मिस्र के अलावा पिरामिड और कहाँ

  • 27 अगस्त 2017
पिरामिड इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption सूडान में 300 से ज़्यादा पिरामिड हैं

अगर आपसे पूछा जाए कि पिरामिड कहां पाए जाते हैं तो आप फ़ौरन कहेंगे- मिस्र में. और यह पूछा जाए कि नील नदी किस देश के लिए वरदान है, तो भी बिना पलक झपकाए आप जवाब 'मिस्र' होगा.

आपका जवाब सही है, मगर पूरी तरह सही नहीं है. यह बात हम नहीं कह रहे, बल्कि वह अफ़्रीकी देश कह रहा है जिसके बारे में सबसे ज़्यादा ग़लत समझा जाता है.

इस देश का नाम है- सूडान. सूडान के बारे में कहा जाता है कि यह अफ़्रीका का ऐसा देश है, जिसके बारे में अक्सर लोगों की जानकारी और समझ ग़लत ही होती है.

आप यह जानकर हैरान होंगे कि सूडान में भी पिरामिड पाए जाते हैं. और यहां तो मिस्र से ज़्यादा पिरामिड हैं. यह बात और है कि सूडान के पिरामिडों के बारे में दुनिया के बहुत कम लोग जानते हैं. और जब जानते ही नहीं, तो देखने भी नहीं आते.

इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption सूडान के लोगों को शिकायत है कि लोग उनके बारे में कम जानते हैं.

इसी तरह, मिस्र का वरदान कही जाने वाली नील नदी समंदर तक के अपने सफ़र का बड़ा हिस्सा सूडान से होकर तय करती है. मगर, जब भी नील नदी का ज़िक्र आता है, इसे मिस्र से जोड़कर देखा जाता है.

सूडान की पूरी दुनिया से यही शिकायत है कि उसे लोग समझते कम हैं. जब भी सूडान का ज़िक्र होता है, तब वहां के गृहयुद्ध, बुरे हालात, भुखमरी और दूसरी बुराइयों की चर्चा होती है. सूडान की ऐतिहासिक विरासतों का ज़िक्र नहीं किया जाता.

इस द्वीप पर केवल एक दिन के लिए जा सकते हैं

चीन के इस आविष्कार पर हैरान थे मार्को पोलो

सूडान के लोगों की यह शिकायत दूर करने और उन्हें समझने के लिए बीबीसी संवाददाता बेंजामिन जैंड ने कुछ दिन सूडान में बिताए. इस दौरान बेंजामिन को कई दिलचस्प तजुर्बे हुए. वह सूडान के बारे में कई नई बातें जानकर हैरान रह गए.

तो, चलिए बेंजामिन के साथ चलते हैं सूडान की सैर पर.

सूडान, उत्तरी-पूर्वी अफ़्रीका में स्थित देश है. यह इस महाद्वीप का तीसरा बड़ा देश है. इसकी सरहदें, मिस्र, इथियोपिया, इरीट्रिया, लीबिया और चाड देशों से मिलती हैं. बरसों के गृहयुद्ध के बाद अब सूडान दो हिस्सों में बंट चुका है. 2011 में दक्षिणी सूडान के लोगों ने सूडान से अलग होकर एक नया देश बनाने का ऐलान कर दिया था. ऐसे में अब उत्तरी सूडान को ही सूडान कहा जाता है.

इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption गृहयुद्ध को लेकर चर्चा में है सूडान

यह देश, 1955 तक मिस्र और ब्रिटेन का ग़ुलाम था. इसे 1956 में आज़ादी मिली थी. यहां पर अरब और अफ़्रीकी लोगों की मिली-जुली आबादी रहती है.

प्राचीन काल में यहां कुशीते साम्राज्य का राज था. इसका नागा नाम का शहर कुशीते साम्राज्य का बहुत बड़ा केंद्र था. ईसा से चार सदी पहले भी यह इलाक़ा बहुत अच्छे से आबाद था. आज भी नागा में अमुन और अपेडेमाक के मंदिर मिलते हैं. हालांकि, सदियों के इस्लामिक शासन के चलते इनकी अनदेखी हुई. आज इन मंदिरों के खंडहर बहुत बुरी हालत में हैं.

बेंजामिन ने सफ़र की शुरुआत सफ़ा और मज़िन के साथ की. दोनों सूडान के रहने वाले युवा हैं. उन्होंने सबसे पहले नागा के मंदिर देखने का फ़ैसला किया. पहले पड़ाव में उन्होंने सूडानी कॉफ़ी का लुत्फ़ लिया. मौसम बहुत गर्म है, सो यहां आप काफ़ी देर तक कॉफ़ी का मज़ा ले सकते हैं.

मनमोहक कार्निवाल की कैसे होती है तैयारी

ईरान: 'सेल्फ़ी की होड़ में देश हुआ शर्मिंदा'

सूडान बहुत बड़ा देश है. इसी वजह से यहां तमाम समुदायों के लोग रहते हैं. इसकी शानदार ऐतिहासिक विरासत रही है. इसकी मिसाल नागा के क़रीब चार हज़ार साल पुराने मंदिर हैं. हालांकि इनके बारे मे स्थानीय लोगों को भी बहुत ज़्यादा जानकारी नहीं है. वे सिर्फ़ इन मंदिरों के पास स्थित कुओं से पानी लेने के लिए आते हैं.

इनके अलावा कुशीते साम्राज्य के दौर में इसकी राजधानी मेरोई में बने दो सौ से ज़्यादा पिरामिड भी इसकी पहचान हैं. इन पिरामिडों को अरब-इस्लामिक हमलावरों ने तोड़-फोड़ डाला था. इसके बाद से सूडान के पिरामिड बहुत बुरी हालत में हैं. देश की सरकार भी इसे टूरिस्ट स्पॉट बनाने में दिलचस्पी नहीं लेती है. यही वजह है कि दुनिया इस बात से अनजान है कि पिरामिड सूडान में भी हैं.

इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption नागा में मंदिरों के पास के कुओं से पानी भरते लोग.

मेरोई जाते वक़्त बेंजामिन ने अपने साथियों के साथ रात नील नदी के किनारे स्थित एक मोटेल में गुज़ारी. स्थानीय लोग भुने हुए मांस को बहुत पसंद करते हैं.

जैसा कि हिंदुस्तान के बहुत से गांवों में होता है, रात के वक़्त सूडान में लोग खुले में सोते हैं. ऐसा इसलिए ताकि जैसे ही रौशनी हो, उनकी नींद खुल जाए. रौशनी उनके लिए क़ुदरती अलार्म का काम करती है.

मेरोई के रेगिस्तानी इलाक़े में स्थित पिरामिड, आपको हज़ारों साल पुराने दौर में ले जाते हैं. मिस्र में जहां इन्हें देखने के लिए लोगों की क़तारें लगी रहती हैं. वहीं, सूडान के पिरामिड को शायद ही कोई देखने आता है.

देश की नई पहचान बनाने में जुटे हैं युवा

बरसों के गृह युद्ध के बाद 2011 में सूडान का बंटवारा हुआ, तो सूडान के युवा अपने देश की नई पहचान बनाने में जुट गए.

इन दिनों बहुत से युवा अपनी कविताओं और नज़्मों के ज़रिए सूडान में बदलाव की बयार बहाने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे ही कई सूडानी युवा नास विद नोटपैड के बैनर तले जमा होते हैं. वे अपनी-अपनी कविताएं पढ़ते हैं. अपने तजुर्बे साझा करते हैं.

एंजेलीना जोली पर भिड़े पड़ोसी देश मिस्र और सूडान

ज़्यादातर कविताएं सूडान की कला, संस्कृति और यहां के इतिहास के बारे में हैं. कई लोग बुराइयों की बेड़ियों से आज़ादी की नज़्में लिख रहे हैं. वहीं कुछ इंक़लाब लाने की बातें करते हैं. पर बहुत से युवा मोहब्बत जैसे मसले पर भी कविताएं और नज़्म लिखते हैं.

सूडान के लोगों को अपनी कला, अपनी संस्कृति पर बहुत गर्व है. भारत की ही तरह सूडान में कुश्ती लड़ी जाती है. इसे नूबा कुश्ती कहा जाता है. आपको हर गांव-क़स्बे में नूबा के मुक़ाबले होते दिख जाएंगे. इसमें कई बार मोटी रक़म भी दांव पर लगती है. सूडान में नूबा कुश्ती का ये खेल क़रीब तीन हज़ार साल से खेला जा रहा है. पहले के ज़माने में सूडान में बड़े योद्धा ही नूबा कुश्ती के मुक़ाबले लड़ा करते थे.

मगर, अब तो नए साल या स्वतंत्रता दिवस जैसे मौक़ों पर कुश्ती के बड़े आयोजन होते हैं. इनाम में बड़ी रक़म दी जाती है.

बुरक़ा पहनने वालियों से ना पूछें ये सवाल

बीबीसी संवाददाता बेंजामिन ने भी ऐसे ही एक मुक़ाबले में हिस्सा लिया. यूं तो जहां कुश्ती हो रही थी, वह मैदान ख़ाली था. मगर जैसे ही एलान किया गया कि एक बर्तानवी पहलवान भी अखाड़े में उतरने वाला है, तो वहां भारी संख्या में लोग मुक़ाबला देखने के लिए जमा हो गए.

बेंजामिन एक ही दांव में चित हो गए. फिर भी सूडान के लोगों ने उन्हें विजेता की तरह कंधों पर बैठाकर घुमाया.

सूडान के इस सफर के बाद बेंजामिन अब बाक़ी दुनिया की सूडान के बारे में राय बदलने में जुट गए हैं. वह लोगों से कहते हैं कि आप सूडान जाएं तो वहां की हक़ीक़त आपको हैरान कर देगी.

तमाम ऐतिहासिक विरासतों वाला यह देश आपकी सोच के मकान में नई खिड़कियां खोल देगा.

(बीबीसी ट्रैवल पर इस स्टोरी को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. )

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

मिलते-जुलते मुद्दे