स्विट्ज़रलैंड के लोग कैसे बोल पाते हैं चार ज़बानें

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सियासी तौर पर हर देश की सिर्फ़ एक सरहद होती है. सरहदें उस देश को एक पहचान दिलाती हैं. लेकिन, दूसरे मुल्क़ों से अलग करने वाली सीमाओं के अलावा भी, देशों के अंदर, अलग-अलग तरह की लक़ीरें खिंची होती हैं. जैसे भाषाई, इलाक़ाई, मज़हबी और सांस्कृतिक दूरियां.

इतने तरह के खांचों और बंटवारों की दीवारों के बावजूद अगर किसी देश में एकता बनी रहती है, तो ये अपने आप में बड़ी बात है.

इन तमाम सरहदों की एकजुटता की बेहतरीन मिसाल भारत है. हमारे देश के बारे में कहा ही जाता है विविधता में एकता. भारत की ही तरह की मिसालें रखने वाला एक देश है, स्विट्ज़रलैंड.

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चार देशों की भाषा और संस्कृति का असर

यूरोप के छोटे से मुल्क़ स्विट्ज़रलैंड की सीमाएं इटली, फ़्रांस, जर्मनी और ऑस्ट्रिया से लगती हैं. इसीलिए यहां इन चारों देशों की भाषा और संस्कृति का असर साफ़ तौर पर देखने को मिलता है.

एक से दूसरे इलाक़े में जाने पर लगता है कि आप किसी और देश में आ गए हैं. अचानक अलग भाषा और वेशभूषा वाले लोग नज़र आने लगते हैं. एक ही परिवार में तीन से चार ज़बान के जानने और बोलने वाले रहते हैं. लेकिन मुख़्तलिफ़ ज़बान बोलने वालों को जोड़ने का काम सिर्फ़ एक भाषा करती है. वो है अंग्रेज़ी.

ये ज़बान सारी दुनिया की भाषाई दूरियों को मिटाकर सबको नज़दीक ले आती है. स्विट्ज़रलैंड में भी भले ही बहुत सी भाषाएं बोलने वाले हैं. लेकिन स्कूल में अंग्रेज़ी ज़बान पढ़ना अनिवार्य है.

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ज़बानों के गुलदस्ते की ताक़त

कहने को तो एक ही देश में कई ज़बान के जानने वालों का होना फ़ख़्र की बात है. लेकिन कई बार यही बात सिर दर्द बन जाती है. कई ज़बान जानने के बाद सिर्फ़ कोई एक भाषा आपकी पहचान नहीं बन पाती. स्विट्ज़रलैंड में जितने प्रोडक्ट बिकते हैं, उनके नाम कई भाषाओं में लिखे जाते हैं.

स्विट्ज़रलैंड के लोग ज़बानों के इस गुलदस्ते को अपनी ताक़त मानते हैं. उनके मुताबिक़ कई भाषाएं बोलने की वजह से दुनिया में उन्हें अलग पहचान मिली है. उन्होंने विनम्रता ब्रिटेन से सीखी है, जबकि जीने का सलीक़ा और स्टाइल इटली से सीखा है.

स्विट्ज़रलैंड दुनिया के सबसे अमीर देशों में से एक है. यहां लंबे वक़्त से लोकतांत्रिक व्यवस्था रही है. देश में क़रीब 26 स्वायत्त सूबे हैं जिन्हें अपने फ़ैसले लेने का पूरा अधिकार है.

स्विट्ज़रलैंड के लोग इसे 'विलिन्सनेशन' कहते हैं यानी अपनी इच्छा से बना गया राष्ट्र. स्विट्ज़रलैंड के लिए हम कह सकते हैं कि कई मुल्क़ एक साथ जुड़कर ख़ुशी से एक साथ रहने को राज़ी हो गए. और बन गया एक देश.

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क्या है स्विट्ज़रलैंड का इतिहास?

स्विट्ज़रलैंड में कई भाषाएं बोलना इसलिए ख़ास है, क्योंकि ज़्यादातर यूरोपीय देश, भाषा की बुनियाद पर ही बने हैं.

जर्मनी में जर्मन, इंग्लैंड में इंग्लिश, फ्रांस में फ्रेंच और रूस में रशियन ज़बान बोली जाती है. इटली में इतालवी और डेनमार्क में डेन भाषा बोलने वाले रहते हैं.

ऐसे देशों से घिरा स्विट्ज़रलैंड तमाम ज़बानों का गुलदस्ता ही लगता है.

स्विट्ज़रलैंड में बहुत सारी ज़बानें बोलने का इतिहास बहुत पुराना है. जुग़राफ़ियाई या भौगोलिक ऐतबार से स्विट्ज़रलैंड आल्पस पर्वत और स्विस पठार के बीच बंटा हुआ है.

अब से सात हज़ार साल पहले ये मुल्क़ सभी बड़े यूरोपीय क़बीलों के लिए समान दूरी पर था. पहाड़ों के एक तरफ़ की ज़िंदगी दूसरी तरफ़ की ज़िंदगी से बिल्कुल अलग थी.

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यहां चार भाषाओं को है मान्यता

1848 में मॉडर्न स्विट्ज़रलैंड वजूद में आने से पहले ही यहां कई भाषाई सरहदें बन चुकी थीं.

स्विट्ज़रलैंड में आधिकारिक रूप से चार भाषाओं को मान्यता मिली हुई है. रोमांश, जर्मन, फ़्रेंच, और इटेलियन.

रोमांश यहां कि इलाक़ाई ज़बान है. जो बहुत हद तक आम बोलचाल वाली इतालवी ज़बान से मेल खाती है. ग्लोबलाइज़ेशन और बदलते आर्थिक रिश्तों की वजह से यहां अंग्रेज़ी भाषा तेज़ी से लोगों के बीच अपनी जगह बना रही है.

एक रिसर्च के मुताबिक़ तीन चौथाई स्विस लोग हफ़्ते में तीन बार अंग्रेज़ी में गुफ़्तगू करते हैं.

भाषा की बात करें, तो जर्मन बहुल कैंटन या प्रांत में घरों में लोग स्विस-जर्मन बोलते हैं. लेकिन स्टैंडर्ड जर्मन स्कूल में ही सीखते हैं.

इसी तरह टिसिनो कैंटन में इतालवी ज़बान के जानने वाले ज़्यादा रहते हैं. लेकिन रोज़मर्राह की बोल-चाल में जर्मन और फ़्रेंच शब्दों का भरपूर इस्तेमाल करते हैं.

स्विट्ज़रलैंड में इतालवी बोलने वालों की संख्या काफ़ी कम है. दक्षिणी टिसिनो कैंटन में रहने वाले ही इस भाषा का प्रयोग करते हैं.

ये लोग स्विट्ज़रलैंड की कुल आबादी का आठ फ़ीसदी हैं. इनकी संस्कृति बाकी स्विट्ज़रलैंड से बिल्कुल अलग है.

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अलग बोली, ज़िंदगी के तौर-तरीक़े अलग

भाषा या ज़बान संस्कृति से आते हैं और संस्कृति लोगों के रहन-सहन, उनकी ज़िंदगी के तौर-तरीक़ों से बनती है.

फ्रेंच बोलने वाले ज़्यादा शांत मिज़ाज के होते हैं. दोपहर के खाने में इन्हें व्हाइट वाइन अपनी लंच टेबल पर चाहिए ही.

जबकि जर्मन बोलने वाले मिज़ाजतन क़ायदे कानून के पक्के होते हैं. ऐसा माना जाता है कि जर्मन बोलने वाले संजीदा रहते हैं. इनकी ज़िंदगी में हंसी-मज़ाक़ कम ही होता है.

ब्राज़ील के पाउलो गोनक्लेव, स्विट्ज़रलैंड के टिसिनो में पिछले एक दशक से रह रहे हैं. ब्राज़ील में आधिकारिक रूप से एक ही ज़बान यानी पुर्तगाली भाषा बोली, लिखी और पढ़ी जाती है.

लेकिन पाउलो ने स्विट्ज़रलैंड आकर चार ज़बानें सीख ली हैं. वो कहते हैं कि ये अनूठा अनुभव है कि वो एक ही कॉन्फ्रेंस हॉल में एक ही वक्त में चार अलग भाषाओं के जानकारों से मुख़ातिब होते हैं.

पाउलो कहते हैं बीते दस सालों में उनके व्यक्तित्व में ग़ज़ब का बदलाव आया है.

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स्विट्ज़रलैंड में नहीं है भाषाई बंटवारा

बहुभाषी स्विट्ज़रलैंड में भाषाओं का बंटवारा बराबर नहीं है. देश की 26 कैंटन में से 17 में जर्मन भाषी हैं.

चार में फ़्रेंच और एक में इतालवी बोलने वालों की तादाद ज़्यादा है. तीन कैंटन में कम से कम दो ज़बानों के जानने वालों की आबादी ज़्यादा है. वहीं एक कैंटन ऐसा है, जहां तीन भाषाएं बोलने वाले लोग रहते हैं. इसके बावजूद देश की क़रीब 63 फ़ीसदी आबादी की पहली ज़बान जर्मन है.

स्विट्ज़रलैंड पर कई देशों की भाषा और संस्कृति का असर है लेकिन इनकी अपनी दो ख़ास पहचान हैं.

ज़हानत और वक़्त की पाबंदी. ये दोनों ही चीज़ें स्विट्ज़रलैंड ने जर्मनी से सीखी हैं.

कारोबार की दुनिया में स्विट्ज़रलैंड और जर्मनी का काफ़ी दबदबा है.

दरअसल बोली और ज़बान में एक बहुत बारीक़ फ़र्क है. ज़बान वो है जिसे सरकारी मान्यता मिली है. जिस भाषा में साहित्य लिखा जाए वो ज़बान है. लेकिन रोज़मर्राह में बोली जाने वाली भाषा बोली है.

तरह-तरह की बोलियां बोलने वाले तो आपको हरेक देश में ना जाने कितने मिल जाएंगे लेकिन स्विट्ज़रलैंड की तरह कई ज़बानें बोलने वाले एक ही देश में शायद ना मिलें. इसीलिए भाषाओं के ऐतबार से स्विट्ज़रलैंड को अलग मक़ाम हासिल है.

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