दुनिया के वो पांच शहर जहां बसना हुआ आसान

  • 15 सितंबर 2018
बीबीसी ट्रैवल, होनोलुलू, अमरीका, बुडापेस्ट, हंगरी, कुवैत सिटी, कुवैत, ऑकलैंड, न्यूज़ीलैंड, ताइपे, ताईवान इमेज कॉपीरइट Alamy

जब भी आप किसी नए देश और नए शहर में जाते हैं, तो वहां बसना एक बड़ी चुनौती होती है. मगर, दुनिया में कई ऐसे शहर हैं, जिन्होंने अपने यहां बसना आसान बना दिया है.

इकोनॉमिस्ट हर साल ऐसे शहरों की रैंकिंग करती है. ये हर साल 140 बड़े शहरों के हालात की समीक्षा कर के उनकी रैंकिंग करती है कि किन शहरों में रहना ज़्यादा आसान हुआ है.

इसके लिए शहरों को 30 से ज़्यादा पैमानों पर कसा जाता है. जैसे कि सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, खान-पान का स्तर, शिक्षा व्यवस्था, सड़कें और आवाजाही के दूसरे ज़रिए.

इस फ़ेहरिस्त में अक्सर दुनिया के बड़े और नामवर शहर हावी रहते हैं.

(इस साल यानी 2018 में इस सूची में ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न को पछाड़ कर ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना अव्वल रहा था).

हमारी कोशिश ये है कि हम टॉप के शहरों को छोड़ कर उन शहरों पर ध्यान दें, जो जीवन बिताने की आसानी के पायदान पर साल-दर-साल मज़बूती से ऊपर चढ़ रहे हैं.

हम यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आख़िर इन शहरों में क्या बदलाव आए हैं, जिनसे यहां बसना आसान हुआ है. और इन शहरों के बाशिंदे की इस बारे में क्या राय है कि उनके शहर में रहना आसान हुआ है?

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होनोलुलू, अमरीका

ये शहर हवाई सूबे की राजधानी है. पिछले एक दशक में यहां की ज़िंदगी बेहतर हुई है. आज हवाई द्वीप में बसा होनोलुलू, बसने के लिहाज़ से अमरीकी शहरों में अव्वल है. इसकी वजह यहां की शिक्षा सुविधाएं और संस्कृति है.

स्थानीय लोग कहते हैं कि दुनिया की अर्थव्यवस्था के विकास के चलते उनके शहर के हालात बेहतर हुए हैं. आज यहां शहरी जीवन के विकास पर ज़ोर दिया जा रहा है, जो पहले नहीं था.

हवाई के पुराने बाशिंदे टॉड एपो कहते हैं कि, "आख़िरकार सरकार और कारोबार जगत को ये समझ में आया कि होनोलुलू के शहरी जीवन में निवेश की ज़रूरत है."

टॉड एपो द होवार्ड ह्यूज़ कॉरपोरेशन के लिए काम करते हैं. वो कहते हैं कि, "होनोलुलू एक द्वीप पर आबाद है. यहां पर दूसरे शहरों से जुड़ने और वहां की सुविधाएं लेने का विकल्प नहीं है. आज होनोलुलू के हालात बेहतर हैं तो इसमें कई लोगों की कोशिशें शामिल हैं."

होनोलुलू ने वार्ड विलेज नाम से कई सामुदायिक इलाक़े बसाए हैं. यहां ख़ुदरा कारोबार की सुविधाएं भी हैं और रिहाइश भी. इसके अलावा हार्ट रेल सिस्टम में भी काफ़ी निवेश किया गया है, जो होनोलुलू का पहला रेल सिस्टम है. ये 2020 तक चालू हो जाएगा. ये पुराने होनोलुलू से 20 मील दूर स्थित कुआलाकाई तक जाएगी.

जब दूसरे देशों के लोग यहां आकर बसते हैं, ख़ास तौर से जापान और पूर्वी एशियाई देशों से, तो यहां की परंपरा का दूसरे देशों की संस्कृति से मेल होता है.

द होवार्ड ह्यूज़ कॉरपोरेशन के अध्यक्ष साइमन ट्रेसी कहते हैं कि, "यहां हर शख़्स एक ही नाव पर वार है. यहां की संस्कृति ख़ूबसूरत है. अच्छे शहर की हर ख़ूबी यहां पर मिलेगी. यहां का माहौल तरोताज़ा करने वाला और सेहतमंद है." साइमन हाल ही में न्यूयॉर्क से आकर यहां बसे हैं.

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बुडापेस्ट, हंगरी

हंगरी की राजधानी और सबसे बड़े शहर बुडापेस्ट में पिछले एक दशक में बुनियादी ढांचे के विकास पर बहुत ज़ोर दिया गया है. स्थानीय लोग पिछले दस साल में आए बदलाव के गवाह हैं.

बुडापेस्ट की पत्रिका द स्पॉइल्ड क्वीन की संस्थापक विक्टोरिया स्किबा कहती हैं कि, "मैं पिछले 8 साल से यहां रह रही हूं. शहर में बहुत विकास हुआ है. आज यहां बहुत से साइकिल ट्रैक बन गए हैं. बस और ट्राम की चौबीसों घंटे चलने वाली सेवाएं हैं. शहर के बहुत से हिस्सों में नई जान डाली गई है."

पांचवीं सदी से ही हंगरी वाइन के उत्पादन के लिए मशहूर है. लेकिन आज इसकी क्राफ्ट बीयर बहुत मशहूर हो रही है. इसके अलावा बुडापेस्ट के स्ट्रीट फूड और कॉफ़ी शॉप भी बहुत लोकप्रिय हो रहे हैं.

बुनियादी ढांचे के विकास के चलते बहुत सी मल्टीनेशनल कंपनियों ने बुडापेस्ट को ठिकाना बनाया है. नतीजा ये कि रोज़गार के हालात भी बेहतर हुए हैं.

हालांकि स्किबा की एक शिकायत है. सस्ते बार खुलने की वजह से बुडापेस्ट के कई हिस्सों में भीड़ बढ़ गई है. सैलानियों की आवाजाही बढ़ने से किराया महंगा हो गया है. यानी आज बुडापेस्ट में रहना पहले के मुक़ाबले महंगा पड़ता है.

स्किबा सलाह देती हैं कि "जो लोग यहां पर किराए के मकान तलाश रहे हैं, उन्हें स्थानीय लोगों के फ़ेसबुक समूहों से जुड़ना चाहिए. ये फ़ेसबुक ग्रुप स्थानीय लोग चलाते हैं, ताकि लोगों को सस्ते घर मुहैया करा सकें."

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कुवैत सिटी, कुवैत

रहने के लिहाज़ से कुवैत सिटी मध्यम दर्जे का शहर है. आज संस्कृति के लिहाज़ से कुवैत सिटी में ज़्यादा ख़ुलापन आया है. यहां का हाईवे सिस्टम भी लगातार बेहतर हो रहा है.

सऊदी अरब, इराक़ और फारस की खाड़ी के बीच स्थित कुवैत सिटी हमेशा से अंतरराष्ट्रीय कारोबार का बड़ा केंद्र रहा है. यहां आते ही आप को बड़े इंटरनेशनल सिटी में पहुंचने का एहसास होता है.

मल्टीमीडिया कंपनी मिडवेस्ट इमर्सिव चलाने वाले आक़िब उस्मान कहते हैं कि, "जब हम बड़े हो रहे थे, तो यहां बहुत सी बंदिशें थीं. नियम-क़ानून सख़्त थे. ख़ास तौर से सिनेमा, खुले में संगीत बजाने को लेकर बहुत सख़्ती थी. यहां म्यूज़िक कंसर्ट नहीं के बराबर हुआ करते थे."

"मैंने अपना पहला म्यूज़िक कंसर्ट कुवैत नहीं बल्कि भारत में देखा था. लेकिन आज ख़ुलापन आया है. आज कुवैत सिटी में कई संगीत समारोह होते हैं. ये मेरे लिए चौंकाने वाली बात है. ये बदलाव पिछले पांच सालों में आया है."

उस्मान के मुताबिक़ कुवैत सिटी में ये बदलाव इंटरनेट संस्कृति और भूमंडलीकरण की वजह से आया है. आज कुवैत में दूसरे देशों का खान-पान देखा जाने लगा है. हालांकि वो कहते हैं कि शराब पर पाबंदी होने की वजह से लोग रेस्टोरेंट में जाने में ही मन बहलाने के ज़रिए तलाशते हैं.

वैसे कुवैत भले ही आज दुनिया के साथ ज़्यादा जुड़ गया हो, वित्तीय आज़ादी बढ़ गई हो. लोगों की औसत उम्र भी बढ़ गई है. लेकिन अभी भी कई दिक़्क़तें हैं.

यहां केवल स्थानीय लोग ही ज़मीन ख़रीद सकते हैं. किसी विदेशी को कारोबार करने के लिए कुवैती नागरिक के साथ साझेदारी करनी होगी और उसे 51 प्रतिशत का हिस्सेदार बनाना होगा.

कुवैत में न तो सेल्स टैक्स लगता है, न ही इन्कम टैक्स देना होता है. ऐसे में यहां कारोबार कर के काफ़ी कमाई की जा सकती है.

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ऑकलैंड, न्यूज़ीलैंड

ऑकलैंड हमेशा से ही रहने के लिहाज़ से अच्छा शहर माना जाता रहा है. पिछले एक दशक में यहां और भी सकारात्मक बदलाव आए हैं. ख़ास तौर से यहां की संस्कृति में बदलाव को स्थानीय लोगों ने महसूस किया है.

हैंड्स अप हॉलिडे के क्रिस्टोफ़र हिल कहते हैं कि, "संस्कृति के लिहाज़ से ऑकलैंड अमीर शहर है. इसमें लगातार बेहतरी आ रही है."

एशियाई और पश्चिमी संस्कृति के मेल से ऑकलैंड में विकसित हुई पैसिफ़िका संस्कृति के चलते यहां तमाम तरह के रेस्टोरेंट खुल गए हैं. बहुत से सांस्कृतिक त्योहार होते हैं. चीन का नया साल भी यहां ज़ोर-शोर से मनाया जाता है और दिवाली भी.

ऑकलैंड में मेडिकल सुविधाएं और शिक्षा व्यवस्था भी बहुत बेहतर हुई है. हालांकि क्रिस्टोफ़र हिल मानते हैं कि निजी क्षेत्र के अस्पताल और स्कूल, सरकारी संस्थानों के मुक़ाबले बेहतर हैं. उनकी नज़र में यूनिवर्सिटी और कॉलेज की पढ़ाई यहां आला दर्जे की है.

हिल मानते हैं कि ऑकलैंड में अभी सुधार की बहुत गुंजाइश है. इसका विकास योजनाबद्ध तरीक़े से नहीं हुआ है. नतीजा ये है कि यहां अक्सर ट्रैफिक जाम लगते हैं. हालांकि सार्वजनिक परिवहन प्रणाली दिनों-दिन बेहतर हो रही है.

तो, अगर ऑकलैंड में बसने की सोच रहे हैं, तो हिल की सलाह पर ग़ौर कीजिएगा. वो कहते हैं कि समुद्र तट से लगे इलाक़ों में ट्रैफिक बहुत बुरा होता है. शहर के बाहर के उपनगरीय इलाक़ों में बसना यहां के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है. जैसे कि डेवनपोर्ट नाम के एक गांव से रोज़ाना नाव के ज़रिए आवाजाही की जा सकती है.

वैसे, ऑकलैंड में रहना महंगा है. अपने मकान हों या किराए के, दोनों बहुत महंगे हैं. इस मामले में ये दुनिया का चौथा सबसे महंगा शहर है. सरकार यहां पर विदेशियों के मकान ख़रीदने पर रोक लगाने की सोच रही है.

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ताइपे, ताईवान

पूर्वी एशिया का ये बड़ा कारोबारी शहर, लगातार बेहतर हो रहा है. यहां का नगर निगम लगातार बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य सुविधाओं में निवेश कर रहा है. मेट्रो लाइन की पहुंच पूरे शहर तक है.

अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से भी मेट्रो रेल सेवा से जुड़े हैं. स्थानीय लोग ताइपे की स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधाओं की तारीफ़ करते नहीं थकते.

मूल रूप से ओटावा की रहने वाली शैनन वाटसन कहती हैं कि, "ताइपे में स्वास्थ्य सेवाएं शानदार हैं. विदेशी नागरिक होने के बावजूद हमें हेल्थ कार्ड मिलता है और यहां के स्थानीय लोगों जैसी सुविधाएं यहां के सरकारी अस्पतालों में मिलती हैं."

"हेल्थ कार्ड की मदद से हम चीनी तरीक़े से इलाज करने वाले डॉक्टरों के अलावा पश्चिमी मेडिकल सिस्टम के डॉक्टरों से भी मिल सकते हैं. इसमें डॉक्टर की फ़ीस के साथ दवाओं और इलाज का ख़र्च बहुत कम फ़ीस पर मुहैया कराया जाता है."

ताइपे में शिक्षा की भी काफ़ी अच्छी सुविधाएं हैं. मूल रूप से अमरीकी नागरिक जूडी त्सुएई ताइपे में मीडिया सलाहकार हैं. उन्होंने अपनी बेटी को एक मॉन्टेसरी स्कूल में दाख़िल कराया है.

वहां पर खाना मुफ़्त मिलता है. स्कूल में चीन की भाषा भी सिखाई जाती है. बच्चों की देखभाल स्थानीय समुदाय मिलकर करता है. यानी युवा परिवारों के लिए ताइपे से बेहतर कोई जगह नहीं.

जूडी कहती हैं, "अगर आप की गोद में बच्चा है तो ठसाठस भरी ट्रेन या बस में भी लोग आप के लिए सीट छोड़ देते हैं."

ताइपे में नौकरी करने के लिए आप को मैंडेरिन भाषा आनी चाहिए. स्थानीय लोग, विदेशियों की मदद करने में झिझकते नहीं. भले ही वो एक-दूसरे की भाषा न समझ पाएं.

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