदे

मैंने उन्हें अपनी मां के गुज़र जाने के बारे में बताया. बाइरन ने मुझसे पूछा कि क्या मैं वापस जाना चाहती हूं.

हम एक नाव पर सवार होकर जंगल के घुमावदार रास्तों से होते हुए अपनी मंज़िल की तरफ़ रवाना हो गए. नदी का डेल्टा तरह-तरह के जीवों से गुलज़ार था.

रंग-बिरंगे परिंदे, ख़तरनाक जीव और तितलियां, सब मिलकर अजब मंज़र पेश कर रहे थे. काले-घने बादलों की छांव में बारिश के क़दमों की आहट दिख रही थी.

बाइरन ने मुझे अपना सैटेलाइट फ़ोन दिया और मैंने कुछ देर तक अपने घर वालों से, अपने पिता से और अपनी बहन से बात की.

उन्होंने बताया कि मां की अंत्येष्टि तीन हफ़्ते बाद ही हो पाएगी. मेरी बहन ने कहा कि तुम वापस आने के बजाय बोत्सवाना में ही रुको और अपना मिशन पूरा करो.

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शिकारी जानवर

मां भी यही कहती. अब मेरे दिल में एक ही ख़्वाहिश थी, तेंदुए का दीदार. बोत्सवाना के जंगलों में एक साथ मुझे ज़िंदगी और मौत के दीदार हो रहे थे.

एक तरफ़ हरे-भरे घास के मैदान, जानवरों की आमद-ओ-रफ़्त से गुलज़ार थे. वहीं, दूसरी तरफ़ शिकारी जानवर, दूसरे जीवों का शिकार कर रहे थे.

इन जानवरों के बीच मुझे अपनी मां का अक्स दिखता था. कहीं जंगली कुत्ते एक हिरण को घसीट रहे थे, तो दूसरी तरफ़ एक बारहसिंघा उछलकर अपने झुंड से जा मिला.

कहीं मादा बंदर अपने बच्चों की हिफ़ाज़त कर रही थीं, तो कहीं ज़ेब्रा और हाथी अपने बच्चों से खेल रहे थे. मुझे उस वक़्त अपनी मां की बहुत याद आई.

वो बचपन में मुझे हर मुसीबत से बचाने के लिए अपनी गोद में छुपा लेती थीं. बोत्सवाना में आख़िरी दिन बहुत ही निराशाजनक था. अगले दिन सुबह ही हमारी फ़्लाइट थी.

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भीगी हुई धरती

जंगल में तूफ़ान की आशंका जताई गई थी. फिर भी मुझे ये उम्मीद थी कि मैं तेंदुए को देख सकूंगी. क़ुदरत ऐसी कोई गारंटी तो नहीं देती.

फिर भी मैं एक उम्मीद के साथ बिस्तर पर गई. मेरी नींद सुबह 4.30 बजे खुली. मैंने कॉफ़ी ली और अपने नए गाइड डेव लक के साथ घूमने निकल गई.

आसमानी दीवार के दायरे में घूमते हुए हमें घंटों बीत गए. भीगी हुई धरती से एकदम ताज़ी और सोंधी ख़ुशबू आ रही थी.

सूरज उगा और बादल छंटे, तो तेंदुए के दीदार की रही-सही उम्मीद भी जाती रही. वहीं डेव लक इतनी तेज़ी से गाड़ी चला रहे थे, जैसे कि कोई गाड़ी पकड़नी हो.

उन्होंने शिकारी जानवरों के पैरों के निशान पर टॉर्च की रोशनी डाली और कहा कि ये शेर के पंजे हैं. एक घंटे के बाद मेरी फ़्लाइट थी.

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घर पहुंचकर हमें मां के अंतिम संस्कार में जुट जाना था. एक घंटे की ड्राइव के बाद डेव लक एक ख़ास दिशा में चल पड़े.

मेरी नज़र ओडेल से मिली और हम ने एक साथ मानो सवाल किया कि कहां जा रहे हैं. डेव ने कहा कि हमें जल्दी करनी चाहिए.

मैंने अपनी आंखें और मुट्ठी एक साथ भींचीं. मेरे फेफड़े हवा से भर गए. जब हम एक जगह रुके, तो मेरी नज़र तेंदुए के शाही चेहरे पर पड़ी.

वो एक पेड़ की मुड़ी-तुड़ी टहनी पर शान से बैठा हुआ था. डेव लक ने बताया कि ये मारोथोड़ी है. इसका मतलब है बरखा की बूंद. इस मादा तेंदुए की मां का नाम पुला है.

जिसका मतलब है बारिश. मुझे डर लगा कि हमारे बोल सुनकर कहीं वो भाग न जाए. इसलिए मैं पलक भी नहीं झपका रही थी.

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सच्ची श्रद्धांजलि

उसने अपने पैरों को फिर से ठीक किया और आराम से टहनी पर पसर गयी. वो बहुत सुकून में दिख रही थी. मुझे पता था कि उसके पास मुझसे कई गुना ज़्यादा ताक़त थी.

मैं उसे देखते ही रोने लगी. मैं ख़ुदा का शुक्र अदा कर रही थी कि उसने मेरे दिल की पुकार सुन ली. मुझे लगा कि मेरा तेंदुए को देखना मेरी मां को सच्ची श्रद्धांजलि थी.

मैंने उनसे किया हुआ आख़िरी वादा जो निभाया था. मैंने एक मादा तेंदुआ और उसकी बेटी को देखा. वो मुझे ही घूर रही थी.

मानो कह रही हो कि तुम वहीं हो जहां तुम्हारी मां तुम्हें चाहती थी. अगले ही पल वो दोनों जंगल में न जाने कहां गुम हो गए.

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