हंगरी: क़िस्सा उस तहखाने का जहां अब स्कूबा डाइविंग की जाती है

  • 12 जून 2018
हंगरी, बुडापेस्ट

कई बार हमारे पैरों तले की ज़मीन में ख़ज़ाना छुपा होता है. लेकिन, हम उससे बेख़बर होते हैं. कुछ ऐसी ही कहानी है हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट की.

यूं तो बुडापेस्ट अपनी ख़ूबसूरत इमारतों के लिए दुनिया भर में मशहूर है.

पर, बहुत ही कम लोग शायद ये बात जानते हैं कि बुडापेस्ट में ज़मीन से 30 मीटर नीचे एक और दुनिया छुपी है. यहां स्कूबा डाइविंग की जा सकती है.

ये ऐसी हक़ीक़त है, जिससे बुडापेस्ट के बहुत से बाशिंदे भी वाबस्ता नहीं हैं. बुडापेस्ट में ज़्यादातर इमारतें चूना पत्थर से बनी हैं.

यहां तक कि 1902 में बनी न्यू-गोथिक पार्लियामेंट बिल्डिंग भी इसी पत्थर से बनी है. इमारतों के लिए चूना पत्थर कोबानिया इलाक़े से खुदाई करके लाया गया था.

यहां खुदाई का काम मध्य युग में शुरू हुआ था, जो उन्नीसवीं सदी के मध्य तक चला. शुरूआत में ये खुदाई पत्थर निकालने के मक़सद से नहीं की गई थी.

मौज-मस्ती वाली डाइविंग

बल्कि, ज़मीन के अंदर तहख़ाना बनाने के लिए की गई थी. उस दौर के लोगों ने जम़ीन की सतह से क़रीब 30 मीटर नीचे 32 किलो मीटर लंबा तहख़ाना बनाया.

1990 में यहां बाढ़ आई तो तहख़ाने में पानी भर गया. स्थानीय सरकार ने ग़ोताख़ोरों के समूह से तहख़ाने का पानी निकालने को कहा.

जब ग़ोताख़ोर सफ़ाई करने तहख़ाने में उतरे तो उन्हें लगा कि तहख़ाने के कुछ हिस्से को मौज-मस्ती वाली डाइविंग के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.

हालांकि यहां बड़ी संख्या में लोग डाइविंग नहीं करते, लेकिन कॉर्नेल डोमजन नियमित रूप से डाइविंग के लिए आते हैं. वो टेलीकम्यूनिकेशन टेक्नीशियन है.

उन्हें ऊंचाई पर चढ़कर जान जोखिम में डाल कर काम करना पसंद है. 2003 में अपने इसी जुनून के चलते उन्हें एक भयानक हादसे का शिकार होना पड़ा.

इस हादसे में उनकी पसलियां टूट गईं. कूल्हे की हड्डी में भी बल पड़ गया. शरीर पर और भी कई जगह गंभीर चोटें आईं.

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स्कूबा डाइविंग

हादसे की वजह से कॉर्नेल का आत्मबल पूरी तरह टूट चुका था. एक दिन उनके किसी साथी ने उन्हें इस मुश्किल घड़ी से निकलने के लिए स्कूबा डाइविंग की सलाह दी.

सलाह पर अमल करते हुए कॉर्नेल ने ताइवान, मिस्र और क्रोएशिया के समुद्र तटों पर जाकर स्कूबा डाइविंग शुरू की.

वो इस बात से बिल्कुल बेख़बर थे कि ये काम वो अपने घर से महज़ चार किलो मीटर की दूर पर भी कर सकते हैं.

कॉर्नेल बताते हैं कि साल 2009 में उन्हें सबसे पहले उनके एक पड़ोसी ने बताया कि बुडापेस्ट में भी स्कूबा डाइविंग की जा सकती है.

इस काम के लिए उन्होंने मास्टर डाइविंग इंस्ट्रक्टर अत्तीला बोल्गर से संपर्क साधा, जिन्होंने शहर की ज़मीन के नीचे डाइव करने का तरीक़ा बताया.

कोबानिया सुरंग के नज़दीक चार ऐसी जगहें हैं, जहां ग़ोताख़ोरी की जा सकती है. लेकिन इनमें से सिर्फ़ एक ही डाइविंग के लिए इस्तेमाल की जाती है.

सावधानी बरतनी ज़रूरी है...

इस साइट का नाम है पार्क कुत. सुरंग का ये ऐसा इलाक़ा है जो खुला हुआ है और यहां ताज़ा हवा रहती है.

लेकिन यहां ग़ोताखोरी के लिए बुनियादी ओपन वॉटर डाइविंग सर्टिफ़िकेट की दरकार है. ये सर्टिफ़िकेट सुरक्षा कारणों से ज़रूरी है.

क्योंकि सुरंग के अंदर चैंबर्स के अलावा सीढ़ियां भी हैं. जहां तैराकी के वक़्त सावधानी बरतनी ज़रूरी है. यहां पानी का तापमान क़रीब 12 डिग्री सेल्सियस रहता है.

पार्क कुत में पानी की सतह से क़रीब 17 मीटर नीचे और ज़मीन की सतह से क़रीब 47 मीटर नीचे तक ग़ोताख़ोरी की जा सकती है.

सुरंग में बने सभी कक्षों तक पहुंचने में क़रीब 40 मिनट का समय लगता है. यहां पहुंच कर आपको अंदाज़ा हो जाएगा कि पत्थर की खुदाई किस तरह की गई होगी.

इन कक्षों में आज भी सुरंग खोदने वाले औज़ार मौजूद हैं. ग़ोताख़ोर बोल्जर के मुताबिक़ सुरंग की खुदाई का काम 1890 में रुक गया था.

बाढ़ से बेअसर

इस दौर में शराब बनाने वाले सुरंग के बहुत से कक्षों का इस्तेमाल शराब रखने और ख़मीर उठाने के लिए करते थे.

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इस गुफ़ा का इस्तेमाल बमबारी से बचने के लिए भी किया गया था.

यहां तक कि जर्मनी के फ़ाइटर प्लेन मेसरश्मिट का इंजन भी यहीं जोड़ा गया था. यही वो दौर था जब इस सुरंग में तराश-ख़राश के बाद तीन चर्च बनाए गए.

इसमें एक चर्च गोथिक शैली में बना है. तहख़ाने का बहुत सा हिस्सा बाढ़ से बेअसर रहा था.

आज कल तहख़ाने के उसी हिस्से को आम जनता के लिए साल में कई मर्तबा खोला जाता है. लोग यहां कई तरह के मनोरंजक कार्यक्रम करते हैं.

साइकिल रेस का मुक़ाबला भी आयोजित करते हैं.

खुफ़िया तहख़ाना

बहुत से इतिहासकारों के अंदाज़े के मुताबिक़ कोबानिया चूना पत्थर की खान से क़रीब दस लाख क्यूबिक मीटर पत्थर खोद कर निकाला गया है. भले ही ये खान ख़ुफ़िया है.

लेकिन यहां के लोग इस बात के गवाह हैं कि यहां से कितना पत्थर निकाला जा चुका है. सुरंग की लंबाई कितनी है, ये यक़ीनी तौर पर बता पाना मुश्किल है.

लेकिन, इतना ज़रूर कहा जा सकता है कि ये खुफ़िया तहख़ाना काफ़ी दूर तक फैला है. कभी मौक़ा लगे तो आप भी लगा आइए तहख़ाने में डुबकी.

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